KPSC KAS सिलेबस और परीक्षा पैटर्न — पूरा, आसान हिंदी में
KPSC इसे KAS नहीं, Gazetted Probationers की भर्ती कहकर निकालता है। चयन में पहले 400 अंकों की वस्तुनिष्ठ प्रारंभिक परीक्षा है जो सिर्फ़ छलनी है, फिर 1250 अंकों की वर्णनात्मक मुख्य परीक्षा, और फिर 25 अंकों का व्यक्तित्व परीक्षण — मेरिट कुल 1275 अंकों पर बनती है।
आधिकारिक सिलेबस पेज खोलेंPDF आधिकारिक साइट पर खुलेगा। नीचे उसी सिलेबस का हर टॉपिक आसान भाषा में समझाया गया है — पढ़ने के लिए PDF खोलना ज़रूरी नहीं।
आधिकारिक सिलेबस से तैयार · आधिकारिक लिंक से पुष्टि कर सकते हैं
KAS का चयन शुरू से आख़िर तक चलता कैसे है ↑
कर्नाटक लोक सेवा आयोग इस भर्ती में कहीं भी 'KAS' अक्षर इस्तेमाल नहीं करता। वह इसे Gazetted Probationers (राजपत्रित परिवीक्षाधीन अधिकारी) की भर्ती कहकर विज्ञापित करता है, और 2026-27 के विज्ञापन में 319 पद अधिसूचित हैं। उम्मीदवार और कोचिंग संस्थान इसे KAS कहते हैं; आयोग नहीं कहता — और अगर आप आधिकारिक साइट पर 'KAS' शब्द ढूँढ़ेंगे, तो वह मिलेगा ही नहीं।
चयन तीन चरणों में होता है, और उनमें से सिर्फ़ दो के अंक आख़िर तक बचते हैं। प्रारंभिक परीक्षा सिर्फ़ छलनी है — शॉर्टलिस्ट बनते ही उसके 400 अंक फेंक दिए जाते हैं। मुख्य परीक्षा और व्यक्तित्व परीक्षण मिलकर वे 1275 अंक बनाते हैं जिन पर नतीजा टिकता है।
एक चौथी बात है जिस पर लोग अक्सर फिसलते हैं: मुख्य परीक्षा के सात पेपरों में से दो सिर्फ़ अर्हक (qualifying) हैं। कन्नड़ और अंग्रेज़ी पास करना ज़रूरी है, पर उनमें मिले अंक मेरिट बनाते समय हटा दिए जाते हैं। नियम यही, इन्हीं शब्दों में कहते हैं।
| चरण | यह है क्या | अंक | क्या अंतिम मेरिट में गिना जाता है? |
|---|---|---|---|
| Preliminary Examination (प्रारंभिक परीक्षा) | दो वस्तुनिष्ठ पेपर (बहुविकल्पीय) | कुल 400 | नहीं। यह सिर्फ़ यह तय करती है कि मुख्य परीक्षा में कौन बैठेगा। |
| Main Examination — qualifying papers (अर्हक पेपर) | कन्नड़ और अंग्रेज़ी, वर्णनात्मक | प्रत्येक 150 | नहीं। नियम कहते हैं कि इन अंकों को चयन की मेरिट तय करने में नहीं गिना जाएगा। |
| Main Examination — compulsory papers (अनिवार्य पेपर) | निबंध और सामान्य अध्ययन 1 से 4, वर्णनात्मक | कुल 1250 | हाँ। |
| Personality Test (व्यक्तित्व परीक्षण) | बोर्ड के सामने साक्षात्कार | 25 | हाँ। |
| Total (कुल) | लिखित परीक्षा और व्यक्तित्व परीक्षण | 1275 | अंतिम मेरिट इसी आँकड़े पर बनती है। |
प्रारंभिक परीक्षा: दो पेपर, हर एक में 100 प्रश्न, हर प्रश्न दो अंक का ↑
दोनों प्रारंभिक पेपर एक ही ढाँचे पर बने हैं: 100 प्रश्न, हर प्रश्न दो अंक का, अधिकतम 200 अंक, समय दो घंटे। दो पेपर, कुल 400 अंक। नियम ठीक इन्हीं शब्दों में यह कहते हैं।
इस एक जैसे ढाँचे के भीतर दोनों पेपरों का भार बहुत अलग है, और नीचे की तालिका धीरे-धीरे पढ़ने लायक़ है। अकेली Humanities पेपर-1 के 60 प्रश्न है — यानी आधे से ज़्यादा पेपर, और 200 में से 120 अंक। प्रारंभिक परीक्षा में और कोई विषय इतना भारी नहीं है।
एक विषय का स्तर बाक़ी सबसे नीचे रखा गया है। आयोग साफ़ लिखता है कि General Mental Ability के प्रश्न दसवीं या SSLC स्तर के होंगे और बाक़ी पेपर स्नातक स्तर के। यही एक वाक्य बता देता है कि कहाँ ज़रूरत से ज़्यादा मेहनत नहीं करनी है।
| पेपर | विषय क्षेत्र | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|---|
| Paper-1 | General studies related to National and International importance (राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय महत्व का सामान्य अध्ययन) | 40 | 80 |
| Paper-1 | Humanities (मानविकी) | 60 | 120 |
| Paper-1 | पेपर-1 का कुल | 100 | 200 |
| Paper-2 | General studies related to State importance (राज्य महत्व का सामान्य अध्ययन) | 40 | 80 |
| Paper-2 | General Science & Technology, Environment & Ecology (सामान्य विज्ञान-प्रौद्योगिकी, पर्यावरण-पारिस्थितिकी) | 30 | 60 |
| Paper-2 | General Mental Ability (सामान्य मानसिक योग्यता) | 30 | 60 |
| Paper-2 | पेपर-2 का कुल | 100 | 200 |
ऋणात्मक अंकन, और वे दो अनुपात जो भीड़ छाँटते हैं ↑
प्रारंभिक परीक्षा में ऋणात्मक अंकन प्रश्न के अंकों का एक-चौथाई है। चूँकि प्रारंभिक परीक्षा का हर प्रश्न दो अंक का है, ग़लत उत्तर पर उस प्रश्न के निर्धारित अंकों का 0.25 भाग दंड के रूप में कटता है — और ख़ाली छोड़ने पर कुछ नहीं कटता। पेपर देने से पहले जानने लायक़ सबसे काम की बात यही असमानता है।
एक से ज़्यादा विकल्प भरने वाला नियम उम्मीदवार अक्सर भूल जाते हैं। दो विकल्प भर देना कोई बचाव नहीं है — उसे ग़लत उत्तर ही माना जाता है और वही दंड लगता है, चाहे भरे गए दोनों में से एक सही ही क्यों न हो।
दो अनुपात तय करते हैं कि हर चरण से कितने लोग आगे बढ़ेंगे। मुख्य परीक्षा की छँटनी अधिसूचित रिक्तियों की 15 गुना होती है। व्यक्तित्व परीक्षण के लिए बुलावा रिक्तियों के 1:3 अनुपात में जाता है। 319 अधिसूचित पदों के सामने यही दो अनुपात एक बहुत बड़ी भीड़ को छोटी संख्या में बदल देते हैं।
सिलेबस वाली PDF को लेकर एक चेतावनी। उसके भीतर छपा 2011 का संशोधन 15 नहीं, 20 गुना कहता है। वह आँकड़ा पुराना पड़ चुका है — मौजूदा 2026-27 की अधिसूचना 15 गुना कहती है, और लागू वही होता है। अगर आप अकेली पुरानी PDF पढ़ रहे हैं, तो आप पुराना अनुपात पढ़ रहे हैं।
| नियम | आधिकारिक दस्तावेज़ क्या कहते हैं |
|---|---|
| ग़लत उत्तर पर दंड | हर प्रश्न के चार विकल्प होते हैं। जिस प्रश्न का उत्तर ग़लत दिया गया, उस प्रश्न के निर्धारित अंकों का एक-चौथाई (0.25) दंड के रूप में काटा जाता है। |
| एक से ज़्यादा उत्तर भरने पर | इसे ग़लत उत्तर माना जाता है, चाहे भरे गए उत्तरों में से एक सही ही क्यों न हो — और वही दंड लगता है। |
| प्रश्न ख़ाली छोड़ने पर | कोई दंड नहीं। उत्तर न देने पर कुछ नहीं कटता। |
| अंतर्निहित ऋणात्मक अंकन वाले प्रश्न | कुछ प्रश्नों में ऋणात्मक अंकन भीतर ही बना होता है — सबसे उपयुक्त और कम उपयुक्त उत्तर के लिए अलग-अलग अंक दिए जाते हैं। |
| मुख्य परीक्षा के लिए छँटनी | अधिसूचित रिक्तियों का 15 गुना, प्रारंभिक परीक्षा की मेरिट के क्रम में — और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा सामान्य वर्ग के लिए वही अनुपात बनाए रखते हुए। |
| व्यक्तित्व परीक्षण के लिए छँटनी | Group-A और Group-B सेवाओं की रिक्तियों के 1:3 अनुपात में उम्मीदवार बुलाए जाते हैं, मुख्य परीक्षा के कुल अंकों की मेरिट के क्रम में। |
| प्रश्नपत्र की भाषा | कन्नड़ और अंग्रेज़ी — दोनों में तैयार किया जाता है। |
पूरा प्रारंभिक सिलेबस, सातों विषय ↑
प्रारंभिक सिलेबस इतना छोटा है कि उसे पूरा छापा जा सकता है — इसलिए यहाँ पूरा दिया गया है। पेपर-1 में चार विषय और पेपर-2 में तीन, ठीक उसी क्रमांक के साथ जो आयोग देता है। कुछ भी संक्षेप करके हटाया नहीं गया है।
विषयों के नाम जितने ध्यान से पढ़िए, उतने ही ध्यान से उनके साथ लगी शर्तें भी पढ़िए। दो जगह आयोग खुद बताता है कि वह क्या नहीं पूछ रहा: इतिहास को व्यापक और सामान्य रूप से समझना है, और विज्ञान का स्तर उस पढ़े-लिखे व्यक्ति का है जिसने किसी वैज्ञानिक विषय में विशेषज्ञता नहीं ली। ये सीमाएँ आधिकारिक पाठ में लिखी हैं, और इन्हें इस्तेमाल करने के लिए ही लिखा गया है।
| क्रम | आयोग के अपने शब्दों में विषय | तैयारी के लिहाज़ से इसका मतलब |
|---|---|---|
| (i) | Current events of National and International importance (राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएँ) | पेपर-1 का सामान्य जागरूकता वाला हिस्सा। यहाँ कोई तय किताब नहीं है — साल भर में देश और दुनिया में जो सचमुच घटा, वही पूछा जाता है। |
| (ii) | Humanities — History of India. Emphasis on broad general understanding of the subject in its social, economic, cultural and political aspects, with a focus on Indian national movement with special emphasis on Karnataka (मानविकी — भारत का इतिहास) | 60 प्रश्नों के साथ यह पेपर-1 का सबसे भारी हिस्सा है। आयोग खुद 'broad' और 'general' शब्द इस्तेमाल करता है — यानी तारीखें रटने की नहीं, दौर को समझने की माँग है। सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक — चारों पहलू, और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन पर ज़ोर, जिसमें कर्नाटक को विशेष महत्व दिया गया है। |
| (iii) | World Geography and Geography of India, with a focus on Karnataka (विश्व का भूगोल और भारत का भूगोल) | विश्व और भारत का भूगोल एक साथ, और कर्नाटक पर अलग से ज़ोर। यह कर्नाटक-झुकाव पूरे सिलेबस में बार-बार दिखता है — इसे हल्के में मत लीजिए। |
| (iv) | Indian polity and economy, including the country's political system, rural development, planning and economic reforms in India — sustainable development, poverty alleviation, demographics, social sector initiatives etc. (भारतीय राजव्यवस्था और अर्थव्यवस्था) | यहाँ राजव्यवस्था और अर्थव्यवस्था अलग-अलग नहीं, एक ही विषय हैं। इसके उप-शीर्षक — ग्रामीण विकास, नियोजन, आर्थिक सुधार, सतत विकास, ग़रीबी उन्मूलन, जनसांख्यिकी और सामाजिक क्षेत्र की योजनाएँ — संविधान के सिद्धांतों से ज़्यादा विकास की तरफ़ झुके हुए हैं। |
| क्रम | आयोग के अपने शब्दों में विषय | तैयारी के लिहाज़ से इसका मतलब |
|---|---|---|
| (i) | Current events of State importance and important State Government programmes (राज्य महत्व की सामयिक घटनाएँ और राज्य सरकार के प्रमुख कार्यक्रम) | यह पेपर-1 के पहले विषय का कर्नाटक-संस्करण है। राज्य सरकार की योजनाओं का अलग से ज़िक्र है, इसलिए उन्हें नाम सहित याद रखना काम आता है। |
| (ii) | General Science & Technology, Environment & Ecology — contemporary developments in science and technology and their implications, including matters of everyday observation and experience, as may be expected of a well educated person who has not made a special study of any scientific discipline; general issues on Health, environmental ecology, biodiversity and climate change that do not require subject specialization (सामान्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी) | इसकी शर्त दो बार पढ़िए — आयोग साफ़ लिखता है कि स्तर उस पढ़े-लिखे व्यक्ति का है जिसने विज्ञान में कोई विशेषज्ञता नहीं ली। यानी विषय-विशेषज्ञ जैसी गहराई यहाँ माँगी ही नहीं जा रही। स्वास्थ्य, पर्यावरणीय पारिस्थितिकी, जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन के सामान्य मुद्दे इसमें आते हैं। |
| (iii) | General Mental Ability — Comprehension, Logical reasoning and Analytical ability, Decision making, problem solving, Basic innumeracy (numbers and their relations, order of magnitude etc.) and data interpretation (charts, graphs, tables, data sufficiency etc.), class X/SSLC level (सामान्य मानसिक योग्यता) | पूरी प्रारंभिक परीक्षा में यही एक विषय है जिसका स्तर स्नातक से नीचे रखा गया है — यह दसवीं/SSLC स्तर का है, बाक़ी सब स्नातक स्तर का। इसमें बोधगम्यता, तार्किक और विश्लेषणात्मक क्षमता, निर्णय लेना, समस्या-समाधान, बुनियादी संख्या-ज्ञान और आँकड़ों की व्याख्या आती है। |
मुख्य परीक्षा: पेपरों की तालिका, और उसके नीचे छपे नियम ↑
मुख्य परीक्षा पारंपरिक और वर्णनात्मक है, और नियम साफ़ कहते हैं कि सभी पेपर अनिवार्य हैं। पेपर-2 से पेपर-5 तक हर पेपर में तीन सेक्शन होते हैं, हर पेपर अधिकतम 250 अंकों का है, और समय सिर्फ़ तीन घंटे।
दो अर्हक भाषा पेपरों को छोड़कर बाक़ी सबका स्तर स्नातक है; वे दोनों SSLC स्तर के प्रथम भाषा कन्नड़ और प्रथम भाषा अंग्रेज़ी के स्तर पर रखे गए हैं। यह बड़ा अंतर है, और जानबूझकर रखा गया है।
आप कोई भी पेपर पूरी तरह कन्नड़ में या पूरी तरह अंग्रेज़ी में लिख सकते हैं — प्रश्नपत्र दोनों भाषाओं में तैयार होते हैं — सिवाय ख़ुद उन अर्हक भाषा पेपरों के।
एक हिसाब वाली बात, ताकि यहाँ कुछ भी आधिकारिक बताकर न परोसा जाए। ऊपर की तालिका में दो अर्हक और पाँच अनिवार्य पेपर हैं; सात पेपरों का यह जोड़ हमारा अपना है, नियमों में छपा आँकड़ा नहीं। नियमों में 1250, 25 और 1275 छपे हैं — ये तीनों उन्हीं के हैं।
| पेपर | विषय | अंक | अवधि |
|---|---|---|---|
| Qualifying (अर्हक) | Kannada (कन्नड़) | 150 | 2 घंटे |
| Qualifying (अर्हक) | English (अंग्रेज़ी) | 150 | 2 घंटे |
| Paper-1 | Essay (निबंध) | 250 | 3 घंटे |
| Paper-2 | General Studies-1 (सामान्य अध्ययन-1) | 250 | 3 घंटे |
| Paper-3 | General Studies-2 (सामान्य अध्ययन-2) | 250 | 3 घंटे |
| Paper-4 | General Studies-3 (सामान्य अध्ययन-3) | 250 | 3 घंटे |
| Paper-5 | General Studies-4 (सामान्य अध्ययन-4) | 250 | 3 घंटे |
| — | लिखित परीक्षा के कुल अंक | 1250 | — |
| — | व्यक्तित्व परीक्षण के कुल अंक | 25 | — |
| — | कुल योग | 1275 | — |
वे दो अर्हक पेपर जिन्हें पास करना ज़रूरी है, पर जिनके अंक जमा नहीं होते ↑
कन्नड़ और अंग्रेज़ी — दोनों 150-150 अंकों के हैं और दोनों की अवधि दो-दो घंटे है। उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम 35 प्रतिशत चाहिए, जिसे नियम खुद ही हर पेपर में 52.5 अंक लिखकर साफ़ कर देते हैं। किसी एक पेपर में भी यह चूक गया तो बाहर — नियम कहते हैं कि ऐसा उम्मीदवार व्यक्तित्व परीक्षण और चयन के लिए पात्र नहीं होगा।
और इसके बावजूद ये अंक कभी आपके काम नहीं आते। नियम कहते हैं कि अर्हक पेपरों में मिले अंक चयन की मेरिट तय करने में नहीं गिने जाएँगे। इसलिए सही रणनीति यही है कि इन्हें सुरक्षित अंतर से पार कर लिया जाए और बचा हुआ समय उन पेपरों पर लगाया जाए जो सचमुच गिने जाते हैं।
दोनों पेपरों का घोषित उद्देश्य एक ही है: यह जाँचना कि आप गंभीर विवेचनात्मक गद्य पढ़-समझ सकते हैं या नहीं, और अपनी बात स्पष्ट तथा शुद्ध रूप से रख सकते हैं या नहीं। अंग्रेज़ी पेपर के छह भाग नीचे दिए हैं, हर भाग 25 अंक का।
कन्नड़ पेपर का ढाँचा भी वही है — 25-25 अंकों के छह क्रमांकित भाग, कुल 150। उनके नाम राजपत्र में कन्नड़ लिपि में छपे हैं, और चूँकि हमें कोई कन्नड़ पाठ-परत या भरोसेमंद प्रतिलेखन नहीं मिला, हमने उनका अनुमान नहीं लगाया। ढाँचा निश्चित है; उन छह कन्नड़ नामों को गढ़ना हमारा काम नहीं है।
| क्रम | अर्हक अंग्रेज़ी पेपर का भाग | अंक |
|---|---|---|
| 1 | Comprehension of given passages (दिए गए गद्यांशों की बोधगम्यता) | 25 अंक |
| 2 | Precis writing (सारांश लेखन) | 25 अंक |
| 3 | Usage (भाषा-प्रयोग) | 25 अंक |
| 4 | Vocabulary (शब्द-भंडार) | 25 अंक |
| 5 | Short Essay (लघु निबंध) | 25 अंक |
| 6 | Communication Skills (संप्रेषण कौशल) | 25 अंक |
एक नज़र में
| संचालक संस्था | Karnataka Public Service Commission (KPSC) |
| विज्ञापन संख्या | KPSCKA/EXA1/EXMF/9/2026-EXAM-1/I/251710/2026 |
| कुल पद | 319 (117 Group A, 202 Group B) |
| आधिकारिक वेबसाइट | kpsc.kar.nic.in |
| राज्य | Karnataka |
पेपर-1: निबंध का पेपर, और उसका ढाँचा क्यों मायने रखता है ↑
पेपर-1 तीन घंटे में 250 अंकों का है और इसमें 125-125 अंकों के दो निबंध होते हैं, जो कन्नड़ या अंग्रेज़ी में लिखे जा सकते हैं।
ये दोनों निबंध आपस में बदले नहीं जा सकते। एक अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय महत्व के विषय पर आता है और दूसरा राज्य या स्थानीय महत्व के विषय पर। जिस उम्मीदवार ने सिर्फ़ राष्ट्रीय सामग्री तैयार की है, वह दूसरे निबंध के सामने ख़ाली हाथ बैठा रह जाता है — और 125 अंक दो अच्छे उम्मीदवारों के बीच का चौथाई फ़ासला होते हैं।
मुख्य परीक्षा में यही इकलौता पेपर है जिसमें न सेक्शन हैं, न विषय-सूची। यहाँ पढ़ने को कुछ नहीं है, सिर्फ़ लिखना सीखना है — और इसीलिए यह पेपर पढ़ाई से नहीं, अभ्यास से बनता है।
| निबंध | निर्धारित विषय | अंक |
|---|---|---|
| Essay-1 | Topic of International / National Importance (अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय महत्व का विषय) | 125 अंक |
| Essay-2 | Topic of State Importance / Local Importance (राज्य या स्थानीय महत्व का विषय) | 125 अंक |
सामान्य अध्ययन 1, सेक्शन I — इतिहास और सांस्कृतिक विरासत, पूरी छह यूनिट ↑
सिलेबस खुद कहता है — छह यूनिट, और नीचे छहों दी गई हैं, उनके भीतर की हर क्रमांकित प्रविष्टि के साथ। पूरी मुख्य परीक्षा में यह सबसे बड़ा सेक्शन है।
शुरू करने से पहले इसका ढाँचा देख लेना काम आता है। यूनिट 1 पूरे भारत की सांस्कृतिक विरासत है। यूनिट 2 उन्नीसवीं सदी का सुधार-आंदोलन है, जिसमें ग्यारह धाराएँ एक-एक करके गिनाई गई हैं। यूनिट 3, 4, 5 और 6 — चारों कर्नाटक की हैं, कालक्रम में, कदंबों से लेकर 1956 के एकीकरण तक।
यानी इस सेक्शन का दो-तिहाई हिस्सा कर्नाटक का इतिहास है। जो उम्मीदवार भारत के सामान्य इतिहास की किताब पढ़कर रुक जाता है, उसने छह में से सिर्फ़ एक यूनिट की तैयारी की है।
छहों यूनिट मिलाकर गिनें तो अकेले इस सेक्शन में 33 क्रमांकित प्रविष्टियाँ हैं। यह जोड़ हमारी अपनी गिनती है — सिलेबस यूनिटों की संख्या बताता है, उनके भीतर की प्रविष्टियों की संख्या कभी नहीं।
| Unit 1: Cultural Heritage of India (यूनिट 1: भारत की सांस्कृतिक विरासत) | आयोग के अपने शब्दों में विषय | तैयारी के लिहाज़ से इसका मतलब |
|---|---|---|
| (i) | Indus Civilization — distinction between Indus Civilization and Vedic Civilization; evolution of Varna and Jathi/caste system; religious condition; emergence of religious movements (सिंधु सभ्यता) | पेपर यहीं से शुरू होता है और पहली ही माँग तुलना की है, वर्णन की नहीं — सिंधु और वैदिक सभ्यता का अंतर, वर्ण तथा जाति व्यवस्था का विकास, धार्मिक स्थिति और धार्मिक आंदोलनों का उदय। |
| (ii) | Literature: Sanskrit Literature (Ancient) — Vedic Literature, the epics and the Puranas and their impact on the life and culture of the Indian people; prose works on polity, ethics (neeti), popular stories and Pancha Tantra (only important works); Mughal contributions to literature (साहित्य: प्राचीन संस्कृत साहित्य) | वैदिक साहित्य, महाकाव्य और पुराण तथा भारतीय जीवन व संस्कृति पर उनका असर; राजनीति और नीति पर गद्य रचनाएँ, लोककथाएँ और पंचतंत्र; मुग़ल काल का साहित्यिक योगदान। कोष्ठक में लिखी शर्त पर ध्यान दीजिए — 'only important works' — दायरा आयोग ने खुद सीमित किया है। |
| (iii) | Science and Technology: Mathematics, Astronomy, Physics, Chemistry, Botany, Zoology, Physiology and Medicine (including Surgery), Ship-building, Mining and Metallurgy, Engineering and Architecture (विज्ञान और प्रौद्योगिकी) | यह प्राचीन भारतीय विज्ञान है, सांस्कृतिक विरासत के रूप में — आधुनिक विज्ञान यहाँ नहीं, General Studies 3 में है। गणित, खगोल, भौतिकी, रसायन, वनस्पति, प्राणी, शरीर-क्रिया और चिकित्सा (शल्य सहित), जहाज़ निर्माण, खनन व धातुकर्म, अभियांत्रिकी और वास्तुकला। |
| (iv) | Arts (excluding Karnataka): the Maurya and Gupta periods; the Khajuraho temples; Jain temples at Mount Abu and the Odishyan temples; Pallava, Chola and Pandyan contributions; the Mughal architecture; Cathedral architecture — Bom Jesus (Old Goa), St. Paul's (Kolkata) and St. Thomas (Chennai); Painting — Ajanta frescoes, Mughal and Rajput schools; Dance and Music — classical music and dance, Mughal contributions to music; Folk arts of India (कला — कर्नाटक को छोड़कर) | यह अपवाद जानबूझकर है: कर्नाटक की अपनी कला यूनिट 3 से 6 में अलग से आती है, इसलिए यहाँ दोबारा नहीं। मौर्य और गुप्त काल, खजुराहो, माउंट आबू के जैन मंदिर और ओडिशा के मंदिर, पल्लव-चोल-पांड्य योगदान, मुग़ल वास्तुकला, गिरजाघर वास्तुकला, अजंता के भित्तिचित्र, मुग़ल व राजपूत चित्रशैली, शास्त्रीय नृत्य-संगीत और भारत की लोककलाएँ। |
| (v) | India's cultural contributions to the outside world: Central Asia, China, Japan, South-East Asia and Sri Lanka (बाहरी दुनिया को भारत का सांस्कृतिक योगदान) | पाँच क्षेत्र नाम से गिनाए गए हैं — मध्य एशिया, चीन, जापान, दक्षिण-पूर्व एशिया और श्रीलंका। छोटा विषय है, और दो लंबे विषयों के बीच दबकर अक्सर छूट जाता है। |
| (vi) | Religions of India — (i) Hindu Dharma: general characteristics and common beliefs, Purusharthas, rituals and ethics, festivals and sacred days, pilgrimage and fairs; Hindu sects — Shaiva, Vaishnava and Shakta; philosophy of the Upanishads and the Bhagavad-Gita; Yoga philosophy of Pathanjali. (ii) Jainism: Ratnatraya, code of morals, equality (samana), Ahimsa; sects Digambara and Swethambara. (iii) Buddhism: Four noble truths, the Eight-fold path, Nirvana, moral doctrines; sects Hinayana and Mahayana. (iv) Christianity: teachings of Jesus Christ, doctrines and theology, Roman Catholic, Eastern orthodox and Protestant groups, missionary activities in India. (v) Islam: God, Confession of Faith, the Five Pillars, sacred places and days, the family system and the shariah, Sufis of Karnataka; sects Shia and Sunni. (vi) Sikhism: principles, practices and evolution (भारत के धर्म) | छह धर्म, और हर एक के अपने उप-बिंदु नाम से दिए गए हैं — हिंदू धर्म, जैन धर्म, बौद्ध धर्म, ईसाई धर्म, इस्लाम और सिख धर्म। यूनिट 1 की यह सबसे लंबी प्रविष्टि है; इसे एक विषय नहीं, छह छोटे विषय मानकर पढ़ना बेहतर है। इस्लाम के अंतर्गत 'Sufis of Karnataka' अलग से लिखा है — फिर वही कर्नाटक-झुकाव। |
| Unit 2: Toward transforming Indian Society (यूनिट 2: भारतीय समाज के रूपांतरण की ओर) — 19वीं सदी से आधुनिक भारतीय इतिहास, सुधार और सुधारक | आयोग के अपने शब्दों में विषय | तैयारी के लिहाज़ से इसका मतलब |
|---|---|---|
| 1 | Eradication of Social and religious wrongs (सामाजिक और धार्मिक कुरीतियों का उन्मूलन) | उन्नीसवीं सदी की शुरुआत करने वाली सुधार-चेतना। |
| 2 | The Vedas for all — The Casteless society (सबके लिए वेद — जातिविहीन समाज) | सुधार की वह धारा जिसे आयोग ने उसके अपने नारे से ही नाम दिया है। |
| 3 | Ideal of service (सेवा का आदर्श) | सेवा को दान की तरह नहीं, सुधार के आदर्श की तरह देखने वाली धारा। |
| 4 | Emancipation of the Depressed class (दलित वर्ग की मुक्ति) | यह बिंदु 6 से अलग रखा गया है, जो सशक्तीकरण की बात करता है। सिलेबस ने दोनों को जानबूझकर अलग गिना है। |
| 5 | "Two-Nation" theory and Islamic revivalism (द्वि-राष्ट्र सिद्धांत और इस्लामी पुनरुत्थानवाद) | इस यूनिट का इकलौता बिंदु जो सीधे विभाजन तक पहुँचता है। |
| 6 | Empowerment of the Depressed class through religion and education (धर्म और शिक्षा के ज़रिये दलित वर्ग का सशक्तीकरण) | आंबेडकरवादी धारा, जिसे उसके तरीक़े से पहचाना गया है — धर्म और शिक्षा। |
| 7 | Hindutva and Patriotism (हिंदुत्व और देशभक्ति) | इसे एक ही बिंदु के रूप में गिना गया है, दो के रूप में नहीं। |
| 8 | The Dravida Movement (द्रविड़ आंदोलन) | दक्षिण भारत का ग़ैर-ब्राह्मण आंदोलन। |
| 9 | Struggle for emancipation of Dalits and their empowerment (दलितों की मुक्ति और सशक्तीकरण का संघर्ष) | बिंदु 4 और 6 में जिन्हें अलग किया था, यहाँ मुक्ति और सशक्तीकरण दोनों एक साथ आते हैं। |
| 10 | Socialist approach and Total Revolution (समाजवादी दृष्टिकोण और संपूर्ण क्रांति) | समाजवाद और जयप्रकाश नारायण वाली धारा, दोनों एक ही बिंदु में। |
| 11 | Gram Swaraj, Satyagraha and Bhoodana (ग्राम स्वराज, सत्याग्रह और भूदान) | गांधीवादी और विनोबा वाली धारा, जिस पर यह यूनिट ख़त्म होती है। |
| Unit 3: From Kadambas to the Hoysalas (यूनिट 3: कदंबों से होयसलों तक) | आयोग के अपने शब्दों में विषय | तैयारी के लिहाज़ से इसका मतलब |
|---|---|---|
| (i) | Antiquity of Karnataka; Kannada language and literature; extent of Kannadanadu; State and District Gazetteers; Museums and Archives in Karnataka; preservation and protection of historical monuments; work of the Archaeological Survey of India; World Heritage Sites in Karnataka (कर्नाटक की प्राचीनता) | राजवंशों से पहले स्रोत। यूनिट यह पूछकर शुरू होती है कि कर्नाटक का इतिहास रखा कहाँ है — राज्य व ज़िला गजेटियर, संग्रहालय, अभिलेखागार, स्मारक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का काम और कर्नाटक के विश्व धरोहर स्थल। कन्नड़ भाषा-साहित्य और कन्नडनाडु का विस्तार भी इसी में। |
| (ii) | From Kadambas to the Hoysalas: contributions to architecture, sculpture, literature and religion (कदंबों से होयसलों तक) | चार पहलू नाम से गिनाए गए हैं — वास्तुकला, मूर्तिकला, साहित्य और धर्म। सिलेबस योगदान माँग रहा है, राजवंशवार राजनीतिक कहानी नहीं। |
| Unit 4: The Vijayanagara Empire and thereafter (यूनिट 4: विजयनगर साम्राज्य और उसके बाद), 1336-1799 | आयोग के अपने शब्दों में विषय | तैयारी के लिहाज़ से इसका मतलब |
|---|---|---|
| (i) | Vijayanagara Empire: origin, aims and aspiration of the Empire; Vidyaranya; political history — Harihara, Bukka, Immadi Devaraya, Krishnadevaraya and Aliya Ramaraya; the battle of Talikote and its consequences; glory of the Capital; administration; society, economy and religion; arts — painting, music, dance, literature, architecture and sculpture; foreign accounts of Vijayanagara (विजयनगर साम्राज्य) | कर्नाटक वाली यूनिटों की सबसे विस्तार से लिखी गई प्रविष्टि — पाँच शासक और एक युद्ध नाम लेकर गिनाए गए हैं। उद्भव, उद्देश्य, विद्यारण्य, तालीकोट का युद्ध और उसके परिणाम, राजधानी का वैभव, प्रशासन, समाज-अर्थव्यवस्था-धर्म, कलाएँ और विदेशी यात्रियों के विवरण। |
| (ii) | Religious sects: Shankaracharya, Ramanujacharya, Madhwacharya; Sri Basaveshvara, Veerashaivism and the Vachana movement; Haridasa movement; Kalamukha, Shakta and Pashupatha sects (धार्मिक संप्रदाय) | कर्नाटक का अपना धार्मिक इतिहास — शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य; श्री बसवेश्वर, वीरशैववाद और वचन आंदोलन; हरिदास आंदोलन; कालामुख, शाक्त और पाशुपत संप्रदाय। |
| (iii) | The Bahmani Shahis: Mahamud Gawan; contributions of the Bahamani; Adil Shahis of Bijapur — contributions to literature and architecture; Sufis in Karnataka (बहमनी शाही) | दक्कन की सल्तनतें — यहाँ युद्धों से ज़्यादा यह पूछा जाता है कि उन्होंने बनाया और लिखा क्या। महमूद गवान, बहमनी योगदान, बीजापुर के आदिल शाही और उनका साहित्यिक व स्थापत्य योगदान, तथा कर्नाटक के सूफ़ी। |
| (iv) | Chikkadevaraja Wodeyar and his contributions; the Nayakas of Keladi and Chitradurga; Rani Chennamma and Sangolli Rayanna of Kittur; the Yalahanka Nadaprabhu; Hyder Ali and Tippu Sultan (1761-1799) (चिक्कदेवराज वोडेयर और बाद की क्षेत्रीय शक्तियाँ) | क्षेत्रीय शक्तियाँ, जिनमें तिथि-सीमा सिर्फ़ हैदर अली और टीपू सुल्तान के साथ दी गई है। केलदी व चित्रदुर्ग के नायक, कित्तूर की रानी चेन्नम्मा और संगोल्ली रायण्णा, तथा यलहंका नाडप्रभु भी इसी में। |
| Unit 5: Modern Mysore (यूनिट 5: आधुनिक मैसूर), 1799-1947 | आयोग के अपने शब्दों में विषय | तैयारी के लिहाज़ से इसका मतलब |
|---|---|---|
| (i) | Krishnaraja Wodeyar III and his contributions (कृष्णराज वोडेयर तृतीय) | वह शासनकाल जिससे आधुनिक मैसूर वाली यूनिट शुरू होती है। |
| (ii) | Armed rebellion in Karnataka against the British (अंग्रेज़ों के विरुद्ध कर्नाटक में सशस्त्र विद्रोह) | सिलेबस यहाँ न कोई तिथि देता है, न कोई नाम — सिर्फ़ इतना कि कर्नाटक में अंग्रेज़ों के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह हुआ। |
| (iii) | Commissioner's Rule (1831-1881) (कमिश्नर शासन) | मैसूर में सीधे ब्रिटिश प्रशासन के पचास साल, जिनकी तिथियाँ सिलेबस में ठीक-ठीक दी गई हैं। |
| (iv) | Nizam's rule in Hyderabad-Karnataka (हैदराबाद-कर्नाटक में निज़ाम का शासन) | उत्तरी ज़िले, जिनका शासक अलग था और इसीलिए इतिहास भी अलग। |
| (v) | Progress of Mysore under the Dewans (दीवानों के अधीन मैसूर की प्रगति) | रियासत का प्रशासनिक और औद्योगिक आधुनिकीकरण। |
| Unit 6: Freedom Movement in Karnataka and Unification (यूनिट 6: कर्नाटक में स्वतंत्रता आंदोलन और एकीकरण), 1885-1956 | आयोग के अपने शब्दों में विषय | तैयारी के लिहाज़ से इसका मतलब |
|---|---|---|
| (i) | Rise of Nationalism; Pre-Gandhian era (1885-1920); Gandhian era (1920-1948) (राष्ट्रवाद का उदय) | यूनिट स्वतंत्रता संग्राम को एक लंबी अवधि नहीं मानती — उसे दो तिथि-बद्ध दौरों में बाँटती है, गांधी-पूर्व और गांधी-युग। |
| (ii) | Freedom movement in Hyderabad-Karnataka (हैदराबाद-कर्नाटक में स्वतंत्रता आंदोलन) | इसे फिर अलग रखा गया है, क्योंकि वहाँ संघर्ष निज़ाम के विरुद्ध भी था। |
| (iii) | Important Personalities in the Freedom Struggle (स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख हस्तियाँ) | व्यक्तियों की माँग है, पर सिलेबस उनके नाम नहीं देता — वह सूची आपको खुद बनानी है। |
| (iv) | Unification of Karnataka; causes for the rise of the unification movement; Alur Venkatrao; role of literacy, cultural associations and print media; three stages in the unification of Karnataka (1947-1956) (कर्नाटक का एकीकरण) | सिलेबस खुद 'तीन चरण' लिखता है — यानी उत्तर भी तीन हिस्सों में अपेक्षित है। एकीकरण आंदोलन के कारण, आलूर वेंकटराव, तथा साक्षरता, सांस्कृतिक संस्थाओं और मुद्रित माध्यमों की भूमिका। |
| (v) | Social and Cultural developments: spread of education by missionary and voluntary bodies; printing and the press; literary and scholarly studies; new literary genres in Kannada literature; Backward Class movement; Miller Committee Report; folk arts of Karnataka (सामाजिक और सांस्कृतिक विकास) | मिलर समिति रिपोर्ट का नाम अलग से लिखा है — कर्नाटक में आरक्षण का इतिहास यहीं से शुरू होता है। मिशनरी व स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा शिक्षा का प्रसार, मुद्रण और प्रेस, साहित्यिक-शोध अध्ययन, कन्नड़ साहित्य की नई विधाएँ, पिछड़ा वर्ग आंदोलन और कर्नाटक की लोककलाएँ। |
सामान्य अध्ययन 1, सेक्शन II — सामाजिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य, पूरी सात यूनिट ↑
सात यूनिट — सिलेबस में भी सात लिखा है — और नीचे पूरी दी गई हैं।
यूनिट 1 दो बार देखने लायक़ है। इसमें पाँच समिति रिपोर्टों के नाम हैं — हावनूर, वेंकटस्वामी, चिन्नप्पा रेड्डी, महाजन और नंजुंदप्पा — और इनमें से हर एक अपने आप में पूरा उत्तर है। स्वतंत्रता के बाद का कर्नाटक सामान्य ज्ञान नहीं है; यह एक सिलेबस-प्रविष्टि के भीतर छिपी हुई नामों वाली पढ़ाई-सूची है।
बाक़ी छह यूनिट समाजशास्त्र और राजनीतिक समाजशास्त्र हैं। ये पूछती हैं कि एक परंपरागत समाज आधुनिक लोकतंत्र कैसे चलाता है, और अंत गाँव पर होता है। ध्यान दीजिए कि गाँव वाला सवाल सेक्शन III में अर्थशास्त्र बनकर लौटता है — सिलेबस एक ही विषय को जानबूझकर दो सेक्शनों में बाँटता है।
| क्रम | आयोग के अपने शब्दों में विषय | तैयारी के लिहाज़ से इसका मतलब |
|---|---|---|
| 1 | Post Independent Karnataka — towards political consolidation; attempts of successive governments; Backward Classes and social justice; reports of the Havnur Committee, Venkataswamy Committee and Chinnappa Reddy Committee; recent trends; Dalit Movement; Devaraja Urs and land reforms; language issue — Gokak Movement, issues and perspectives; inter-State disputes — boundary disputes, Mahajan Committee Report and its impact, water disputes; Farmer's Movement; regional imbalance and the Nanjundappa Committee Report (स्वतंत्रता के बाद का कर्नाटक) | एक ही प्रविष्टि में पाँच समिति रिपोर्टों के नाम हैं — हावनूर, वेंकटस्वामी, चिन्नप्पा रेड्डी, महाजन और नंजुंदप्पा। इस सेक्शन में और कुछ न भी याद रहे, तो यह ज़रूर याद रखिए कि इन पाँचों ने सिफ़ारिश क्या की थी। साथ में दलित आंदोलन, देवराज अर्स और भूमि सुधार, गोकाक आंदोलन, सीमा व जल विवाद, किसान आंदोलन और क्षेत्रीय असंतुलन। |
| 2 | Social Change and Movements — social structure and social change, theories of social change, social disorganisation and social movements, directed social change, social policy and social development (सामाजिक परिवर्तन और आंदोलन) | यह सिद्धांत वाला हिस्सा है — शुद्ध समाजशास्त्र, जिस पर आगे के दो बिंदु टिके हैं। सामाजिक संरचना और परिवर्तन, परिवर्तन के सिद्धांत, सामाजिक विघटन और आंदोलन, निर्देशित सामाजिक परिवर्तन, सामाजिक नीति और विकास। |
| 3 | Social Change and Modernisation — problems of role conflict, intergenerational gap, youth unrest and commercialization of education, emergence of India as an educational force, changing status of women and social movements, industrialization and urbanization, role of pressure groups, Sanskritisation, westernisation and modernization, modernism versus traditionalism; current social evils — fundamentalism and terrorism, Naxalism, nepotism, corruption and black money (सामाजिक परिवर्तन और आधुनिकीकरण) | एक ही प्रविष्टि में सिद्धांत और आज की समस्याएँ साथ हैं — संस्कृतीकरण के बग़ल में काला धन। भूमिका-संघर्ष, पीढ़ी-अंतराल, युवा असंतोष, शिक्षा का व्यापारीकरण, महिलाओं की बदलती स्थिति, औद्योगीकरण-शहरीकरण, दबाव समूह, पश्चिमीकरण, तथा कट्टरवाद, आतंकवाद, नक्सलवाद, भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार। |
| 4 | Government and Political System — legislature, executive and judiciary; functioning of a democratic political system in a traditional society; political parties and their social composition (सरकार और राजनीतिक व्यवस्था) | इसे संविधान-कानून की तरह नहीं, राजनीति के समाजशास्त्र की तरह पढ़िए — संविधान वाला हिस्सा General Studies 2 में है। विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका; परंपरागत समाज में लोकतंत्र का कामकाज; और राजनीतिक दलों की सामाजिक बनावट। |
| 5 | Decentralisation of Power — decentralisation of power and political participation; Union Government, Parliament, Cabinet, Supreme Court, judicial review, Centre-State relations, State government, role of Governor, Panchayathi raj; class and caste in Indian politics; politics of regionalism, linguism and communalism; problems of secularisation policy and national integration; political participation and voting, vote bank politics (सत्ता का विकेंद्रीकरण) | इस सेक्शन की सबसे लंबी संस्थागत सूची, जो जाति और भाषा की राजनीति पर ख़त्म होती है। संघ सरकार, संसद, मंत्रिमंडल, उच्चतम न्यायालय, न्यायिक समीक्षा, केंद्र-राज्य संबंध, राज्यपाल की भूमिका, पंचायती राज, क्षेत्रवाद-भाषावाद-सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्षता की समस्याएँ और वोट बैंक की राजनीति। |
| 6 | Socio Economic System — the Jajmani system and its bearing on traditional society; market economy and its social consequences; occupational diversification and social structure; profession and professionalisation; role of trade unions; social determinants and consequences of economic development; economic inequalities, exploitation and corruption; globalisation and its social impact (सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था) | अर्थव्यवस्था को समाज की नज़र से देखना — एक सिरे पर जजमानी व्यवस्था, दूसरे पर वैश्वीकरण। बाज़ार अर्थव्यवस्था के सामाजिक परिणाम, व्यवसायों का विविधीकरण, ट्रेड यूनियन की भूमिका, आर्थिक असमानता, शोषण और भ्रष्टाचार। |
| 7 | Rural Social system and Rural Development — socio-cultural dimensions of village community, traditional power structure, democratization and leadership, poverty, indebtedness, bonded labour, social consequences of land reforms, rural development projects, green revolution, new strategies of rural development, the changing rural scene (ग्रामीण सामाजिक व्यवस्था और ग्रामीण विकास) | यहाँ गाँव को समाजशास्त्र की नज़र से देखा गया है; उसी विषय का अर्थशास्त्र सेक्शन III में है। गाँव समुदाय के सामाजिक-सांस्कृतिक पहलू, परंपरागत सत्ता-संरचना, लोकतंत्रीकरण और नेतृत्व, ग़रीबी, ऋणग्रस्तता, बंधुआ मज़दूरी, भूमि सुधार के सामाजिक परिणाम और हरित क्रांति। |
सामान्य अध्ययन 1, सेक्शन III — भारतीय अर्थव्यवस्था, नियोजन और ग्रामीण विकास, पूरी आठ यूनिट ↑
आठ यूनिट, और सिलेबस भी आठ ही कहता है। इनमें से सात अर्थशास्त्र हैं। आठवीं नहीं है।
यूनिट 8 है Data Collection, Analysis and Interpretation — और यह सामान्य अध्ययन के पेपर के भीतर बैठा हुआ असली अंकगणित और तर्कशक्ति वाला हिस्सा है: ग्राफ़ और चार्ट, प्रायिकता, क्रमचय-संचय, अनुपात-समानुपात, लाभ-हानि, प्रतिशत, समय-कार्य, चाल-समय-दूरी और साधारण ब्याज। वर्णनात्मक पेपर में, जहाँ ज़्यादातर उत्तर तर्क पर परखे जाते हैं, यही एक जगह है जहाँ उत्तर सीधे सही या ग़लत होता है। इसे इस सेक्शन का अंक-बटोरू हिस्सा मानिए।
बाक़ी सात यूनिटों में देखिए कि हर भारत-स्तर के सवाल के पीछे-पीछे उसका कर्नाटक-संस्करण कितनी नियमितता से आता है — योजना काल, निर्यात, असमानताएँ, विकेंद्रित नियोजन, ग्रामीण बुनियादी ढाँचा। यह राज्य आयोग है, और सिलेबस यह कभी नहीं भूलता।
| क्रम | आयोग के अपने शब्दों में विषय | तैयारी के लिहाज़ से इसका मतलब |
|---|---|---|
| 1 | Indian Economy — post-independence growth; experience of agriculture, industry and tertiary sectors; growth and distributive justice; poverty and inequality; growth of the Karnataka economy during the plan era; growth, sectoral changes and linkages in the State economy (भारतीय अर्थव्यवस्था) | इस सेक्शन की हर प्रविष्टि भारत-स्तर के सवाल के साथ उसका कर्नाटक-संस्करण भी जोड़ती है — यह पहली प्रविष्टि वही ढाँचा तय कर देती है। स्वतंत्रता के बाद की वृद्धि, कृषि-उद्योग-सेवा क्षेत्रों का अनुभव, वृद्धि और वितरणात्मक न्याय, ग़रीबी और असमानता। |
| 2 | India and International economic relations — growth and trade, volume, composition and direction of exports and imports; domestic and foreign capital in economic development; changes in India's foreign trade policy; balance of payments and foreign exchange; Karnataka's exports — volume, composition and direction (भारत और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध) | वही तीन शब्द — मात्रा, संरचना और दिशा — पहले भारत पर, फिर कर्नाटक पर लगाए गए हैं। घरेलू व विदेशी पूँजी, विदेश व्यापार नीति में बदलाव, भुगतान संतुलन और विदेशी मुद्रा भी इसी में। |
| 3 | Development patterns and disparities among regions and between rural and urban areas; public policies to mitigate disparities; prospects and problems of Special Economic Zones; development disparities in Karnataka and public policies; redressal of development disparities; regional development boards (विकास के प्रतिमान और असमानताएँ) | क्षेत्रीय असंतुलन, यहाँ अर्थशास्त्र के रूप में — यही विषय सेक्शन II में राजनीति के रूप में आ चुका है। विशेष आर्थिक क्षेत्रों की संभावनाएँ और समस्याएँ, तथा क्षेत्रीय विकास बोर्ड। |
| 4 | Planning — planning goals, objectives and approaches; achievements and failures of the five year plans (I to VII Five Year Plans); development plans under the new economic policies regime (VIII Five Year Plan onwards); planning in Karnataka (नियोजन) | सिलेबस खुद आठवीं योजना पर विभाजन-रेखा खींचता है — वहीं से उदारीकरण शुरू होता है। पहली से सातवीं योजना की उपलब्धियाँ और असफलताएँ एक तरफ़, नई आर्थिक नीति वाले दौर की योजनाएँ दूसरी तरफ़, और कर्नाटक का नियोजन अलग से। |
| 5 | Decentralization — pros and cons of top-down and bottom-up planning; planning mechanism and experience in Panchayathi raj institutions; planning and capacity building; planning and financing; decentralized planning in Karnataka; resource mobilization and devolution; District Planning Committee; State finances and local finances; State Finance Commission (विकेंद्रीकरण) | यहाँ संस्थाएँ नाम से हैं — ज़िला योजना समिति और राज्य वित्त आयोग को उनके काम सहित जानना ज़रूरी है। ऊपर-से-नीचे बनाम नीचे-से-ऊपर नियोजन, पंचायती राज संस्थाओं का अनुभव, क्षमता-निर्माण, तथा संसाधन जुटाना और हस्तांतरण। |
| 6 | Rural Development — importance of agriculture in the national economy; Gandhian approach to rural development and land reforms; size of farms and productivity; problems of irrigation and dry land farming; food security; rural credit; agricultural marketing; agricultural labour; rural industries and employment; agricultural problems in Karnataka; rural economic infrastructure (energy, irrigation, transport, communication, markets); rural social infrastructure — housing, drinking water, sanitation and drainage, rural health systems and their delivery; development of economic and social infrastructure in Karnataka; rural markets in Karnataka; rural housing and health care schemes in Karnataka (ग्रामीण विकास) | General Studies 1 की सबसे लंबी प्रविष्टि, जिसके पाँच हिस्से सिर्फ़ कर्नाटक के हैं। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्व, भूमि सुधार का गांधीवादी दृष्टिकोण, सिंचाई और शुष्क खेती की समस्याएँ, खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण ऋण, कृषि विपणन और मज़दूरी, तथा ग्रामीण आर्थिक व सामाजिक बुनियादी ढाँचा। |
| 7 | Rural Development Initiatives — poverty alleviation-cum-employment generation programmes; Five Year Plan and inclusive growth; rural financial institutions; development and conservation of common property resources in rural areas — village grasslands and woods, water bodies; Provision of Urban Amenities in Rural Areas (PURA); rural development schemes in Karnataka; self help groups and micro finance institutions in Karnataka; external assistance for rural tank rejuvenation, drinking water, sanitation and health care in Karnataka (ग्रामीण विकास की पहलें) | सिद्धांत नहीं, योजनाएँ। PURA इकलौता कार्यक्रम है जिसे संक्षिप्त नाम से लिखा गया है। ग़रीबी उन्मूलन सह रोज़गार सृजन कार्यक्रम, समावेशी वृद्धि, ग्रामीण वित्तीय संस्थाएँ, साझा संपत्ति संसाधनों का संरक्षण, तथा कर्नाटक में स्वयं सहायता समूह और सूक्ष्म वित्त संस्थाएँ। |
| 8 | Data Collection, Analysis and Interpretation — collection, interpretation and appreciation of statistical data; study of graphs and charts (bar graphs, line graphs and pie charts); problems based on tabular and diagrammatical data; data sufficiency in statistics; problems based on probability; permutations and combinations; quantitative aptitude — number sequences, series, averages, number systems, ratio and proportion, profit and loss, percentages, time and work, speed-time-distance, simple interest; analytical and critical reasoning; reading comprehension (आँकड़ों का संकलन, विश्लेषण और व्याख्या) | सामान्य अध्ययन के पेपर के भीतर यह सचमुच चौंकाने वाली प्रविष्टि है — यह अभिवृत्ति और अंकगणित का हिस्सा है, और अंक बटोरने वाला हिस्सा है, क्योंकि यहाँ उत्तर वस्तुनिष्ठ रूप से सही या ग़लत होता है। ग्राफ़-चार्ट, प्रायिकता, क्रमचय-संचय, संख्या शृंखला, औसत, अनुपात, लाभ-हानि, प्रतिशत, समय-कार्य, चाल-समय-दूरी, साधारण ब्याज और तार्किक विश्लेषण। |
सामान्य अध्ययन 2, सेक्शन I — भौतिक विशेषताएँ और प्राकृतिक संसाधन ↑
इस सेक्शन के लिए सिलेबस कोई यूनिट-संख्या नहीं देता, पर यह तीन शीर्षकों के नीचे छपा है जिनसे इसका ढाँचा साफ़ हो जाता है — विश्व का भूगोल, भारत का भूगोल और कर्नाटक का भूगोल, और हर शीर्षक के नीचे दो-दो क्रमांकित प्रविष्टियाँ।
यह साफ़-सुथरा और असामान्य रूप से संतुलित बँटवारा है। एक-तिहाई सेक्शन विश्व भूगोल है, एक-तिहाई भारत, और एक-तिहाई कर्नाटक — और कर्नाटक वाला तिहाई हिस्सा वही है जो किसी अखिल-भारतीय पाठ्यपुस्तक से नहीं मिलेगा। भू-आकृतिक विभाजन, कृषि-जलवायु क्षेत्र, कर्नाटक के अपने खनिज, उसके ऊर्जा स्रोत और उद्योग — ये सब राज्य-आधारित सामग्री से ही आएँगे।
यहाँ छह प्रविष्टियों की गिनती हमारी अपनी है; सिलेबस प्रविष्टियाँ छापता है, पर इस सेक्शन के लिए कोई कुल संख्या नहीं बताता।
| क्रम | आयोग के अपने शब्दों में विषय | तैयारी के लिहाज़ से इसका मतलब |
|---|---|---|
| 1 | GEOGRAPHY OF THE WORLD — Lithosphere: place of Earth in the Solar System, rocks, earthquakes, volcanoes, plate tectonics, agents of erosion. Atmosphere: structure and composition, elements of climate and weather, broad climatic types. Hydrosphere: world oceans, salinity, ocean currents and tides, ocean deposits (स्थलमंडल, वायुमंडल, जलमंडल) | एक ही प्रविष्टि में तीन मंडल — स्थलमंडल, वायुमंडल और जलमंडल। यह भौतिक भूगोल का सबसे मानक हिस्सा है। सौरमंडल में पृथ्वी की स्थिति, चट्टानें, भूकंप, ज्वालामुखी, प्लेट विवर्तनिकी, अपरदन के कारक, जलवायु के तत्व और प्रकार, तथा महासागरीय लवणता, धाराएँ, ज्वार-भाटा और निक्षेप। |
| 2 | Physiography of Continents and Demographic distribution — mountains, rivers, forests, grasslands, deserts; human races; population change, distribution and demographic transition, density, sex ratio, quality of life, life expectancy, literacy, standard of living and migration (महाद्वीपों की भू-आकृति और जनसांख्यिकीय वितरण) | विश्व का भौतिक और मानव भूगोल एक ही विषय में जोड़ दिया गया है — पर्वत, नदियाँ, वन, घास के मैदान, मरुस्थल; मानव प्रजातियाँ; तथा जनसंख्या परिवर्तन, घनत्व, लिंगानुपात, जीवन प्रत्याशा, साक्षरता, जीवन स्तर और प्रवास। |
| 3 | GEOGRAPHY OF INDIA — Physiography of India: climate, rivers, soil, natural vegetation. Mineral resources: iron ore and manganese, copper and bauxite, coal, petroleum and natural gas, nuclear deposits. Major crops: distribution and production of cereals, millets, oilseeds, plantation crops, commercial crops. Indian demography: growth, composition, distribution, density, Human Development Index, demographic database (भारत की भू-आकृति) | खनिज जोड़ियों में नाम लेकर गिनाए गए हैं — यह साफ़ संकेत है कि तुलनात्मक सवाल अपेक्षित हैं। जलवायु, नदियाँ, मृदा, प्राकृतिक वनस्पति; लोहा-मैंगनीज़, ताँबा-बॉक्साइट, कोयला, पेट्रोलियम-प्राकृतिक गैस और नाभिकीय निक्षेप; प्रमुख फ़सलें; तथा भारतीय जनसांख्यिकी और मानव विकास सूचकांक। |
| 4 | Industrial Planning and Development — growth and distribution of major, medium, small and tiny industries; industrial regions of India; industrial infrastructure — railways, roads and ports; backward regions and rural industrialisation; regional planning and development — tribal and hill areas, drought prone areas, command areas and river basins; classification of towns and cities; urban structure (औद्योगिक नियोजन और विकास) | उद्योगों के चार आकार नाम से दिए गए हैं — बड़े, मध्यम, लघु और अति-लघु — यानी वर्गीकरण खुद परीक्षा-योग्य है। औद्योगिक क्षेत्र और बुनियादी ढाँचा, पिछड़े क्षेत्र और ग्रामीण औद्योगीकरण, जनजातीय व पहाड़ी क्षेत्र, सूखाग्रस्त क्षेत्र, कमान क्षेत्र व नदी बेसिन, तथा नगरों का वर्गीकरण। |
| 5 | GEOGRAPHY OF KARNATAKA — physiographic divisions: climate, rivers, rainfall distribution, natural vegetation and soil; agriculture and agro-climatic regions; major crops, plantation and commercial crops of Karnataka; mineral resources of Karnataka; sources of power (hydro, thermal, solar, nuclear and wind); major, medium and small scale industries, agro-based industries; transportation and communication systems in Karnataka; geographic information system (कर्नाटक का भूगोल) | बिजली के पाँच स्रोत अलग-अलग नाम से हैं — जल, ताप, सौर, नाभिकीय और पवन। अंत में जुड़ा 'Geographic Information System' आसानी से छूट जाता है, उसे मत छोड़िए। भू-आकृतिक विभाजन, कृषि-जलवायु क्षेत्र, प्रमुख व बाग़ानी फ़सलें, खनिज संसाधन, उद्योग तथा परिवहन-संचार व्यवस्था। |
| 6 | Urban Land use Policy and Urbanisation — demographic features, literacy and urbanisation; population problems and policies; literacy; city classification and urban spheres of influence; rural urban fringe; problems of urban growth; land use, town planning, slums and urban housing; intra and inter regional trade and the role of rural market centres (शहरी भू-उपयोग नीति और शहरीकरण) | सेक्शन शहरी नीति पर ख़त्म होता है, और अंत में घूमकर फिर ग्रामीण बाज़ार केंद्रों पर आ जाता है। नगरों का वर्गीकरण, शहरी प्रभाव क्षेत्र, ग्रामीण-शहरी सीमांत, शहरी वृद्धि की समस्याएँ, भू-उपयोग, नगर नियोजन, मलिन बस्तियाँ और शहरी आवास। |
सामान्य अध्ययन 2, सेक्शन II — भारतीय संविधान का अवलोकन, पूरी सात यूनिट ↑
सात यूनिट, और सात ही लिखा गया है। सिलेबस जो शब्द चुनता है वह है 'overview' — अवलोकन — और सामग्री भी वैसी ही है: यह संवैधानिक ढाँचा है, मुक़दमों का क़ानून नहीं।
दो प्रविष्टियाँ अपनी लंबाई से कहीं ज़्यादा भारी हैं। यूनिट 4 में 'delegated legislation' दो बार आता है और उस पर न्यायिक नियंत्रण तीसरी बार — यह आयोग का इशारा है कि उसके सवाल कहाँ से बनते हैं। यूनिट 6 एक ही पंक्ति में दस आयोग और परिषदें भर देती है, निर्वाचन आयोग से लेकर राष्ट्रीय विकास परिषद तक, और हर एक की बनावट तथा शक्तियाँ अलग-अलग जानने लायक़ हैं।
यूनिट 7 इस सेक्शन की सबसे छोटी प्रविष्टि है, और वही उस सेवा की संवैधानिक स्थिति बताती है जिसमें आप शामिल होने जा रहे हैं।
| क्रम | आयोग के अपने शब्दों में विषय | तैयारी के लिहाज़ से इसका मतलब |
|---|---|---|
| 1 | Nature of the Constitution — constitutional developments; salient features of the Constitution: Preamble, Directive Principles of State Policy, Indian federation, etc. (संविधान की प्रकृति) | पहली प्रविष्टि, और इकलौती ऐसी जो संविधान को उसके किसी हिस्से की नहीं, पूरे के रूप में पूछती है — संवैधानिक विकास, प्रस्तावना, राज्य के नीति निदेशक तत्व और भारतीय संघवाद। |
| 2 | Fundamental rights — Right to Equality, Right to Freedom, Right against exploitation, Right to freedom of religion, Cultural and Educational rights, Right to Constitutional remedies; reasonable restrictions; provision for scheduled caste, scheduled tribe and minorities; reservations for SC/ST and OBCs; prevention of SC/ST Atrocities Act; National and State SC/ST Commission (मौलिक अधिकार) | छह अधिकार एक-एक करके गिनाए गए हैं, और उसी प्रविष्टि से आरक्षण की पूरी व्यवस्था जुड़ी है। उचित प्रतिबंध, अनुसूचित जाति-जनजाति व अल्पसंख्यकों के प्रावधान, SC/ST और OBC आरक्षण, अत्याचार निवारण अधिनियम, तथा राष्ट्रीय व राज्य आयोग। |
| 3 | Distribution of Legislative Powers — between the Union and the State; administrative and financial relations between the Union and the States; powers and functions of constitutional bodies; powers and functions of the Governor, Council of Ministers and Cabinet; judicial remedies (विधायी शक्तियों का वितरण) | संघवाद यहाँ सिद्धांत नहीं, चलती हुई मशीन है — किसके पास कौन-सी शक्ति है और ख़र्च कौन उठाता है। केंद्र-राज्य प्रशासनिक व वित्तीय संबंध, संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, राज्यपाल व मंत्रिपरिषद के कार्य, और न्यायिक उपचार। |
| 4 | Unicameral and Bicameral legislations — functions and crisis of accountability; delegated legislation; legislative procedure and committees of legislature; legislative and judicial control over delegated legislation; judicial review of administrative action; Comptroller and Auditor General of India; Attorney General of India (एकसदनीय और द्विसदनीय विधायिकाएँ) | एक ही प्रविष्टि में 'delegated legislation' दो बार आता है, और उस पर न्यायिक नियंत्रण तीसरी बार — यह दोहराव आयोग का इशारा है कि सवाल कहाँ से बनते हैं। जवाबदेही का संकट, विधायी प्रक्रिया और समितियाँ, प्रत्यायोजित विधान पर विधायी व न्यायिक नियंत्रण, प्रशासनिक कार्रवाई की न्यायिक समीक्षा, तथा नियंत्रक-महालेखापरीक्षक और महान्यायवादी। |
| 5 | Important Amendments of the Constitution — basic structure theory; emergency provisions and decentralization; Panchayathi raj; Seventy-third and Seventy-fourth amendments, etc. (संविधान के महत्वपूर्ण संशोधन) | सिर्फ़ दो संशोधन नंबर सहित लिखे गए हैं — तिहत्तरवाँ और चौहत्तरवाँ — और दोनों स्थानीय शासन के हैं। मूल ढाँचे का सिद्धांत, आपातकालीन प्रावधान, विकेंद्रीकरण और पंचायती राज भी इसी में। |
| 6 | Welfare mechanism in India — Directive Principles of State Policy and their relationships; Right to Property; Election Commission; Public Service Commissions; Women's Commission; National and State Minorities Commission; Backward Commission; Human Rights Commission; Information Commission; Finance Commission; Planning Commission; National Development Council (भारत में कल्याण-तंत्र) | एक ही प्रविष्टि में दस आयोग और परिषदें। हर एक की बनावट और असल अधिकार अलग से याद रखिए — निर्वाचन आयोग, लोक सेवा आयोग, महिला आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग, मानवाधिकार आयोग, सूचना आयोग, वित्त आयोग, योजना आयोग और राष्ट्रीय विकास परिषद। |
| 7 | Services under the Union and State — constitutional provisions relating to Government and public servants (संघ और राज्य की सेवाएँ) | सेक्शन की सबसे छोटी प्रविष्टि — और वही जो उस नौकरी का वर्णन करती है जिसके लिए आप आवेदन कर रहे हैं। सरकार और लोक सेवकों से जुड़े संवैधानिक प्रावधान। |
सामान्य अध्ययन 2, सेक्शन III — लोक प्रशासन, प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय संबंध ↑
सात यूनिट — सात ही लिखा है — और आख़िरी यूनिट अकेले बहुत बड़ा बोझ उठा रही है।
यूनिट 1 से 6 तक लोक प्रशासन और प्रबंधन है: विषय की प्रकृति, दफ़्तर की संरचना, संगठनात्मक व्यवहार, कार्यात्मक प्रबंधन, नाम-दर-नाम गिनाई गई प्रबंधन तकनीकें, और लोकायुक्त सहित प्रशासनिक सुधार। अकेली यूनिट 5 में PERT, CPM, PIME, POSD-CORB, SWOT और PDCA चक्र हैं — छह संक्षिप्त नाम, और हर एक एक परिभाषा-योग्य तकनीक।
फिर यूनिट 7 आती है और अपने भीतर पूरा अंतरराष्ट्रीय संबंध समेट लेती है: संयुक्त राष्ट्र का उद्भव और उसके अंग, शांति अभियान, निरस्त्रीकरण, विशेष एजेंसियाँ, एक दर्जन से ज़्यादा दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठन, विकासशील देशों की भूमिका, तथा भारत और उसके पड़ोसी। एक ही क्रमांकित प्रविष्टि, जो असल में अपने आप में एक पूरा पेपर है। इस सेक्शन का समय बाँटते वक़्त यह बात ध्यान में रखिए।
| क्रम | आयोग के अपने शब्दों में विषय | तैयारी के लिहाज़ से इसका मतलब |
|---|---|---|
| 1 | Private and Public Administration — its role in society; public administration as an art and a science; New Public Administration and New Public Management; responsive administration; difference between administration and management; difference between public and private administration (निजी और लोक प्रशासन) | दो अंतर साफ़-साफ़ पूछे गए हैं, इसलिए दोनों का तैयार उत्तर होना चाहिए — प्रशासन बनाम प्रबंधन, और लोक बनाम निजी प्रशासन। साथ में समाज में इसकी भूमिका, कला या विज्ञान का सवाल, नया लोक प्रशासन और नया लोक प्रबंधन। |
| 2 | Structure of Organisation — personnel, financial, administrative law, maintenance of law and order; administration for welfare; issues of areas in Indian administration; development administration (संगठन की संरचना) | यहाँ 'संरचना' का मतलब संगठन-चार्ट नहीं, सरकारी दफ़्तर के काम करने वाले हिस्से हैं — कार्मिक, वित्त, प्रशासनिक विधि, क़ानून-व्यवस्था, कल्याण प्रशासन और विकास प्रशासन। |
| 3 | Organisational Behaviour and Management Concepts — organisation structure, systems, processes, strategies, policies and objectives; decision making; communication; centralisation, decentralisation, delegation of authority, responsibility, control (संगठनात्मक व्यवहार और प्रबंधन अवधारणाएँ) | शुद्ध प्रबंधन सिद्धांत। प्राधिकार का प्रत्यायोजन, उत्तरदायित्व और नियंत्रण — तीनों अलग-अलग चीज़ों के रूप में गिनाए गए हैं। साथ में प्रणालियाँ, प्रक्रियाएँ, रणनीतियाँ, नीतियाँ, निर्णय-प्रक्रिया, संचार तथा केंद्रीकरण-विकेंद्रीकरण। |
| 4 | Formal and informal Organisation — functional management: finance, HR, marketing, production, leadership and motivation (औपचारिक और अनौपचारिक संगठन) | छोटी-सी प्रविष्टि, जो चुपचाप प्रबंधन-संस्थानों वाला कार्यात्मक प्रबंधन ले आती है — वित्त, मानव संसाधन, विपणन, उत्पादन, नेतृत्व और अभिप्रेरणा। |
| 5 | Management Tools and Techniques — decision making under uncertainty; PERT and CPM; PIME; POSD-CORB; SWOT Analysis; performance standards and appraisal; PDCA Cycle; personnel policies; manpower policy and planning; training and development; conflict management; management of change and development; team building; quality tools (brain storming, nominal group technique, pareto chart, fishbone diagram and process chart) (प्रबंधन के उपकरण और तकनीकें) | पूरे सिलेबस में सबसे ज़्यादा संक्षिप्त नामों वाली प्रविष्टि। हर संक्षिप्त नाम एक परिभाषा-योग्य तकनीक है और हर एक के लिए एक पंक्ति याद रखना काम आता है — PERT, CPM, PIME, POSD-CORB, SWOT, PDCA, तथा गुणवत्ता उपकरण जैसे पारेटो चार्ट और फ़िशबोन आरेख। |
| 6 | Administrative Reforms, Ethics and Values in Public Service — public relations; good governance; accountability and control; programme monitoring and evaluation; Lokpal and Lokayukta; redressal of citizens' grievances; district administration and Panchayathi Raj system; law and order and development functions; development programmes; welfare programmes for SC/ST and women; people's participation; Administrative Reforms Commissions, Central and State (प्रशासनिक सुधार, लोक सेवा में नैतिकता और मूल्य) | यहाँ लोकायुक्त का नाम है — और कर्नाटक में यह संस्था बाक़ी ज़्यादातर राज्यों से ज़्यादा मायने रखती है। सुशासन, जवाबदेही, कार्यक्रम निगरानी व मूल्यांकन, नागरिक शिकायत निवारण, ज़िला प्रशासन, पंचायती राज तथा केंद्र व राज्य के प्रशासनिक सुधार आयोग। |
| 7 | United Nations and Specialised Agencies, other International Organisations and Agencies — origin and development of the UNO; role in international relations; General Assembly, Security Council, Economic and Social Council, Trusteeship Council, International Court of Justice; UN and peace keeping operations; UN and disarmament; future of the UN; special agencies like WHO, ILO, FAO etc.; international organisations like IMF, World Bank, ADB, WTO, EU, ASEAN, SAARC, AU, NATO, NAM, OPEC, G-8, IAEA etc.; role of developing countries in international relations; India and her neighbours (संयुक्त राष्ट्र और विशेष एजेंसियाँ) | मुख्य परीक्षा का पूरा अंतरराष्ट्रीय संबंध वाला हिस्सा इसी एक प्रविष्टि में ठूँसा हुआ है — संयुक्त राष्ट्र के पाँच अंग और एक दर्जन से ज़्यादा दूसरे संगठन। महासभा, सुरक्षा परिषद, आर्थिक व सामाजिक परिषद, न्यास परिषद, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय, शांति अभियान, निरस्त्रीकरण, तथा भारत और उसके पड़ोसी। |
सामान्य अध्ययन 3, सेक्शन I — विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी ↑
इस सेक्शन के लिए भी सिलेबस कोई यूनिट-संख्या नहीं बताता; वह सात क्रमांकित प्रविष्टियाँ छापता है, और सात की गिनती हमारी अपनी है।
यहाँ का ढाँचा वह नहीं है जिसकी उम्मीद ज़्यादातर उम्मीदवार विज्ञान वाले सेक्शन से करते हैं। सिर्फ़ प्रविष्टि 1 से 4 तक ही विज्ञान-प्रौद्योगिकी जैसी दिखती हैं। प्रविष्टि 5, 6 और 7 — Related Perceptions, Knowledge Society और Rural Upliftment — असल में इस बारे में निबंध हैं कि तकनीक किसलिए है। 'Technology with a Human Face' कोई तथ्य नहीं, एक वाक्यांश है, और वह आपसे पक्ष लेने को कहता है।
उम्र को लेकर एक ईमानदार चेतावनी। यह सेक्शन भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के रूप में Chandrayana-1 का नाम लेता है — इसी से पता चलता है कि सिलेबस कब लिखा गया था। विषय है 'भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी', इसलिए गिनाए गए कार्यक्रमों को न्यूनतम मानिए और मौजूदा कार्यक्रम अपने साथ लाइए — सिलेबस खुद 'and future programme' लिखता है।
| क्रम | आयोग के अपने शब्दों में विषय | तैयारी के लिहाज़ से इसका मतलब |
|---|---|---|
| 1 | Basics of Science and Technology — classical and emerging areas of science and technology; value addition by science and technology; current developments in India and the importance of science and technology as an engine for national development; industrial development and urbanization; national policy of science and technology and changes in policy from time to time; technology missions; ICT — basics of computers, communication, telephone and television; broadband, internet and web; IT industries, BPO, economic and employment growth; e-governance, e-commerce and e-learning; IT and rural applications; digital divide and its prevention; computers in mass media (विज्ञान और प्रौद्योगिकी की बुनियाद) | एक ही प्रविष्टि में नीति भी और नट-बोल्ट भी — राष्ट्रीय विज्ञान-प्रौद्योगिकी नीति के बग़ल में यह भी कि ब्रॉडबैंड असल में है क्या। शास्त्रीय व उभरते क्षेत्र, प्रौद्योगिकी मिशन, सूचना-संचार प्रौद्योगिकी की बुनियाद, IT उद्योग व BPO, ई-गवर्नेंस, ई-कॉमर्स, ई-लर्निंग और डिजिटल खाई। |
| 2 | SPACE Science and Technology — a brief history of global space programmes and current space programmes; space programme in India: INSAT, IRS systems, EDUSAT and Chandrayana-1 etc. and future programmes; application of space technology in India with special reference to educational, agricultural and other rural developmental activities (अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी) | भारत के चार कार्यक्रम नाम से हैं — INSAT, IRS, EDUSAT और Chandrayana-1। ध्यान रखिए कि यह सिलेबस उस समय लिखा गया जब चंद्रयान-1 ही नवीनतम था, इसलिए इसे न्यूनतम मानिए, अधिकतम नहीं। शिक्षा, कृषि और ग्रामीण विकास में अंतरिक्ष तकनीक का उपयोग भी इसी में। |
| 3 | Energy Resources — Indian energy scenario: hydel, thermal, nuclear and renewable, their potential, harnessing and options; importance of renewable resources — solar, wind, small/mini/micro hydel, biomass, waste based, geothermal, tidal, hydrogen and fuel cells; enabling legislations, financial and procedural incentives, and business opportunities for investors (ऊर्जा संसाधन) | नवीकरणीय ऊर्जा को आठ नामों में बाँटा गया है, और प्रविष्टि भौतिकी पर नहीं, क़ानून और निवेश पर ख़त्म होती है। सौर, पवन, लघु-सूक्ष्म जल, बायोमास, अपशिष्ट-आधारित, भूतापीय, ज्वारीय तथा हाइड्रोजन व ईंधन सेल; और निवेशकों के लिए प्रोत्साहन व अवसर। |
| 4 | Disasters, Pests and Pollution — climatic change: floods, cyclone, tsunami, natural and manmade disasters and disaster management; crop science in India, fertilizers, control of pests and crop diseases; safe drinking water and supply; sanitation and waste disposal; urbanization, industrialization and pollution control (आपदाएँ, कीट और प्रदूषण) | आपदा, कृषि और स्वच्छता — तीनों को एक ही प्रविष्टि में समेट दिया गया है, जो असामान्य संयोजन है और इसी वजह से ध्यान देने लायक़ है। बाढ़, चक्रवात, सुनामी, प्राकृतिक व मानव-निर्मित आपदाएँ और आपदा प्रबंधन; उर्वरक, कीट व फ़सल रोग नियंत्रण; सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता और अपशिष्ट निपटान। |
| 5 | Related Perceptions — universalizing science and technology literacy; technology with a human face; Human Development Index (HDI); contribution to growth of GDP; facing global competition; preservation and promotion of culture and indigenous knowledge (संबंधित दृष्टिकोण) | यह दार्शनिक प्रविष्टि है। 'Technology with a human face' कोई विषय नहीं, एक वाक्यांश है — और यह तर्क माँगता है, तथ्य नहीं। विज्ञान-साक्षरता का सार्वभौमीकरण, मानव विकास सूचकांक, GDP में योगदान, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, तथा संस्कृति और देशज ज्ञान का संरक्षण। |
| 6 | Knowledge Society — human capital, its power, imparting education, skill and values; role of knowledge for economic growth, social development, cultural enrichment and political empowerment; achieving goals around knowledge — eradication of poverty, universal primary education, gender equality (ज्ञान समाज) | अंत में तीन लक्ष्य नाम से दिए गए हैं, और वे पहचाने-जाने वाले विकास लक्ष्य हैं — ग़रीबी उन्मूलन, सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा और लैंगिक समानता। साथ में मानव पूँजी, कौशल व मूल्य, तथा आर्थिक वृद्धि और राजनीतिक सशक्तीकरण में ज्ञान की भूमिका। |
| 7 | Rural Upliftment and Science & Technology — advanced infrastructure in rural areas, establishing physical, electronic, knowledge and economic connectivity; regional language usage in ICT; horticulture — hybrid seed production with R&D, setting up fruit and vegetable processing plants, packaging and marketing; agro food processing — forming village clusters and establishing food storage, food processing, food packaging and marketing; bio-fuel cultivation and extraction; scientific water harvesting (ग्रामीण उत्थान और विज्ञान-प्रौद्योगिकी) | चार तरह की कनेक्टिविटी नाम से हैं — भौतिक, इलेक्ट्रॉनिक, ज्ञान और आर्थिक। असल में यह प्रविष्टि PURA वाले विचार को तकनीक की भाषा में कहती है। सूचना-प्रौद्योगिकी में क्षेत्रीय भाषा, बाग़वानी व संकर बीज, फल-सब्ज़ी प्रसंस्करण, ग्राम-समूह बनाकर खाद्य भंडारण व प्रसंस्करण, जैव-ईंधन तथा वैज्ञानिक जल संचयन। |
सामान्य अध्ययन 3, सेक्शन II — प्राकृतिक, जीव और कृषि विज्ञान, स्वास्थ्य और स्वच्छता, पूरी सात यूनिट ↑
सात यूनिट — सात ही लिखा है — और इनमें से पाँच किसी न किसी रूप में कृषि हैं: कृषि विज्ञान, बाग़वानी और रेशम उत्पादन, जैव प्रौद्योगिकी, पशुपालन, तथा कृषि नीति और व्यापार।
यह संयोग नहीं, कर्नाटक वाला संकेत है। यूनिट 3 का आधा हिस्सा रेशम उत्पादन को मिला है, और सिलेबस वहाँ भारत तथा कर्नाटक — दोनों में रेशम उत्पादन के महत्व को नाम लेकर पूछता है। यूनिट 5 में AMUL और KMF — दोनों का नाम है। यूनिट 6 में राष्ट्रीय और कर्नाटक राज्य की कृषि नीतियाँ अगल-बग़ल रखी गई हैं।
यूनिट 7, यानी Health and Hygiene, सबसे अलग और सबसे घनी है: शरीर के पाँच तंत्र, AYUSH पद्धतियाँ, तीन राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम, रोगों की चार श्रेणियाँ, दस बीमारियाँ नाम सहित, और तीन ख़ास टीकों का उत्पादन। अगर आप यूनिट के हिसाब से दोहराने का समय बाँट रहे हैं, तो इसे उसके हिस्से से ज़्यादा समय चाहिए।
| क्रम | आयोग के अपने शब्दों में विषय | तैयारी के लिहाज़ से इसका मतलब |
|---|---|---|
| 1 | Natural Science — plants: crop plants, forest species, medicinal and aromatic plants, usefulness of plants in human affairs, photosynthesis, transpiration, harmful plants; common classification of animals: domestic and wild animals, usefulness of animals in human affairs; microorganisms: common bacteria, virus, fungi and their beneficial and harmful effects on mankind (प्राकृतिक विज्ञान) | पौधे, जानवर और सूक्ष्मजीव — तीनों के बारे में शुद्ध जीव विज्ञान नहीं, बल्कि उपयोग और नुक़सान के हिसाब से पूछा गया है। फ़सली पौधे, वन प्रजातियाँ, औषधीय व सुगंधित पौधे, प्रकाश संश्लेषण, वाष्पोत्सर्जन, हानिकारक पौधे; पालतू व वन्य जीव; तथा सामान्य जीवाणु, विषाणु और कवक। |
| 2 | Agriculture Science — agriculture scenario and importance of agriculture in the national and state economy; crop production and protection; chemical fertilizers and vermi compost; cost benefit and investment analysis of agricultural enterprises; programmes for production and productivity enhancement — green, white, yellow and blue revolutions; recent trends in organic farming and farm mechanization; farming systems and sustainability; agro-processing and agro-based industries; post-harvest technology and value addition; management of land and water resources (कृषि विज्ञान) | चार क्रांतियाँ रंगों के नाम से — हरित, श्वेत, पीली और नीली। कौन-सा रंग किस उपज का है, यह मानक सवाल है। साथ में फ़सल उत्पादन व सुरक्षा, रासायनिक उर्वरक और वर्मी कंपोस्ट, लागत-लाभ विश्लेषण, जैविक खेती, कृषि यंत्रीकरण, कटाई-उपरांत तकनीक तथा भूमि-जल संसाधन प्रबंधन। |
| 3 | Horticulture and Sericulture — importance of horticulture: floriculture, vegetables, fruits, plantation crops, spices, aromatic and medicinal plants; hi-tech horticulture (green/poly house cultivation); post-harvest management and value addition; special promotional programmes for horticulture development; sericulture: importance of sericulture in India and Karnataka, distribution of mulberry and non-mulberry sericulture (area, production and productivity across States), cocoon production (बाग़वानी और रेशम उत्पादन) | रेशम उत्पादन को प्रविष्टि का आधा हिस्सा दिया गया है, और उसमें भारत के साथ-साथ कर्नाटक का नाम अलग से है — यह कर्नाटक वाला संकेत सिलेबस में ही लिखा हुआ है। पुष्प, सब्ज़ी, फल, बाग़ानी फ़सलें, मसाले, औषधीय पौधे; हाई-टेक बाग़वानी; तथा शहतूत व ग़ैर-शहतूत रेशम का वितरण और कोसा उत्पादन। |
| 4 | Initiatives in Biotechnology — concept of biotechnology; introduction and application of genetic engineering and stem cell research; molecular breeding and marker assisted selection; transgenic plants (genetically modified) and their beneficial and harmful effects on environment and society; biotechnology in agriculture (bio-fertilizers, bio-pesticides, bio-fuels, tissue culture, cloning); food biotechnology, food safety and microbial standards, food quality standards, food laws and regulations (जैव प्रौद्योगिकी की पहलें) | प्रविष्टि जीएम फ़सलों के लाभ और नुक़सान — दोनों माँगती है, यानी उत्तर एकतरफ़ा नहीं, तर्कयुक्त होना चाहिए। आनुवंशिक अभियांत्रिकी, स्टेम सेल शोध, आणविक प्रजनन, ट्रांसजेनिक पौधे, जैव-उर्वरक, जैव-कीटनाशक, ऊतक संवर्धन, क्लोनिंग तथा खाद्य सुरक्षा मानक व क़ानून। |
| 5 | Animal Husbandry (veterinary, dairy and fishery sciences) — importance of livestock in the national and state economy; important exotic and Indian breeds of cattle, buffalo, sheep, goat, swine and poultry; milk production management and dairy development; milk cooperative unions and their role in the rural economy — AMUL, KMF; fisheries resources in India: marine fisheries resources and potential, exclusive economic zone of India, coastal aquaculture and mariculture; inland water resources, commercially important fishes, responsible fishing; ornamental fish production; value addition of livestock products and quality control (पशुपालन — पशु-चिकित्सा, डेयरी और मत्स्य विज्ञान) | दो सहकारी संस्थाएँ नाम से हैं — AMUL और KMF — और छह पशु प्रजातियाँ अलग-अलग गिनाई गई हैं। विदेशी व भारतीय नस्लें, दुग्ध उत्पादन प्रबंधन, डेयरी विकास, समुद्री व अंतर्देशीय मत्स्य संसाधन, अनन्य आर्थिक क्षेत्र, तटीय जलकृषि, ज़िम्मेदार मछली पकड़ना तथा सजावटी मछली उत्पादन। |
| 6 | Agriculture development policies, Programmes and trade — salient features of national and Karnataka state agricultural policies; Agriculture Price Policy; National Seed Policy; Agricultural Credit Policy; National Agricultural Research System (NARS); farmers welfare programmes in India; farm women development programmes; agriculture under Five Year Plans; development and strengthening of agricultural marketing infrastructure — grading and standardization; crop insurance schemes — National Agricultural Insurance Scheme (NAIS), Weather Based Crop Insurance Scheme (WBCIS); food security; National Watershed Development Programme; export potential of agriculture, horticulture and livestock products; commercialization and globalization of agriculture — WTO, AoA (Agreement on Agriculture) (कृषि विकास नीतियाँ, कार्यक्रम और व्यापार) | पूरी प्रविष्टि में नीतियाँ और योजनाएँ नाम सहित हैं। दो फ़सल बीमा योजनाएँ पूरे नाम और संक्षिप्त रूप दोनों में दी गई हैं — NAIS और WBCIS। साथ में कृषि मूल्य नीति, राष्ट्रीय बीज नीति, कृषि ऋण नीति, NARS, किसान कल्याण कार्यक्रम, खाद्य सुरक्षा, राष्ट्रीय जलग्रहण विकास कार्यक्रम तथा WTO और कृषि पर समझौता। |
| 7 | Health and Hygiene — human digestive, circulatory, respiratory, excretory and reproductive systems; Allopathic, Indian System of Medicine, Naturopathy and Yoga (AYUSH), NRHM, National HIV Programme, Tuberculosis programme, P and SM (Preventive and Social Medicine); diseases — communicable, epidemic, endemic and vector borne; basic knowledge of infections caused by different groups of microorganisms — gastroenteritis, cholera, tuberculosis, malaria, viral infections, HIV, encephalitis, chikungunya, bird flu, dengue; preventive measures during outbreaks; vaccines, introduction to immunity, production of DPT, rabies and hepatitis vaccines; application of immunological methods in diagnosis; health awareness programmes (स्वास्थ्य और स्वच्छता) | दस बीमारियाँ नाम लेकर गिनाई गई हैं, साथ में शरीर के पाँच तंत्र और तीन राष्ट्रीय कार्यक्रम। पाचन, रक्त-परिसंचरण, श्वसन, उत्सर्जन और प्रजनन तंत्र; एलोपैथी, भारतीय चिकित्सा पद्धति, प्राकृतिक चिकित्सा और योग; संचारी, महामारी, स्थानिक तथा वाहक-जनित रोग; टीके, प्रतिरक्षा और प्रकोप के समय बचाव के उपाय। |
सामान्य अध्ययन 3, सेक्शन III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी, पूरी छह यूनिट ↑
छह यूनिट — छह ही लिखा है। इनमें से पाँच में 'any other related current issues' वाक्यांश आता है, यानी सिलेबस लिखित रूप में बता रहा है कि यह सेक्शन जानबूझकर खुला रखा गया है और समसामयिक घटनाएँ इसी के भीतर आती हैं।
जो हिस्सा उम्मीदवार सबसे ज़्यादा छोड़ देते हैं, वह क़ानून है। यूनिट 4 में Environment Protection Act, वायु और जल प्रदूषण नियंत्रण क़ानून तथा Water Pollution Cess Act — सबके नाम हैं। यहाँ प्रदूषण जितना विज्ञान का विषय है, उतना ही क़ानून का भी।
यूनिट 5 का शीर्षक उसकी सामग्री से मेल नहीं खाता — नाम है 'Role of Information Technology in Environment and Human Health', पर उसके नीचे गिनाया सब कुछ वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दे हैं। इसलिए शीर्षक नहीं, सूची पढ़िए।
| क्रम | आयोग के अपने शब्दों में विषय | तैयारी के लिहाज़ से इसका मतलब |
|---|---|---|
| 1 | Environmental Segments: promotion and protection — forest conservation and environmentalism; protection of wild life, Project Tiger, national parks and sanctuaries; impact of mining on forest and environment; Red Data Book: endangered species; eco tourism and any other related current issues (पर्यावरणीय खंड) | नाम से दिए गए उपकरण — प्रोजेक्ट टाइगर और रेड डेटा बुक। 'any other related current issues' वाक्यांश इस पूरे सेक्शन में बार-बार आता है और इसे खुला रखता है। वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा, राष्ट्रीय उद्यान व अभयारण्य, खनन का असर तथा पर्यावरण-पर्यटन। |
| 2 | Natural Resources: forest — types and conservation of forest and forest resources; water resources — flood and drought occurrences, water resource management; land resources; rain water harvesting; infrastructure development — dams, roads, rails, bridges, industry, urbanization and waste water management; acquisition and rehabilitation and other issues due to human interventions and any other related current issues (प्राकृतिक संसाधन) | भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास यहीं आते हैं — इसलिए यह प्रविष्टि संसाधनों जितनी ही लोगों के बारे में है। वन के प्रकार व संरक्षण, बाढ़-सूखा, जल संसाधन प्रबंधन, वर्षा जल संचयन, तथा बाँध-सड़क-रेल-पुल और अपशिष्ट जल प्रबंधन। |
| 3 | Eco System and Biodiversity — ecology: basic concepts of ecology, eco system, food chain; biodiversity and its conservation; hot spots of biodiversity; threats to diversity; forest sustainable development and management; any other related current issues; IPR (पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता) | अंत में बिना किसी व्याख्या के 'IPR' जोड़ा गया है — इसे जैविक संसाधनों के संदर्भ में बौद्धिक संपदा के रूप में पढ़िए। पारिस्थितिकी की बुनियादी अवधारणाएँ, खाद्य शृंखला, जैव विविधता संरक्षण, जैव विविधता के हॉट स्पॉट तथा विविधता पर मंडराते ख़तरे। |
| 4 | Environment Pollution and Solid Waste Management — air pollution, water pollution, soil pollution, noise pollution and remedies; solid waste management: types, factors affecting solid waste generation, impact of solid waste, recycling and reuse; any other related current issues; Environment Protection Act; Air (Prevention and Control of Pollution); Water (Prevention and Control of Pollution); Water Pollution Cess Act (पर्यावरण प्रदूषण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन) | प्रविष्टि चार क़ानूनों के नाम पर ख़त्म होती है — यानी यहाँ प्रदूषण का विज्ञान ही नहीं, प्रदूषण का क़ानून भी परीक्षा-योग्य है। वायु, जल, मृदा और ध्वनि प्रदूषण तथा उनके उपाय; ठोस अपशिष्ट के प्रकार, उसका असर, पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग। |
| 5 | Role of Information Technology in Environment and Human Health — global environmental issues like climate change, acid rains, global warming, wasteland reclamation, watershed management, watershed approach for sustainable development, linking of rivers, water crisis; any other related current issues (पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका) | शीर्षक सूचना प्रौद्योगिकी कहता है, पर नीचे गिनाई गई सामग्री वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दों की है — इसलिए शीर्षक नहीं, सूची पढ़िए। जलवायु परिवर्तन, अम्ल वर्षा, वैश्विक तापन, बंजर भूमि सुधार, जलग्रहण प्रबंधन, नदी जोड़ो और जल संकट। |
| 6 | State community-civil society interface; joint forest management system — community participation; development, displacement and rehabilitation; disaster management; sustainable forest development; flood, earthquake, drought, tsunami; global warming — ozone layer, CFC, carbon credit (राज्य, समुदाय और नागरिक समाज का अंतर्संबंध) | सेक्शन विज्ञान पर नहीं, शासन पर ख़त्म होता है — फ़ैसला कौन करता है और विकास की क़ीमत कौन चुकाता है। संयुक्त वन प्रबंधन और सामुदायिक भागीदारी, विकास-विस्थापन-पुनर्वास, आपदा प्रबंधन, तथा ओज़ोन परत, CFC और कार्बन क्रेडिट। |
सामान्य अध्ययन 4 — नैतिकता, सत्यनिष्ठा और अभिवृत्ति, तीनों सेक्शन ↑
पेपर-5 बाक़ी हर सामान्य अध्ययन पेपर की तरह 250 अंकों का है, और उन्हीं की तरह इसमें तीन सेक्शन हैं। जो चीज़ इसमें नहीं है, वह है उतनी मात्रा में सिलेबस।
तीनों सेक्शन लंबाई में बेहद असमान हैं। नैतिकता पाँच अनुच्छेदों में फैली है। सत्यनिष्ठा सिर्फ़ एक वाक्य है जिसमें आठ गुण गिनाए गए हैं। अभिवृत्ति तीन छोटी प्रविष्टियाँ हैं। फिर भी यह पेपर उतने ही 250 अंकों का है जितना सामान्य अध्ययन 1, जिसके अकेले पहले सेक्शन में छह यूनिट और दर्जनों प्रविष्टियाँ हैं।
यही असंतुलन इसका असली मतलब है। यह पेपर यह नहीं जाँचता कि आपने कितना पढ़ा है; यह जाँचता है कि दबाव में आप कोई पक्ष लेकर उसे लागू कर सकते हैं या नहीं। सिलेबस की आख़िरी पंक्ति — 'Case studies of the above issues' — पूरे पेपर पर लागू होने वाला निर्देश है। उससे ऊपर का सब कुछ शब्दावली है; असली परीक्षा केस स्टडी है।
तीनों सेक्शनों में पाँच, एक और तीन प्रविष्टियों की गिनती हमारी अपनी है। सिलेबस इन सेक्शनों का पाठ बिना क्रमांक के छापता है।
| Section-I: Ethics (सेक्शन I: नैतिकता) | आयोग के अपने शब्दों में विषय | तैयारी के लिहाज़ से इसका मतलब |
|---|---|---|
| 1 | Essence, determinants and consequences of ethics in human action; dimensions of ethics; ethics in private and public relationships (नैतिकता का सार, निर्धारक और परिणाम) | यह परिभाषा वाली शुरुआत है। पहली ही पंक्ति से निजी और सार्वजनिक संबंधों में अंतर किया गया है, तथा नैतिकता के आयाम गिनाए गए हैं। |
| 2 | Ethics in public administration, status and problems; ethical dilemmas in government and private institutions; laws, rules, regulations and conscience as source of ethical guidance (लोक प्रशासन में नैतिकता) | नैतिक मार्गदर्शन के चार स्रोत नाम से हैं, और अंतरात्मा को जानबूझकर तीन क़ानूनी स्रोतों के साथ रखा गया है — क़ानून, नियम, विनियम और अंतरात्मा। सरकारी व निजी संस्थाओं की नैतिक दुविधाएँ भी इसी में। |
| 3 | Accountability and ethical governance; strengthening of ethical and moral values in governance; ethical issues in international relations and funding; corporate governance (जवाबदेही और नैतिक शासन) | नैतिकता का दायरा यहाँ अंतरराष्ट्रीय संबंधों, वित्तपोषण और कंपनियों तक फैल जाता है। शासन में नैतिक व नैतिक-मूल्यों को मज़बूत करना तथा कॉर्पोरेट गवर्नेंस इसी में आते हैं। |
| 4 | Concept of public service; philosophical basis of governance; information sharing and transparency in government; Right to Information; codes of ethics; codes of conduct; citizen charters; work culture; quality of service delivery; utilization of public fund; challenges of corruption (लोक सेवा की अवधारणा) | 'Codes of ethics' और 'codes of conduct' अलग-अलग गिनाए गए हैं — ये एक चीज़ नहीं हैं, और यही अंतर परीक्षा में पूछा जा सकता है। शासन का दार्शनिक आधार, सूचना का अधिकार, पारदर्शिता, नागरिक चार्टर, कार्य संस्कृति, सेवा की गुणवत्ता, सार्वजनिक धन का उपयोग और भ्रष्टाचार की चुनौतियाँ। |
| 5 | Human values — lessons from the lives and teachings of great leaders, reformers and administrators; role of family, society and educational institutions in inculcating values (मानव मूल्य) | मूल्यों के तीन स्रोत नाम से दिए गए हैं — परिवार, समाज और शैक्षिक संस्थाएँ। और नेताओं व सुधारकों के साथ प्रशासकों को भी गिना गया है, जो इस पद के लिहाज़ से अर्थपूर्ण है। |
| Section-II: Integrity (सेक्शन II: सत्यनिष्ठा) | आयोग के अपने शब्दों में विषय | तैयारी के लिहाज़ से इसका मतलब |
|---|---|---|
| 1 | Integrity, impartiality and non-partisanship, objectivity, dedication to public service, empathy, tolerance and compassion towards the weaker sections (सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और ग़ैर-पक्षपात) | पूरा सेक्शन II यही एक वाक्य है। आठ गुण नाम से गिनाए गए हैं — सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता, ग़ैर-पक्षपात, वस्तुनिष्ठता, लोक सेवा के प्रति समर्पण, सहानुभूति, सहिष्णुता और कमज़ोर वर्गों के प्रति करुणा — और छोटा होने के बावजूद इस सेक्शन का अंक-भार बाक़ी सेक्शनों जितना ही है। |
| Section-III: Aptitude (सेक्शन III: अभिवृत्ति) | आयोग के अपने शब्दों में विषय | तैयारी के लिहाज़ से इसका मतलब |
|---|---|---|
| 1 | Aptitude and foundational values for civil service; content, structure and function, its relation with thoughts and behaviour; moral and political attitudes; social influence and persuasion (सिविल सेवा के लिए अभिवृत्ति और आधारभूत मूल्य) | यहाँ 'attitude' मनोविज्ञान वाली परिभाषा में है — उसकी अंतर्वस्तु, संरचना और कार्य — गणित वाली अभिरुचि नहीं। विचार व व्यवहार से उसका संबंध, नैतिक तथा राजनीतिक अभिवृत्तियाँ, सामाजिक प्रभाव और अनुनय। |
| 2 | Aptitude and foundational values for civil service; emotional intelligence and their utilities and application in administration and governance; contributions of moral thinkers from India and the world (भावनात्मक बुद्धिमत्ता और नैतिक विचारक) | भावनात्मक बुद्धिमत्ता तथा प्रशासन व शासन में उसका उपयोग; और भारत तथा दुनिया — दोनों के नैतिक विचारक। सिलेबस सिर्फ़ भारतीय विचारक नहीं माँगता, यह ध्यान रखिए। |
| 3 | Case studies of the above issues (उपरोक्त विषयों के केस स्टडी) | एक ही पंक्ति, पर यही पूरे पेपर का उत्तर लिखने का तरीक़ा बदल देती है — यह सेक्शन रटने का नहीं, लागू करने का है। |
आधिकारिक सिलेबस PDF में अब भी वे पेपर क्यों दिखते हैं जो रह ही नहीं गए ↑
यह बात साफ़-साफ़ कहना ज़रूरी है, क्योंकि यही उम्मीदवारों के असली महीने खा जाती है। आयोग की अपनी वेबसाइट पर मौजूद सिलेबस PDF कोई साफ़-सुथरा सिलेबस दस्तावेज़ नहीं है। यह राजपत्र में छपी संशोधन अधिसूचनाओं का संकलन है, एक के बाद एक छपी हुई — और उनमें से कई एक-दूसरे को ही संशोधित करती हैं।
सबसे नुक़सानदेह नतीजा यह है: उस PDF में पेपर VI के लिए वैकल्पिक विषयों की पूरी सूची मौजूद है — कोड नंबर के साथ पच्चीस विषय, और चार साहित्य विकल्प। वे पेपर 2020 में हटा दिए गए थे। इस परीक्षा में अब कोई वैकल्पिक विषय है ही नहीं। जो उम्मीदवार उस PDF को खोलकर Agriculture या Sociology या Public Administration को कोड नंबर के साथ देखता है और वैकल्पिक पेपर की तैयारी शुरू कर देता है, वह एक ऐसी परीक्षा की तैयारी कर रहा है जो अब होती ही नहीं।
उसी फ़ाइल में छँटनी का पुराना 20 गुना अनुपात भी है, लिखित परीक्षा का पुराना कुल 1750 अंक भी, व्यक्तित्व परीक्षण के पुराने 200 अंक भी, और वह टिप्पणी भी जो कहती है 'All seven papers are compulsory'। इनमें से हर एक बदल चुका है, और नीचे की तालिका बताती है कि किस संशोधन से।
काम करने का नियम यह है: पैटर्न के लिए मौजूदा साल की अधिसूचना पर भरोसा कीजिए। मुख्य परीक्षा की विषय-सूचियों के लिए वही PDF आज भी इकलौता आधिकारिक स्रोत है — उन विषयों में कोई संशोधन नहीं हुआ है। उससे विषय पढ़िए, और उसके आँकड़े छोड़ दीजिए।
| संशोधन | इसने क्या बदला | पुराना आँकड़ा | नया आँकड़ा |
|---|---|---|---|
| DPAR 14 SRR 2011, दिनांक 28.09.2011 (9वाँ संशोधन) | मौजूदा दो-पेपर वाली वस्तुनिष्ठ प्रारंभिक परीक्षा तय की, और उस समय मुख्य परीक्षा की छँटनी का अनुपात भी | — | रिक्तियों का 20 गुना (अब बदल चुका है) |
| DPAR 118 SRR 2012, दिनांक 12-02-2013 (10वाँ संशोधन) | प्रारंभिक परीक्षा में ऋणात्मक अंकन लागू किया | — | ग़लत उत्तर पर अंकों का एक-चौथाई (0.25) |
| DPAR 235 SRR 2013, दिनांक 24-11-2014 (11वाँ संशोधन) | उस समय लागू मुख्य परीक्षा के ढाँचे को बदला | — | लिखित परीक्षा और व्यक्तित्व परीक्षण |
| DPAR 151 SeLoSe 2014, दिनांक 04-06-2020 | पेपर VI और पेपर VII — दोनों वैकल्पिक विषय पेपर — हटा दिए | लिखित 1750 अंक; सातों पेपर | लिखित 1250 अंक; पाँचों पेपर |
| DPAR 151 SeLoSe 2014, दिनांक 04-06-2020 | व्यक्तित्व परीक्षण के अंक घटाए | 200 अंक | 50 अंक |
| DPAR 20 SSC 2022, दिनांक 12-04-2022 | व्यक्तित्व परीक्षण के अंक फिर घटाए, और उसके साथ कुल योग भी | 50 अंक; कुल योग 1300 | 25 अंक; कुल योग 1275 |
ये दस्तावेज़ क्या नहीं बताते — और जो हम गढ़ेंगे नहीं ↑
इस बिंदु से ऊपर का सब कुछ दो आधिकारिक फ़ाइलों से आया है: kpsc.kar.nic.in/syll_GP.pdf पर मौजूद सिलेबस संकलन, जो बिना पाठ-परत वाला स्कैन किया हुआ राजपत्र है; और उसी साइट पर मौजूद 2026-27 की मौजूदा Gazetted Probationers अधिसूचना, जिसमें साफ़ द्विभाषी पाठ-परत है और जिससे परीक्षा पैटर्न लिया गया है।
स्कैन की हुई फ़ाइल को पहले चित्र के रूप में तैयार करना पड़ा, फिर अक्षर-पहचान (OCR) से पढ़ना पड़ा, और उसके बाद इस पेज की एक भी पंक्ति लिखने से पहले उसे पन्नों के चित्रों से मिलाकर हाथ से ठीक करना पड़ा। जहाँ कोई अंश भरोसे के साथ नहीं पढ़ा जा सका, उसे अनुमान से भरने के बजाय छोड़ दिया गया है और नीचे नाम लेकर बता दिया गया है।
इस पेज पर एक संख्या हमारी अपनी है, उनकी नहीं — इसलिए उसे छिपाने के बजाय यहीं बता देना ठीक है: इस पेज पर सिलेबस की 112 विषय-प्रविष्टियाँ हैं, जो प्रारंभिक सिलेबस, अर्हक अंग्रेज़ी पेपर, निबंध पेपर और सामान्य अध्ययन 1 से 4 तक के हर सेक्शन को मिलाकर गिनी गई हैं। दोनों में से कोई दस्तावेज़ ऐसा कुल योग नहीं छापता। हर अलग-अलग प्रविष्टि उन्हीं की है; सिर्फ़ गिनती हमारी है।
अब वह सूची, जिसका जवाब इन दोनों दस्तावेज़ों में नहीं है।
- परीक्षा की तारीख़ें। दोनों में से कोई भी दस्तावेज़ प्रारंभिक या मुख्य परीक्षा की तारीख़ इस तरह तय नहीं करता कि हम उसे उद्धृत करने लायक़ मानें। आयोग की अपनी साइट देखते रहिए।
- कट-ऑफ़ अंक। किसी भी दस्तावेज़ में कोई कट-ऑफ़ नहीं लिखा है। कट-ऑफ़ परीक्षा के बाद रिक्तियों और उम्मीदवारों के प्रदर्शन से बनता है; जो कोई इसे पहले से छाप रहा है, वह अनुमान लगा रहा है।
- मुख्य परीक्षा के हर विषय से कितने प्रश्न आएँगे। सिलेबस पेपर के अंक (250) और सेक्शन के अंक (80/85) देकर रुक जाता है। विषयवार प्रश्न-संख्या कहीं नहीं है, और जो तालिका ऐसा दावा करे वह किसी का अनुमान है।
- मुख्य परीक्षा के किसी पेपर का कौन-सा सेक्शन 85 अंक का है और कौन-सा 80 का। सिलेबस सबके लिए '80/85' छापता है, यह बताए बिना कि कौन-सा कौन है।
- अर्हक कन्नड़ पेपर के छह भागों के नाम। वे एक स्कैन किए हुए राजपत्र में कन्नड़ लिपि में छपे हैं; हम उन्हें भरोसे के साथ नहीं निकाल पाए, इसलिए हमने उन्हें लिखा ही नहीं।
- कोई किताबों की सूची। आयोग सिलेबस तय करता है। विषय-सूची पढ़ने की सूची नहीं होती, और किसी भी दस्तावेज़ में किसी किताब का नाम नहीं है।
- आवेदन शुल्क और पात्रता। ये उस साल की अधिसूचना में होते हैं, सिलेबस में नहीं, और हर विज्ञापन के साथ बदलते रहते हैं।
महत्वपूर्ण लिंक
FAQ — आपके सवाल, सीधे जवाब
यह परीक्षा कौन-सी संस्था कराती है?
Karnataka Public Service Commission (KPSC)
विज्ञापन संख्या क्या है?
KPSCKA/EXA1/EXMF/9/2026-EXAM-1/I/251710/2026
कुल कितने पद हैं?
319 (117 Group A, 202 Group B)
इसकी आधिकारिक वेबसाइट कौन-सी है?
kpsc.kar.nic.in
KPSC की और अपडेट
और सिलेबस
आधिकारिक स्रोत: आधिकारिक PDF ↗. कोई भी कदम उठाने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर पुष्टि ज़रूर करें।
अस्वीकरण: SarkariReady किसी सरकारी संस्था से संबद्ध नहीं है। यह लेख आधिकारिक नोटिफिकेशन के आधार पर लिखा गया है — कोई भी कदम उठाने से पहले तिथियां, फीस और पात्रता हमेशा आधिकारिक वेबसाइट पर जांच लें। कोई गलती दिखे तो हमें बताएं, हम तुरंत सुधारेंगे।
किसी एजेंट या वेबसाइट को सरकारी नौकरी के लिए पैसे न दें — शिकायत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर करें।