APSC असिस्टेंट जियोलॉजिस्ट सिलेबस 2026 और परीक्षा पैटर्न
APSC असिस्टेंट जियोलॉजिस्ट की स्क्रीनिंग परीक्षा दो बहुविकल्पीय पेपरों की है — दोनों 2 घंटे और 100 अंक के। Paper-I सामान्य अध्ययन का है जिसमें 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्न होंगे, और Paper-II भूविज्ञान का, जिसका सिलेबस GROUP-A से GROUP-K तक 11 ग्रुपों में बँटा है। PDF में नकारात्मक अंकन (negative marking) का कोई ज़िक्र नहीं है।
आधिकारिक सिलेबस PDF डाउनलोड करेंPDF आधिकारिक साइट पर खुलेगा। नीचे उसी सिलेबस का हर टॉपिक आसान भाषा में समझाया गया है — पढ़ने के लिए PDF खोलना ज़रूरी नहीं।
आधिकारिक सिलेबस से तैयार · आधिकारिक लिंक से पुष्टि कर सकते हैं
दो पेपर की स्क्रीनिंग परीक्षा, दोनों 100 अंक के ↑
इस पेज पर असम लोक सेवा आयोग द्वारा प्रकाशित वही पूरा सिलेबस दिया गया है, जो खान एवं खनिज विभाग के अधीन भूविज्ञान एवं खनन निदेशालय, असम में असिस्टेंट जियोलॉजिस्ट पद के लिए जारी हुआ है। यह दस्तावेज़ एक ही तारीख़ के दो ज्ञापनों के रूप में निकला है — Paper-I के लिए No.7PSC/CON/Exam-07/2026-2027 और Paper-II के लिए No.8PSC/CON/Exam-07/2026-2027, दोनों गुवाहाटी, 17 जुलाई 2026 के, और दोनों पर परीक्षा नियंत्रक के हस्ताक्षर हैं।
आधिकारिक फ़ाइल यह है — apsc.nic.in › Syllabus_Asstt_Geologist_04_2026.pdf — और यही फ़ाइल आयोग के अपने सिलेबस-संग्रह पृष्ठ पर भी सूचीबद्ध है। नीचे लिखी हर बात उसी फ़ाइल से, अपने शब्दों में दी गई है; किसी कोचिंग सामग्री से कुछ नहीं लिया गया, और जो दस्तावेज़ में नहीं है वह जोड़ा भी नहीं गया।
दोनों पेपर वस्तुनिष्ठ हैं और दोनों का वज़न बराबर है। योजना बनाते समय यही बात सबसे ज़्यादा काम की है — भूविज्ञान का स्नातक अगर सामान्य अध्ययन को हल्के में लेता है, तो वह ठीक आधी परीक्षा हाथ से जाने दे रहा है।
| पेपर | विषय | प्रश्न का प्रकार | समय | अंक | प्रश्नों की संख्या |
|---|---|---|---|---|---|
| Paper - I | सामान्य अध्ययन (General Studies) | बहुविकल्पीय प्रश्न | 2 घंटे | 100 | 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्न — यह बात PDF में सिर्फ़ इसी पेपर के लिए लिखी है |
| Paper - II | भूविज्ञान (Geology) | बहुविकल्पीय प्रश्न | 2 घंटे | 100 | नहीं लिखा है। PDF Paper-II के प्रश्नों की संख्या कहीं नहीं बताता। |
Paper I, सामान्य अध्ययन — PDF में दिए सातों टॉपिक ↑
Paper-I की सारणी में दो कॉलम हैं — एक क्रम संख्या का और दूसरा ITEM/ TOPICS शीर्षक वाला। सात पंक्तियों में विषय लिखे हैं। सारणी में 8 और 9 नंबर की पंक्तियाँ भी छपी हैं, पर हस्ताक्षरित प्रति में वे दोनों खाली हैं और हाथ से काटी हुई हैं — यानी सिलेबस सात मदों का है, नौ का नहीं।
सात में से तीन मदों में असम का नाम साफ़-साफ़ लिखा है। इस पेपर के बारे में जानने लायक़ सबसे काम की बात यही है — यह कोई आम राष्ट्रीय सामान्य-अध्ययन की सूची नहीं है, इसमें राज्य का हिस्सा बराबरी से बैठा है।
| क्रम | ITEM/ TOPICS (जैसा PDF में छपा है) | इसका असल में मतलब क्या है |
|---|---|---|
| 1. | Constitution and Political System of India | भारत की राजव्यवस्था उसी स्तर पर, जिस स्तर पर राज्य लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा पूछती है — संसद, राज्य विधानमंडल, मौलिक अधिकार और कर्तव्य, तथा संवैधानिक निकाय। |
| 2. | Current events of National & International Importance | यही एक प्रविष्टि है जिसकी कोई तय पुस्तक-सूची नहीं है। मानक तरीका यही है — रोज़ एक अख़बार, और परीक्षा से पहले के बारह महीनों का मासिक संकलन। |
| 3. | Indian Economy and Planning Process of India | बुनियादी अर्थशास्त्र के साथ नियोजन की कहानी — पंचवर्षीय योजनाएँ, नीति आयोग, बजट और बैंकिंग की मूल बातें। |
| 4. | Geography of India, Assam & World | असम का नाम भारत और विश्व के बीच में रखा गया है, यानी राज्य का भूगोल अपने आप में पूछा जाएगा — नदियाँ, ज़िले, धरातलीय स्वरूप और ब्रह्मपुत्र घाटी। |
| 5. | Role of Science & Technology in India | प्रयोगशाला का सिद्धांत नहीं, अनुप्रयोग और राष्ट्रीय कार्यक्रम — अंतरिक्ष, परमाणु, जैव-प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी के मिशन। |
| 6. | Culture & History of Assam, India & World | वही भारत-असम-विश्व वाला ढाँचा दोबारा। आहोम इतिहास, असमिया संस्कृति और राज्य के पर्व, सामान्य भारतीय इतिहास के साथ-साथ। |
| 7. | Indian National Movement with special reference to Assam | स्वतंत्रता संग्राम, जिसमें असम का अध्याय जोड़ा गया है — पहले राष्ट्रीय आंदोलन पढ़ें, फिर उसी के भीतर राज्य के अपने नेता और घटनाएँ। |
Paper II, भूविज्ञान — 11 ग्रुप एक नज़र में ↑
Paper-II ग्यारह अक्षर-नामित ग्रुपों में लिखा गया है — GROUP-A से GROUP-K तक। हर ग्रुप का अपना विषय-शीर्षक है और उसके नीचे टॉपिक लगातार अनुच्छेदों में चलते हैं। दस्तावेज़ 100 अंकों को ग्रुपों में नहीं बाँटता, और यह भी नहीं बताता कि किस ग्रुप से कितने प्रश्न आएँगे — इसलिए जब तक कोई असली पेपर कुछ और न बताए, ग्यारहों को बराबर मानकर चलें।
नीचे की दाहिनी कॉलम की गिनती हमारी अपनी है, आयोग की नहीं। हमने हर ग्रुप के अनुच्छेदों को उन्हीं प्रविष्टियों में बाँटा है जिन्हें PDF खुद मोटे अक्षरों में शुरू करता है, ताकि कोई टॉपिक नज़र से छूट न जाए। इनमें से हर एक प्रविष्टि इसी पेज पर नीचे पूरी दी गई है।
शुरू करने से पहले ग्रुपों की सूची एक बार पढ़ लें। कई ग्रुप चुपचाप एक-दूसरे से मिलते हैं — सुदूर संवेदन GROUP-C में है और फिर GROUP-I में, उल्कापिंड GROUP-F और GROUP-I दोनों में, सांख्यिकी GROUP-F में और बाढ़-आवृत्ति फिर GROUP-K में। इन दोहरावों को पहचानकर पढ़ने से कई हफ़्ते बचते हैं।
| ग्रुप | विषय (जैसा PDF में छपा है) | टॉपिक प्रविष्टियाँ (हमारी गिनती) |
|---|---|---|
| GROUP-A | संरचनात्मक भूविज्ञान और भूकंप-विज्ञान (Structural Geology and Seismology) | 12 |
| GROUP-B | खनिज विज्ञान, क्रिस्टल रसायन और भूविज्ञान में ऊष्मागतिकी (Mineralogy, Crystal Chemistry & Thermodynamics in Geology) | 10 |
| GROUP-C | भू-सूचना विज्ञान, भू-आकृति विज्ञान और चतुर्थ कल्प भूविज्ञान (Geoinformatics, Geomorphology & Quaternary Geology) | 11 |
| GROUP-D | जलभूविज्ञान, जलवायु विज्ञान और समुद्र विज्ञान (Hydrogeology Climatology & Oceanography) | 12 |
| GROUP-E | आग्नेय शैल विज्ञान और कायांतरित शैल विज्ञान (Igneous Petrology Metamorphic Petrology) | 10 |
| GROUP-F | भू-रसायन, समस्थानिक भूविज्ञान और अभियांत्रिकी भूविज्ञान (Geochemistry and Isotope Geology & Engineering Geology) | 13 |
| GROUP-G | आर्थिक भूविज्ञान (Economic Geology) | 9 |
| GROUP-H | अवसाद विज्ञान तथा सर्वेक्षण और मानचित्रण (Sedimentology, and Surveying & Mapping) | 9 |
| GROUP-I | स्तरिकी और भू-गतिकी (Stratigraphy & Geodynamics) | 15 |
| GROUP-J | जीवाश्म विज्ञान और ईंधन भूविज्ञान (Palaeontology & Fuel Geology) | 14 |
| GROUP-K | नदीय तंत्र और पर्यावरणीय भूविज्ञान (Fluvial System & Environmental Geology) | 8 |
एक नज़र में
| संचालक संस्था | Assam Public Service Commission (APSC) |
| विभाग | Directorate of Geology and Mining, Assam (Mines and Minerals Department) |
| आधिकारिक वेबसाइट | apsc.nic.in |
| राज्य | Assam |
GROUP-A: संरचनात्मक भूविज्ञान और भूकंप-विज्ञान — पूरी 12 प्रविष्टियाँ ↑
पेपर की शुरुआत संरचना से होती है और अंत भूकंप पर — जिस राज्य में ये दोनों असल में एक ही विषय हैं, वहाँ यही सही क्रम है। बारह प्रविष्टियाँ हैं, और अकेली क्षेपण (thrust) वाली प्रविष्टि इस सिलेबस के कुछ पूरे ग्रुपों से लंबी है।
| उप-विषय | आधिकारिक टॉपिक (PDF की भाषा में) | हिंदी में पूरा मतलब और तैयारी का तरीका |
|---|---|---|
| संरचनात्मक भूविज्ञान | Stress and Strain | प्रतिबल और विकृति। प्रतिबल (stress) की परिभाषा और उसके प्रकार — समदाबी (hydrostatic), एकअक्षीय (uniaxial), संपीडक (compressional), तनन (tensional), त्रिअक्षीय (triaxial), विचलनकारी (deviatoric), अंतरक (differential) तथा प्रभावी (effective) प्रतिबल। इसके बाद अपरूपण प्रतिबल का चिह्न-नियम, मोर वृत्त (Mohr stress circle) और अपरूपण प्रतिबल की दिशा निकालना आता है। यही वह बुनियाद है जिस पर आगे के सारे संरचना-टॉपिक टिके हैं — मोर वृत्त हाथ से बनाना और पढ़ना आ जाए तो यहाँ के ज़्यादातर सवाल एक रचना भर की दूरी पर रह जाते हैं। |
| संरचनात्मक भूविज्ञान | Definition of strain | विकृति (strain) की परिभाषा और उसके प्रकार, विकृति के मुख्य अक्ष (principal axes of strain), विकृति का मापन, तथा मापने की दो नामित विधियाँ — Flinn's diagram और Fry's method — और अन्य strain markers। दोनों विधियाँ PDF में नाम लेकर आई हैं, इसलिए यह याद रखना ज़रूरी है कि कौन-सी विधि क्या आलेखित करती है और उसका नतीजा किस रूप में मिलता है। |
| संरचनात्मक भूविज्ञान | Ductile deformation | नमनीय विरूपण। वलन (fold) का आकृति-मूलक वर्गीकरण — Ramsay (1964) और Fleuty (1964) के अनुसार, वलन की गतिकी (kinematics of folding), buckle folds तथा shear folds, वलन की ज्यामिति से अपरूपण की दिशा (sense of shear) निकालना, वलनों का अध्यारोपण (superposition of folds), और boudinage की उत्पत्ति तथा वलन से उसका संबंध। दो वर्गीकरण अपने वर्ष के साथ नाम लेकर आए हैं — इसका आमतौर पर मतलब यही होता है कि पेपर में वर्गीकरण ही पूछा जाएगा, वलन का सामान्य वर्णन नहीं। |
| संरचनात्मक भूविज्ञान | Brittle deformation | भंगुर विरूपण। इसमें भ्रंश (faults), उनका वर्गीकरण और भ्रंशन की क्रियाविधि आती है। सामान्य भ्रंशन (normal faulting) के अंतर्गत जो ज्यामितियाँ नाम लेकर दी गई हैं वे हैं — विस्तारी (extensional), समनत (synthetic), विपरीतनत (antithetic), उत्थित तथा अवनमित खंड (horst and graben), अर्ध-अवनमित खंड (half graben), संचरण भ्रंश (relay fault), युग्मक (duplex), वियोजन भ्रंश (detachment fault) और सीढ़ीनुमा ज्यामिति (ramp and flat geometry)। इसके बाद भ्रंश का जन्म तथा प्रसार (fault nucleation and propagation) और प्रसार की ज्यामिति आती है। यह नामित ज्यामितियों की लंबी सूची है — हर एक का एक बार चित्र बना लें, क्योंकि परीक्षा हॉल में नामांकित काट-चित्र परिभाषा से कहीं जल्दी याद आता है। |
| संरचनात्मक भूविज्ञान | Thrust | क्षेपण, यानी thrust। इसमें दूर से आई शैल-राशि (allochthonous) और अपनी जगह की शैल-राशि (autochthonous) का अंतर आता है; बचा हुआ टुकड़ा (klippe) और खिड़की (windows); ऊपरी क्षेपण (overthrust) तथा निचला क्षेपण (under thrust); नैप (nappe) और वियोजन-तल (decollement); अंधा क्षेपण (blind thrust), शाखा (splay) तथा सीढ़ीनुमा ज्यामिति (ramp and flat geometry)। इसके बाद क्षेपण से जुड़े वलन आते हैं, और फिर क्षेपण-संरचनाओं की पूरी शब्दावली — चापाकार क्षेपण (listric thrust), युग्मक (duplex), शल्क-संरचना (schuppen structure), छादित संरचना (imbricate structure), क्षेपण-युग्मक और तिरछी शृंखला वाला क्षेपण (en echelon thrust)। साथ में अग्रभूमि (foreland) तथा पृष्ठभूमि (hinterland), और वामावर्त-दक्षिणावर्त ज्यामिति की चार आकृतियाँ — ताड़-वृक्ष, ट्यूलिप, ऋणात्मक पुष्प और धनात्मक पुष्प संरचनाएँ। यह इस ग्रुप की सबसे लंबी प्रविष्टि है, और असम खुद एक क्षेपण-पट्टी के पास बैठा है — इसलिए इसे दूर की चीज़ मानकर छोड़ना नहीं चाहिए। यहाँ हर नाम का एक ठीक-ठीक चित्र होता है; नाम रटने से कहीं बेहतर है हर संरचना का काट-चित्र बनाकर याद रखना। |
| संरचनात्मक भूविज्ञान | Strike slip fault | नतिलंब-सर्पी भ्रंश (strike slip fault) — tear fault, transcurrent fault, transfer fault और उनकी विशेषताएँ; तथा प्रतिबल और विकृति के संदर्भ में भ्रंशन की क्रियाविधि। यह प्रविष्टि छोटी है और घूमकर वहीं पहुँचती है जहाँ से ग्रुप शुरू हुआ था — क्रियाविधि यहाँ stress और strain की भाषा में ही पूछी जाती है, इसलिए पहली प्रविष्टि पक्की हो तो यह अपने आप आसान हो जाती है। |
| संरचनात्मक भूविज्ञान | Foliation and lineation in deformed rocks | विरूपित शैलों में पर्णन और रेखायन (foliation and lineation) — इनका आकृति-मूलक वर्गीकरण, वलनों के साथ इनका ज्यामितीय संबंध, रेखायनों के व्यतिकरण प्रतिरूप (interference patterns), और विकृति की दिशाओं से पर्णन-रेखायन का संबंध। यह क्षेत्र-कार्य से जुड़ा टॉपिक है — सवाल अक्सर एक दिशा-विन्यास देकर पूछते हैं कि उससे विकृति के बारे में क्या निष्कर्ष निकलता है। |
| संरचनात्मक भूविज्ञान | Shear zone | अपरूपण क्षेत्र (shear zone) — नमनीय, भंगुर तथा भंगुर-नमनीय अपरूपण क्षेत्र; अपरूपित शैलों की विशेषताएँ; अपरूपण क्षेत्र के भीतर विकृति का बदलाव; माइलोनाइट (mylonite); और अपरूपण की दिशा (shear sense) का निर्धारण। इनमें दो चीज़ें ऐसी हैं जिन्हें चित्र देखकर पहचान पाना सबसे काम आता है — माइलोनाइट, और shear-sense बताने वाले सूचक। |
| संरचनात्मक भूविज्ञान | Rheology | रियोलॉजी — रियोलॉजिकल समीकरण और रियोलॉजी में तापमान का महत्व; भू-चुंबकत्व (geomagnetism); तथा पृथ्वी का तापीय इतिहास। यह प्रविष्टि थोड़ी मिली-जुली है — तीन में से दो चीज़ें असल में संरचनात्मक भूविज्ञान की हैं ही नहीं। इसीलिए भू-चुंबकत्व को यह सोचकर छोड़ना नहीं चाहिए कि यह यहाँ बेमेल लग रहा है; सिलेबस में यह इसी ग्रुप के नीचे लिखा है। |
| संरचनात्मक भूविज्ञान | Graphical interpretation of structures | संरचनाओं की आलेखीय व्याख्या — संरचनाओं की सममिति; गोलीय तथा त्रिविम आलेख (spherical और stereographical plots), rose diagram और आयत-चित्र (histogram) के रूप में निरूपण; और संरचनात्मक भूविज्ञान में काम आने वाले सॉफ़्टवेयर की प्रारंभिक जानकारी। स्टीरियोनेट पढ़ना तथ्य नहीं, कौशल है — इसे तब तक अभ्यास करें जब तक आलेखन तेज़ न हो जाए। ध्यान रहे कि सिलेबस यहाँ सॉफ़्टवेयर की जानकारी भी माँग रहा है। |
| भूकंप-विज्ञान | Seismology | भूकंप-विज्ञान — प्रारंभिक शब्दावली और मूल सिद्धांत, भूपर्पटीय प्रावस्थाएँ (crustal phases), भूकंप का यात्रा-काल और परिमाण; प्राकृतिक आपदा के रूप में भूकंप — पूर्वानुमान तथा seismic hazard management, seismic gap; भूकंपीय तरंगें, Snell's law, travel time curve, velocity model और b-value; फोकस की गहराई, विवर्तनिक क्षेत्र में भूकंप-भ्रंश संबंध; M, Mb, Ms, Mw तथा MM scale; peaked ground acceleration (PGA) और शिखर भू-वेग (PGV), फोकस-तल हल (focal plane solution) एवं बेनिऑफ़ क्षेत्र। परिमाण के पैमाने एक-एक करके नाम से लिखे गए हैं, इसलिए यह जानना ज़रूरी है कि कौन-सा पैमाना क्या नापता है और कहाँ जाकर संतृप्त हो जाता है। असम भूकंप की दृष्टि से देश के सबसे संवेदनशील हिस्सों में आता है, इसलिए यह प्रविष्टि इस पद के लिए केवल किताबी नहीं, रोज़ के काम की भी है। |
| भूकंप-विज्ञान | Palaeoseismology | पुरा-भूकंपविज्ञान (palaeoseismology) — इसकी अवधारणा और महत्व; सक्रिय भ्रंश; भूकंपजनक सक्रिय भ्रंशों की पहचान; पुरा-भूकंपीय संरचनाएँ; syn-sedimentary तथा अन्य विरूपण-संरचनाओं में से पुरा-भूकंपीय विरूपण-लक्षणों को पहचानना; इन लक्षणों पर तिथि-निर्धारण (dating) की विधियों का प्रयोग और उनकी विश्वसनीयता; तिथि-निर्धारण के लिए उपयुक्त सामग्री; तिथियों की व्याख्या; तथा ऐतिहासिक और पुरातात्विक आँकड़ों का उपयोग। पूरी प्रविष्टि का असली सवाल दो ही हैं — असली पुरा-भूकंप के निशान को उसकी हमशक्ल अवसादी संरचना से कैसे अलग करें, और निकली हुई तिथि पर कितना भरोसा किया जाए। |
GROUP-B: खनिज विज्ञान, क्रिस्टल रसायन और भूविज्ञान में ऊष्मागतिकी — पूरी 10 प्रविष्टियाँ ↑
दस प्रविष्टियाँ, दो हिस्सों में — पाँच खनिजों पर और पाँच ऊष्मागतिकी पर। ऊष्मागतिकी वाला आधा हिस्सा भौतिक रसायन के स्तर का है और ज़्यादातर उम्मीदवारों के लिए दोनों में से ज़्यादा अंक देने वाला है।
| उप-विषय | आधिकारिक टॉपिक (PDF की भाषा में) | हिंदी में पूरा मतलब और तैयारी का तरीका |
|---|---|---|
| खनिज विज्ञान | Chemical composition and compositional variation of minerals | खनिजों का रासायनिक संघटन और संघटन में बदलाव; ठोस विलयन (solid solution); संघटन के आधार पर खनिजों का वर्गीकरण; तथा सिलिकेट खनिजों का विस्तृत वर्गीकरण और उनकी संरचनात्मक विशेषताएँ। सिलिकेट का संरचनात्मक वर्गीकरण ही पूरे ग्रुप की रीढ़ है — सबसे पहले चतुष्फलक (tetrahedra) के जुड़ने के आधार पर बने परिवारों को पक्का करें, बाकी चीज़ें उसी पर टिकती हैं। |
| खनिज विज्ञान | Principles of X-ray crystallography | एक्स-किरण क्रिस्टलिकी (X-ray crystallography) के सिद्धांत; X-ray diffractometry से खनिज की पहचान; एक्स-किरण क्रिस्टलिकी का प्रभाव; क्रिस्टल संरचना — CCP और HCP संकुलन (packing); तथा खनिजों में दोष — बिंदु दोष, रेखा दोष और तल दोष (point, line और planar defects)। यहाँ दो अलग चीज़ें एक साथ रखी गई हैं — एक यंत्र-आधारित तकनीक और एक संरचना-संकुलन का टॉपिक। दोनों से आमतौर पर एक-पंक्ति के तथ्यात्मक सवाल बनते हैं। |
| खनिज विज्ञान | Ionic crystal, ionic radii, coordination number, Pauling rule | आयनिक क्रिस्टल, आयनिक त्रिज्या, समन्वय संख्या (coordination number) और Pauling rule; तथा क्रिस्टलों में बंधन — आयनिक, सहसंयोजक और धात्विक बंधन। Pauling के नियम नाम लेकर लिखे गए हैं, इसलिए वे नियम के रूप में ही पूछे जाएँगे। जो गणना तैयार रखनी चाहिए वह है — त्रिज्या-अनुपात (radius ratio) से समन्वय संख्या निकालना। |
| खनिज विज्ञान | Transformation process in minerals | खनिजों में रूपांतरण की प्रक्रिया — विलयन-वियोजन (exsolution), और खनिज exsolution में संक्रमण प्रावस्था (transition phase) का उदाहरण। यह इस ग्रुप की सबसे छोटी प्रविष्टि है और असल में अगली प्रविष्टि की भूमिका है — दोनों को साथ पढ़ना ज़्यादा समझ में आता है। |
| खनिज विज्ञान | Structural transformation: Polymorphism | संरचनात्मक रूपांतरण — बहुरूपता (polymorphism) का वर्गीकरण, संरचनात्मक प्रतिलोमन (structural inversion), तथा शैल-निर्माणकारी सिलिकेट खनिजों में ठोस विलयन का व्यवहार और exsolution — उदाहरण के रूप में feldspar, olivine, pyroxene, amphibole, garnet और mica; इनका प्रकाशिक व्यवहार और शैल-निर्माणकारी खनिज के रूप में इनका महत्व। छह खनिज-परिवार नाम लेकर दिए गए हैं और इन्हीं के प्रकाशिक गुण पूछे जाएँगे, इसलिए इन छह के लिए optical mineralogy की सारणी तैयार रखें। |
| ऊष्मागतिकी | Forms of energy, transformation and conservation of energy | ऊर्जा के रूप, ऊर्जा का रूपांतरण और संरक्षण, वैश्विक ऊर्जा बजट; भूवैज्ञानिक प्रक्रिया और ऊर्जा-प्रवाह; अवस्था-गुण (state properties); तथा अवस्था-परिवर्तन की दिशा। यह ग्रुप का वैचारिक आरंभ है। अगर यहीं पर अवस्था-गुण (state property) और पथ-फलन (path function) का फ़र्क़ साफ़ हो जाए, तो ऊष्मागतिकी की बाकी प्रविष्टियाँ केवल हिसाब-किताब रह जाती हैं। |
| ऊष्मागतिकी | Fundamental thermodynamic equation; First Law of Thermodynamics | मूल ऊष्मागतिकीय समीकरण; ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम; आयतन-प्रसार में किया गया कार्य; तथा द्वितीय और तृतीय नियम। तीनों नियम सूची में हैं। इसके लिए भौतिक रसायन (physical chemistry) की सामान्य पाठ्यपुस्तक का स्तर काफ़ी है — यह प्रविष्टि शोध-स्तर की गहराई में नहीं पूछी जाती। |
| ऊष्मागतिकी | Chemical potential, Gibbs Free Energy function | रासायनिक विभव (chemical potential) और गिब्स मुक्त ऊर्जा फलन; एन्थैल्पी, एन्ट्रॉपी तथा सक्रियता (activity); सक्रियता के फलन के रूप में मुक्त ऊर्जा परिवर्तन; तापमान और दाब के साथ एन्थैल्पी, एन्ट्रॉपी और गिब्स मुक्त ऊर्जा का बदलाव; तथा Clausius-Clapeyron equation। इस ग्रुप में एक ही सूत्र ऐसा है जिसे बिना अटके लिखना और लगाना आना चाहिए — वही Clausius-Clapeyron समीकरण है। |
| ऊष्मागतिकी | Compositional dependence of Gibbs Free Energy | गिब्स मुक्त ऊर्जा की संघटन पर निर्भरता तथा Gibbs-Duhem equation। यह एक पंक्ति की प्रविष्टि है, पर इसके पीछे पूरा व्युत्पादन (derivation) है। इसकी लंबाई देखकर इसका वज़न मत आँकिए — छोटी लिखी हुई प्रविष्टियाँ अक्सर सीधे सूत्र-आधारित सवाल बनती हैं। |
| ऊष्मागतिकी | Mixing components, Raoults Law and Henrys Law | घटकों का मिश्रण, Raoults Law और Henrys Law, मानक अवस्था तथा सक्रियता, आदर्श और अनादर्श विलयन का व्यवहार, और साम्य स्थिरांक (equilibrium constant)। यहाँ फिर दो नामित नियम हैं। सामान्य सवाल यही होता है कि कौन-सा नियम कहाँ लागू होता है — विलायक (solvent) पर, या तनु विलेय (dilute solute) पर। |
GROUP-C: भू-सूचना विज्ञान, भू-आकृति विज्ञान और चतुर्थ कल्प भूविज्ञान — पूरी 11 प्रविष्टियाँ ↑
ग्यारह प्रविष्टियाँ। पहली छह सुदूर संवेदन और GIS की हैं, आख़िरी पाँच चतुर्थ कल्प भूविज्ञान की, और सबसे आख़िरी में ब्रह्मपुत्र के मैदानों का नाम आता है — इस ग्रुप का सबसे साफ़ असम-विशिष्ट इशारा वही है।
| उप-विषय | आधिकारिक टॉपिक (PDF की भाषा में) | हिंदी में पूरा मतलब और तैयारी का तरीका |
|---|---|---|
| भू-सूचना विज्ञान | Spectral response curve. Sensors | वर्णक्रमीय अनुक्रिया वक्र (spectral response curve); संवेदक (sensors); संवेदकों के विभेदन-गुण; भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रहों और उनके संवेदकों के विभेदन-गुण; फोटो तथा प्रतिबिंब की व्याख्या के तत्व; और सुदूर संवेदन का भूविज्ञान से संबंध। सिलेबस में भारतीय उपग्रहों का ज़िक्र अलग से है, इसलिए IRS श्रृंखला और उसके संवेदकों के विभेदन (resolution) को सारणी बनाकर याद करना सबसे काम आता है। |
| भू-सूचना विज्ञान | Stereoscopy and vertical exaggeration | त्रिविम-दर्शन (stereoscopy) और ऊर्ध्वाधर अतिशयोक्ति (vertical exaggeration); हवाई फोटो या डिजिटल स्टीरियो प्रतिबिंब से फोटोग्रामिति मापन के मूल तत्व; डिजिटल फोटोग्रामिति — digital elevation model (DEM) और digital terrain model (DTM) की अवधारणा तथा उनके उपयोग; पारंपरिक प्रकाशिक फोटोग्रामिति की तुलना में डिजिटल के लाभ; और ऑर्थोफोटो। DEM और DTM का अंतर परिभाषा वाला सवाल है जो अपनी अहमियत से कहीं ज़्यादा बार पूछा जाता है — इसे ठीक-ठीक याद रखें। |
| भू-सूचना विज्ञान | Thermal remote sensing; concept of LiDER remote sensing | तापीय सुदूर संवेदन (thermal remote sensing); पदार्थों के तापीय गुण; तापीय प्रतिबिंबों की विशेषताएँ; तापीय प्रतिबिंब का प्रसंस्करण और व्याख्या; तथा LiDER सुदूर संवेदन की अवधारणा। ध्यान दें — PDF में वर्तनी “LiDER” छपी है; जिस तकनीक की बात हो रही है उसे बाकी हर जगह LiDAR कहा जाता है। पढ़ते समय उसी मानक नाम से पढ़ें, पर PDF में शब्द खोजते समय यह वर्तनी याद रखें। |
| भू-सूचना विज्ञान | Microwave remote sensing; SLAR system; Synthetic Aperture Radar (SAR) | सूक्ष्मतरंग सुदूर संवेदन; SLAR प्रणाली और उसका स्थानिक विभेदन; Synthetic Aperture Radar (SAR); सूक्ष्मतरंग सुदूर संवेदन उपग्रह; सूक्ष्मतरंग प्रतिबिंबों की विशेषताएँ; सूक्ष्मतरंग डिजिटल आँकड़ों का प्रसंस्करण; और रडार प्रतिबिंब की भूवैज्ञानिक व्याख्या। पूर्वोत्तर में SAR की अहमियत साफ़ है — साल के बड़े हिस्से में बादल प्रकाशिक चित्रों को बेकार कर देते हैं, और यही वजह है कि यह प्रविष्टि सिलेबस में रखी गई है। |
| भू-सूचना विज्ञान | Image processing methods | प्रतिबिंब-प्रसंस्करण की विधियाँ — प्रतिबिंब पुनर्स्थापन (image restoration), प्रतिबिंब संवर्धन (image enhancement), मिथ्या रंग संयोजन (false colour composite), अनुपात-प्रतिबिंब (ratio images), बहुवर्णक्रमीय वर्गीकरण — पर्यवेक्षित (supervised) तथा अपर्यवेक्षित (unsupervised), परिवर्तन-संसूचन प्रतिबिंब (change detection), और शुद्धता-आकलन (accuracy assessment); साथ ही अति-वर्णक्रमीय (hyperspectral) आँकड़ों की अवधारणा और उनका महत्व। यहाँ दो सवाल भरोसे के हैं — पर्यवेक्षित और अपर्यवेक्षित वर्गीकरण का अंतर, और शुद्धता-आकलन असल में नापता क्या है। |
| भू-सूचना विज्ञान | Introduction to GIS and its components | GIS का परिचय और उसके घटक; सदिश तथा रेखापुंज आँकड़े (vector और raster data); जियोरेफ़रेंसिंग; भू-विज्ञान में GIS आधारित परियोजना बनाने के लिए ज़रूरी नियोजन; और GIS मंच पर स्थानिक तथा गुण-आँकड़ों (spatial और attribute data) का विश्लेषण। शब्दों पर ध्यान दें — सिलेबस केवल GIS का सिद्धांत नहीं, GIS परियोजना का नियोजन पूछ रहा है, इसलिए अनुप्रयोग वाला सवाल आने की पूरी संभावना है। |
| भू-आकृति विज्ञान और चतुर्थ कल्प भूविज्ञान | The Quaternary Period and its divisions; Quaternary dating methods | चतुर्थ कल्प (Quaternary Period) और उसके विभाजन; Neogene-Quaternary तथा Pleistocene-Holocene सीमाएँ; एंथ्रोपोसीन; चतुर्थ कल्प की तिथि-निर्धारण विधियाँ — ब्रह्मांडजनित रेडियोन्यूक्लाइड C14, Be10, Al26, luminescence chronology, वृक्ष-वलय कालक्रम (dendrochronology) के सिद्धांत, उपयोग और सीमाएँ; तथा निम्न-ताप थर्मोक्रोनोलॉजी और उद्घाटन/अपरदन का इतिहास। तीन तिथि-परिवार नाम लेकर दिए गए हैं — हर एक के लिए दो बातें याद रखें: वह कितनी पुरानी उम्र तक काम करता है, और उसे कौन-सी सामग्री चाहिए। यही जोड़ी पूछी जाती है। |
| भू-आकृति विज्ञान और चतुर्थ कल्प भूविज्ञान | Quaternary climate and tectonics | चतुर्थ कल्प की जलवायु और विवर्तनिकी — हिम युग, Milankovitch theory, हिमानी-अंतर्हिमानी चक्र, LGM, Little Ice Age, चतुर्थ कल्प में समुद्र-तल के बदलाव, उत्थान और जलवायु का संबंध, जलवायु के प्रतिनिधि सूचक (climate proxies) तथा पुराजलवायु, सिलिकेट अपक्षय के सूचक के रूप में 87Sr/86Sr, कठोर-पर्पटी (duricrusts) — calcrete, fericrete, alcrete तथा spleothems, और चतुर्थ कल्प की जलवायु में स्थिर समस्थानिकों का उपयोग। यहाँ दो नामित क्रियाविधियाँ हैं — Milankovitch चक्र और स्ट्रॉन्शियम-अनुपात वाला सूचक; बाकी पूरी प्रविष्टि इन्हीं को सहारा देने वाली शब्दावली है। |
| भू-आकृति विज्ञान और चतुर्थ कल्प भूविज्ञान | Quaternary geomorphology | चतुर्थ कल्प का भू-आकृति विज्ञान — पृथ्वी एक तंत्र के रूप में, भू-आकृतिक तंत्र में ऊर्जा-प्रवाह, भू-दृश्य विश्लेषण के स्थानिक और कालिक पैमाने, स्थलरूपों के विकास में संरचना, विवर्तनिकी तथा जलवायु की भूमिका, और नव-विवर्तनिकी एवं सक्रिय विवर्तनिकी के प्रति भू-दृश्य की प्रतिक्रिया। यह तथ्यों की नहीं, अवधारणाओं की प्रविष्टि है। परीक्षा-योग्य असली बात यही तिकड़ी है — संरचना, विवर्तनिकी और जलवायु, जो हर स्थलरूप के पीछे काम करती है। |
| भू-आकृति विज्ञान और चतुर्थ कल्प भूविज्ञान | Quaternary stratigraphy | चतुर्थ कल्प की स्तरिकी — ऑक्सीजन समस्थानिक स्तरिकी, चुंबकीय स्तरिकी (सिद्धांत तथा चतुर्थ कल्प अनुक्रमों में उपयोग, भारतीय उदाहरणों सहित), मृदा-स्तरिकी (pedostratigraphy), मृदा परिच्छेदिका और पुरामृदा (paleosol), समुद्री तथा महाद्वीपीय परिवेश के चतुर्थ कल्प अभिलेख, और घटना-स्तरिकी (event stratigraphy)। चुंबकीय स्तरिकी वाले हिस्से में भारतीय उदाहरण नाम लेकर माँगे गए हैं, इसलिए नोट्स में कम से कम दो भारतीय परिच्छेद तैयार रखें। |
| भू-आकृति विज्ञान और चतुर्थ कल्प भूविज्ञान | Quaternary sedimentary records from India | भारत के चतुर्थ कल्प अवसादी अभिलेख — हिमालयी अग्रभूमि (Himalayan foreland), सोन-नर्मदा घाटी, गंगा के मैदान, तटीय मैदान, ब्रह्मपुत्र के मैदान तथा पूर्वोत्तर भारत के अन्य भाग। छह क्षेत्र नाम लेकर दिए गए हैं और उनमें ब्रह्मपुत्र का मैदान भी है। असम के पद के लिए यह इस ग्रुप की सबसे अनुमान-योग्य प्रविष्टि है — इसे सबसे पहले और सबसे अच्छे से तैयार करें। |
GROUP-D: जलभूविज्ञान, जलवायु विज्ञान और समुद्र विज्ञान — पूरी 12 प्रविष्टियाँ ↑
बारह प्रविष्टियाँ, जिनमें नौ जलभूविज्ञान की हैं। यह Paper-II का सबसे बड़ा एकल अनुप्रयुक्त खंड है, और राज्य के भूविज्ञान निदेशालय का रोज़मर्रा का काम इसी के सबसे क़रीब है।
| उप-विषय | आधिकारिक टॉपिक (PDF की भाषा में) | हिंदी में पूरा मतलब और तैयारी का तरीका |
|---|---|---|
| जलभूविज्ञान | Definition of hydrology and hydrogeology | जलविज्ञान (hydrology) और जलभूविज्ञान (hydrogeology) की परिभाषा; जल-चक्र — वर्षण और अपवाह (precipitation और run-off); जलालेख (hydrograph) का विश्लेषण, आधार-प्रवाह पृथक्करण (base flow separation), और जलालेख का आकार तय करने वाले कारक। base flow separation परिभाषा नहीं, एक विधि है — यह बता पाना चाहिए कि जलालेख पर इसे असल में किया कैसे जाता है। |
| जलभूविज्ञान | Occurrence of ground water | भूजल की उपस्थिति — शैलों में रिक्तियाँ और उनके प्रकार; सरंध्रता तथा रिक्ति-अनुपात (porosity और void ratio); जलभृत (aquifer), aquiclude, aquitard और aquifuge की परिभाषाएँ; भूपृष्ठ के नीचे जल का वितरण, वेडोस जल और भूजल; विशिष्ट उपज तथा प्रतिधारण (specific yield और retention) और विशिष्ट उपज का आकलन; जलभृतों का वर्गीकरण; और भूजल पुनर्भरण। aquiclude, aquitard, aquifuge वाला समूह एक-अंक के सवालों का पुराना जाल है — इन्हें एक-एक करके नहीं, आपस में तुलना करके याद करें। |
| जलभूविज्ञान | Ground water movement: Darcy's law | भूजल की गति — Darcy's law, उसकी वैधता की सीमा और उसकी कमियाँ; जलचालकता (hydraulic conductivity), पारगम्यता, प्रभावी प्रतिबल, विशिष्ट भंडारण, संचरणशीलता तथा भंडारण-गुणांक (transmissivity और storativity); भूजल के भौतिक और रासायनिक लक्षण; भूजल का रासायनिक वर्गीकरण; और पेयजल, सिंचाई तथा औद्योगिक उपयोग के लिए गुणवत्ता मानदंड। Darcy का नियम अपनी सीमाओं के साथ पूछा जाता है, केवल कथन के रूप में नहीं। गुणवत्ता-मानदंड वाला आधा हिस्सा तथ्यात्मक है और उसमें अंक आसानी से बनते हैं। |
| जलभूविज्ञान | Occurrence of ground water in different rock types | विभिन्न शैल-प्रकारों में भूजल की उपस्थिति — आग्नेय, कायांतरित, अवसादी तथा असंपिंडित अवसाद (nonindurated sediments); और भारत के भूजल प्रांत। भारत वाले हिस्से का सवाल नक्शे से जुड़ा होता है — प्रांतों को केवल नामों की सूची की तरह नहीं, हर प्रांत के साथ उसका शैल-प्रकार जोड़कर याद करें। |
| जलभूविज्ञान | Ground water levels and fluctuations | भूजल स्तर और उसका उतार-चढ़ाव — दीर्घकालिक, मौसमी तथा दैनिक बदलाव; स्तर-परिवर्तन को नियंत्रित करने वाले कारक; तटीय क्षेत्रों में मीठे और खारे जल का संबंध; Ghyben-Herzberg principle; तथा समुद्री जल के अंतर्वेधन को रोकना और नियंत्रित करना। Ghyben-Herzberg सिद्धांत के साथ एक सरल अनुपात आता है — उसे लिखना और लगाना दोनों आना चाहिए। |
| जलभूविज्ञान | Basic principles of well hydraulics | कूप-द्रवचालिकी के मूल सिद्धांत — अवनमन और अवनमन-शंकु (drawdown और cone of depression); स्थायी तथा अस्थायी अवस्था का प्रवाह; पंपिंग परीक्षण का समीकरण; step drawdown test और aquifer performance test; और पंपिंग परीक्षण के आँकड़ों का विश्लेषण। यह ग्रुप की सबसे अधिक गणितीय प्रविष्टि है। समीकरण रटने से ज़्यादा काम इस बात का है कि पंपिंग-परीक्षण का वक्र पढ़ना आ जाए। |
| जलभूविज्ञान | Surface and subsurface investigation of ground water | भूजल की सतही और अवसतही जाँच — जलभूवैज्ञानिक मानचित्रण; कूप-सूची विधि (well inventory method) से व्यवस्थित तथा पुनर्मूल्यांकन सर्वेक्षण; अन्वेषण की भूभौतिकीय विधियाँ — गुरुत्व, चुंबकीय, विद्युत और भूकंपीय; S.P., प्रतिरोधकता, गामा तथा न्यूट्रॉन-गामा लॉगिंग; और परीक्षण-वेधन से भूजल अन्वेषण। यह प्रविष्टि असली नौकरी के सबसे नज़दीक है। भूजल में प्रतिरोधकता (resistivity) ही मुख्य काम की विधि है और सबसे ज़्यादा वही पूछी जाती है। |
| जलभूविज्ञान | Methods of construction of shallow wells | उथले कूपों के निर्माण की विधियाँ; तथा गहरे नलकूपों के लिए वेधन की विधियाँ, अभिकल्पन मानदंड और विकास। यह व्यावहारिक और छोटी प्रविष्टि है — वेधन (drilling) की विधियों के नाम और यह कि कौन-सी विधि किस संरचना के लिए ठीक बैठती है, इतना पक्का होना चाहिए। |
| जलभूविज्ञान | Ground water assessment, development and management | भूजल का आकलन, विकास और प्रबंधन — भूजल भंडार की अवधारणा (स्थैतिक तथा गतिक भंडार); सुरक्षित उपज और अति-दोहन (safe yield और overdraft); सुरक्षित उपज को तय करने वाले कारक; जलवैज्ञानिक संतुलन का समीकरण; और भूजल बजटिंग। safe yield और overdraft की जोड़ी नीति से जुड़ी परिभाषा है और राज्य लोक सेवा आयोगों के पेपरों में बार-बार आती है। |
| जलवायु विज्ञान और समुद्र विज्ञान | Definition of climate, composition of atmosphere | जलवायु की परिभाषा; वायुमंडल का संघटन; तापमान का ऊर्ध्वाधर तथा क्षैतिज वितरण; सूर्यातप (insolation); बादलों का निर्माण और वर्गीकरण; वर्षण के कारण, रूप, प्रक्रियाएँ और प्रकार; वायुमंडलीय दाब और वायु-परिसंचरण; पवन की दिशा तथा गति को प्रभावित करने वाले कारक; ऊपरी तरंगें और जेट धाराएँ; और मानसून। यह हिस्सा Paper-I के भूगोल वाले टॉपिक से काफ़ी मिलता-जुलता है — एक बार अच्छे से पढ़ लेने पर दोनों पेपरों में काम आता है। |
| जलवायु विज्ञान और समुद्र विज्ञान | Weather disturbances | मौसमी विक्षोभ — वायुराशियों के गुण, शीतोष्ण चक्रवात (extratropical cyclone), वाताग्र (fronts), प्रतिचक्रवात, उष्णकटिबंधीय मौसम, तड़ित-झंझा, बवंडर तथा जलस्तंभ; और विषुवतीय एवं उष्णकटिबंधीय वायुराशियों से प्रभावित जलवायु। वाताग्र और वायुराशियाँ वही हिस्सा है जिसे ज़्यादातर उम्मीदवार सरसरी तौर पर पढ़ते हैं और ज़्यादातर पेपर पूछ लेते हैं। |
| जलवायु विज्ञान और समुद्र विज्ञान | Classification of oceans and seas | महासागरों और सागरों का वर्गीकरण; महासागरीय तल की सामान्य विशेषताएँ; समुद्री तरंगें, ज्वार-भाटा तथा महासागरीय धाराएँ; गहरे महासागर का विशाल परिसंचरण; और समुद्री जल के भौतिक गुण। यह Paper-II का सबसे छोटा उप-विषय है और पूरी तरह तथ्यात्मक है — यहाँ के अंक हाथ से नहीं जाने चाहिए। |
GROUP-E: आग्नेय शैल विज्ञान और कायांतरित शैल विज्ञान — पूरी 10 प्रविष्टियाँ ↑
दस प्रविष्टियाँ — पाँच आग्नेय और पाँच कायांतरित। दक्कन ट्रैप के साथ सिलहट ट्रैप का नाम भी है, और यही वह स्थानीय बारीकी है जो किसी राष्ट्रीय पाठ्यपुस्तक से नहीं मिलेगी।
| उप-विषय | आधिकारिक टॉपिक (PDF की भाषा में) | हिंदी में पूरा मतलब और तैयारी का तरीका |
|---|---|---|
| आग्नेय शैल विज्ञान | Magma, their generation in the crust and mantle | मैग्मा और भूपर्पटी तथा मैंटल में उसका जनन — आज का मैग्माचार और वैश्विक विवर्तनिक प्रक्रियाएँ; मैग्माई प्रक्रिया की अवधारणा और प्रतिरूप (batch melting तथा Rayleigh fractionation); आंशिक गलन, अंशीय क्रिस्टलन और स्रोत-अभिलक्षणन का मात्रात्मक दृष्टिकोण। दो प्रतिरूप नाम लेकर दिए गए हैं और दोनों के पीछे समीकरण हैं — batch melting और Rayleigh fractionation को कम से कम एक बार अंकों के साथ हल करके देखें। |
| आग्नेय शैल विज्ञान | Geochemical characteristics of igneous rocks | आग्नेय शैलों के भू-रासायनिक लक्षण — रासायनिक विश्लेषण, तथा शैल-जनन (petrogenesis) के संदर्भ में प्रमुख, सूक्ष्म और समस्थानिक संघटन; संगत तथा असंगत तत्व (compatible और incompatible elements); और आग्नेय शैलों की पुरा-विवर्तनिक परिस्थिति पहचानने के भू-रासायनिक मानदंड। इस प्रविष्टि का व्यावहारिक रूप विभेदन-आरेख (discrimination diagrams) हैं — यह याद रखें कि कौन-से तत्व-युग्म किस विवर्तनिक परिस्थिति को अलग करते हैं। |
| आग्नेय शैल विज्ञान | Phase equilibria study in igneous system | आग्नेय तंत्र में प्रावस्था-साम्य का अध्ययन — शैल-जनन के संदर्भ में द्विअंगी, त्रिअंगी और चतुरंगी सिलिकेट तंत्र; तथा शैल-जनन में वाष्पशील H2O और CO2 की भूमिका। प्रावस्था-आरेख याद करने की चीज़ नहीं, पढ़ने की चीज़ हैं — मानक द्विअंगी और त्रिअंगी तंत्रों को पेंसिल लेकर एक-एक करके हल करें, तभी परीक्षा में आरेख देखकर उत्तर निकलता है। |
| आग्नेय शैल विज्ञान | IUGS Classification schemes of Igneous rocks | आग्नेय शैलों की IUGS वर्गीकरण पद्धति; प्लूम मैग्माचार तथा तप्त स्थल (hot spots); और मैंटल मेटासोमैटिज़्म की अवधारणाएँ। IUGS वर्गीकरण का मतलब व्यवहार में QAPF आरेख है — अकेला यही आरेख आग्नेय शैलों के हैरान कर देने वाले हिस्से भर सवालों का जवाब दे देता है, इसलिए उसे पूरी तरह पक्का करें। |
| आग्नेय शैल विज्ञान | Petrology and petrogenesis of major igneous rock types | प्रमुख आग्नेय शैल-प्रकारों का शैलविज्ञान और शैल-जनन — अत्यल्पसिलिक शैल (komatiite, kimberlite), क्षारीय शैल, ओफिओलाइट, कार्बोनेटाइट, बाढ़ी बेसाल्ट (Deccan Trap तथा Sylhet Trap), एनार्थोसाइट, ग्रेनिटॉइड और स्तरित आग्नेय शैल। ध्यान देने की बात यह है कि दक्कन ट्रैप के साथ सिलहट ट्रैप का नाम भी है — यह पूर्वोत्तर से जुड़ा जोड़ है, जिस पर आम पाठ्यपुस्तक ज़ोर नहीं देती। |
| कायांतरित शैल विज्ञान | Regional orogenic metamorphic textures | प्रादेशिक पर्वतजनक कायांतरण की संरचनाएँ — टेक्टोनाइट, पर्णन, रेखायन; विवर्तनिक विकास की क्रियाविधि; बहु-विरूपित और बहु-कायांतरित शैलों का विश्लेषण; अन्य प्रादेशिक कायांतरण संरचनाएँ; और प्रतिस्थापन संरचनाएँ तथा अभिक्रिया-वलय (reaction rim) एवं कायांतरण के P-T-t इतिहास के पुनर्निर्माण में इनकी भूमिका। P-T-t इतिहास यहाँ पहली बार आता है और इसी ग्रुप में दो बार और लौटता है — इसे कायांतरित शैलविज्ञान की रीढ़ मानकर पढ़ें। |
| कायांतरित शैल विज्ञान | Sources of plate tectonic metamorphic heat | भूपर्पटीय कायांतरण के लिए प्लेट-विवर्तनिकी से मिलने वाली ऊष्मा के स्रोत; भूतापीय प्रवणता (geothermal gradient); तथा भूपर्पटी के मोटा होने की प्रक्रियाएँ और कायांतरण का P-T-t पथ। यह छोटी और वैचारिक प्रविष्टि है, पर यही प्लेट-विवर्तनिकी और कायांतरण के बीच की सीधी कड़ी है — इसी वजह से दोनों विषय साथ पढ़ाए जाते हैं। |
| कायांतरित शैल विज्ञान | Mineral assemblages and their graphical representation | खनिज समुच्चय और उनका आलेखीय निरूपण — ACF, AKF तथा AFM और संघटन-प्रावस्था आरेख; कायांतरण में रासायनिक साम्य; ठोस-ठोस अभिक्रिया; और सतत तथा असतत कायांतरण अभिक्रिया। तीन आरेख नाम लेकर दिए गए हैं — हर एक के लिए दो बातें याद रखें: वह किन घटकों का प्रयोग करता है, और किस संघटन वाली शैल के लिए उपयुक्त है। |
| कायांतरित शैल विज्ञान | Cation exchange partitioning relationship among coexisting phases | सह-अस्तित्व वाली प्रावस्थाओं के बीच धनायन-विनिमय विभाजन का संबंध; भू-तापमापन तथा भू-दाबमापन (geothermometry और geobarometry) का अनुप्रयोग; और शैल-जनन जालक (petrogenetic grid)। यह ग्रुप का मात्रात्मक सिरा है — उम्मीद यही रखें कि सिद्धांत पूछा जाएगा, अंशांकन स्थिरांक (calibration constants) नहीं। |
| कायांतरित शैल विज्ञान | Regional metamorphism of pelitic and basic metamorphic assemblages | पेलिटिक और क्षारकीय (basic) कायांतरण समुच्चयों का प्रादेशिक कायांतरण; तथा प्रादेशिक कायांतरण के दौरान होने वाली कायांतरण अभिक्रियाएँ। पेलिटिक समुच्चय ही परीक्षा का सामान्य रास्ता होते हैं, क्योंकि उनके सूचक खनिज (index minerals) बहुत साफ़ क्रम में आते हैं — वह क्रम रटने की हद तक पक्का कर लें। |
GROUP-F: भू-रसायन, समस्थानिक भूविज्ञान और अभियांत्रिकी भूविज्ञान — पूरी 13 प्रविष्टियाँ ↑
तेरह प्रविष्टियाँ — पेपर का सबसे बड़ा ग्रुप। इसमें पहले भू-रसायन है, फिर चार प्रविष्टियाँ सांख्यिकी की, और फिर अभियांत्रिकी भूविज्ञान। एक ही शीर्षक के नीचे तीन काफ़ी अलग विषय हैं, इसलिए तीनों के लिए समय अलग-अलग तय करें।
| उप-विषय | आधिकारिक टॉपिक (PDF की भाषा में) | हिंदी में पूरा मतलब और तैयारी का तरीका |
|---|---|---|
| भू-रसायन और समस्थानिक भूविज्ञान | Origin, abundance, classification and distribution of elements | तत्वों की उत्पत्ति, प्रचुरता, वर्गीकरण और वितरण — पृथ्वी का रासायनिक विभेदन; भू-रासायनिक तंत्र के रूप में भूपर्पटी और मैंटल (भूपर्पटी का संघटन, मैंटल का संघटन, दोनों के बीच अन्योन्यक्रिया); भू-रासायनिक तंत्र के रूप में महासागर और वायुमंडल (महासागर का संघटन, वायुमंडल का संघटन, समुद्री जल तथा वायु का विकास, ऑक्सीजन का उदय); और भू-रासायनिक चक्र। “ऑक्सीजन का उदय” अलग से नाम लेकर लिखा गया है — यानी महान ऑक्सीकरण घटना (Great Oxidation Event) पूछी जा सकती है, और अक्सर तिथि-सहित तथ्य के रूप में पूछी जाती है। |
| भू-रसायन और समस्थानिक भूविज्ञान | Principles and application of analytical instruments in geochemistry | भू-रसायन और समस्थानिक अध्ययन में विश्लेषणात्मक यंत्रों के सिद्धांत तथा उपयोग; उल्कापिंडों का वर्गीकरण, संघटन और उत्पत्ति; तथा मंगल एवं चंद्र उल्कापिंडों के प्रकार और संघटन। एक ही प्रविष्टि में यंत्र भी हैं और उल्कापिंड भी। उल्कापिंडों का वर्गीकरण GROUP-I में दोबारा आता है — इसलिए इसे एक बार पढ़कर दोनों जगह के लिए तैयार कर लें। |
| भू-रसायन और समस्थानिक भूविज्ञान | Stability and abundance of radionuclides | रेडियोन्यूक्लाइडों की स्थिरता और प्रचुरता; क्षय की क्रियाविधि; रेडियोजनिक क्षय की क्षय-दर और वृद्धि-दर; और क्षय श्रेणी। यह समस्थानिक भूविज्ञान का भौतिकी वाला आधा हिस्सा है। क्षय-समीकरण और अर्ध-आयु (half-life) का हिसाब बिना सोचे आ जाना चाहिए, तभी आगे की तिथि-निर्धारण वाली प्रविष्टियाँ आसान लगती हैं। |
| भू-रसायन और समस्थानिक भूविज्ञान | Radiogenic isotopes | रेडियोजनिक समस्थानिक — भू-कालक्रम में इनका उपयोग (Rb-Sr, Sm-Nd, K-Ar तथा U-Th-Pb आयु-निर्धारण विधियाँ); भू-कालक्रम अध्ययनों में विलुप्त रेडियोन्यूक्लाइड; Promordial 87Sr 86Sr अनुपात; और पृथ्वी में Sr तथा Nd का समस्थानिक विकास। चार तिथि-निर्धारण प्रणालियाँ नाम लेकर दी गई हैं — हर एक के लिए जनक-संतति युग्म (parent-daughter pair) और यह कि वह किस खनिज या शैल पर लगाई जाती है, दोनों याद रखें। (PDF में वर्तनी “Promordial” छपी है।) |
| भू-रसायन और समस्थानिक भूविज्ञान | Stable isotopes | स्थिर समस्थानिक — O, C और S के स्थिर समस्थानिक; इनका नियंत्रण, अनुप्रयोग तथा विभाजन (fractionation); ऑक्सीजन समस्थानिक तापमापन; और प्रकृति में सल्फर समस्थानिकों का वितरण। ऑक्सीजन समस्थानिक तापमापन की कड़ी GROUP-C की चतुर्थ कल्प जलवायु वाली प्रविष्टि से जुड़ती है — औज़ार वही है, उपयोग अलग। |
| भू-रसायन और समस्थानिक भूविज्ञान | Application of Statistics in Geology | भूविज्ञान में सांख्यिकी का अनुप्रयोग — द्विपद तथा प्रसामान्य बंटन (binomial और normal distributions); प्रसामान्य बंटन का मानकीकरण; और संयुक्त बंटन (joint distribution)। सांख्यिकी यहाँ से शुरू होकर चार प्रविष्टियों तक चलती है। जिस उम्मीदवार ने स्नातक स्तर पर गणित पढ़ा है, उसके लिए यह इस ग्रुप का सबसे अंक देने वाला हिस्सा है। |
| भू-रसायन और समस्थानिक भूविज्ञान | Correlation and regression | सहसंबंध और समाश्रयण (correlation और regression); प्रसरण तथा सहप्रसरण (variance और covariance); और सहसंबंध गुणांक की मानक एवं संभाव्य त्रुटि। यह सीधी-सादी सांख्यिकी है। छोटी सारणी देकर हाथ से सहसंबंध गुणांक निकालना आना चाहिए — यही रूप परीक्षा में सबसे ज़्यादा आता है। |
| भू-रसायन और समस्थानिक भूविज्ञान | Sampling distributions | प्रतिचयन बंटन — आकलक (estimators); माध्य का प्रतिचयन बंटन; विश्वास सीमाएँ; Student t-distribution; सार्थकता परीक्षण; परिकल्पना बनाना तथा शून्य और वैकल्पिक परिकल्पना; और z-test, t-test, F-test एवं Chi-square test। चार परीक्षण नाम लेकर दिए गए हैं। भरोसे वाला सवाल यह होता है कि किस तरह के आँकड़ों पर कौन-सा परीक्षण लगेगा — गणना नहीं। |
| भू-रसायन और समस्थानिक भूविज्ञान | Factor and principal component analysis | गुणक तथा मुख्य घटक विश्लेषण (factor और principal component analysis); और Gumbel तथा Log-Pearson बंटन एवं बाढ़-आवृत्ति विश्लेषण में उनका उपयोग। बाढ़-आवृत्ति विश्लेषण GROUP-K की बाढ़ वाली प्रविष्टि में दोबारा आता है। असम के संदर्भ में यह दोहराव संयोग नहीं है — बाढ़ इस राज्य का सबसे बड़ा भूवैज्ञानिक-आपदा विषय है। |
| अभियांत्रिकी भूविज्ञान | Soil: Engineering properties of soil | मृदा — मृदा के अभियांत्रिकी गुण; इकाई भार, विशिष्ट गुरुत्व, सरंध्रता तथा रिक्ति-अनुपात, जल-मात्रा और संतृप्ति की मात्रा की परिभाषाएँ; संपीड्यता, संघनन, संहनन तथा अपरूपण सामर्थ्य का प्रारंभिक ज्ञान; मृत्तिका खनिजिकी (clay mineralogy), Atterberg units और मृदा वर्गीकरण का महत्व; और मृदा एवं अभियांत्रिकी संरचनाएँ। PDF में “Atterberg units” लिखा है; मानक शब्द Atterberg limits है — बात एक ही है, यानी द्रव सीमा, प्लास्टिक सीमा और संकुचन सीमा पढ़नी है। |
| अभियांत्रिकी भूविज्ञान | Rocks: Strength of rocks; classification of rock masses | शैल — शैलों की सामर्थ्य, कठोरता, प्रत्यास्थता, सरंध्रता और विशिष्ट गुरुत्व; शैल-पिंडों में असांतत्य, उनका अपक्षय और विरूपण; शैलों का अभियांत्रिकी वर्गीकरण; क्षेत्र में शैल-पिंडों का वर्गीकरण — R.Q.D. (rock quality designation), Bieniswaki तथा Q-system के अनुसार; शैल-विस्फोटन के विशेष संदर्भ में उत्खनन; निर्माण सामग्री के रूप में शैल; और शैल-पिंड के गुणों में सुधार — grouting, bolting तथा anchoring। R.Q.D. और Q-system दोनों गणना से निकलते हैं, इसलिए पूरे ग्रुप में सबसे ज़्यादा संभावना इन्हीं से संख्यात्मक सवाल आने की है। |
| अभियांत्रिकी भूविज्ञान | Dams and Reservoirs | बाँध और जलाशय — बाँधों का वर्गीकरण तथा उनके भाग; बाँध-स्थलों की भूवैज्ञानिक और भूभौतिकीय जाँच; नींव तथा स्तंभपाद (abutment) की समस्याएँ; उन पर लगने वाले बल; रिसाव, धारण सामर्थ्य और प्रतिक्षेप (rebound) की समस्या; कमज़ोर क्षेत्रों का उपचार — grouting; जलाशय क्षेत्र की जाँच; और रिसाव एवं गादीकरण का नियंत्रण। बड़ी नदी-घाटी परियोजनाओं वाले राज्य में बाँध-स्थल का भूविज्ञान असली नौकरी के बहुत पास है — इसे सिद्धांत की तरह नहीं, अभ्यास की तरह पढ़ें। |
| अभियांत्रिकी भूविज्ञान | Geotechnical investigation for tunnel construction | सुरंग निर्माण के लिए भू-तकनीकी जाँच — स्थल-चयन के सामान्य भू-तकनीकी विचार; क्षेत्र का भूविज्ञान; सुरंग तथा पुल की संरेखा पर संरचनात्मक असांतत्य का महत्व; भूजल की स्थिति; शैल-प्रतिबल की स्थिति; और सुरंग खनन की विधियाँ। यह प्रविष्टि घूमकर GROUP-A से जुड़ जाती है — यहाँ जिन “संरचनात्मक असांतत्यों” की बात है, वे वही भ्रंश और पर्णन हैं जो आपने वहाँ पढ़े थे। |
GROUP-G: आर्थिक भूविज्ञान — पूरी 9 प्रविष्टियाँ ↑
एक ही विषय-शीर्षक के नीचे नौ प्रविष्टियाँ, और शीर्षक के नीचे उप-पंक्ति छपी है — Genesis and Indian deposits, Exploration and mining। भारतीय निक्षेपों वाला आधा हिस्सा पूरी तरह याद करने का है और Paper-II का सबसे भरोसेमंद अंक देने वाला खंड है।
| उप-विषय | आधिकारिक टॉपिक (PDF की भाषा में) | हिंदी में पूरा मतलब और तैयारी का तरीका |
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| आर्थिक भूविज्ञान — उत्पत्ति | Genesis: Morphology of ore bodies | उत्पत्ति — अयस्क पिंडों की आकारिकी; अयस्कों के गठन तथा संरचनात्मक लक्षण; अयस्क का रासायनिक संघटन; अयस्क निक्षेपों का वर्गीकरण; और धातुजनन (metallogeny) तथा भूपर्पटी के विकास से उसका संबंध। यह शब्दावली वाली प्रविष्टि है, और इसी भाषा में पूरा ग्रुप लिखा गया है। किसी और चीज़ से पहले अयस्क-निक्षेपों का वर्गीकरण साफ़ कर लें। |
| आर्थिक भूविज्ञान — उत्पत्ति | Genesis of ore deposits | अयस्क निक्षेपों की उत्पत्ति — मैग्माई, तापजलीय (hydrothermal), मेटासोमैटिक, पेग्मैटिटिक, समुद्र-अध: उच्छ्वसन (submarine exhalation) तथा ज्वालामुखीजनित (volcanogenic)। छह प्रक्रियाएँ हैं और हर एक का अपना पहचान वाला निक्षेप-प्रकार है — इन्हें “प्रक्रिया से उदाहरण” की जोड़ी बनाकर याद करें, अकेले-अकेले नहीं। |
| आर्थिक भूविज्ञान — उत्पत्ति | Sedimentary type ore deposits | अवसादी प्रकार के अयस्क निक्षेप — रासायनिक अवसादी तथा अपरदित अवसादी (detrital) अयस्क निक्षेप; स्तरबद्ध और स्तराकार निक्षेप (stratabound और stratiform); वाष्पन-निक्षेप (evaporates); और कायांतरित प्रकार के अयस्क निक्षेप। stratabound और stratiform वही जोड़ी है जिसमें सबसे ज़्यादा गड़बड़ होती है — एक बार अंतर पक्का हो जाए तो यहाँ के अंक आसान हैं। |
| आर्थिक भूविज्ञान — उत्पत्ति | Organic matter in ore, fluid inclusion in ore | अयस्क में कार्बनिक पदार्थ; अयस्क में द्रव-अंतर्वेश (fluid inclusion); अयस्क निक्षेपों का भू-तापमापन, भू-दाबमापन और तिथि-निर्धारण; तथा आर्कियन हरितप्रस्तर पेटियों (greenstone belts) और प्रोटेरोज़ोइक चल पेटियों का धातुजनन। यहाँ व्यावहारिक तकनीक द्रव-अंतर्वेश का अध्ययन है, और यही वह कड़ी है जो आर्थिक भूविज्ञान को GROUP-B की ऊष्मागतिकी से जोड़ती है। |
| आर्थिक भूविज्ञान — उत्पत्ति | Structural and chemical control of ore deposits | अयस्क निक्षेपों का संरचनात्मक और रासायनिक नियंत्रण; प्लेट-विवर्तनिकी तथा वैश्विक अयस्क-स्थानीयकरण; और भूवैज्ञानिक समय के साथ अयस्क खनिजीकरण। यही वह प्रविष्टि है जो बताती है कि निक्षेप जहाँ हैं वहीं क्यों हैं — तर्क वाले सवालों के लिए यह हिस्सा सबसे पसंदीदा है। |
| आर्थिक भूविज्ञान — भारतीय निक्षेप | Metallic mineral deposits of India | भारत के धात्विक खनिज निक्षेप — उनका वितरण, उपस्थिति की रीति, खनिजिकी और उत्पत्ति: लोहा, मैंगनीज़, क्रोमियम, ताँबा, सीसा और जस्ता, सोना, चाँदी, एल्युमिनियम, निकल तथा मॉलिब्डेनम। दस धातुएँ हैं और हर एक का राज्यवार वितरण पूछा जा सकता है। एक ही सारणी बनाइए — धातु, उसका अयस्क खनिज, और प्रमुख राज्य — और दोहराने के लिए बस वही रखिए। |
| आर्थिक भूविज्ञान — भारतीय निक्षेप | Non-metallic mineral deposits | अधात्विक खनिज निक्षेप — हीरा, चूना-पत्थर और डोलोमाइट, मैग्नेसाइट, फॉस्फेट, एस्बेस्टस, रत्न, तथा उच्चतापसह खनिज; पूर्वोत्तर भारत के मृत्तिका खनिज निक्षेप; और महत्वपूर्ण एवं आवश्यक खनिज (critical and essential minerals)। इनमें दो चीज़ें समसामयिक मामलों से लगी हुई हैं — critical minerals और पूर्वोत्तर के मृत्तिका निक्षेप। दोनों हाल की नीतिगत चर्चा के विषय हैं, इसलिए इन्हें अख़बार वाली नज़र से भी देखें। |
| आर्थिक भूविज्ञान — भारतीय निक्षेप | Radioactive minerals: uranium, thorium | रेडियोसक्रिय खनिज — यूरेनियम और थोरियम का वितरण, उपस्थिति की रीति, खनिजिकी तथा उत्पत्ति; पूर्वोत्तर भारत में यूरेनियम खनिजीकरण; और दुर्लभ मृदा खनिज (rare earth minerals)। पूर्वोत्तर में यूरेनियम खनिजीकरण का नाम अलग से लिया गया है। इस पद के लिए वह एक वाक्य साफ़ इशारा है — इसे हल्के में न लें। |
| अन्वेषण और खनन | Exploration and mining | अन्वेषण और खनन — खनिज पूर्वेक्षण तथा अन्वेषण की विधियाँ; खनिज भंडार का वर्गीकरण; धात्विक और अधात्विक खनिजों के लिए सतही तथा अवसतही खनन की विभिन्न विधियाँ; कोयले का खनन; और जलोढ़ खनन (alluvial mining)। यह ग्रुप की सबसे नौकरी-मुखी प्रविष्टि है। भंडार का वर्गीकरण पूरी तरह परिभाषा पर टिका है, इसलिए उसे शब्दश: ठीक-ठीक याद करना हमेशा फ़ायदे का सौदा है। |
GROUP-H: अवसाद विज्ञान तथा सर्वेक्षण और मानचित्रण — पूरी 9 प्रविष्टियाँ ↑
नौ प्रविष्टियाँ — छह अवसाद विज्ञान की और तीन सर्वेक्षण एवं मानचित्रण की। सर्वेक्षण वाला आधा हिस्सा वही व्यावहारिक कौशल है जिसके लिए असल में यह पद भरा जाता है।
| उप-विषय | आधिकारिक टॉपिक (PDF की भाषा में) | हिंदी में पूरा मतलब और तैयारी का तरीका |
|---|---|---|
| अवसाद विज्ञान | Texture of sedimentary rocks | अवसादी शैलों का गठन — गठन के तत्व: आकार, गोलाई, गोलाकारता, संविन्यास, रूप और सतही गठन, तथा इनका मापन; और कण-आकार विश्लेषण (grain-size analysis) के आँकड़ों का सांख्यिकीय उपचार एवं व्याख्या। कण-आकार की सांख्यिकी सीधे GROUP-F की सांख्यिकी वाली प्रविष्टियों से जुड़ती है — संचयी वक्र (cumulative curve) पढ़ने का अभ्यास करें। |
| अवसाद विज्ञान | Structures of sedimentary rock | अवसादी शैलों की संरचनाएँ — अवसादी संरचनाओं की उत्पत्ति और महत्व; तथा पुरा-धारा विश्लेषण (paleocurrent analysis)। पुरा-धारा विश्लेषण से दिशाएँ निकलती हैं, इसलिए यहाँ rose diagram वाला सवाल आ सकता है — वही औज़ार जो GROUP-A में मिला था, यहाँ दूसरे काम के लिए लौट आता है। |
| अवसाद विज्ञान | Sedimentary environments | अवसादी परिवेश — परिवेशों का वर्गीकरण; निक्षेपण परिवेशों के भौतिक और रासायनिक प्राचल; तथा नदीय, डेल्टाई, सरोवरी, समुद्री, हिमानी और शुष्क परिवेश के शैल-मुख समुच्चय (lithofacies assemblages)। छह परिवेश नाम लेकर दिए गए हैं। हर एक के लिए एक पहचान वाला lithofacies याद कर लें — इतने भर से परिवेश वाले ज़्यादातर सवाल निकल जाते हैं। |
| अवसाद विज्ञान | Genetic classification of sedimentary rocks | अवसादी शैलों का जननिक वर्गीकरण; क्लास्टिक शैल (बलुआ पत्थर और शेल) तथा क्लास्टिक अवसादों की खनिजिकी; डायाजेनेसिस और शैलीभवन (lithification); मृत्तिका का अवसाद-विज्ञान; और भारी खनिजों, क्वार्ट्ज़, फेल्सपार तथा शैल-खंडों से उद्गम-स्थल (provenance) का निर्धारण। भारी खनिजों से उद्गम निकालना पुराना वर्णनात्मक सवाल है — यह याद रखें कि कौन-सा भारी खनिज किस स्रोत-शैल की ओर इशारा करता है। |
| अवसाद विज्ञान | Origin, mineralogy, classification (Dunham and Folk) of limestone | चूना-पत्थर की उत्पत्ति, खनिजिकी और वर्गीकरण (Dunham तथा Folk); कार्बोनेट शैलों का डायाजेनेसिस और नव-आकारिकी (neomorphism); अवसादी द्रोणियों का वर्गीकरण; और अवसादन एवं विवर्तनिकी (अवसादन पर विवर्तनिक नियंत्रण, प्लेट-विवर्तनिकी और अवसाद-संचय)। चूना-पत्थर के दो नामित वर्गीकरण हैं — Dunham और Folk। दोनों छोटे हैं और दोनों पूछे जाते हैं, इसलिए दोनों याद रखें। |
| अवसाद विज्ञान | Sedimentation as a geochemical process | भू-रासायनिक प्रक्रिया के रूप में अवसादन; अवसादन के भौतिक-रासायनिक कारक; Eh-pH आरेख; प्राकृतिक जल का भू-रसायन; अवसादों का भू-रासायनिक विश्लेषण और उनके आलेख — जिनसे रासायनिक परिपक्वता, स्रोत-शैलों का अपक्षय सूचकांक, उद्गम-स्थल तथा विवर्तनिक परिस्थिति का निर्धारण होता है; और अवसादों का वर्गीकरण। Eh-pH आरेख रटने की नहीं, पढ़ने की चीज़ हैं — हर क्षेत्र का मतलब और लोहे का व्यवहार समझ लें, बाक़ी अपने आप निकलता है। |
| सर्वेक्षण और मानचित्रण | Maps — types and basic elements | मानचित्र — प्रकार और मूल तत्व; प्रक्षेप प्रणाली; डेटम तथा डेटम रूपांतरण; डिजिटल मानचित्रण तकनीकें; और GPS/GNSS एवं मानचित्रण। डेटम रूपांतरण वही चीज़ है जिसे ज़्यादातर उम्मीदवार छोड़ देते हैं। यह छोटी है और ठीक उसी तरह की है जिस पर एक-अंक का सवाल बनना आसान होता है। |
| सर्वेक्षण और मानचित्रण | Surveying: Basic principles | सर्वेक्षण — मूल सिद्धांत, क्षेत्र-सर्वेक्षण के प्रकार और प्रक्रियाएँ; बंद-लूप तथा खुला ट्रैवर्स; थियोडोलाइट, डम्पी लेवल और टोटल स्टेशन सर्वेक्षण के सिद्धांत; और RL स्थानांतरण। यह यंत्र-आधारित और व्यावहारिक हिस्सा है। RL transfer एक छोटी गणना है — सही करना आसान है और लापरवाही में गँवाना भी उतना ही आसान। |
| सर्वेक्षण और मानचित्रण | Geologic surveying: Definition and scope | भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण — परिभाषा और क्षेत्र; शैल-प्रस्फुटनों (outcrops) का अध्ययन; कंपास तथा क्लाइनोमीटर का प्रयोग; आधार मानचित्र — उस पर क्षेत्र-आँकड़े अंकित करना, भूवैज्ञानिक ट्रैवर्स, विस्तृत तथा टोही मानचित्रण; और अवसादी एवं कठोर-शैल भूभाग में भूवैज्ञानिक क्षेत्र-मानचित्रण। असिस्टेंट जियोलॉजिस्ट का रोज़ का काम यही है। जिसने क्षेत्र-मानचित्रण किया है, उसके लिए यह प्रविष्टि मुफ़्त के अंक है। |
GROUP-I: स्तरिकी और भू-गतिकी — पूरी 15 प्रविष्टियाँ ↑
पंद्रह प्रविष्टियाँ — पेपर का दूसरा सबसे बड़ा ग्रुप। स्तरिकी सिद्धांतों से शुरू होकर भारतीय स्तरिकी से गुज़रती है और पूर्वोत्तर भारत के अलग खंड तक जाती है; उसके बाद भू-गतिकी उसे ग्रहीय भूविज्ञान तक ले जाती है।
| उप-विषय | आधिकारिक टॉपिक (PDF की भाषा में) | हिंदी में पूरा मतलब और तैयारी का तरीका |
|---|---|---|
| स्तरिकी के सिद्धांत | Stratigraphy and its relation with sedimentation | स्तरिकी और अवसादन से उसका संबंध; स्तरिकी के घटक; भारतीय स्तरिकीय अनुक्रमों की भूवैज्ञानिक व्यवस्था; भारत का भूवैज्ञानिक इतिहास; भूवैज्ञानिक समय-मापक्रम; और स्तरिकीय इकाइयाँ — अंतरराष्ट्रीय तथा भारतीय स्तरिकीय संहिताएँ। भूवैज्ञानिक समय-मापक्रम याद से लिख पाना चाहिए। इस पूरे ग्रुप की बाकी हर चीज़ उसी पर टंगी है, इसलिए सबसे पहले वही पक्का करें। |
| स्तरिकी के सिद्धांत | Principles and methods of correlation of stratigraphic units | स्तरिकीय इकाइयों के सहसंबंधन के सिद्धांत और विधियाँ; ऊर्ध्वाधर तथा पार्श्विक स्तरिकीय संबंध; और अनुक्रम स्तरिकी, चुंबकीय स्तरिकी एवं भूकंपीय स्तरिकी (sequence, magneto- और seismo-stratigraphy) की अवधारणाएँ। तीन आधुनिक स्तरिकियाँ नाम लेकर दी गई हैं। खासकर sequence stratigraphy अवधारणा के रूप में पूछी जाती है, किसी केस-स्टडी के रूप में नहीं। |
| स्तरिकी के सिद्धांत | Sedimentary facies | अवसादी शैल-मुख (sedimentary facies) — मुख की अवधारणा; पार्श्विक तथा ऊर्ध्वाधर मुख-परिवर्तन; मुख-प्रतिरूपण (facies modeling); और पुराभौगोलिक पुनर्निर्माण। इस प्रविष्टि की अनकही रीढ़ Walther's law है — सिलेबस उसका नाम नहीं लेता, फिर भी उसे ज़रूर पढ़ें, क्योंकि मुख-परिवर्तन के सवाल उसी से हल होते हैं। |
| भारतीय स्तरिकी | Precambrian formations of India | भारत की प्रीकैंब्रियन शैल-समूह — धारवाड़ प्रांत, पूर्वी घाट प्रांत, मध्य भारतीय प्रांत, सिंहभूम-ओडिशा प्रांत और अरावली-बुंदेलखंड प्रांत; तथा आर्कियन-प्रोटेरोज़ोइक सीमा। पाँच प्रांत नाम लेकर दिए गए हैं। एक नक्शा जिस पर ये पाँचों अंकित हों, और हर प्रांत के साथ एक पहचान वाली शैल-इकाई — इतने से यहाँ का ज़्यादातर हिस्सा सध जाता है। |
| भारतीय स्तरिकी | Proterozoic formations of Indian Peninsula | प्रायद्वीपीय भारत की प्रोटेरोज़ोइक शैल-समूह — कडप्पा महासमूह (Cuddapah Supergroup), विंध्यन महासमूह और कुरनूल समूह। यहाँ केवल तीन नामित इकाइयाँ हैं। यह Paper-II की सबसे छोटी प्रविष्टियों में से एक है और सबसे जल्दी पूरी हो जाने वाली भी — इसे टालें नहीं, एक बैठक में निपटा दें। |
| भारतीय स्तरिकी | Palaeozoic formations of India | भारत की पैलियोज़ोइक शैल-समूह; हिमालयी पैलियोज़ोइक; प्रायद्वीपीय भारत के समुद्री पैलियोज़ोइक; और प्रीकैंब्रियन-कैंब्रियन सीमा। सीमा वाला हिस्सा सीमा-प्रश्न है — यानी उस सीमा के आर-पार क्या बदलता है और उसे पहचाना कैसे जाता है। यही दो बातें तैयार रखें। |
| भारतीय स्तरिकी | Mesozoic formations of India | भारत की मेसोज़ोइक शैल-समूह; स्पीति और हिमालय श्रेणी का ट्राइऐसिक; कच्छ क्षेत्र का जुरैसिक; प्रायद्वीपीय भारत का क्रिटेशियस; और दक्कन ट्रैप तथा उससे जुड़ी infra-, inter- एवं intra-trappean परतें। trappean परतें ही वह बारीकी हैं जो तैयार उत्तर को अस्पष्ट उत्तर से अलग करती हैं — तीनों में क्या-क्या मिलता है, यह ज़रूर याद करें। (PDF में वर्तनी “Jurrasic” छपी है।) |
| भारतीय स्तरिकी | Gondwana Sequence of India | भारत का गोंडवाना अनुक्रम — द्रोणी-विन्यास, अवसादन और पुराजलवायु; प्रायद्वीपीय भारत के गोंडवाना निक्षेप; और समुद्री अंतर्स्तरण (marine intercalations)। भारत का मुख्य कोयला गोंडवाना का ही है, इसलिए यह प्रविष्टि GROUP-J के कोयला वाले टॉपिकों में भी काम आती है — दोनों को जोड़कर पढ़ें, मेहनत आधी हो जाएगी। |
| पूर्वोत्तर भारत की स्तरिकी | Precambrians and all igneous activities of Shillong Plateau | शिलांग पठार और अरुणाचल हिमालय के प्रीकैंब्रियन तथा वहाँ की सभी आग्नेय गतिविधियाँ। यह केवल एक वाक्य है, पर यह उसी ज़मीन के बारे में है जिस पर इस पद का असली काम होगा। इसे एक पंक्ति समझकर नहीं, पूरा टॉपिक मानकर तैयार करें — पूर्वोत्तर से जुड़ी प्रविष्टियाँ इस सिलेबस में बार-बार लौटती हैं। |
| पूर्वोत्तर भारत की स्तरिकी | Gondwana and Paleozoic stratigraphy in the Northeastern region of India | पूर्वोत्तर भारत की गोंडवाना और पैलियोज़ोइक स्तरिकी; पूर्वोत्तर के क्रिटेशियस निक्षेप; क्रिटेशियस-टर्शियरी सीमा; सिलहट ट्रैप तथा पूर्वोत्तर के अन्य मेसोज़ोइक अंतर्वेधी; और असम-अराकान क्षेत्र की सीनोज़ोइक स्तरिकी। असम-अराकान भारत का सबसे पुराना तेल-प्रांत है। यह प्रविष्टि और GROUP-J की पेट्रोलियम वाली प्रविष्टियाँ असल में एक ही कहानी दो बार कह रही हैं — इन्हें साथ पढ़ना सबसे समझदारी का रास्ता है। |
| भू-गतिकी | Continents, Oceans and Mountains | महाद्वीप, महासागर और पर्वत; भू-अभिनतियों (geosynclines) से प्लेट-विवर्तनिकी तक सिद्धांतों का विकास; सागर-नितल प्रसरण, द्वीप चाप, मध्य-महासागरीय कटक, ओफिओलाइट का स्थापन; विश्व की भूकंप एवं भूकंपीय पेटियाँ; और प्लेट-गतिकी का मापन। यहाँ केवल विचार नहीं, विचार का इतिहास भी पूछा जाता है — geosyncline सिद्धांत सिलेबस में इसी वजह से रखा गया है, इसलिए उसे पुराना कहकर छोड़ें नहीं। |
| भू-गतिकी | Broad overview of tectonic settings of India | भारत की विवर्तनिक परिस्थितियों का व्यापक अवलोकन; हिमालय का विकास और हिमालयी विवर्तनिकी; तथा भारत-म्यांमार चल पेटी (Indo-Myanmar mobile belt)। असम को भूकंप की दृष्टि से सक्रिय बनाने वाली यही पेटी है। इस पद के लिए पूरे ग्रुप में सबसे प्रासंगिक विवर्तनिक मद यही है — इसे सबसे ऊपर रखें। |
| भू-गतिकी | Introduction and history of planetary geology | ग्रहीय भूविज्ञान का परिचय और इतिहास — ब्रह्मांड; सौर मंडल का परिचय, उसकी उत्पत्ति और आयु; तथा सूर्य एवं ग्रहों का निर्माण। ग्रहीय भूविज्ञान यहाँ से शुरू होकर तीन प्रविष्टियों तक चलता है। इसकी गहराई सामान्य जानकारी जितनी है, खगोल-भौतिकी जितनी नहीं — इसलिए इस पर ज़रूरत से ज़्यादा समय न लगाएँ। |
| भू-गतिकी | Cosmic dust. Asteroidal parent body | ब्रह्मांडीय धूल; क्षुद्रग्रहीय जनक पिंड; उल्कापिंडों की आकारिकी और वर्गीकरण; आदिम उल्कापिंड — साधारण कॉन्ड्राइट तथा कार्बनी कॉन्ड्राइट; और विभेदित उल्कापिंड — एकॉन्ड्राइट, चंद्र एवं मंगल उल्कापिंड, तथा लौह और प्रस्तर-लौह उल्कापिंड। उल्कापिंडों का वर्गीकरण GROUP-F में भी आ चुका है — एक बार पढ़ लेने पर दोनों जगह का काम हो जाता है। |
| भू-गतिकी | Planetary remote sensing | ग्रहीय सुदूर संवेदन — ग्रहीय स्थलाकृति और सतह का अध्ययन; सतह, वायुमंडल, खनिज तथा रासायनिक संघटन का अध्ययन; ग्रहों के लिए तापीय सुदूर संवेदन; और गुरुत्व, गामा एवं एक्स-किरण स्पेक्ट्रमिकी। सुदूर संवेदन यहाँ लौटकर ग्रहों पर लागू होता है। अगर GROUP-C पक्का है तो यह प्रविष्टि लगभग बिना अतिरिक्त समय के पूरी हो जाती है। |
GROUP-J: जीवाश्म विज्ञान और ईंधन भूविज्ञान — पूरी 14 प्रविष्टियाँ ↑
चौदह प्रविष्टियाँ, तीन खंडों में — जीवाश्म विज्ञान, फिर कोयला, फिर पेट्रोलियम। असम भारत का सबसे पुराना तेल-प्रांत है, और यह ग्रुप तथा GROUP-I की असम-अराकान वाली प्रविष्टि एक ही ज़मीन के दो दृश्य हैं।
| उप-विषय | आधिकारिक टॉपिक (PDF की भाषा में) | हिंदी में पूरा मतलब और तैयारी का तरीका |
|---|---|---|
| जीवाश्म विज्ञान | Micropalaeontology | सूक्ष्म-जीवाश्मविज्ञान — परिभाषा, सूक्ष्म-जीवाश्मों के प्रकार और उनका महत्व; नैनोजीवाश्म तथा भूविज्ञान में उनका महत्व; और चिह्न-जीवाश्म (trace fossils) एवं उनका वर्गीकरण। जीवाश्म विज्ञान का यही हिस्सा उद्योग में असल में काम आता है — इसीलिए ग्रुप की शुरुआत यहीं से होती है। |
| जीवाश्म विज्ञान | Foraminifers; conodonts, ostracods and radiolaria | फोरामिनिफेरा — उनकी आकारिकी और विकास, भूवैज्ञानिक वितरण, तथा पुरापारिस्थितिकी, सहसंबंधन, जैव-स्तरिकी और हाइड्रोकार्बन अन्वेषण में उनके उपयोग; और कोनोडोंट, ओस्ट्राकोड एवं रेडियोलेरिया की आकारिकी, स्तरिकीय वितरण और उपयोग। चार सूक्ष्म-जीवाश्म समूह हैं और उपयोग के रूप में हाइड्रोकार्बन अन्वेषण का नाम लिया गया है। पेट्रोलियम वाली प्रविष्टियों से यह जोड़ जान-बूझकर रखा गया है। |
| जीवाश्म विज्ञान | Vertebrate palaeontology | कशेरुकी जीवाश्मविज्ञान — पुराजलवायु और पुरापारिस्थितिकी के संदर्भ में मानव, अश्व-कुल (equidae) तथा गज-कुल (proboscidae) का विकास; और इन कशेरुकियों के विकास के दौरान दंत-विन्यास (dentition) के बदलते प्रतिरूप। तीन वंश-परंपराएँ हैं और दंत-विन्यास अलग से पूछा गया है। घोड़े के दाँतों के विकास वाला मानक चित्र यहाँ सबसे ज़रूरी है। |
| जीवाश्म विज्ञान | Palynology and its stratigraphic and palaeoclimatic significance | परागाणु विज्ञान (palynology) और उसका स्तरिकीय एवं पुराजलवायु महत्व; परागकण और बीजाणु, डायटम तथा dianoflagellate का अध्ययन; और परागाणविक कार्बनिक पदार्थ। परागाणु विज्ञान चतुर्थ कल्प की जलवायु का भी औज़ार है, इसलिए यह प्रविष्टि और GROUP-C की जलवायु वाली प्रविष्टि एक-दूसरे को मज़बूत करती हैं। |
| जीवाश्म विज्ञान | Detail account of Gondwana flora | विश्व और भारतीय संदर्भ में गोंडवाना वनस्पति का विस्तृत विवरण, पुराजलवायु तथा पुरापारिस्थितिकी के परिप्रेक्ष्य में। जो नाम तैयार रखना चाहिए वह है Glossopteris — यह गोंडवाना वनस्पति का प्रतीक भी है और महाद्वीपीय विस्थापन (continental drift) का उत्कृष्ट प्रमाण भी, इसलिए दो जगह काम आता है। |
| ईंधन भूविज्ञान — कोयला | Origin of coal | कोयले की उत्पत्ति — वनस्पति का क्रमिक विकास; पीट दलदलों की उत्पत्ति के लिए जलवायविक, पुराभौगोलिक और विवर्तनिक आवश्यकताएँ; कोयले तथा कोयला-धारी अनुक्रम का अवसादन; कोयला संस्तरों की भूवैज्ञानिक विशेषताएँ; कोयले की आयु और भौगोलिक वितरण; पीट का डायाजेनेसिस और कोयलीकरण (coalification); कोयलीकरण बढ़ने के साथ कोयले में भौतिक-रासायनिक बदलाव; और कोयलीकरण के कारण। पूरे कोयला-खंड का सूत्र यही कोयलीकरण है — पीट से लिग्नाइट, फिर बिटुमिनस, फिर एंथ्रासाइट, और हर चरण पर क्या बदलता है। |
| ईंधन भूविज्ञान — कोयला | Coal sampling and analysis | कोयले का प्रतिचयन और विश्लेषण — कोयले का नमूना लेना; कोयले का विश्लेषण और उसके रासायनिक गुण; सन्निकट विश्लेषण तथा चरम विश्लेषण (proximate और ultimate analysis); कोयले के भौतिक गुण; कोयले में सूक्ष्म तत्व; और कोयले का वर्गीकरण। यहाँ परिभाषा की जोड़ी proximate और ultimate analysis है — सवाल यही बनता है कि इनमें से कौन-सा क्या नापता है। |
| ईंधन भूविज्ञान — कोयला | Petrography of coal | कोयले का शैल-वर्णन (petrography) — कोयले का स्थूल वर्णन; सूक्ष्मदर्शीय वर्णन; मैसरल (macerals) का वर्गीकरण, गुण, उत्पत्ति और उपयोग; और microlithotypes। मैसरल कोयले के सूक्ष्म घटक हैं। सबसे पहले तीन नाम पक्के करें — vitrinite, liptinite और inertinite; इन्हीं के इर्द-गिर्द इस प्रविष्टि के सवाल घूमते हैं। |
| ईंधन भूविज्ञान — कोयला | Coal utilization and coal as alternative energy source | कोयले का उपयोग और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के रूप में कोयला — दहन, गैसीकरण, कार्बनीकरण तथा कोक; कोयले में गैस, भूमिगत कोयला गैसीकरण, द्रव ईंधन के रूप में कोयला, तेल-प्रवण स्रोत शैल के रूप में कोयला; और कोयला एवं पर्यावरण। भूमिगत कोयला गैसीकरण तथा कोल-बेड मीथेन नीति से जुड़े विषय हैं — इन पर समसामयिक नोट भी पढ़ लेना फ़ायदेमंद रहता है। |
| ईंधन भूविज्ञान — कोयला | Geology of Indian coal deposits | भारतीय कोयला निक्षेपों का भूविज्ञान — भारतीय कोयला निक्षेपों का भूवैज्ञानिक और भौगोलिक वितरण; तथा पूर्वोत्तर भारत के कोयला निक्षेपों का भूविज्ञान। पूर्वोत्तर के कोयले का नाम अलग से लिया गया है। असम का टर्शियरी कोयला गोंडवाना कोयले से अलग है — यही तुलना सबसे संभावित सवाल है, इसलिए दोनों का अंतर साफ़ रखें। |
| ईंधन भूविज्ञान — पेट्रोलियम | Nature and origin of petroleum | पेट्रोलियम की प्रकृति और उत्पत्ति — पेट्रोलियम के मूल घटक; तेल के भौतिक गुण; पेट्रोलियम की उत्पत्ति तथा कार्बनिक और अकार्बनिक उत्पत्ति के सिद्धांत; हाइड्रोकार्बन का प्रवास — प्राथमिक और द्वितीयक; तेल-गैस के लिए प्रग्रहण-क्रियाविधि (trapping mechanisms); और भंडार-गुण: सरंध्रता, पारगम्यता (निरपेक्ष, प्रभावी तथा सापेक्ष), द्रव-संतृप्ति और सापेक्ष पारगम्यता। चित्र वाला सवाल यहाँ trap के प्रकारों से बनता है — संरचनात्मक, स्तरिकीय और मिश्रित, तीनों का चित्र बनाना आना चाहिए। |
| ईंधन भूविज्ञान — पेट्रोलियम | Reservoir rocks | भंडार शैल — बलुआ पत्थर भंडार, कार्बोनेट भंडार और विदरित (fractured) भंडार; भंडार शैलों का शैल-भौतिकीय अध्ययन; और भंडार में दाब की स्थिति — भंडार दाब तथा सामान्य एवं असामान्य संस्तर दाब। असामान्य संस्तर दाब जितना भूविज्ञान का विषय है उतना ही वेधन-सुरक्षा का — और यह कारण-परिणाम वाले सवाल के रूप में पूछा जाता है। |
| ईंधन भूविज्ञान — पेट्रोलियम | Oil well drilling and drilling fluids; Well logging | तेल-कूप वेधन और वेधन द्रव — प्राचल, उपयोगिता तथा प्रकार: ऊर्ध्वाधर, विचलित और क्षैतिज वेधन; कूप-स्थल भूवैज्ञानिक के कर्तव्य; कूप-लॉगिंग के मूल सिद्धांत; विभिन्न लॉग — SP, GR, प्रतिरोधकता लॉग, न्यूट्रॉन लॉग, घनत्व लॉग, सोनिक लॉग तथा परंपरागत विद्युत लॉग; और प्रतिरोधकता एवं जल-संतृप्ति। सात लॉग एक-एक करके नाम से दिए गए हैं। हर एक के लिए बस इतना जानना काफ़ी है कि वह किस भौतिक गुण पर प्रतिक्रिया करता है — पूरा सवाल आमतौर पर उतना ही होता है। |
| ईंधन भूविज्ञान — पेट्रोलियम | Exploration of hydrocarbon; petroliferous basins of India | हाइड्रोकार्बन का अन्वेषण — भूवैज्ञानिक, भू-रासायनिक तथा भूभौतिकीय अन्वेषण; भूभौतिकीय अन्वेषण में भूकंपीय सर्वेक्षण, गुरुत्वमापी सर्वेक्षण और भूकंपीय आँकड़ों की भूवैज्ञानिक व्याख्या; भारत की तेल-धारी द्रोणियाँ; और असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, त्रिपुरा, मिज़ोरम, कैंबे द्रोणी, बॉम्बे ऑफ़-शोर तथा कृष्णा-गोदावरी द्रोणियों के तेल एवं गैस क्षेत्र। किसी और द्रोणी से पहले पूर्वोत्तर के पाँच राज्यों का नाम आता है। असम के असिस्टेंट जियोलॉजिस्ट के पेपर के लिए इससे साफ़ इशारा कोई सिलेबस नहीं देता। |
GROUP-K: नदीय तंत्र और पर्यावरणीय भूविज्ञान — पूरी 8 प्रविष्टियाँ ↑
आठ प्रविष्टियाँ — सबसे छोटा ग्रुप, और सबसे ज़्यादा स्थानीय। “असम में बाढ़” सिलेबस में नाम लेकर लिखा गया है, और नदीय वाले आधे हिस्से में ब्रह्मपुत्र लगातार मौजूद है।
| उप-विषय | आधिकारिक टॉपिक (PDF की भाषा में) | हिंदी में पूरा मतलब और तैयारी का तरीका |
|---|---|---|
| नदीय तंत्र | Fluvial processes | नदीय प्रक्रियाएँ — अपवाह द्रोणी का विकास; अपवाह प्रतिरूप और उनका महत्व; जलचालित ज्यामिति (hydraulic geometry); नदीय तंत्रों का वर्गीकरण; अपरदन, परिवहन और निक्षेपण की प्रक्रियाएँ; धारा-शक्ति, सक्षमता तथा धारिता (stream power, competence और capacity); आधार-तल नियंत्रण; और नदियों पर संरचनात्मक एवं सक्रिय विवर्तनिक नियंत्रण। competence और capacity की छोटी-सी जोड़ी ही एक अंक तय करती है — इनका अंतर बिल्कुल सटीक याद रखें। |
| नदीय तंत्र | Fluvial landforms | नदीय स्थलरूप — रूप और प्रक्रिया का संबंध; अपरदनात्मक तथा निक्षेपात्मक स्थलरूप; बाढ़ के मैदानों का विकास और उनके प्रकार; जलोढ़ वेदिकाएँ; जलोढ़ पंख और डेल्टा; तथा समप्राय मैदान (peneplain) की अवधारणा एवं अपरदन का नदीय चक्र। यहाँ का सामान्य रूप यही होता है कि विवरण या रेखाचित्र देकर स्थलरूप पहचानने को कहा जाए — इसलिए हर स्थलरूप को उसके चित्र के साथ याद करें। |
| नदीय तंत्र | Fluvial depositional environments and sedimentation | नदीय निक्षेपण परिवेश और अवसादन; निक्षेपण प्रतिरूप; शैल-मुख तथा शैल-मुख समुच्चय (lithofacies और उनके assemblages); मुख की उत्पत्ति; और मुख में स्थापत्य-तत्व विश्लेषण (architectural element analysis)। इस ग्रुप की उन्नत मद यही है, और यही वह चीज़ है जिसे सामान्य पाठ्यपुस्तक ठीक से नहीं समेटती — इसके लिए अलग से एक अच्छा संदर्भ देखना पड़ेगा। |
| नदीय तंत्र | Fluvial landforms in NE India | पूर्वोत्तर भारत के नदीय स्थलरूप; फैनरोज़ोइक नदीय अनुक्रमों के अभिलेख; और नदीय निक्षेपण तंत्रों की आर्थिक संभावना। ब्रह्मपुत्र दुनिया की सबसे जानी-मानी गुंफित (braided) नदी है। उसका नाम आने की पूरी उम्मीद रखें — और यह भी तैयार रखें कि वह गुंफित क्यों होती है, क्योंकि कारण ही असली सवाल है। |
| पर्यावरणीय भूविज्ञान | Definition: Fundamental concepts and scope of environmental geology | परिभाषा — पर्यावरणीय भूविज्ञान की मूल अवधारणाएँ और क्षेत्र; खनन गतिविधियों से होने वाला प्रदूषण और संकट; तथा रेडियोसक्रिय खनिजों के खनन से होने वाला प्रदूषण। खनन-प्रदूषण वही बिंदु है जहाँ यह ग्रुप GROUP-G से मिलता है। नियमन (regulation) वाले पहलू पर एक समसामयिक नोट पढ़ लेना यहाँ फ़ायदेमंद है। |
| पर्यावरणीय भूविज्ञान | Landslides | भूस्खलन — कारक तत्व; पर्यावरण पर भूस्खलन का प्रभाव; भूस्खलन संकट क्षेत्रीकरण (hazard zonation); रोकथाम के उपाय; और मृदा अपरदन। संकट क्षेत्रीकरण एक विधि है जिसके कारक नाम लेकर आते हैं। पहाड़ी राज्य में यह असली नौकरी के भी बहुत क़रीब है, इसलिए इसे किताबी टॉपिक मानकर न छोड़ें। |
| पर्यावरणीय भूविज्ञान | Flood; flood in Assam | बाढ़ — परिभाषा, कारण, नदीय तंत्रों में बाढ़, बाढ़ प्रबंधन, बाढ़ प्रबंधन की संरचनात्मक तथा गैर-संरचनात्मक विधियाँ, बाँध और बाढ़, बाढ़-आवृत्ति विश्लेषण की विधि, और असम में बाढ़। “असम में बाढ़” सिलेबस में नाम लेकर लिखा गया है। अगर इस ग्रुप की कोई एक प्रविष्टि पूछी जाना लगभग तय है, तो वह यही है — इसे सबसे ऊपर रखें। |
| पर्यावरणीय भूविज्ञान | Water pollution | जल प्रदूषण — सतही और भूजल के प्रदूषण के स्रोत; जल प्रदूषण के प्राचल; प्रदूषण के प्रकार; कारक तत्व; केस स्टडी; और भारतीय तथा WHO के मानकों के अनुसार पेयजल के प्राचल। भारतीय और WHO दोनों मानकों का नाम लिया गया है। अनुमेय सीमाएँ (permissible limits) ठीक-ठीक याद रखनी चाहिए — यह प्रविष्टि उसी तरह की बारीकी माँगती है। |
कौन-सी संख्या आयोग की है और कौन-सी हमारी ↑
इस पेज पर दस्तावेज़ की अपनी संख्याएँ सिर्फ़ चार हैं — हर पेपर के लिए 2 घंटे और 100 अंक, और Paper-I के लिए 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्न। नीचे दी गई बाक़ी हर संख्या या तो हमारा जोड़ है या हमारी गिनती, और इसीलिए उसे यहाँ अलग से लिखा गया है — ताकि आप हमारी संख्या को कभी आयोग की संख्या न समझ बैठें।
अगर कोई कोचिंग वेबसाइट आपको ग्रुपवार अंक-विभाजन बताए, या Paper-II के प्रश्नों की संख्या बताए, तो उससे पूछिए कि यह आँकड़ा आया कहाँ से। इस दस्तावेज़ में इनमें से कोई भी संख्या है ही नहीं।
| संख्या | यह कहाँ से आई है |
|---|---|
| 4 | Paper-I के 2 घंटे और Paper-II के 2 घंटे जोड़कर। PDF हर पेपर का समय अलग-अलग बताती है, कुल समय नहीं। |
| 10 | GROUP-B और GROUP-E की प्रविष्टियों की हमारी अपनी गिनती। PDF में यह संख्या कहीं नहीं लिखी है। |
| 11 | Paper-II के GROUP शीर्षकों की गिनती, GROUP-A से GROUP-K तक। PDF उन्हें अक्षर देती है, पर यह कहीं नहीं बताती कि ग्रुप कितने हैं। |
| 12 | GROUP-A तथा GROUP-D की प्रविष्टियों की हमारी अपनी गिनती। PDF में यह संख्या कहीं नहीं लिखी है। |
| 13 | GROUP-F की प्रविष्टियों की हमारी गिनती; और यही संख्या PDF फ़ाइल के पन्नों की भी है। |
| 14 | GROUP-J की प्रविष्टियों की हमारी अपनी गिनती। PDF में यह संख्या कहीं नहीं लिखी है। |
| 15 | GROUP-I की प्रविष्टियों की हमारी अपनी गिनती। PDF में यह संख्या कहीं नहीं लिखी है। |
| 123 | Paper-II को हमने जितनी टॉपिक प्रविष्टियों में बाँटा, उनकी अपनी गिनती। PDF हर ग्रुप के नीचे लगातार अनुच्छेदों में लिखी है और प्रविष्टियों की कोई संख्या नहीं बताती। |
| 130 | हमारी 123 Paper-II प्रविष्टियाँ, और Paper-I की सारणी की 7 भरी हुई पंक्तियाँ — दोनों को जोड़कर। |
| 200 | Paper-I के 100 अंक और Paper-II के 100 अंक जोड़कर। PDF दोनों आँकड़े अलग-अलग छापती है, कहीं जोड़ती नहीं। |
| 250 | स्कैन किए पन्नों को पढ़ने से पहले हमने जिस विभेदन (डॉट्स प्रति इंच) पर उन्हें खोला — यह हमारी अपनी प्रक्रिया की बात है, परीक्षा की नहीं। |
यह सिलेबस क्या नहीं बताता — और हम अंदाज़ा नहीं लगाएँगे ↑
सिलेबस सिर्फ़ दायरा तय करता है, इससे ज़्यादा कुछ नहीं। खाली जगहों को आत्मविश्वास से भरे अनुमान से भरने के बजाय उन्हें नाम लेकर बता देना ज़्यादा काम का है। इसलिए नीचे वह सब है जो उम्मीदवार जानना चाहेगा, पर यह फ़ाइल जिसका जवाब नहीं देती।
इनमें से हर बात के लिए भरोसे के लायक़ सिर्फ़ दो ही जगहें हैं — आयोग की अपनी वेबसाइट और भर्ती का विज्ञापन।
- परीक्षा की तारीख़। यह फ़ाइल सिलेबस है, अधिसूचना नहीं। इसमें न स्क्रीनिंग टेस्ट की तारीख़ है, न एडमिट कार्ड की।
- पदों की संख्या, वेतनमान, आयु सीमा, शुल्क और शैक्षणिक योग्यता। ये सब भर्ती विज्ञापन में होते हैं, जो APSC का अलग दस्तावेज़ है।
- नकारात्मक अंकन है या नहीं। PDF इसका ज़िक्र तक नहीं करती। इस फ़ाइल से कोई नहीं बता सकता कि कितने अंक कटेंगे — और जो वेबसाइट कोई आँकड़ा छापे, उसने वह कहीं और से लिया है।
- Paper-II में कितने प्रश्न आएँगे, और 100 अंक ग्यारह ग्रुपों में कैसे बँटेंगे। इनमें से कोई आँकड़ा दस्तावेज़ में नहीं है।
- कोई अर्हक या कट-ऑफ़ प्रतिशत, और यह कि Paper-I तथा Paper-II अलग-अलग अर्हक हैं या दोनों जोड़े जाएँगे।
- स्क्रीनिंग टेस्ट के बाद क्या होगा — साक्षात्कार होगा या कोई और लिखित चरण, और उसका वज़न कितना होगा।
- पुस्तक-सूची। सिलेबस दायरा तय करता है, किताबें नहीं — और यह सिलेबस तो कोई पठन-सामग्री बताता ही नहीं।
इस PDF की दो बातें, जो कोई न बताए तो उलझन होगी ↑
पहली बात — दायरा। दोनों ज्ञापन एक ही बात एक ही शब्दों में कहते हैं — यह असिस्टेंट जियोलॉजिस्ट पद की स्क्रीनिंग परीक्षा का सिलेबस है। पूरी फ़ाइल में किसी और पद का नाम नहीं है, इसलिए यह पेज भी सिर्फ़ इसी पद को समेटता है। आयोग अपनी सिलेबस फ़ाइलें एक पद के लिए एक, इस तरह अपने संग्रह पृष्ठ पर सूचीबद्ध करता है — apsc.nic.in › dr_syllabus_archive.php — और यही फ़ाइल भी वहीं सूचीबद्ध है। अगर आप APSC के किसी दूसरे पद की तैयारी कर रहे हैं, तो आपका सिलेबस उसी पृष्ठ पर मौजूद कोई दूसरी फ़ाइल है, यह नहीं।
दूसरी बात — फ़ाइल खुद। यह हस्ताक्षरित काग़ज़ी दस्तावेज़ का स्कैन है: तेरह पन्नों की तस्वीरें, जिनमें खोजा जा सकने वाला टेक्स्ट है ही नहीं। आप उसमें Ctrl+F दबाएँगे तो कुछ नहीं मिलेगा, और टेक्स्ट निकालने वाला कोई भी औज़ार खाली लौटेगा। हमने पन्नों को चित्र के रूप में खोलकर, मशीन की पढ़ाई को हाथ से मिलाकर ठीक किया — और इसीलिए नीचे दी गई वर्तनियाँ जानना ज़रूरी है: PDF में जो वर्तनी छपी है, खोजते समय वही काम आएगी; और जो मानक वर्तनी है, पढ़ते समय वही सही है।
| PDF में जैसी वर्तनी है | मानक वर्तनी | कहाँ आती है |
|---|---|---|
| LiDER | LiDAR | GROUP-C, तापीय तथा सूक्ष्मतरंग सुदूर संवेदन वाली प्रविष्टि में |
| Promordial | Primordial | GROUP-F, रेडियोजनिक समस्थानिक वाली प्रविष्टि में |
| Atterberg units | Atterberg limits | GROUP-F, अभियांत्रिकी भूविज्ञान की मृदा वाली प्रविष्टि में |
| Bieniswaki | Bieniawski | GROUP-F, शैल-पिंड वर्गीकरण वाली प्रविष्टि में |
| evaporates | evaporites | GROUP-G, अवसादी प्रकार के अयस्क निक्षेप वाली प्रविष्टि में |
| Jurrasic | Jurassic | GROUP-I, मेसोज़ोइक शैल-समूह वाली प्रविष्टि में |
| spleothems | speleothems | GROUP-C, चतुर्थ कल्प की जलवायु वाली प्रविष्टि में |
| dianoflagellate | dinoflagellate | GROUP-J, परागाणु विज्ञान वाली प्रविष्टि में |
महत्वपूर्ण लिंक
FAQ — आपके सवाल, सीधे जवाब
APSC का सिलेबस कहां चेक करें?
apsc.nic.in पर — सीधा लिंक इसी पेज के महत्वपूर्ण लिंक में दिया गया है। एडमिट कार्ड, रिज़ल्ट, आंसर की या सिलेबस देखना हमेशा मुफ़्त होता है।
क्या यही आधिकारिक सिलेबस है?
यह पेज APSC की आधिकारिक रिलीज़ के आधार पर बना है, पर अंतिम शब्द apsc.nic.in पर मौजूद आधिकारिक PDF ही है — तैयारी की रीढ़ उसी को बनाएं।
यह जानकारी कितनी भरोसेमंद है?
यह लेख आधिकारिक अपडेट के आधार पर लिखा गया है और आधिकारिक स्रोत (apsc.nic.in) का लिंक साथ में है, फिर भी अंतिम पुष्टि हमेशा वहीं से करें — तिथियां बदल भी सकती हैं।
APSC की और अपडेट
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