HPPSC Physiotherapist सिलेबस और SAT परीक्षा पैटर्न — पूरा, आसान भाषा में
HPPSC Physiotherapist का Subject Aptitude Test वस्तुनिष्ठ पेपर है — 2 Hours का, अधिकतम 100 अंक का, अधिसूचना No. 3-68/2023-PSC(R-I), दिनांक 21.07.2026 के तहत। इसका सिलेबस सोलह विषय खंड गिनाता है, Human Anatomy से लेकर Physiotherapy in Neurological Conditions तक। दस्तावेज़ प्रश्नों की संख्या नहीं बताता और negative marking का ज़िक्र नहीं करता।
आधिकारिक सिलेबस पेज खोलेंPDF आधिकारिक साइट पर खुलेगा। नीचे उसी सिलेबस का हर टॉपिक आसान भाषा में समझाया गया है — पढ़ने के लिए PDF खोलना ज़रूरी नहीं।
आधिकारिक सिलेबस से तैयार · आधिकारिक लिंक से पुष्टि कर सकते हैं
एक वस्तुनिष्ठ पेपर, दो घंटे, सौ अंक ↑
हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के Physiotherapist पद के Subject Aptitude Test का सिलेबस अधिसूचना No. 3-68/2023-PSC(R-I), दिनांक 21.07.2026 के तहत प्रकाशित किया है। इस पेज पर जो कुछ है, वह उसी दस्तावेज़ से है, और कहीं से नहीं।
दस्तावेज़ पेपर के बारे में तीन बातें कहता है और बाक़ी पूरी लंबाई टॉपिक पर ख़र्च करता है। पेपर वस्तुनिष्ठ (objective type) है। उसकी अवधि 2 Hours है। अधिकतम अंक 100 हैं। वह प्रश्नों की संख्या नहीं बताता, और negative marking का ज़िक्र किसी भी तरफ़ नहीं करता - यह चुप्पी यहाँ चुप्पी की तरह ही बताई गई है, अंदाज़े से भरी नहीं गई।
आगे की टॉपिक सूची नीचे पूरी की पूरी दी गई है, विषय-दर-विषय, आधिकारिक शब्द ठीक वैसे ही रखते हुए जैसे छपे हैं, और हर प्रविष्टि के साथ आसान भाषा में समझ जोड़कर।
| पेपर की बात | अधिसूचना क्या कहती है |
|---|---|
| पेपर | Objective type Subject Aptitude Test (SAT) — वस्तुनिष्ठ विषय अभिरुचि परीक्षा |
| पद | Physiotherapist, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, हिमाचल प्रदेश |
| भर्ती करने वाली संस्था | हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (HPPSC) |
| अवधि | 2 Hours — दो घंटे |
| अधिकतम अंक | 100 |
| प्रश्नों की संख्या | इस दस्तावेज़ में नहीं बताई गई |
| Negative marking | इस दस्तावेज़ में किसी भी तरफ़ ज़िक्र नहीं |
| कितने विषय | सोलह नामित विषय खंड, इस पेज पर पूरे दिए गए हैं |
| अधिसूचना संदर्भ | No. 3-68/2023-PSC(R-I), दिनांक 21.07.2026 |
आयोग की दो-स्तरीय योजना में यह पेपर कहाँ बैठता है ↑
आयोग इस सिलेबस को अपनी वेबसाइट पर उन सिलेबसों के समूह में रखता है जिन्हें वह Two Tier (Screening Test) के अंतर्गत दाख़िल करता है। इससे इतना पता चलता है कि भर्ती दो चरणों की है: एक screening test, और फिर वह Subject Aptitude Test जिसका सिलेबस यह है।
पर यह जगह दस्तावेज़ के अपने पाठ से नहीं, बल्कि इससे तय होती है कि आयोग उसे कहाँ दाख़िल करता है। PDF ख़ुद सिर्फ़ एक पेपर का वर्णन करती है - SAT का। वह screening test के pattern, उसके सिलेबस, या उसके अंकों के इस्तेमाल के बारे में कुछ नहीं कहती। कहीं और इस पद के screening test का बँटवारा बताया जा रहा हो, तो वह इस फ़ाइल से नहीं आया है।
इसलिए ईमानदार पढ़त सीमित है और इसी में काम की भी: यह पेज ठीक-ठीक वही बताता है जो आयोग ने विषय-पेपर के बारे में कहा है, और जो नहीं कहा उसे ढकने के बजाय उसका नाम लेता है।
| उम्मीदवार क्या जानना चाहता है | यह दस्तावेज़ क्या जवाब देता है |
|---|---|
| यह सिलेबस किस पेपर का है? | Physiotherapist पद की वस्तुनिष्ठ Subject Aptitude Test का। |
| कितनी देर का है और कितने अंक का? | अवधि 2 Hours। अधिकतम अंक 100। |
| कितने प्रश्न आएँगे? | दस्तावेज़ नहीं बताता। |
| Negative marking है या नहीं? | दस्तावेज़ किसी भी तरफ़ ज़िक्र नहीं करता। |
| इससे पहले कोई पेपर है? | आयोग इस सिलेबस को Two Tier (Screening Test) के अंतर्गत रखता है, यानी छँटनी वाला चरण है — पर दस्तावेज़ ख़ुद सिर्फ़ SAT का वर्णन करता है। |
| Screening test में क्या आता है? | इस दस्तावेज़ में नहीं। वह पद के अपने विज्ञापन से ही आएगा। |
| विषयों के बीच अंक कैसे बँटे हैं? | दस्तावेज़ में कहीं भी विषय-वार या टॉपिक-वार वज़न नहीं दिया गया है। |
सोलह विषय खंड, और नीचे की तालिकाएँ कैसे पढ़ें ↑
सिलेबस सोलह विषय खंड गिनाता है। इनमें छह मूल विज्ञान के हैं, दो चिकित्सा की बुनियाद हैं, एक नैतिकता का है, और बचे सात नैदानिक हैं। किसी पर कोई वज़न नहीं दिया गया है, इसलिए नीचे की सूची दायरे का नक़्शा है, अंकों का नहीं।
दस्तावेज़ में छपी हर टॉपिक प्रविष्टि आगे की तालिकाओं में लाई गई है। बाईं कॉलम आयोग के अपने शब्द ठीक वैसे ही दोहराती है - उसके बड़े अक्षर, उसके ऐम्परसैंड, कोष्ठक के भीतर के निर्देश जैसे in brief, और दो साफ़ दिखने वाली छपाई की चूकें भी, जिन्हें जानबूझकर सुधारा नहीं गया है। दाईं कॉलम हमारी है: आसान भाषा की एक पंक्ति, जो बताती है कि उस प्रविष्टि में असल में क्या आता है।
नीचे बीच वाली कॉलम की गिनती छपी हुई प्रविष्टियों की हमारी अपनी गिनती है। आयोग ऐसा कोई आँकड़ा नहीं छापता, इसलिए उसे DERIVED लिखा गया है और उसे पढ़ने की सुविधा भर मानिए, आधिकारिक संख्या कभी नहीं।
| विषय, जैसा सिलेबस में नाम है | टॉपिक प्रविष्टियाँ (हमारी गिनती) | यह क्या है |
|---|---|---|
| मानव शरीर रचना (Human Anatomy) | 13 | शरीर की बनावट, एक-एक तंत्र करके। |
| मानव शरीर क्रिया विज्ञान (Human Physiology) | 8 | स्वस्थ शरीर में हर तंत्र कैसे काम करता है। |
| विकृति विज्ञान (Pathology) | 14 | हर स्थिति के पीछे की रोग प्रक्रिया। |
| औषध विज्ञान (Pharmacology) | 9 | दवाओं के वर्ग और उनका असर। |
| सामान्य मनोविज्ञान (General Psychology) | 11 | अधिगम, स्मृति, अभिप्रेरणा और व्यक्तित्व। |
| नैदानिक जैव रसायन (Clinical Biochemistry) | 10 | पोषण, अणु और चयापचय। |
| जैव यांत्रिकी तथा गति विज्ञान (Biomechanics and Kinesiology) | 24 | मुद्रा, मांसपेशी और चाल का भौतिक विज्ञान। |
| चिकित्सा सूक्ष्म जीव विज्ञान (Medical Microbiology) | 14 | सूक्ष्मजीव, संक्रमण नियंत्रण, और फ़िज़ियोथेरेपिस्ट के लिए इमेजिंग। |
| व्यायाम चिकित्सा (Exercise Therapy) | 15 | गति, मापन और हाथ से की जाने वाली तकनीक। |
| विद्युत चिकित्सा (Electro Therapy) | 18 | धारा, विकिरण, सुरक्षा और विद्युत निदान। |
| फ़िज़ियोथेरेपी में नैतिकता (Ethics in Physiotherapy) | 14 | सहमति, आचरण, गोपनीयता और क़ानून। |
| अस्थि रोग विज्ञान (Orthopaedics) | 20 | हड्डी-जोड़ के रोग, चोट और पुनर्वास। |
| अस्थि रोगों में फ़िज़ियोथेरेपी (Physiotherapy in Orthopaedic) | 17 | एक-एक फ्रैक्चर का फ़िज़ियोथेरेपी प्रबंधन। |
| घाव, जलन तथा प्लास्टिक सर्जरी (Wounds, Burns and Plastic Surgery) | 3 | तीन नामित स्थितियाँ - ऑपरेशन से पहले और बाद। |
| सामान्य चिकित्सा तथा शल्य स्थितियों में फ़िज़ियोथेरेपी (Physiotherapy in General Medical and Surgical Conditions) | 4 | उदर, प्रसूति, ENT और प्रत्यारोपण शल्य क्रियाएँ। |
| तंत्रिका रोगों में फ़िज़ियोथेरेपी (Physiotherapy in Neurological Conditions) | 30 | सबसे लंबा खंड: आकलन, पुनर्शिक्षा, तंत्रिका क्षति। |
| कुल | 224 | दस्तावेज़ में छपी प्रविष्टियों की हमारी अपनी गिनती (DERIVED — आयोग कोई कुल योग नहीं छापता)। |
एक नज़र में
| संचालक संस्था | Himachal Pradesh Public Service Commission (HPPSC) |
| पद का नाम | Physiotherapist |
| विभाग | Department of Health & Family Welfare, H.P. |
| विज्ञापन संख्या | No. 3-68/2023-PSC(R-I) dated 21.07.2026 |
| आधिकारिक वेबसाइट | hppsc.hp.gov.in |
| राज्य | Himachal Pradesh |
Human Anatomy (मानव शरीर रचना): जिन तंत्रों को नाम से पहचानना है ↑
Anatomy इस सिलेबस का पहला खंड है, और यह क्षेत्र-वार नहीं बल्कि तंत्र-वार गिनाया गया है। शरीर का हर बड़ा तंत्र इसमें आता है, यानी किसी भी तंत्र को छोड़ने लायक़ नहीं माना जा सकता।
दो प्रविष्टियों पर ध्यान देना ज़रूरी है क्योंकि वे छूट जाती हैं। Sensory system को Nervous system से अलग नाम दिया गया है, और Lymphatic system को Cardiovascular system से अलग - दोनों अपने आप में सूची में हैं।
| टॉपिक, जैसा सिलेबस में छपा है | इसमें क्या पढ़ना है |
|---|---|
| General Anatomy (सामान्य शरीर रचना) | शरीर के तल, दिशाएँ, ऊतकों के प्रकार और अंग-तंत्रों का सामान्य परिचय। |
| Musculoskeletal system (अस्थि-पेशी तंत्र) | हड्डियाँ, जोड़, स्नायुबंध और मांसपेशियाँ - वही ढाँचा जिस पर फ़िज़ियोथेरेपिस्ट रोज़ काम करता है। |
| Upper and lower extremity (ऊपरी और निचला अंग) | कंधे से हाथ तक और कूल्हे से पैर तक - हड्डियाँ, मांसपेशियों के जुड़ाव, तंत्रिका और रक्त आपूर्ति। |
| Spine and thorax (रीढ़ और वक्ष) | कशेरुक दंड, पसलियों का पिंजरा और उन्हें हिलाने तथा थामने वाली मांसपेशियाँ। |
| Head and neck (सिर और गर्दन) | खोपड़ी, चेहरे तथा गर्दन की संरचनाएँ और उन्हें संचालित करने वाली कपाल तंत्रिकाएँ। |
| Nervous system (तंत्रिका तंत्र) | मस्तिष्क, मेरुरज्जु और परिधीय तंत्रिकाएँ - केंद्रीय तथा परिधीय दोनों बनावट। |
| Sensory system (संवेदी तंत्र) | स्पर्श, दर्द, तापमान, स्थिति-बोध और विशेष इंद्रियों के ग्राही तथा उनके मार्ग। |
| Cardiovascular system (हृदय-वाहिका तंत्र) | हृदय के कक्ष और कपाट, धमनियाँ, शिराएँ और उनसे चलने वाला रक्त संचार। |
| Lymphatic system (लसीका तंत्र) | लसीका वाहिकाएँ, गाँठें और वे मार्ग जो सूजन के प्रबंधन में काम आते हैं। |
| Respiratory system (श्वसन तंत्र) | श्वास नलिकाएँ, फेफड़े, फुफ्फुसावरण और छाती तथा डायाफ़्राम की यांत्रिकी। |
| Digestive system (पाचन तंत्र) | मुँह से गुदा तक की आहार नाल, तथा यकृत, अग्न्याशय और पित्ताशय। |
| Urinary and Reproductive system (मूत्र और प्रजनन तंत्र) | गुर्दे, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और मूत्रमार्ग, तथा पुरुष व स्त्री के प्रजनन अंग। |
| Endocrine system (अंतःस्रावी तंत्र) | वे ग्रंथियाँ जिनकी कोई नली नहीं होती और जो हार्मोन सीधे रक्त में छोड़ती हैं। |
Human Physiology (मानव शरीर क्रिया): वही तंत्र काम कैसे करते हैं ↑
Physiology वही anatomy वाली सूची दोहराता है, पर सवाल बदल देता है: संरचना क्या है नहीं, बल्कि वह करती क्या है। Nerve Muscle Physiology यहाँ अपनी अलग प्रविष्टि है, और फ़िज़ियोथेरेपिस्ट के लिए आगे Electro Therapy की हर बात इसी पर टिकी है।
इस खंड की एक प्रविष्टि अलग-अलग नामों के बजाय समूह में छपी है - Nervous, Digestive & Renal System। नीचे उसे ठीक वैसा ही रखा गया है जैसा दस्तावेज़ में छपा है।
| टॉपिक, जैसा सिलेबस में छपा है | इसमें क्या पढ़ना है |
|---|---|
| General Physiology (सामान्य शरीर क्रिया) | कोशिका का काम, शरीर के तरल, झिल्ली के आर-पार परिवहन और समस्थिति। |
| Blood (रक्त) | रक्त की बनावट, रक्त कोशिकाएँ, रक्तस्राव रुकना, थक्का जमना और रक्त समूह। |
| Cardiovascular system (हृदय-वाहिका क्रिया) | हृदय चक्र, कार्डियक आउटपुट, रक्तचाप और उसका नियंत्रण। |
| Respiratory System (श्वसन क्रिया) | फेफड़ों के आयतन, गैस विनिमय, ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन और श्वास का नियंत्रण। |
| Nerve Muscle Physiology (तंत्रिका-पेशी क्रिया) | विश्राम तथा क्रिया विभव, तंत्रिका चालन, तंत्रिका-पेशी संधि और पेशी संकुचन। |
| Nervous, Digestive & Renal System (तंत्रिका, पाचन और वृक्क तंत्र) | संवेदी तथा प्रेरक मार्ग और प्रतिवर्त, पाचन और अवशोषण, तथा मूत्र बनने की प्रक्रिया। |
| Endocrinology (अंतःस्रावी क्रिया) | हर हार्मोन का काम, उसका नियंत्रण, और उसके बढ़ने या घटने पर क्या होता है। |
| Male & female reproductive system (पुरुष तथा स्त्री प्रजनन तंत्र) | प्रजनन हार्मोन, मासिक चक्र, गर्भावस्था और स्तनपान। |
Pathology (विकृति विज्ञान): किस तंत्र में क्या बिगड़ता है ↑
Pathology भी उसी तरह सजा है - पहले सामान्य प्रक्रियाएँ, फिर तंत्र। सूची के ऊपर वाली सामान्य प्रक्रियाएँ आगे हर नैदानिक खंड में लौटकर आती हैं, इसलिए वे अपनी जगह से ज़्यादा समय माँगती हैं।
आख़िरी प्रविष्टि दो ऐसी स्थितियों को साथ रखती है जिन्हें आमतौर पर साथ नहीं रखा जाता: Congenital Myopathy और myasthenia gravis। दोनों में कमज़ोरी आती है, और दोनों यहाँ एक ही प्रविष्टि में छपी हैं।
| टॉपिक, जैसा सिलेबस में छपा है | इसमें क्या पढ़ना है |
|---|---|
| Introduction to Pathology (विकृति विज्ञान का परिचय) | रोग की प्रक्रियाएँ क्या होती हैं और उनका अध्ययन तथा वर्गीकरण कैसे होता है। |
| Cell injuries (कोशिका क्षति) | कोशिका की लौटने योग्य तथा न लौटने योग्य क्षति, ऊतक-मृत्यु और नियोजित कोशिका-मृत्यु। |
| Inflammation and Repair (शोथ और मरम्मत) | तीव्र तथा जीर्ण सूजन, घाव भरना, कणिकामय ऊतक और निशान बनना। |
| Circulatory Disturbances (संचार संबंधी विकार) | सूजन, थक्का, वाहिका-अवरोध, ऊतक-मृत्यु, आघात और रक्त जमाव। |
| Growth Disturbances and Neoplasia (वृद्धि विकार और अर्बुद) | अतिवृद्धि, क्षय, विषम वृद्धि, और सौम्य तथा घातक ट्यूमर का अंतर। |
| Hematology (रुधिर विज्ञान) | रक्ताल्पता, रक्तस्राव के विकार, ल्यूकीमिया और रक्त की जाँच। |
| Respiratory System (श्वसन तंत्र की विकृति) | निमोनिया, तपेदिक, COPD, दमा और फेफड़ों के ट्यूमर - रोग प्रक्रिया के रूप में। |
| Cardiovascular Pathology (हृदय-वाहिका विकृति) | धमनी काठिन्य, हृदय की रक्त-अल्पता, उच्च रक्तचाप, तथा आमवाती और कपाट रोग। |
| Hepato Biliary Pathology (यकृत-पित्त विकृति) | यकृत शोथ, यकृत काठिन्य, पीलिया और पित्ताशय के रोग। |
| Musculoskeletal System (अस्थि-पेशी विकृति) | हड्डी और जोड़ के रोग - अस्थि सुषिरता, गठिया, संक्रमण तथा अस्थि अर्बुद। |
| Endocrine pathology (अंतःस्रावी विकृति) | थायरॉइड, अधिवृक्क, पीयूष और अग्न्याशय ग्रंथि के रोग। |
| Neuropathology (तंत्रिका विकृति) | पक्षाघात, मस्तिष्क तथा मेरुरज्जु की चोट, संक्रमण, माइलिन क्षय और अपह्रास। |
| Dermatopathology (त्वचा विकृति) | त्वचा के रोग - संक्रमण, सूजन और घाव-अल्सर सहित। |
| Congenital Myopathy &myasthenia gravis (जन्मजात पेशी रोग तथा मायस्थीनिया ग्रेविस) | जन्म से मौजूद पेशी रोग, और वह तंत्रिका-पेशी संधि विकार जिसमें इस्तेमाल के साथ कमज़ोरी बढ़ती है। |
Pharmacology (औषध विज्ञान): दवाओं के वर्ग, कई पर संक्षेप में लिखा है ↑
यही एक खंड है जहाँ सिलेबस ख़ुद बताता है कि कितनी गहराई तक पढ़ना है। इसकी नौ में से पाँच प्रविष्टियों पर दस्तावेज़ में in brief लिखा है, और ये शब्द आयोग के हैं, हमारे नहीं - नीचे की तालिका में वे ठीक वहीं रखे गए हैं जहाँ छपे हैं।
जिन चार प्रविष्टियों पर यह शर्त नहीं लगी है, उन्हें पूरी गहराई से पढ़ना है: General Pharmacology (सामान्य औषध विज्ञान), Autonomic Nervous system (स्वायत्त तंत्रिका तंत्र), Inflammatory/Immune Diseases (शोथ तथा प्रतिरक्षा रोग) और Geriatrics (वृद्धावस्था)।
| टॉपिक, जैसा सिलेबस में छपा है | इसमें क्या पढ़ना है |
|---|---|
| General Pharmacology (सामान्य औषध विज्ञान) | दवा कैसे अवशोषित होती है, फैलती है, असर करती है और शरीर से बाहर निकलती है। |
| Autonomic Nervous system (स्वायत्त तंत्रिका तंत्र) | अनुकंपी तथा परानुकंपी दवाएँ और उनका हृदय, फेफड़ों और आँतों पर असर। |
| Cardiovascular Pharmacology (in brief) (हृदय-वाहिका औषध (संक्षेप में)) | रक्तचाप, हृदय दुर्बलता, एनजाइना और थक्के की दवाएँ - सिलेबस ख़ुद इसे संक्षेप में रखता है। |
| Neuropharmacology (in brief) (तंत्रिका औषध (संक्षेप में)) | मस्तिष्क पर असर करने वाली दवाएँ - शामक, मिर्गी-रोधी, अवसाद-रोधी - रूपरेखा के तौर पर। |
| Disorders of Movement (in brief) (गति-विकार (संक्षेप में)) | कंपवात, स्पास्टिसिटी और पेशी ऐंठन में इस्तेमाल होने वाली दवाएँ। |
| Inflammatory/Immune Diseases (शोथ तथा प्रतिरक्षा रोग) | दर्दनिवारक, शोथ-रोधी दवाएँ, स्टेरॉयड, और आमवाती रोगों में दी जाने वाली दवाएँ। |
| Respiratory Pharmacology (in brief) (श्वसन औषध (संक्षेप में)) | श्वास नली खोलने वाली दवाएँ, साँस से ली जाने वाली स्टेरॉयड और खाँसी की दवाएँ। |
| Digestion and Metabolism (in brief) (पाचन और चयापचय (संक्षेप में)) | अम्लता, आँत के विकार, मधुमेह और वसा की दवाएँ - रूपरेखा में। |
| Geriatrics (वृद्धावस्था) | बढ़ती उम्र में दवा का असर कैसे बदलता है, और बुज़ुर्गों में कई दवाएँ साथ चलने का ख़तरा। |
General Psychology (सामान्य मनोविज्ञान): मन से जुड़े टॉपिक, और वे इस पेपर में क्यों हैं ↑
नैदानिक पेपर पर Psychology बाहरी लगती है, जब तक यह ध्यान न जाए कि प्रविष्टियाँ कौन-सी चुनी गई हैं। Learning, Motivation और Attitudes ठीक वही टॉपिक हैं जो तय करते हैं कि रोगी घर का कार्यक्रम करेगा या नहीं, और Fields of application of Psychology अपने क्षेत्रों में पुनर्वास का नाम लेती है।
ये प्रविष्टियाँ सामान्य मनोविज्ञान की हैं, नैदानिक मनोविज्ञान की नहीं। इस खंड में कहीं मानसिक रोग का निदान नहीं माँगा गया है।
| टॉपिक, जैसा सिलेबस में छपा है | इसमें क्या पढ़ना है |
|---|---|
| Introduction to Psychology (मनोविज्ञान का परिचय) | मनोविज्ञान क्या पढ़ता है, उसके प्रमुख संप्रदाय और उसकी विधियाँ। |
| Fields of application of Psychology (मनोविज्ञान के प्रयोग क्षेत्र) | नैदानिक, स्वास्थ्य, पुनर्वास, शिक्षा, उद्योग और खेल - जहाँ-जहाँ मनोविज्ञान लागू होता है। |
| influence of heredity and environment on the individual (व्यक्ति पर आनुवंशिकता तथा पर्यावरण का प्रभाव) | कौन-सा गुण विरासत में आता है और कौन-सा परिवेश से बनता है। |
| Learning (अधिगम) | शास्त्रीय तथा क्रियाप्रसूत अनुबंधन, पुनर्बलन और सीख का स्थानांतरण। |
| Memory (स्मृति) | जानकारी का दर्ज होना, संचित रहना और याद आना, स्मृति के प्रकार तथा भूलने के कारण। |
| Thinking (चिंतन) | संप्रत्यय, तर्कणा, समस्या समाधान और निर्णय लेना। |
| Motivation (अभिप्रेरणा) | अंतःप्रेरणाएँ, आवश्यकताएँ और वे सिद्धांत जो बताते हैं कि लोग क्यों काम करते हैं। |
| Emotions (संवेग) | संवेग क्या है, शरीर उसे कैसे व्यक्त करता है, और उसके प्रमुख सिद्धांत। |
| Attitudes (अभिवृत्ति) | अभिवृत्ति कैसे बनती है, कैसे मापी जाती है और कैसे बदलती है। |
| Intelligence (बुद्धि) | बुद्धि के सिद्धांत, बुद्धि परीक्षण और बुद्धि-लब्धि की अवधारणा। |
| Personality (व्यक्तित्व) | व्यक्तित्व के प्रकार तथा शीलगुण, प्रमुख सिद्धांत, और उसका मापन। |
Clinical Biochemistry (नैदानिक जैव रसायन): पोषण, अणु और चयापचय ↑
यह खंड पोषण से शुरू होकर जैविक अणुओं के चार वर्गों से गुज़रता है और दो साफ़ नैदानिक प्रविष्टियों पर पहुँचता है: Biochemistry of connective tissue और Diabetes mellitus। ये दोनों फ़िज़ियोथेरेपिस्ट के लिहाज़ से चुनी गई हैं - एक ऊतक भरने की व्याख्या करती है, दूसरी वार्ड में मिलने वाली तंत्रिका क्षति और देर से भरने वाले घावों की।
| टॉपिक, जैसा सिलेबस में छपा है | इसमें क्या पढ़ना है |
|---|---|
| Nutrition (पोषण) | संतुलित आहार, कैलोरी तथा प्रोटीन की ज़रूरत, और कुपोषण। |
| Carbohydrates (कार्बोहाइड्रेट) | वर्गीकरण, पाचन, ग्लाइकोलिसिस, सिट्रिक अम्ल चक्र और ग्लाइकोजन। |
| Lipids (वसा) | वसा का वर्गीकरण, चयापचय, कोलेस्ट्रॉल और लाइपोप्रोटीन। |
| Amino Acids (अमीनो अम्ल) | प्रोटीन की मूल इकाइयाँ, उनका वर्गीकरण और चयापचय। |
| Proteins (प्रोटीन) | संरचना, वर्गीकरण, कार्य और प्रोटीन का विघटन। |
| Study of hemoglobin and myoglobin with their functions (हीमोग्लोबिन तथा मायोग्लोबिन का अध्ययन और उनके कार्य) | ऑक्सीजन ढोने वाले दो प्रोटीन - एक रक्त में, एक मांसपेशी में - और दोनों का काम। |
| Enzymes (एंज़ाइम) | एंज़ाइम कैसे काम करते हैं, उनकी क्रिया किन बातों से बदलती है, और जाँच में उनका उपयोग। |
| Biochemistry of connective tissue (संयोजी ऊतक का जैव रसायन) | कोलेजन, इलास्टिन और आधार पदार्थ - ऊतक भरने के पीछे का रसायन। |
| Vitamins (विटामिन) | वसा तथा जल में घुलने वाले विटामिन, उनके कार्य और कमी से होने वाले रोग। |
| Diabetes mellitus (मधुमेह) | प्रकार, रक्त शर्करा का नियंत्रण, जटिलताएँ और जाँच। |
Biomechanics and Kinesiology (जैव यांत्रिकी तथा गति विज्ञान): मुद्रा, मांसपेशी और चाल का भौतिक विज्ञान ↑
मूल विज्ञान वाले खंडों में यह सबसे बड़ा है, और असल में यह दो सूचियों का जोड़ है। पहला हिस्सा सीधी यांत्रिकी है - बल, घर्षण, गुरुत्व, उत्तोलक, घिरनी, प्रत्यास्थता, स्प्रिंग। दूसरा हिस्सा Muscular system शीर्षक के नीचे लटकता है और अपनी उप-प्रविष्टियाँ ख़ुद गिनाता है, direction of pull और angle of pull तक।
Posture, Gait और Bio-Physics इस खंड को बंद करते हैं। ख़ासकर Gait वही प्रविष्टि है जो इस खंड को आगे के हर नैदानिक खंड से जोड़ती है।
| टॉपिक, जैसा सिलेबस में छपा है | इसमें क्या पढ़ना है |
|---|---|
| Mechanics (यांत्रिकी) | बल और गति का वह भौतिक विज्ञान जो मानव शरीर पर लागू होता है। |
| Motion (गति) | रैखिक, कोणीय और मिश्रित गति, तथा वे तल और अक्ष जिनमें ये होती हैं। |
| Force (बल) | बल क्या है, बल आपस में कैसे जुड़ते हैं, और उन्हें घटकों में कैसे बाँटा जाता है। |
| Friction (घर्षण) | स्थैतिक तथा गतिज घर्षण, और इलाज तथा चाल में उसका महत्व। |
| Gravity (गुरुत्व) | गुरुत्व केंद्र, गुरुत्व रेखा और आधार क्षेत्र। |
| Equilibrium (संतुलन) | स्थायी, अस्थायी और उदासीन संतुलन, और कोई मुद्रा स्थिर क्यों रहती है। |
| Levers (उत्तोलक) | उत्तोलक के तीन वर्ग और शरीर में उनके उदाहरण। |
| Pulleys (घिरनी) | स्थिर तथा चल घिरनी, और सस्पेंशन व ट्रैक्शन में उनका उपयोग। |
| Elasticity (प्रत्यास्थता) | प्रतिबल, विकृति और शरीर के ऊतकों का प्रत्यास्थ व्यवहार। |
| Springs (स्प्रिंग) | स्प्रिंग बल को कैसे संचित और मुक्त करती है, और व्यायाम उपकरणों में उसका उपयोग। |
| Muscular system (पेशी तंत्र) | मांसपेशियों का पूरा तंत्र - आगे के टॉपिक इसी शीर्षक के नीचे आते हैं। |
| Definition (परिभाषा) | मांसपेशी की परिभाषा, उन्हीं शब्दों में जो सिलेबस इस्तेमाल करता है। |
| properties of muscle (पेशी के गुण) | उत्तेजनशीलता, संकुचनशीलता, विस्तारशीलता और प्रत्यास्थता। |
| muscular contraction (पेशी संकुचन) | आइसोमेट्रिक, आइसोटॉनिक (कॉन्सेंट्रिक तथा एक्सेंट्रिक) और आइसोकाइनेटिक संकुचन। |
| structural classification (संरचनात्मक वर्गीकरण) | तंतुओं की बनावट के आधार पर मांसपेशियों का वर्ग - समांतर, पिच्छाकार आदि। |
| action of muscle in moving bone (हड्डी हिलाने में पेशी की क्रिया) | सिकुड़ती हुई मांसपेशी उस हड्डी को कैसे हिलाती है जिससे वह जुड़ी है। |
| direction of pull (खिंचाव की दिशा) | वह रेखा जिसके साथ मांसपेशी अपने जुड़ाव को खींचती है। |
| angle of pull (खिंचाव का कोण) | मांसपेशी और हड्डी के बीच का कोण, और उससे उपयोगी बल कैसे बदलता है। |
| functional classification (कार्यात्मक वर्गीकरण) | काम के आधार पर वर्ग - अभिकर्ता, प्रतिकर्ता, सहकर्ता और स्थिरक। |
| coordination of muscular system (पेशी तंत्र का समन्वय) | कई मांसपेशियाँ मिलकर एक सहज गति कैसे बनाती हैं। |
| Joint structures and functions (जोड़ों की संरचना और कार्य) | जोड़ों के प्रकार, हर जोड़ का परास, और उसकी गति को क्या सीमित करता है। |
| Posture (मुद्रा) | सामान्य तथा दोषपूर्ण मुद्रा, मुद्रा का नियंत्रण और आम विचलन। |
| Gait (चाल) | सामान्य चलने का चक्र, उसके चरण, और आम असामान्य चाल। |
| Bio-Physics (जैव भौतिकी) | दाब, ऊष्मा, ध्वनि, प्रकाश और विद्युत - चिकित्सा के पीछे के भौतिक सिद्धांत। |
Medical Microbiology (चिकित्सा सूक्ष्म जीव विज्ञान): सूक्ष्मजीव, संक्रमण नियंत्रण और इमेजिंग ↑
इस खंड का ज़्यादातर हिस्सा वही है जो इसका नाम कहता है। जो चीज़ उम्मीदवार छोड़ देते हैं वह अंत में है: Diagnostic Imaging for Physiotherapist और Clinical Education, microbiology वाले पैराग्राफ़ के भीतर छपे हैं, अपने अलग खंड के रूप में नहीं। ये सिलेबस में हैं, और सिर्फ़ अपनी जगह की वजह से छूट जाते हैं।
Sterilization & disinfection तथा Handling of infected material - ये दो प्रविष्टियाँ विभाग की रोज़मर्रा की व्यवहारिक बातें हैं, सिद्धांत नहीं।
| टॉपिक, जैसा सिलेबस में छपा है | इसमें क्या पढ़ना है |
|---|---|
| Introduction & History of Microbiology (सूक्ष्म जीव विज्ञान का परिचय तथा इतिहास) | यह विषय क्या पढ़ता है और किन खोजों ने इसे बनाया। |
| Classification of microorganism (सूक्ष्मजीवों का वर्गीकरण) | जीवाणु, विषाणु, कवक तथा प्रोटोज़ोआ और उनका वर्गीकरण। |
| Bacteriology (जीवाणु विज्ञान) | जीवाणु की बनावट, अभिरंजन, संवर्धन और पहचान। |
| Bacterial growth/Reproduction (जीवाणु वृद्धि तथा प्रजनन) | वृद्धि वक्र, द्विविभाजन, और जीवाणुओं को चाहिए वाली परिस्थितियाँ। |
| Sterilization & disinfection (निर्जर्मीकरण और विसंक्रमण) | जीवाणु मारने की भौतिक तथा रासायनिक विधियाँ, और उपकरण सुरक्षित रखना। |
| Modes of transmission of diseases (रोग फैलने के तरीक़े) | संपर्क, बूँद, वायु, वाहक और फैलने के अन्य मार्ग। |
| Bacterial diseases (in brief) (जीवाणु जनित रोग (संक्षेप में)) | आम जीवाणु संक्रमण - सिलेबस इसे संक्षेप में रखता है। |
| Viral diseases (in brief) (विषाणु जनित रोग (संक्षेप में)) | आम विषाणु संक्रमण - रूपरेखा के तौर पर। |
| Fungal diseases and opportunistic infections (in brief) (कवक रोग तथा अवसरवादी संक्रमण (संक्षेप में)) | कवक संक्रमण, और वे संक्रमण जो रोग-प्रतिरोध कमज़ोर होने पर पकड़ लेते हैं। |
| Immunity (प्रतिरक्षा) | जन्मजात तथा अर्जित प्रतिरक्षा, प्रतिजन, प्रतिरक्षी और टीकाकरण। |
| AIDS - Aetiology, modes of transmission, diagnostic procedure (AIDS - कारण, फैलने के तरीक़े, जाँच प्रक्रिया) | कारण क्या है, कैसे फैलता है और जाँच कैसे होती है - सिलेबस यही तीन हिस्से गिनाता है। |
| Handling of infected material (संक्रमित सामग्री का रख-रखाव) | अस्पताल में संक्रमित सामग्री को सुरक्षित छूना और नष्ट करना। |
| Diagnostic Imaging for Physiotherapist (फ़िज़ियोथेरेपिस्ट के लिए नैदानिक इमेजिंग) | X-ray, CT, MRI और अल्ट्रासाउंड को उतना समझना जितना फ़िज़ियोथेरेपिस्ट को चाहिए। |
| Clinical Education etc. (नैदानिक शिक्षा आदि) | क्लिनिक में सीखना - निगरानी में अभ्यास, केस सँभालना और दस्तावेज़ीकरण। |
Exercise Therapy (व्यायाम चिकित्सा): पेपर का व्यवहारिक केंद्र ↑
Exercise Therapy और Electro Therapy - ये दो खंड बताते हैं कि नौकरी असल में है क्या। यह खंड सिद्धांत से व्यवहार तक जाता है: यांत्रिक सिद्धांत, फिर गति और प्रारंभिक स्थितियाँ, फिर मापन की तीन प्रविष्टियाँ - जोड़ की गति-सीमा, अंग की लंबाई तथा घेरा, और हस्त पेशी परीक्षण।
यह वहीं ख़त्म होता है जहाँ काम करता विभाग ख़त्म होता है: चलने के सहारे, और कोमल ऊतक चिकित्सा, जिसे दस्तावेज़ ख़ुद मालिश कहकर समझाता है।
| टॉपिक, जैसा सिलेबस में छपा है | इसमें क्या पढ़ना है |
|---|---|
| Introduction to exercise therapy (व्यायाम चिकित्सा का परिचय) | व्यायाम चिकित्सा क्या है, उसके उद्देश्य, और इलाज में उसकी जगह। |
| Mechanical principle applied in human body (मानव शरीर पर लागू यांत्रिक सिद्धांत) | उत्तोलक, बल और संतुलन - रोगी पर इनका उपयोग। |
| Disability models (दिव्यांगता के मॉडल) | दुर्बलता, गतिविधि की सीमा और भागीदारी को समझाने वाले ढाँचे। |
| Movements (गतियाँ) | गति का वर्गीकरण और उसे बताने वाले शब्द। |
| Passive & active movements (निष्क्रिय तथा सक्रिय गति) | जो गति रोगी के लिए की जाती है और जो रोगी ख़ुद करता है - कब कौन-सी चुनी जाए। |
| Starting positions (प्रारंभिक स्थितियाँ) | इलाज जिन मूल तथा व्युत्पन्न स्थितियों से शुरू होता है। |
| Relaxation (विश्रांति) | सामान्य तथा स्थानीय विश्राम की तकनीकें, और उनका उपयोग कब होता है। |
| Suspension (सस्पेंशन) | अक्षीय तथा लोलक सस्पेंशन, और स्लिंग व रस्सी की व्यवस्था। |
| Balance (संतुलन) | स्थैतिक तथा गतिशील संतुलन - उसका अभ्यास और परीक्षण। |
| Neuromuscular coordination (तंत्रिका-पेशी समन्वय) | समन्वय का अभ्यास और उसे लौटाने वाले व्यायाम। |
| Joint range measurement (जोड़ की गति-सीमा का मापन) | गोनियोमीटर से यह नापना कि जोड़ सचमुच कितना घूमता है। |
| Measurement of limb length, girth (अंग की लंबाई तथा घेरे का मापन) | अंग की वास्तविक और आभासी लंबाई, तथा उसका घेरा नापना। |
| Manual muscle testing (हस्त पेशी परीक्षण) | हाथ से मांसपेशी की ताक़त को मानक श्रेणी पर आँकना। |
| Mobility aids (चलने के सहारे) | छड़ी, बैसाखी, वॉकर और व्हीलचेयर - चुनना और उनका उपयोग सिखाना। |
| Soft tissue manipulation (massage) (कोमल ऊतक चिकित्सा (मालिश)) | मालिश के प्रकार, उनका असर, और कब मालिश नहीं करनी चाहिए। |
Electro Therapy (विद्युत चिकित्सा): धारा, विकिरण, सुरक्षा और विद्युत निदान ↑
इस खंड का आधा हिस्सा चिकित्सा से पहले भौतिकी है - धारा, चुंबकत्व, प्रेरण, विकिरण और उसके नियम। चिकित्सा वाली प्रविष्टियाँ उसके बाद आती हैं, और नाम लेकर सिर्फ़ दो विधियाँ आती हैं: low frequency currents और interferential therapy।
दो प्रविष्टियाँ अलग से दोहराने लायक़ हैं, क्योंकि मौखिक या व्यावहारिक परीक्षा सबसे पहले इन्हीं पर जाती है: Safety issues while using electrical equipments, और Electro diagnostic test।
| टॉपिक, जैसा सिलेबस में छपा है | इसमें क्या पढ़ना है |
|---|---|
| Basic components of electric current (विद्युत धारा के मूल घटक) | आवेश, धारा, वोल्टेज और प्रतिरोध - शुरुआती शब्दावली। |
| Current electricity (धारा विद्युत) | दिष्ट तथा प्रत्यावर्ती धारा, परिपथ और ओम का नियम। |
| Magnetism (चुंबकत्व) | चुंबकीय क्षेत्र और उसका मूल व्यवहार। |
| theories of magnetism (चुंबकत्व के सिद्धांत) | चुंबकत्व कैसे पैदा होता है, इसकी व्याख्याएँ। |
| properties of magnet (चुंबक के गुण) | ध्रुव, आकर्षण तथा प्रतिकर्षण, और चुंबक बनना व चुंबकत्व खोना। |
| Electromagnetic induction (विद्युत चुंबकीय प्रेरण) | बदलता हुआ चुंबकीय क्षेत्र धारा कैसे पैदा करता है। |
| electromagnetic radiation (विद्युत चुंबकीय विकिरण) | अवरक्त से पराबैंगनी तक का स्पेक्ट्रम, और उस पर आधारित चिकित्सा। |
| laws governing radiations (विकिरण के नियम) | व्युत्क्रम वर्ग नियम, कोज्या नियम और अवशोषण के नियम। |
| Electrical components (विद्युत घटक) | प्रतिरोधक, संधारित्र, ट्रांसफ़ॉर्मर और दिष्टकारी - चिकित्सा मशीनों के पुर्ज़े। |
| Types of electric current (विद्युत धारा के प्रकार) | इलाज में काम आने वाली दिष्ट, प्रत्यावर्ती, फैराडिक, गैल्वेनिक और स्पंदित धाराएँ। |
| wave forms (तरंग रूप) | स्पंद की आकृति - वर्गाकार, त्रिकोणीय, ज्यावक्रीय - और आकृति का महत्व। |
| current modulation (धारा का मॉड्युलेशन) | आयाम, आवृत्ति और अवधि को उपचारित ऊतक के अनुसार बदलना। |
| Safety issues while using electrical equipments (विद्युत उपकरण के उपयोग में सुरक्षा) | उपकरण की जाँच, अर्थिंग, वर्जनाएँ, और जलने तथा झटके से बचाव। |
| Muscle and nerve response to electrical stimulation (विद्युत उद्दीपन पर पेशी तथा तंत्रिका की प्रतिक्रिया) | स्वस्थ और तंत्रिका-रहित मांसपेशी उद्दीपन का जवाब अलग-अलग कैसे देती है। |
| Pain (दर्द) | दर्द के मार्ग, गेट कंट्रोल सिद्धांत, और विद्युत चिकित्सा से दर्द में राहत। |
| Low frequency currents (निम्न आवृत्ति धाराएँ) | फैराडिक तथा गैल्वेनिक उद्दीपन और उनके चिकित्सकीय उपयोग। |
| Electro diagnostic test (विद्युत नैदानिक परीक्षण) | स्ट्रेंथ-ड्यूरेशन वक्र, क्रोनैक्सी, रियोबेस और अपह्रास की प्रतिक्रिया। |
| Interferential therapy (IFT) (इंटरफ़रेंशियल थेरेपी (IFT)) | दो मध्यम आवृत्ति धाराएँ काटकर ऊतक की गहराई में निम्न आवृत्ति का असर देना। |
Ethics in Physiotherapy (फ़िज़ियोथेरेपी में नैतिकता): सहमति, आचरण, गोपनीयता और क़ानून ↑
सरकारी पद के साथ लिखित कर्तव्य आते हैं, और यह खंड उन्हीं की परीक्षा लेता है। यह स्वास्थ्य नैतिकता के चार शास्त्रीय सिद्धांतों से चलकर व्यवहारिक सिरे तक जाता है - सूचित सहमति, गोपनीयता, कदाचार और उपेक्षा, विज्ञापन पर सीमाएँ, और अभ्यास के विधिक पहलू।
यहाँ की एक प्रविष्टि मूल दस्तावेज़ में एक फ़ालतू अल्पविराम के साथ छपी है: Provision of services and, advertising। नीचे उसे ठीक वैसे ही रखा गया है जैसे छपा है।
| टॉपिक, जैसा सिलेबस में छपा है | इसमें क्या पढ़ना है |
|---|---|
| History of physiotherapy (फ़िज़ियोथेरेपी का इतिहास) | यह पेशा कैसे बना और नियमबद्ध क्षेत्र कैसे बना। |
| Ethical principles in health care (स्वास्थ्य सेवा के नैतिक सिद्धांत) | स्वायत्तता, हितकारिता, अहित न करना और न्याय। |
| Ethical principles related to physiotherapy (फ़िज़ियोथेरेपी से जुड़े नैतिक सिद्धांत) | वही सिद्धांत इलाज की मेज़ पर कैसे लागू होते हैं। |
| Scope of practice (अभ्यास का दायरा) | फ़िज़ियोथेरेपिस्ट क्या कर सकता है और क्या उसके दायरे से बाहर है। |
| Enforcing standards in health profession-promoting quality care (स्वास्थ्य पेशे में मानक लागू करना तथा गुणवत्ता को बढ़ावा) | मानक कैसे तय और लागू होते हैं ताकि सेवा की गुणवत्ता बनी रहे। |
| Professional ethics in research, education and patient care delivery (अनुसंधान, शिक्षा तथा रोगी सेवा में व्यावसायिक नैतिकता) | तीन जगहों की नैतिकता - शोध, कक्षा और क्लिनिक। |
| Informed consent issues (सूचित सहमति के प्रश्न) | इलाज समझाना, और रोगी की सहमति दर्ज करना। |
| Medical ethics and Economics in clinical decision-making (नैदानिक निर्णय में चिकित्सा नैतिकता तथा अर्थशास्त्र) | इलाज चुनते समय ख़र्च और कर्तव्य का आमना-सामना। |
| Rules of professional conduct (व्यावसायिक आचरण के नियम) | वे लिखित नियम जिनसे चिकित्सक बँधा होता है। |
| Confidentiality and Responsibility (गोपनीयता और उत्तरदायित्व) | रोगी की जानकारी गुप्त रखना, और अपने काम का उत्तरदायित्व लेना। |
| Malpractice and negligence (कदाचार और उपेक्षा) | उपेक्षा किसे कहते हैं, और उसका परिणाम क्या होता है। |
| Provision of services and, advertising (सेवाओं की उपलब्धता और विज्ञापन) | सेवा देना, और उसके विज्ञापन पर लगी सीमाएँ। |
| Legal aspects (विधिक पहलू) | अभ्यास से जुड़े क़ानूनी कर्तव्य और दायित्व। |
| Professionalism and Values (व्यावसायिकता और मूल्य) | आचरण, पहनावा, संवाद, और पेशे से अपेक्षित मूल्य। |
Orthopaedics (अस्थि रोग विज्ञान): हड्डी और जोड़ के रोग, पूरे ↑
अस्थि रोग की इस जोड़ी का यह चिकित्सा वाला आधा हिस्सा है। इसमें पहले स्थितियाँ गिनाई गई हैं - चोट, संक्रमण, विकृति, अर्बुद, चयापचय रोग - और फिर हस्तक्षेप: ऑपरेशन, स्प्लिंट तथा उपकरण, ट्रैक्शन, अंगच्छेदन और पुनर्वास।
दो प्रविष्टियों में गहराई का निर्देश कोष्ठक के भीतर ही दिया है। Inflammation of bones & joints को उसके लक्षण, आकलन तथा अशल्य और शल्य दोनों प्रबंधन के साथ पढ़ना है; Congenital malformations सिर्फ़ संक्षिप्त वर्णन और इलाज की रूपरेखा तक सीमित है। कोष्ठक के ये दोनों निर्देश आयोग के अपने शब्द हैं।
| टॉपिक, जैसा सिलेबस में छपा है | इसमें क्या पढ़ना है |
|---|---|
| Introduction to Orthopaedics (अस्थि रोग विज्ञान का परिचय) | यह विशेषज्ञता क्या पढ़ती है, और उसकी शब्दावली। |
| Injuries of muscle & tendons (पेशी तथा कंडरा की चोटें) | खिंचाव, फटना और कंडरा की चोट - और हर एक का प्रबंधन। |
| Bony & Soft tissue injuries (अस्थि तथा कोमल ऊतक की चोटें) | हड्डी की और उसके आसपास के ऊतकों की चोटें। |
| Fractures (अस्थि भंग) | फ्रैक्चर के प्रकार, उसका वर्णन कैसे होता है, और उसका इलाज। |
| Inflammation of bones & joints (Clinical features, evaluation, conservative & surgical management) (हड्डी तथा जोड़ की सूजन (लक्षण, आकलन, अशल्य तथा शल्य प्रबंधन)) | हड्डी और जोड़ की सूजन - लक्षण, जाँच, और बिना ऑपरेशन तथा ऑपरेशन दोनों तरह का इलाज, ठीक जैसा सिलेबस लिखता है। |
| Nutritional & metabolic diseases of bones (हड्डियों के पोषण तथा चयापचय रोग) | रिकेट्स, ऑस्टियोमलेशिया, अस्थि सुषिरता और उनसे जुड़े रोग। |
| Spine deformities (रीढ़ की विकृतियाँ) | स्कोलियोसिस, काइफ़ोसिस और लॉर्डोसिस, और उनका आकलन। |
| Infections of Musculoskeletal system (अस्थि-पेशी तंत्र के संक्रमण) | अस्थि मज्जा शोथ, पूयजनक संधिशोथ, और हड्डी तथा जोड़ का तपेदिक। |
| Congenital malformations (in brief description with outline of treatment) (जन्मजात विकृतियाँ (संक्षिप्त वर्णन तथा इलाज की रूपरेखा)) | जन्म से मौजूद विकृतियाँ - सिलेबस ख़ुद कहता है कि संक्षेप में और इलाज की रूपरेखा भर। |
| Developmental diseases of skeleton (कंकाल के विकासजन्य रोग) | कंकाल के वे रोग जो उसकी वृद्धि के दौरान पैदा होते हैं। |
| Neuromuscular diseases (तंत्रिका-पेशी रोग) | वे रोग जिनमें तंत्रिका और पेशी की गड़बड़ी मिलकर कमज़ोरी तथा विकृति लाती है। |
| Upper & lower Limbs (ऊपरी तथा निचले अंग) | बाँह और टाँग के अपने-अपने अस्थि रोग। |
| Neuro-vascular Diseases (तंत्रिका-वाहिका रोग) | वे रोग जिनमें तंत्रिका और रक्त आपूर्ति दोनों प्रभावित होती हैं। |
| Amputations (अंगच्छेदन) | अंगच्छेदन के स्तर, स्टंप की देखभाल, और कृत्रिम अंग की तैयारी। |
| Bones tumors (अस्थि अर्बुद) | सौम्य तथा घातक अस्थि ट्यूमर, और उनके लक्षण। |
| Operations (ऑपरेशन) | आम अस्थि शल्य क्रियाएँ, और हर एक का उद्देश्य। |
| Orthopaedic splints and appliances (अस्थि रोग के स्प्लिंट तथा उपकरण) | स्प्लिंट, ब्रेस और ऑर्थोसिस - कौन किस काम का और कब लगाया जाता है। |
| Tractions : Skeleton (in brief) (ट्रैक्शन: स्केलेटन (संक्षेप में)) | अस्थीय ट्रैक्शन - सिलेबस इसे संक्षेप में रखता है। |
| Foot arches & their complications (पैर के मेहराब तथा उनकी जटिलताएँ) | पैर के आर्च, और उनके बिगड़ने पर आने वाली समस्याएँ जैसे चपटा पैर और दर्द। |
| Rehabilitation of patients (रोगियों का पुनर्वास) | रोगी को कार्यक्षमता, काम-काज और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में वापस लाना। |
Physiotherapy in Orthopaedic (अस्थि रोगों में फ़िज़ियोथेरेपी): एक-एक फ्रैक्चर ↑
यह खंड चिकित्सा वाला आधा हिस्सा है, और पूरे पेपर में सबसे विशिष्ट खंड यही है। यह सिर्फ़ ऊपरी अंग के फ्रैक्चर नहीं कहता - यह clavicle, humerus, ulna, radius और हाथ की कुचल चोटों का नाम लेता है, और फिर निचले अंग तथा रीढ़ के हर फ्रैक्चर का नाम बारी-बारी लेता है।
इसी विशिष्टता की वजह से इसे सारांश में नहीं, पूरा यहाँ रखा गया है। Traumatology के नीचे सिलेबस चार हस्त-चिकित्सा विधियों के नाम भी लेता है - Kaltenbom, Maitland, Mulligan और Mckenzie - और कहता है कि फ़िज़ियोथेरेपी के साधन तथा तकनीक इन्हें सहित सिखाए जाने चाहिए।
| टॉपिक, जैसा सिलेबस में छपा है | इसमें क्या पढ़ना है |
|---|---|
| Traumatology (ट्रॉमेटोलॉजी) | हर स्थिति की संक्षिप्त समीक्षा, प्रबंधन के उद्देश्य, फ़िज़ियोथेरेपी हस्तक्षेप, और सिखाई जाने वाली विधियाँ - सिलेबस इनमें Kaltenbom, Maitland, Mulligan तथा Mckenzie के नाम गिनाता है। |
| Bone Tissue - Fracture and dislocations: Classification and types of displacement (अस्थि ऊतक - फ्रैक्चर तथा अव्यवस्था: वर्गीकरण और विस्थापन के प्रकार) | फ्रैक्चर और जोड़ उतरने का वर्गीकरण, और टूटे सिरे किस-किस तरह खिसक सकते हैं। |
| method of immobilization (स्थिरीकरण की विधि) | प्लास्टर, स्प्लिंट, ट्रैक्शन और फ़िक्सेशन - जुड़ने तक फ्रैक्चर को थामने के तरीक़े। |
| healing of Fractures and factors affecting union, non union, delayed Union etc. (फ्रैक्चर का भरना तथा जुड़ाव, न जुड़ना और देर से जुड़ने को प्रभावित करने वाले कारक) | हड्डी कैसे जुड़ती है, और जुड़ाव पूरी तरह क्यों नहीं होता या देर से क्यों होता है। |
| Upper limb: Clavicle (ऊपरी अंग: क्लैविकल) | हँसली की हड्डी का फ्रैक्चर, और उसके बाद का फ़िज़ियोथेरेपी प्रबंधन। |
| humerus (ह्यूमरस) | बाँह की हड्डी का फ्रैक्चर और उसका फ़िज़ियोथेरेपी प्रबंधन। |
| ulna (अल्ना) | अग्रबाहु की अल्ना हड्डी का फ्रैक्चर और उसका प्रबंधन। |
| radius (रेडियस) | रेडियस का फ्रैक्चर, कलाई वाले सिरे का आम फ्रैक्चर सहित। |
| crush injuries of hand (हाथ की कुचल चोटें) | हाथ की कुचली हुई चोट, और उसके लिए ज़रूरी पुनर्वास। |
| Lower Limb: fracture neck of femur (निचला अंग: फ़ीमर की गर्दन का फ्रैक्चर) | जाँघ की हड्डी के कूल्हे वाले सिरे का फ्रैक्चर, और उसका प्रबंधन। |
| shaft of femur (फ़ीमर का शाफ़्ट) | जाँघ की हड्डी के बीच वाले हिस्से का फ्रैक्चर। |
| patella (पटेला) | घुटने की टोपी का फ्रैक्चर, और उसके बाद घुटने का पुनर्वास। |
| tibia fibula (टिबिया-फ़िबुला) | पिंडली की दोनों हड्डियों का फ्रैक्चर, और उसके बाद भार सहने की योजना। |
| pott's fracture (पॉट्स फ्रैक्चर) | टख़ने का वह फ्रैक्चर-अव्यवस्था जिसे पॉट्स फ्रैक्चर कहते हैं, और उसका प्रबंधन। |
| fracture of tarsal and metatarsals (टार्सल तथा मेटाटार्सल का फ्रैक्चर) | पिछले और बीच वाले पैर की हड्डियों का फ्रैक्चर, और फिर से चलना शुरू करना। |
| Spine: fracture and dislocations of cervical, thoracic and lumbar vertebrae with and without neurological deficits (रीढ़: ग्रीवा, वक्ष तथा कटि कशेरुकाओं का फ्रैक्चर और अव्यवस्था - तंत्रिका क्षति के साथ तथा बिना) | रीढ़ के हर स्तर का फ्रैक्चर और अव्यवस्था - मेरुरज्जु प्रभावित है या नहीं, इससे इलाज बदल जाता है। |
| Soft tissue injuries (कोमल ऊतक की चोटें) | चोटिल हड्डी के आसपास की मांसपेशी, स्नायुबंध और अन्य कोमल ऊतक की चोटें। |
Wounds, Burns and Plastic Surgery (घाव, जलन तथा प्लास्टिक सर्जरी): तीन नामित स्थितियाँ ↑
पेपर का सबसे छोटा खंड, और सबसे साफ़ निर्देश वाला। तीनों स्थितियों के लिए सिलेबस एक ही दो चीज़ें माँगता है: रोग-परिवर्तनों की समीक्षा, और फ़िज़ियोथेरेपी द्वारा ऑपरेशन से पहले तथा बाद के प्रबंधन का सिद्धांत।
यानी यहाँ गहराई स्थितियों की सूची में नहीं है - यह जानने में है कि ऑपरेशन के दोनों ओर फ़िज़ियोथेरेपी करती क्या है।
| टॉपिक, जैसा सिलेबस में छपा है | इसमें क्या पढ़ना है |
|---|---|
| Wounds, ulcers, pressure sores (घाव, अल्सर, दबाव से बने घाव) | इनमें होने वाले रोग-परिवर्तन, और ऑपरेशन से पहले तथा बाद की फ़िज़ियोथेरेपी। |
| Burns & their complications (जलन तथा उसकी जटिलताएँ) | जलने की गहराई और फैलाव, उसके बाद की जटिलताएँ, और फ़िज़ियोथेरेपी प्रबंधन। |
| Common reconstructive surgical proceedings of the management of wounds, ulcers, burns & consequent contractures & deformities (घाव, अल्सर, जलन तथा उनसे बनी सिकुड़न और विकृतियों के प्रबंधन की आम पुनर्निर्माण शल्य क्रियाएँ) | ग्राफ़्ट, फ़्लैप और अन्य पुनर्निर्माण शल्य क्रियाएँ, तथा वे सिकुड़न और विकृतियाँ जिन्हें वे ठीक करती हैं। |
Physiotherapy in General Medical and Surgical Conditions (सामान्य चिकित्सा तथा शल्य स्थितियों में फ़िज़ियोथेरेपी) ↑
दस्तावेज़ इस खंड को अपना एक उप-शीर्षक देता है - General, Gynecology and Obstetrics and ENT - और फिर वही निर्देश दोहराता है जो जलन वाले खंड में था: रोग-परिवर्तनों की समीक्षा, और ऑपरेशन से पहले तथा बाद के फ़िज़ियोथेरेपी प्रबंधन का सिद्धांत।
चारों क्रमांकित स्थितियाँ आम उदर शल्य क्रिया से लेकर अंग प्रत्यारोपण तक जाती हैं। प्रसव-पूर्व तथा प्रसव-पश्चात फ़िज़ियोथेरेपी का नाम दूसरी स्थिति के भीतर ही लिया गया है, उसे अपना अलग शीर्षक नहीं मिला है।
| टॉपिक, जैसा सिलेबस में छपा है | इसमें क्या पढ़ना है |
|---|---|
| Common abdominal surgeries. Including GIT, liver, spleen, Kidney, bladder etc. (आम उदर शल्य क्रियाएँ - जठरांत्र, यकृत, प्लीहा, गुर्दा, मूत्राशय आदि सहित) | आँत, यकृत, प्लीहा, गुर्दे और मूत्राशय के ऑपरेशन से पहले तथा बाद की फ़िज़ियोथेरेपी। |
| Common operation of reproductive system, including surgical intervention for child delivery. Ante natal &post natal, physiotherapy. (प्रजनन तंत्र की आम शल्य क्रियाएँ - प्रसव की शल्य क्रिया सहित; प्रसव-पूर्व तथा प्रसव-पश्चात फ़िज़ियोथेरेपी) | प्रजनन अंगों के ऑपरेशन, शल्य प्रसव सहित, और जन्म से पहले तथा बाद की फ़िज़ियोथेरेपी। |
| Common operations of the ear, nose, throat & Jaw as related to physiotherapy (कान, नाक, गला तथा जबड़े की आम शल्य क्रियाएँ - फ़िज़ियोथेरेपी से जुड़ी) | कान, नाक, गले और जबड़े के ऑपरेशन, और उनसे जुड़ी फ़िज़ियोथेरेपी। |
| Common organ transplant surgeries - heart, liver, bone marrow etc. (आम अंग प्रत्यारोपण शल्य क्रियाएँ - हृदय, यकृत, अस्थि मज्जा आदि) | हृदय, यकृत और अस्थि मज्जा के प्रत्यारोपण के आसपास की फ़िज़ियोथेरेपी। |
Physiotherapy in Neurological Conditions (तंत्रिका रोगों में फ़िज़ियोथेरेपी): पेपर का सबसे लंबा खंड ↑
इस खंड में किसी भी और खंड से ज़्यादा नामित प्रविष्टियाँ हैं, और यह तीन हिस्सों में बना है: नैदानिक तंत्रिका शरीर रचना तथा क्रिया की समीक्षा, फिर आकलन और उपचार के सिद्धांत, फिर परिधीय तंत्रिका क्षति।
ब्योरा उपचार वाले हिस्से में है। वह सुगमीकरण तथा अवरोधन की तकनीकें एक-एक करके गिनाता है - खिंचाव, हल्का जोड़ संपीड़न, नियंत्रित संवेदी उद्दीपन, PNF पैटर्न, संतुलन तथा लैबिरिंथ तंत्र का उपयोग - और फिर कार्यात्मक सिरा: चाल का प्रशिक्षण, दैनिक जीवन की क्रियाएँ, मैट व्यायाम, और मनोरंजन के लिए व्यायाम।
इस हिस्से की एक पंक्ति use of rifle, activity to improve motor function के रूप में छपी है। नीचे उसे ठीक वैसा ही रखा गया है जैसा आधिकारिक PDF में है। कुछ भी सुधारा या अनुमान से नहीं भरा गया, क्योंकि सिलेबस आयोग का दस्तावेज़ है, हमारा नहीं।
| टॉपिक, जैसा सिलेबस में छपा है | इसमें क्या पढ़ना है |
|---|---|
| Review of Clinical Neuroanatomy & Neurophysiology: structure and function of neuron (नैदानिक तंत्रिका शरीर रचना तथा क्रिया की समीक्षा: न्यूरॉन की संरचना और कार्य) | तंत्रिका कोशिका के अंग, और वह संकेत कैसे ले जाती है। |
| structure and function of synapse (सिनैप्स की संरचना और कार्य) | दो तंत्रिका कोशिकाओं के बीच की संधि, और वहाँ संकेत कैसे पार होता है। |
| structure and function of supporting tissue (सहायक ऊतक की संरचना और कार्य) | ग्लियल कोशिकाएँ और वे आवरण जो तंत्रिका ऊतक को सहारा तथा सुरक्षा देते हैं। |
| Principles of Assessment (आकलन के सिद्धांत) | तंत्रिका रोगी की जाँच - टोन, ताक़त, संवेदना, प्रतिवर्त, संतुलन और कार्यक्षमता। |
| Sensory re-education: hyposensitivity, hyper-sensitivity and anesthesia (संवेदी पुनर्शिक्षा: अल्प-संवेदना, अति-संवेदना तथा संवेदनहीनता) | जहाँ संवेदना कम है, ज़्यादा है, या बिलकुल नहीं है - वहाँ उसे फिर से सिखाना। |
| Treatment of altered tone: hyper tonicity and hypo tonicity (बदली हुई टोन का इलाज: अति-टोन तथा अल्प-टोन) | जब पेशी की टोन ज़्यादा या कम हो, तब का इलाज। |
| Motor re-education: Strengthening exercise (प्रेरक पुनर्शिक्षा: शक्तिवर्धक व्यायाम) | तंत्रिका क्षति के बाद मांसपेशी की ताक़त दोबारा बनाना। |
| coordination exercise (समन्वय व्यायाम) | वे व्यायाम जो गति को फिर से सहज और सटीक बनाते हैं। |
| joint mobilization exercise (जोड़ की गतिशीलता का व्यायाम) | तंत्रिका रोगी में जोड़ की गति बनाए रखना और लौटाना। |
| use of equilibrium and labyrinthine systems (संतुलन तथा लैबिरिंथ तंत्र का उपयोग) | संतुलन और भीतरी कान के प्रतिवर्तों से गति जगाना और उसे स्थिर करना। |
| use of PNF patterns (PNF पैटर्न का उपयोग) | प्रोप्रियोसेप्टिव न्यूरोमस्कुलर फ़ैसिलिटेशन - वे तिरछे गति-पैटर्न जिनसे गति सुगम होती है। |
| controlled sensory stimulation to bias the spindle cell e.g. Vibration, tactile, ice etc (स्पिंडल कोशिका को पक्ष देने हेतु नियंत्रित संवेदी उद्दीपन - जैसे कंपन, स्पर्श, बर्फ़) | कंपन, स्पर्श और बर्फ़ से पेशी-स्पिंडल को तैयार करना। |
| use of stretch to elicit movement (facilitation) (गति जगाने के लिए खिंचाव का उपयोग (सुगमीकरण)) | झटपट खिंचाव देकर संकुचन निकालना। |
| light joint compression (inhibition) (हल्का जोड़ संपीड़न (अवरोधन)) | जोड़ पर हल्का दबाव देकर टोन घटाना। |
| use of rifle, activity to improve motor function (जैसा आधिकारिक PDF में छपा है) | आधिकारिक PDF में ठीक ऐसे ही छपा है; आयोग के शब्द यहाँ बदले नहीं गए हैं। इसे आसपास के सुगमीकरण तथा प्रेरक-कार्य वाले टॉपिक के साथ पढ़ें। |
| phylogenic sequence of motor behavior (प्रेरक व्यवहार का जातिवृत्तीय क्रम) | लुढ़कना, बैठना, रेंगना, खड़ा होना - विकास का वह क्रम जिससे इलाज सजाया जाता है। |
| Treatment to improve function: Free exercise (कार्यक्षमता सुधारने का इलाज: मुक्त व्यायाम) | बिना उपकरण का सक्रिय व्यायाम, रोज़मर्रा की कार्यक्षमता के लिए। |
| gait training with and without aids (सहारे के साथ तथा बिना चाल का प्रशिक्षण) | चलना सिखाना - पहले सहारे से, फिर बिना सहारे। |
| activities of daily living (दैनिक जीवन की क्रियाएँ) | कपड़े पहनना, खाना, नहाना और उठना-बैठना - दिन असल में जिन कामों से बनता है। |
| mat exercise (मैट व्यायाम) | ज़मीन पर काम - लुढ़कना, उठकर बैठना, घुटनों पर आना और मैट पर संतुलन। |
| exercise for recreation (मनोरंजन के लिए व्यायाम) | खेल और मनोरंजन की गतिविधियों को इलाज की तरह इस्तेमाल करना। |
| Review the use of ambulatory aids in neurological conditions (तंत्रिका रोगों में चलने के सहारों के उपयोग की समीक्षा) | तंत्रिका रोगी के लिए चलने का सहारा चुनना, और उसका उपयोग सिखाना। |
| Peripheral Nerve Lesions - muscle re-education: electrical stimulation (selection of current) (परिधीय तंत्रिका क्षति - पेशी पुनर्शिक्षा: विद्युत उद्दीपन (धारा का चयन)) | तंत्रिका चोट के बाद पेशी को फिर से सिखाना, और उसके लिए सही धारा चुनना। |
| active, assisted, resisted movements (सक्रिय, सहायता-प्राप्त तथा प्रतिरोधित गतियाँ) | ताक़त लौटने के साथ गति का क्रमिक बढ़ाव। |
| Passive mode of all sensitive stretching and massage (सभी संवेदनशील खिंचाव तथा मालिश का निष्क्रिय रूप) | जहाँ रोगी अंग हिला नहीं सकता, वहाँ निष्क्रिय खिंचाव और मालिश। |
| sensory re-education and pain relief by various modalities (विविध विधियों से संवेदी पुनर्शिक्षा तथा दर्द से राहत) | उपलब्ध विधियों से संवेदना फिर सिखाना और दर्द घटाना। |
| common splints used peripheral nerve lesions. Static, dynamic and functional (परिधीय तंत्रिका क्षति में इस्तेमाल आम स्प्लिंट - स्थैतिक, गतिशील तथा कार्यात्मक) | तंत्रिका चोट के बाद इस्तेमाल होने वाले तीन तरह के स्प्लिंट, और हर एक का काम। |
| Isolating muscle contraction, specific muscle strengthening (पेशी संकुचन को अलग करना, विशिष्ट पेशी को मज़बूत करना) | एक-एक मांसपेशी पर अलग से काम करके उसे वापस लाना। |
| Post- Operative management: Pressure bandaging reeducation after transfer (ऑपरेशन के बाद प्रबंधन: प्रेशर बैंडेजिंग, ट्रांसफ़र के बाद पुनर्शिक्षा) | तंत्रिका या कंडरा ट्रांसफ़र सर्जरी के बाद की फ़िज़ियोथेरेपी, प्रेशर बैंडेजिंग सहित। |
| Describe a home programme (गृह कार्यक्रम बताना) | वे व्यायाम और सावधानियाँ जो रोगी घर पर जारी रखता है। |
यह सिलेबस क्या नहीं बताता — और वह कहाँ मिलेगा ↑
सिलेबस दायरा तय करता है। वह उम्मीदवार के हर सवाल का जवाब नहीं देता, और ईमानदारी इसी में है कि उन ख़ाली जगहों को आत्मविश्वास भरे अंदाज़े से भरने के बजाय उनका नाम ले लिया जाए।
नीचे लिखी हर बात के लिए आयोग की अपनी वेबसाइट और इस पद का विज्ञापन ही एकमात्र भरोसेमंद स्रोत हैं।
- प्रश्नों की संख्या। सिर्फ़ अवधि 2 Hours और अधिकतम अंक 100 दिए गए हैं। इस पेपर के लिए कहीं जो प्रश्न-संख्या बताई जा रही हो, वह इस दस्तावेज़ से नहीं आई है।
- Negative marking। दस्तावेज़ किसी भी दिशा में इसका ज़िक्र नहीं करता। जब तक विज्ञापन या प्रवेश पत्र कुछ न कहे, इसे अज्ञात ही मानिए।
- Screening test। इस सिलेबस को आयोग Two Tier (Screening Test) के अंतर्गत रखता है, पर यह वर्णन सिर्फ़ Subject Aptitude Test का करता है। screening test का अपना pattern और सिलेबस यहाँ नहीं है।
- विषय-वार या टॉपिक-वार अंक। सोलह में से किसी भी खंड पर कोई वज़न नहीं छपा है, इसलिए कोई भी तालिका ईमानदारी से यह नहीं बता सकती कि Human Anatomy कितने अंक का है।
- परीक्षा की तारीख़, रिक्तियों की संख्या, पात्रता, आयु सीमा और शुल्क। इनमें से कुछ भी सिलेबस के दस्तावेज़ में नहीं होता; ये पद के विज्ञापन की बातें हैं।
- Cut-off अंक। ये रिक्तियों और उम्मीदवारों के प्रदर्शन पर निर्भर करते हैं, और परीक्षा के बाद ही प्रकाशित होते हैं।
- पेपर का माध्यम और किताबों की सूची। दस्तावेज़ दोनों में से कुछ नहीं बताता। आयोग सिलेबस तय करता है, पाठ्यपुस्तकें नहीं — टॉपिक की सूची पढ़ने की सूची नहीं होती।
- लिंक के बारे में एक व्यावहारिक बात। आयोग अपनी फ़ाइलें तय नाम के बजाय बनने वाले token से देता है, इसलिए सहेजा या साझा किया गया फ़ाइल-लिंक काम करना बंद कर सकता है। इस पेज का डाउनलोड लिंक error दिखाए तो hppsc.hp.gov.in खोलिए और फ़ाइल तक Syllabi & Previous Year Question Papers, फिर Syllabi, फिर Two Tier (Screening Test) से पहुँचिए; प्रविष्टि का शीर्षक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, हि.प्र. के Physiotherapist पद की वस्तुनिष्ठ Subject Aptitude Test के सिलेबस के रूप में है।
महत्वपूर्ण लिंक
FAQ — आपके सवाल, सीधे जवाब
यह परीक्षा कौन-सी संस्था कराती है?
Himachal Pradesh Public Service Commission (HPPSC)
यह किस पद के लिए है?
Physiotherapist
यह भर्ती किस विभाग के लिए है?
Department of Health & Family Welfare, H.P.
विज्ञापन संख्या क्या है?
No. 3-68/2023-PSC(R-I) dated 21.07.2026
HPPSC की और अपडेट
और सिलेबस
आधिकारिक स्रोत: आधिकारिक वेबसाइट ↗. कोई भी कदम उठाने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर पुष्टि ज़रूर करें।
अस्वीकरण: SarkariReady किसी सरकारी संस्था से संबद्ध नहीं है। यह लेख आधिकारिक नोटिफिकेशन के आधार पर लिखा गया है — कोई भी कदम उठाने से पहले तिथियां, फीस और पात्रता हमेशा आधिकारिक वेबसाइट पर जांच लें। कोई गलती दिखे तो हमें बताएं, हम तुरंत सुधारेंगे।
किसी एजेंट या वेबसाइट को सरकारी नौकरी के लिए पैसे न दें — शिकायत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर करें।