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JKPSC सहायक प्राध्यापक सिलेबस — चिकित्सा शिक्षा विभाग के सभी 33 पेपर

सिलेबस

यह जम्मू-कश्मीर के चिकित्सा शिक्षा विभाग में Assistant Professor पदों की वस्तुनिष्ठ लिखित परीक्षा का सिलेबस है — 123 पेज, और उसमें 33 अलग-अलग विषयों के पेपर, Anatomy से लेकर Casualty Medical Officer तक। इसमें सिर्फ़ विषय दिए हैं: न अंक, न समय, न प्रश्नों की संख्या, न negative marking।

आधिकारिक सिलेबस पेज खोलें

PDF आधिकारिक साइट पर खुलेगा। नीचे उसी सिलेबस का हर टॉपिक आसान भाषा में समझाया गया है — पढ़ने के लिए PDF खोलना ज़रूरी नहीं।

आधिकारिक सिलेबस से तैयार · आधिकारिक लिंक से पुष्टि कर सकते हैं

123 पेज का यह JKPSC दस्तावेज़ असल में है क्या ↑

अगर आप उच्च शिक्षा विभाग (Higher Education Department) के कॉलेज या विश्वविद्यालय वाले Assistant Professor पद की तैयारी कर रहे हैं, तो यह आपका सिलेबस नहीं है। यह दस्तावेज़ स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के मेडिकल शिक्षण तथा अस्पताल पदों के लिए है, और उसका अपना कवर पेज यही कहता है।

इस फ़ाइल की तारीख़ को लेकर जो उलझन है, वह सबसे पहले साफ़ कर लीजिए। JKPSC का सर्वर फ़ाइल को जो नाम देता है उसमें 17_07_2026 लिखा है — यानी यह प्रति साइट पर कब रखी गई। और स्कैन किए गए कवर पर हाथ से लिखा नोट इन्हीं पेजों को notification no. 30-PSC (DR-P) of 2022, dated 31-12-2022 का annexure बताता है। ये दोनों बातें दस्तावेज़ पर ही मौजूद हैं; कोई हमारा अनुमान नहीं है।

क्यादस्तावेज़ ख़ुद क्या दिखाता है
कहाँ प्रकाशित हैjkpsc.nic.in — जम्मू और कश्मीर लोक सेवा आयोग की वेबसाइट। सीधा लिंक इस पेज के अंत में दिया गया है।
पहले पेज पर छपा शीर्षकSYLLABUS FOR WRITTEN TEST (OBJECTIVE TYPE) FOR THE POST OF ASSISTANT PROFESSOR MEDICAL EDUCATION DEPARTMENT
सर्वर फ़ाइल को जो नाम देता हैSyllabus for Written test (Objective Type) for various posts of Assistant Professor in Health and Medical Education Department. 17_07_2026.pdf
कवर पर हाथ से लिखा नोटAnnexure to notification no. 30-PSC (DR-P) of 2022, Dated: 31-12-2022 (Page. 1-123)। यह स्कैन किए गए पहले पेज पर, छपे शीर्षक के ऊपर, हाथ से लिखा है।
लंबाई123 पेज। पहला पेज स्कैन है और उस पर हस्ताक्षर हैं; पेज 2 से 123 तक सामान्य टेक्स्ट है।
परीक्षा क्या हैलिखित परीक्षा, वस्तुनिष्ठ (objective type)। यही वाक्यांश दस्तावेज़ के शीर्षक में है और परीक्षा के स्वरूप के बारे में दस्तावेज़ बस इतना ही कहता है।
कितने विषय33 अलग-अलग विषय-खंड, जो 1 से 28 तक क्रमांकित हैं और उनमें उप-अक्षर भी हैं (8A से 8D, 13A व 13B, 18A व 18B)। पूरी सूची अगले खंड में है।
इस पेज पर विषय-प्रविष्टियाँ670 — नीचे के 33 विषय-खंडों में गिनकर। ये दोनों संख्याएँ हमारी गिनी हुई हैं; दस्तावेज़ इनमें से कोई नहीं बताता।

दस्तावेज़ का हर विषय, उसके पेज नंबर के साथ ↑

सबसे पहले इस तालिका में अपना विषय ढूँढ़िए। पेज-सीमा वही है जो दस्तावेज़ के अपने फ़ुटर में छपी है, इसलिए आप PDF खोलकर सीधे वहीं जा सकते हैं — 123 पेज स्क्रॉल करने की ज़रूरत नहीं।

आख़िरी कॉलम बताता है कि उस विषय के लिए इस पेज पर कितनी पंक्तियाँ हैं — इससे एक नज़र में दिख जाता है कि कौन-सा पेपर यूनिट की सूची भर है और कौन-सा अलग-अलग विषयों की लंबी गिनती।

क्रमविषय, जैसा दस्तावेज़ में नाम हैपेजयहाँ पंक्तियाँ
1ANATOMY1-420
2PHYSIOLOGY4-715
3BIO-CHEMISTRY7-1114
4PATHOLOGY11-1754
5MICROBIOLOGY17-197
6PHARMACOLOGY19-2217
7FORENSIC MEDICINE23-2419
8ACOMMUNITY MEDICINE (Assistant Professor / Assistant Professor I/c UTHC/RTHC) [Level-11]24-2629
8BCOMMUNITY MEDICINE (Epidemiologist-cum-Assistant Professor)26-2829
8CCOMMUNITY MEDICINE (Statistician-cum-Assistant Professor)29-3129
8DCOMMUNITY MEDICINE (Lady Medical Officer)31-3329
9GENERAL MEDICINE34-3818
10TUBERCULOSIS & RESPIRATORY DISEASES38-4127
11DERMATOLOGY, VENEREOLOGY & LEPROSY41-4314
12PSYCHIATRY43-4615
13APAEDIATRICS46-5220
13BCHILD PSYCHOLOGIST52-6278
14GENERAL SURGERY62-6773
15ORTHOPAEDICS67-6812
16OTO-RHINO-LARYNGOLOGY (ENT)68-7024
17OPHTHALMOLOGY70-7224
18AOBSTETRICS AND GYNAECOLOGY72-738
18BOBSTETRICS AND GYNAECOLOGY (Assistant Professor / Antenatal Care Incharge) and (Maternity and Child Welfare Officer) [Level-11]738
19RADIODIAGNOSIS74-766
20RADIOTHERAPY76-8541
21ANAESTHESIOLOGY85-8612
22PHYSICAL MEDICINE & REHABILITATION86-8915
23DENTISTRY89-9213
24BLOOD BANK92-9819
25HOSPITAL ADMINISTRATION98-10536
26MEDICAL RECORD OFFICER106-10810
27LIBRARIAN109-11516
28CASUALTY MEDICAL OFFICER116-12314

यह सिलेबस क्या नहीं बताता — और हम मनगढ़ंत नहीं जोड़ेंगे ↑

हमने पूरे 123 पेजों में अंक, अवधि, प्रश्न-संख्या और negative marking खोजे। कुछ नहीं मिला। परीक्षा के स्वरूप के बारे में दस्तावेज़ सिर्फ़ एक बात कहता है, और वह उसके अपने शीर्षक में है: परीक्षा लिखित और वस्तुनिष्ठ (objective type) है।

नीचे दी गई हर बात के लिए, जिस पद पर आप आवेदन कर रहे हैं उसकी JKPSC की अपनी अधिसूचना और JKPSC की वेबसाइट — यही भरोसे लायक स्रोत हैं।

  • प्रश्नों की संख्या और अंक। दस्तावेज़ किसी भी विषय के लिए इनमें से कुछ नहीं बताता।
  • पेपर की अवधि। नहीं बताई गई।
  • Negative marking। किसी भी तरफ़ कुछ नहीं लिखा — न लागू करता है, न मना करता है।
  • परीक्षा की तारीख़, एडमिट कार्ड और परिणाम की तारीख़। नहीं दी गई; सिलेबस annexure में ये होती भी नहीं।
  • Cut-off अंक और उत्तीर्ण होने का मानक। नहीं बताया गया।
  • साक्षात्कार या viva है या नहीं, और लिखित परीक्षा के मुक़ाबले उसका वज़न कितना है। इस दस्तावेज़ में नहीं है।
  • पात्रता, आयु सीमा, शुल्क और पदों की संख्या। ये भर्ती अधिसूचना का हिस्सा हैं, सिलेबस annexure का नहीं।
  • कोई पुस्तक-सूची। दस्तावेज़ विषय बताता है, किताबें नहीं — विषय-सूची पढ़ने की सूची नहीं होती।

एक नज़र में

संचालक संस्थाJammu & Kashmir Public Service Commission (JKPSC)
पद का नामAssistant Professor (Medical Education Department)
चयन प्रक्रियाआधिकारिक सिलेबस दस्तावेज़ में नहीं बताया गया
आधिकारिक वेबसाइटjkpsc.nic.in
राज्यJammu & Kashmir

Anatomy — 20 यूनिट, PDF के पेज 1 से 4 तक ↑

Anatomy दस्तावेज़ का पहला विषय है और इकलौता ऐसा जिसके शुरुआती पेज स्कैन की गई कवर शीट पर हैं — Unit-I से Unit-VI तक वहाँ तस्वीर के रूप में छपे हैं, चुनने लायक टेक्स्ट के रूप में नहीं। वे पंक्तियाँ उसी स्कैन को 300 dpi पर पढ़कर और फिर आँख से मिलाकर बनाई गई हैं।

बीस यूनिट हैं, और योजना बनाने से पहले उनका ढाँचा देख लीजिए: Unit-I से IX तक स्थूल शरीर-रचना है, फिर भ्रूण-विज्ञान, आनुवंशिकी और सूक्ष्म शरीर-रचना की एक-एक यूनिट, और आख़िरी पाँच यूनिट व्यावहारिक हैं — जीवित, अनुभागीय, रेडियो-निदान, शव-लेपन तथा न्यायालयिक मानव-विज्ञान।

यूनिट / क्रमइसमें क्या-क्या आता है
Unit-I — सामान्य शरीर-रचना (General Anatomy)शरीर-रचना की शब्दावली: शारीरिक स्थिति, स्थिति और गति के पद। त्वचा और प्रावरणी: त्वचा के प्रकार, डर्मेटोम, त्वचा के उपांग, त्वचा-चीरे, सतही तथा गहरी प्रावरणी और उसके रूपांतर। मांसपेशी: वर्गीकरण, कंडरा और अपोन्यूरोसिस का अंतर, shunt व spurt मांसपेशी। तंत्रिका तंत्र: केंद्रीय, परिधीय तथा स्वायत्त तंत्र के अंग, न्यूरॉन और न्यूरोग्लिया, सामान्य स्पाइनल नर्व व सिनैप्स, सिम्पैथेटिक तथा स्पाइनल गैंग्लिया। हड्डियाँ और जोड़: हड्डियों का वर्गीकरण व अस्थिकरण, उपास्थि के प्रकार, जोड़ों का वर्गीकरण। ग्रंथियाँ: बहिःस्रावी और अंतःस्रावी — वर्गीकरण तथा कार्य। रक्तवाहिनी और लसीका तंत्र: धमनी, शिरा व लसीका वाहिनियों के सामान्य लक्षण, पोर्टल तंत्र, धमनी-मिलन, तथा थ्रॉम्बोसिस, इन्फार्क्शन और एन्यूरिज़्म की परिभाषा।
Unit-II — अस्थि-विज्ञान (Osteology)शरीर की सभी हड्डियों और उपास्थियों की संरचना, जुड़ाव, संबंध, अस्थिकरण, उम्र के साथ बदलाव और रक्त आपूर्ति।
Unit-III — पेशी-विज्ञान (Myology)ऊपरी अंग, निचले अंग, वक्ष, उदर, श्रोणि, पेरिनियम तथा सिर-गर्दन की मुख्य मांसपेशियों का जुड़ाव, क्रिया, तंत्रिका आपूर्ति, रक्त आपूर्ति और संबंध।
Unit-IV — संधि-विज्ञान (Arthology)शरीर के हर जोड़ की संरचना, संबंध, गतियाँ, रक्त तथा तंत्रिका आपूर्ति, और व्यावहारिक (applied) शरीर-रचना।
Unit-V — हृदय-रक्तवाहिनी तंत्र (Cardio-Vascular)पेरिकार्डियम; हृदय के सभी कक्षों की बाहरी और भीतरी बनावट; रक्त आपूर्ति और तंत्रिका आपूर्ति; तंतुमय कंकाल; तथा इस्कीमिक हृदय रोग का शारीरिक आधार।
Unit-VI — लसीका तंत्र (Lymphatic System)प्रतिरक्षा तंत्र और शरीर की रक्षा-प्रणाली में लगी कोशिकाएँ। प्राथमिक तथा द्वितीयक लसीका अंगों की स्थूल बनावट, कोशिकीय संरचना, कार्य, विकास और हिस्टोजेनेसिस। मनुष्य के major histocompatibility complex का जैविक तथा नैदानिक महत्व — प्रत्यारोपण में उसकी भूमिका, रोग-संवेदनशीलता या प्रतिरोध, और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का आनुवंशिक नियंत्रण। शरीर के सभी भागों व अंगों की लसीका निकासी; लिम्फ नोड समूहों की स्थिति और संबंध; तथा मुख्य लसीका वाहिनियाँ।
Unit-VII — तंत्रिका शरीर-रचना (Neuroanatomy)मस्तिष्क और उसका आवरण — मेनिंजेस, CSF तथा ड्यूरल वीनस साइनस; तंत्रिका तंत्र का विकास; न्यूरॉन और न्यूरोग्लिया; दैहिक संवेदी तंत्र; घ्राण तथा दृष्टि पथ; श्रवण-संतुलन और स्वाद पथ; गति-पथ; केंद्रीय स्वायत्त पथ; हाइपोथैलेमो-हाइपोफाइसियल तंत्र; लिम्बिक तंत्र; बेसल गैंग्लिया; रेटिकुलर तंत्र; मस्तिष्क, ब्रेनस्टेम व मेरुरज्जु की अनुप्रस्थ काट; CNS की विस्तृत संरचना और उसका व्यावहारिक पक्ष; तथा मस्तिष्क व मेरुरज्जु की रक्त आपूर्ति।
Unit-VIII — विशिष्ट इंद्रियाँ (Special Senses)स्वाद, गंध, दृष्टि, श्रवण और स्पर्श के परिधीय ग्राहकों की शरीर-रचना, उनके केंद्रीय संबंध, पथ, कार्य और व्यावहारिक पक्ष।
Unit-IX — आंतरांग-विज्ञान (Splanchnology)सभी आंतरांगों की स्थूल शरीर-रचना: श्वसन, पाचन तथा मूत्र-जनन अंग, लसीका अंग, और अंतःस्रावी व बहिःस्रावी ग्रंथियाँ।
Unit-X — भ्रूण-विज्ञान (Embryology)सामान्य भ्रूण-विज्ञान: युग्मकजनन, गर्भाशय तथा अंडाशय चक्र, निषेचन, आरोपण और अपरा, तथा मानव भ्रूण का प्रारंभिक विकास। सांगोपांग भ्रूण-विज्ञान: अंग-तंत्रों का विकास और उनसे जुड़ी सामान्य जन्मजात विकृतियाँ, टेराटोजेनेसिस, तथा जन्मजात विकृतियों का शारीरिक-क्रियात्मक संबंध।
Unit-XI — आनुवंशिकी (Genetics)मानव गुणसूत्र: संरचना, संख्या और वर्गीकरण, गुणसूत्र तैयार करने की विधियाँ, बैंडिंग पैटर्न। गुणसूत्र विकृतियाँ, ऑटोसोमल तथा लिंग-गुणसूत्र विकृतियाँ और सिंड्रोम, आणविक व कोशिका-आनुवंशिकी। एकल जीन वंशानुक्रम: ऑटोसोमल और लिंग-गुणसूत्र पैटर्न, मध्यवर्ती पैटर्न तथा बहु-एलील, उत्परिवर्तन, गैर-मेंडेलीय वंशानुक्रम, माइटोकॉन्ड्रियल वंशानुक्रम, जीनोम इम्प्रिंटिंग, पैरेंटल डाइसोमी। बहुकारकीय वंशानुक्रम: टेराटोलॉजी, स्ट्रक्चर जीन, आणविक स्क्रीनिंग, कैंसर आनुवंशिकी, रक्त-संबंधी दुर्दमताएँ, फार्माकोजेनेटिक्स। प्रजनन आनुवंशिकी: पुरुष व स्त्री बंध्यता, गर्भपात-सामग्री, सहायक प्रजनन, प्री-इम्प्लांटेशन आनुवंशिकी, प्रसव-पूर्व निदान, आनुवंशिक परामर्श, आनुवंशिकी की नैतिकता, और जीन थेरेपी के सिद्धांत व उपयोग।
Unit-XII — सूक्ष्म शरीर-रचना (Microanatomy)कोशिका जीव-विज्ञान: कोशिकाद्रव्य (मैट्रिक्स, कोशिका झिल्ली, कोशिकांग, कोशिका-कंकाल, कोशिकीय समावेश, सिलिया और फ्लैजेला); केंद्रक (केंद्रक आवरण, केंद्रक मैट्रिक्स, DNA तथा क्रोमैटिन के अन्य घटक, प्रोटीन संश्लेषण, न्यूक्लियोलस, कोशिका-मृत्यु दर्शाने वाले बदलाव); कोशिका चक्र (माइटोसिस, मियोसिस, कोशिका-नवीनीकरण, विभेदन और प्रसार)। शरीर की सूक्ष्म संरचना: प्रकार व भाग, सभी कोशिकाओं, ऊतकों और अंगों के ऊतकीय लक्षण। प्रकाश, ट्रांसमिशन व स्कैनिंग, इलेक्ट्रॉन, प्रतिदीप्ति, कॉन्फोकल तथा वर्चुअल माइक्रोस्कोपी के सिद्धांत। शरीर के तंत्र और अंग: कोशिकीय संगठन, प्रकाश व इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी लक्षण, और संरचना-कार्य संबंध।
Unit-XIII — व्यावहारिक शरीर-रचना (Applied Anatomy)संरचनात्मक शरीर-रचना, विकास और न्यूरोएनाटॉमी के ज्ञान से सामान्य से हटाव पहचानना; मानव शरीर की संरचना तथा कार्यों का नैदानिक संबंध; और नैदानिक समस्याओं का शारीरिक आधार व व्याख्या।
Unit-XIV — क्रियात्मक शरीर-रचना (Functional Anatomy)शरीर के विभिन्न ऊतकों और अंगों में संरचना तथा कार्य का आपसी संबंध।
Unit-XV — जीवित शरीर-रचना (Living Anatomy)शरीर के सभी भागों की सतही निशानदेही, और सामान्य रेडियोग्राफ़ की व्याख्या — बेरियम अध्ययन, कोलेसिस्टोग्राफी, पाइलोग्राफी, सैल्पिंगोग्राफी, तथा सामान्य CT स्कैन, MRI और अल्ट्रासाउंड सहित।
Unit-XVI — अनुभागीय शरीर-रचना (Sectional Anatomy)मस्तिष्क, सिर-गर्दन, वक्ष, उदर, श्रोणि और अंगों की अनुप्रस्थ, धनु तथा कोरोनल काट — अंगों का आपसी संबंध समझने और CT व MRI पढ़ने के लिए।
Unit-XVII — नवीनतम प्रगति (Recent Advances)चिकित्सा विज्ञान की वे नई प्रगतियाँ जो संरचना-कार्य संबंध और नैदानिक समस्या-समाधान में मदद करती हैं; तथा स्टेम सेल का संग्रह, रखरखाव व उपयोग, क्रायोबैंकिंग, और हाल ही में मृत शरीर से अंगदान के सिद्धांत।
Unit-XVIII — रेडियो-निदान (Radio Diagnosis)सादे X-ray की पहचान, विशेष रेडियोग्राफ़िक प्रक्रियाएँ, और आर्टिरियोग्राफी।
Unit-XIX — शव-लेपन (Embalming)शव-लेपन के प्रकार और लेपन-द्रवों के प्रकार, तथा जले, डूबे या पोस्टमॉर्टम किए गए शरीरों जैसी विशेष परिस्थितियों में लेपन।
Unit-XX — न्यायालयिक चिकित्सा और मानव-विज्ञान (Forensic Medicine and Anthropology)अवशेषों से मानव हड्डियों की पहचान और लिंग, आयु व ऊँचाई का निर्धारण — शरीर-रचना के मेडिकोलीगल उपयोग के लिए; विभिन्न मानव-वैज्ञानिक लक्षण; मानव-वैज्ञानिक उपकरणों की पहचान और उपयोग; पेल्विमेट्री तथा सेफैलोमेट्री। यूनिट के अंत में विषय की नवीनतम प्रगति भी जुड़ी है।

Physiology — 15 यूनिट, PDF के पेज 4 से 7 तक ↑

पंद्रह यूनिट हैं और क्रम तंत्र-दर-तंत्र चलता है: पहले सामान्य सिद्धांत और रक्त, फिर तंत्रिका-पेशी, फिर गुर्दा, पाचन, अंतःस्रावी, प्रजनन, हृदय-वाहिनी, श्वसन और तंत्रिका तंत्र, और उसके बाद विशिष्ट इंद्रियाँ।

आख़िरी चार यूनिट वही हैं जिन्हें उम्मीदवार सबसे कम पढ़ते हैं, जबकि वे इतनी छोटी हैं कि एक हफ़्ते में निपट जाएँ — पर्यावरणीय शरीर-क्रिया, खेल-व्यायाम-योग-ध्यान, बुढ़ापा, और विषय का इतिहास व नवीनतम प्रगति।

यूनिट / क्रमइसमें क्या-क्या आता है
Unit-I — सामान्य शरीर-क्रिया सिद्धांतहोमियोस्टैसिस के सिद्धांत; धनात्मक व ऋणात्मक फ़ीडबैक तंत्र; कोशिका तथा कोशिका झिल्ली की संरचना; अंतर-कोशिकीय संचार; झिल्ली के आर-पार परिवहन; गिब्स-डोनन साम्य; नर्न्स्ट समीकरण; शरीर के द्रव-कक्ष और द्रव मात्रा का मापन; ECF तथा ICF के बीच परासरणी साम्य; आनुवंशिकी के बुनियादी सिद्धांत और उनका व्यावहारिक पक्ष; आनुवंशिक कोड, उसकी अभिव्यक्ति और उसका नियमन; कोशिका चक्र व उसका नियमन; एपोप्टोसिस; तथा सामान्य शरीर-क्रिया के व्यावहारिक पहलू।
Unit-II — रक्तरक्त का संघटन और कार्य; प्लाज़्मा प्रोटीन के प्रकार व कार्य; इम्यूनोग्लोबुलिन; RBC का बनना और कार्य; रक्त सूचकांक PCV, MCV, MCH, MCHC; रक्ताल्पता का वर्गीकरण व वर्णन; पॉलीसाइथीमिया; लाल रक्त कोशिकाओं की परिणति; हीमोग्लोबिन का संश्लेषण और कार्य; बिलीरुबिन बनने की रसायन-प्रक्रिया और पीलिया; रक्त समूह, समूह-निर्धारण का आधार व उसका नैदानिक महत्व; ब्लड बैंकिंग, रक्ताधान और आधान-चिकित्सा के सिद्धांत; WBC का बनना व कार्य, ल्यूकोपीनिया और ल्यूकीमिया; मैक्रोफ़ेज; सूजन और उसकी रोग-क्रिया; प्लेटलेट का बनना व कार्य; हीमोफ़ीलिया, DIC, थ्रॉम्बोसाइटोपीनिक परप्यूरा; रक्तस्राव रोकने की क्रिया और उसके उपयोग, एंटीकोऐगुलेंट तथा रक्तस्राव विकार सहित; थक्का बनने की क्रिया-विधि व जाँचें; थाइमस और प्रतिरक्षा; जन्मजात तथा अर्जित प्रतिरक्षा; एलर्जी, अतिसंवेदनशीलता और प्रतिरक्षा-न्यूनता; स्वप्रतिरक्षी विकार; ऊतक व अंग प्रत्यारोपण; लसीका ऊतक और लिम्फ़; असामान्य थक्का व रक्तस्राव (थक्का कारक और एंटीकोऐगुलेंट); फ़ाइब्रिनोलिसिस; जन्मजात विकृतियाँ; प्रतिरक्षा विकार, उनके उपचार का शारीरिक आधार और दवाओं के दुष्प्रभाव; तथा रक्त-विज्ञान के व्यावहारिक पहलू।
Unit-III — पेशी और तंत्रिका शरीर-क्रियान्यूरॉन तथा न्यूरोग्लिया की संरचना, कार्य व गुण; तंत्रिका तंतुओं का वर्गीकरण, कार्य और गुण; विश्राम झिल्ली विभव तथा क्रिया विभव का आणविक आधार; तंत्रिका आवेग का संचरण; तंत्रिका चोटें, वॉलेरियन अपक्षय और चोट के बाद तंतु का पुनर्जनन; पेशी तंतुओं की संरचना, प्रकार व गुण; अलग-अलग पेशियों में क्रिया विभव; उत्तेजन-संकुचन युग्मन; पेशी संकुचन की क्रिया-विधि; तंत्रिका-पेशी संधि की संरचना और उसके पार संचरण; न्यूरोमस्कुलर ब्लॉकिंग दवाएँ; मायस्थीनिया ग्रेविस तथा ईटन-लैम्बर्ट सिंड्रोम की रोग-क्रिया; व्यायाम के दौरान पेशीय बदलाव; आंतरांगी और मल्टी-यूनिट चिकनी पेशी, उसमें उत्तेजन-संकुचन युग्मन तथा उसके लक्षण — प्लास्टिसिटी और लैच परिघटना; तथा तंत्रिका-पेशी शरीर-क्रिया के व्यावहारिक पहलू।
Unit-IV — गुर्दा तंत्रनेफ़्रॉन तथा जक्स्टाग्लोमेरुलर उपकरण की संरचना और कार्य, रेनिन-एंजियोटेंसिन-एल्डोस्टेरोन तंत्र सहित; मूत्र बनने की क्रिया; परिवहन अधिकतम और वृक्कीय देहली; GFR तथा उसे प्रभावित करने वाले कारक; मूत्र के गाढ़ा व पतला होने की क्रिया, काउंटर करंट तंत्र सहित; मूत्र का अम्लीकरण; शरीर के द्रव-कक्ष और जल संतुलन, द्रव व इलेक्ट्रोलाइट का नियमन; बाह्य कोशिकीय सोडियम तथा परासरणीयता का नियमन; रीनल क्लीयरेंस की अवधारणा; अम्ल-क्षार संतुलन और उसका नियमन; मूत्राशय का तंत्रिका-संचालन, मूत्रत्याग, सिस्टोमेट्रोग्राम और मूत्राशय की गड़बड़ी; मूत्रवर्धक; कृत्रिम गुर्दा और डायलिसिस; रेडियोलॉजी व गुर्दा इमेजिंग; गुर्दा विफलता और गुर्दा कार्य-जाँच; गुर्दा प्रत्यारोपण; तथा व्यावहारिक पहलू।
Unit-V — पाचन तंत्रGIT की पेशियों का सामान्य संगठन, तंत्रिका-संचालन और तंत्रिका जाल; लार, जठर, अग्न्याशयी व आंत्र स्राव तथा पित्त का कार्य और संघटन; यकृत की संरचना, कार्य और यकृत कार्य-जाँच; पीलिया के प्रकार व प्रयोगशाला जाँच; आंत्र-पथ के हॉर्मोन — स्रोत, नियमन, कार्य; आंत्र गतियाँ और GIT प्रतिवर्त; उल्टी, दस्त, क़ब्ज़; आहारीय रेशा; कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज व सूक्ष्म तत्वों का पाचन और अवशोषण; पेप्टिक अल्सर तथा दस्त-रोग की रोग-क्रिया; तीव्र अग्न्याशयशोथ का कारण, रोग-क्रिया और नैदानिक लक्षण; पित्त-पथरी, स्टीएटोरिया और कुअवशोषण सिंड्रोम; तथा GIT के व्यावहारिक पहलू।
Unit-VI — अंतःस्रावी विज्ञानहॉर्मोन के प्रकार, क्रिया-विधि, और हॉर्मोन का आकलन; पीयूष, थायरॉइड, पैराथायरॉइड, अधिवृक्क ग्रंथि, अग्न्याशय, पीनियल तथा हाइपोथैलेमस के शारीरिक कार्य और स्राव बदलने के प्रभाव; अग्र व पश्च पीयूष के विकार; थायरॉइड विकार, थायरॉइड कार्य-जाँच और थायरॉइड-रोधी दवाएँ; पैराथायरॉइड विकार, कैल्शियम संतुलन, अस्थि शरीर-क्रिया और चयापचयी अस्थि रोग; अधिवृक्क कॉर्टेक्स व मेड्युला के हॉर्मोन विकार; तथा अंतःस्रावी तंत्र के व्यावहारिक पहलू।
Unit-VII — प्रजनन तंत्रलिंग विभेदन व विकास, वृषण और अंडाशय के कार्य; शुक्राणुजनन और उसे प्रभावित करने वाले कारक; क्रिप्टॉर्किडिज़्म; गुणसूत्र विकृतियाँ; मासिक चक्र — हॉर्मोनी, गर्भाशयी व अंडाशयी बदलाव — और मासिक विकार; गर्भावस्था के शारीरिक बदलाव, भ्रूण-अपरा इकाई और अपरा हॉर्मोन; प्रसव और स्तनपान; यौवन तथा रजोनिवृत्ति का शारीरिक आधार और यौवन-विकार; लिंग हॉर्मोन के प्रभाव; गर्भ-जाँच; भ्रूण व नवजात शरीर-क्रिया; गर्भनिरोधन की क्रिया और पुरुष तथा स्त्री गर्भनिरोधक विधियाँ; तथा व्यावहारिक पहलू।
Unit-VIII — हृदय-रक्तवाहिनी तंत्रहृदय पेशी की संरचना और गुण; विश्राम झिल्ली तथा क्रिया विभव; उत्तेजन-संकुचन युग्मन और हृदय पेशी संकुचन; पेसमेकर विभव और हृदय की चालन प्रणाली; हृदय चक्र में यांत्रिक घटनाएँ तथा दाब-आयतन बदलाव; हृदय ध्वनियाँ, मर्मर और कपाट-विकार; फ़्रैंक-स्टार्लिंग नियम; जुगुलर वीनस पल्स; हृदय गति, रक्तचाप और कार्डियक आउटपुट का नियमन; ECG — शारीरिक आधार, उपयोग, असामान्य ECG और हृद्पेशी रोधगलन का पैटर्न; हृदय की अनियमित गति; ECF में K+, Ca++ तथा Na+ बदलने का असर; चालन दोष और प्रथम, द्वितीय व तृतीय श्रेणी ब्लॉक; हृदय का विद्युत अक्ष; हार्ट ब्लॉक और हृदय विफलता की रोग-क्रिया; रक्त-संचार की गतिकी; क्षेत्रीय परिसंचरण — हृद्धमनी, आंतरांगी, मस्तिष्कीय, केशिका, भ्रूणीय और फुफ्फुसीय; शॉक, हृद्धमनी रोग तथा उच्च रक्तचाप की शरीर-क्रिया; कार्डियो-पल्मोनरी पुनर्जीवन; लसीका परिसंचरण; व्यायाम पर हृदय-वाहिनी प्रतिक्रिया; तथा CVS के व्यावहारिक पहलू।
Unit-IX — श्वसन तंत्रश्वसन तंत्र की क्रियात्मक शरीर-रचना; गैस विनिमय के भौतिक सिद्धांत; सरफ़ैक्टेंट; श्वसन गैसों का परिवहन; सामान्य श्वसन की यांत्रिकी; फुफ्फुसीय आयतन व क्षमताएँ; फुफ्फुसीय संवातन और संवातन-रक्तप्रवाह अनुपात; श्वसन का नियमन; फेफड़ा कार्य-जाँच और उसका नैदानिक महत्व; कृत्रिम श्वसन तथा ऑक्सीजन चिकित्सा के सिद्धांत; ऊँचाई पर अनुकूलन और डीकंप्रेशन बीमारी; हाइपोक्सिया, कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता, ऑक्सीजन विषाक्तता, नीलिमा और श्वासावरोध; व्यायाम तथा योग में हृदय-श्वसन बदलाव; फुफ्फुसीय विकार — क्रॉनिक एम्फ़ाइसीमा, न्यूमोनिया, एटेलेक्टेसिस, अस्थमा; रक्त गैस विश्लेषण; कृत्रिम श्वसन; विमानन व अंतरिक्ष शरीर-क्रिया में त्वरण बलों का असर, बंद अंतरिक्ष यान की कृत्रिम जलवायु और भारहीनता; ऊँचाई पर शारीरिक बदलाव, तीव्र व दीर्घकालिक पर्वतीय बीमारी और फुफ्फुसीय शोफ़; कृत्रिम संवातन और CPR; गहरे समुद्र में गोताखोरी के ख़तरे; तथा व्यावहारिक पहलू।
Unit-X — केंद्रीय तंत्रिका तंत्रतंत्रिका तंत्र का संगठन; सिनैप्स के कार्य, प्रकार व गुण; न्यूरोट्रांसमीटर; मेरुरज्जु की शरीर-रचना और कार्य; खिंचाव प्रतिवर्त तथा कंडरा झटके; मांसपेशी तर्कु और गॉल्जी कंडरा अंग; ब्रेन स्टेम की शरीर-क्रिया; संवेदी ग्राहक; गति व संवेदी तंत्र और उनके व्यावहारिक पहलू; कॉर्टेक्स, बेसल गैंग्लिया, थैलेमस, हाइपोथैलेमस, अनुमस्तिष्क, लिम्बिक तंत्र तथा रेटिकुलर सक्रियक तंत्र की तंत्रिका-क्रिया; पार्किंसनिज़्म; तनाव, मुद्रा व संतुलन बनाए रखने की क्रिया और गति का नियमन; वेस्टिबुलर उपकरण; उच्चतर क्रियाएँ — स्मृति, सीखना (अनुकूलित प्रतिवर्त सहित), वाणी और उसके विकार; मेरुरज्जु की काट; EEG और नींद; मिर्गी, अल्ज़ाइमर रोग तथा नींद के विकार; दर्द की तंत्रिका-क्रिया; CSF; स्वायत्त तंत्रिका तंत्र, उसकी कार्य-जाँच और उस पर असर करने वाली दवाएँ; तथा CNS के व्यावहारिक पहलू।
Unit-XI — विशिष्ट इंद्रियाँआँख की क्रियात्मक शरीर-रचना; प्रतिबिंब बनना, फ़ोटोट्रांसडक्शन और रंग दृष्टि; अपवर्तन दोष; दृष्टि प्रतिवर्त — पुतली और प्रकाश प्रतिवर्त; दृष्टि पथ तथा दृष्टि-क्षेत्र दोष; कान की क्रियात्मक शरीर-रचना; बाहरी कान, मध्य कान और कॉक्लिया के कार्य; ध्वनि के गुण, सुनने की क्रिया, बहरापन, श्रवण जाँच और श्रवण यंत्र; संतुलन में भीतरी कान की भूमिका; गंध तथा स्वाद की अनुभूति, उनके पथ और व्यावहारिक पहलू; श्रवण व दृष्टि उद्दीपित विभव; तथा कान-आँख की शरीर-क्रिया के व्यावहारिक पहलू।
Unit-XII — पर्यावरणीय शरीर-क्रियातापमान नियमन की क्रिया; गर्मी और ठंड के अनुसार ढलना; बुख़ार की क्रिया; ठंड से चोट और लू लगना; तथा भिन्न-भिन्न परिवेशों में अनुकूलन के शारीरिक बदलाव।
Unit-XIII — खेल, व्यायाम, योग और ध्यान की शरीर-क्रियाहृदय-श्वसन तथा चयापचयी समायोजन, और योग व ध्यान के शारीरिक प्रभाव।
Unit-XIV — बुढ़ापे की शरीर-क्रियाबुढ़ापे के शारीरिक और मानसिक बदलाव, बुढ़ापे के सिद्धांत, तथा उसे रोकने के उपाय।
Unit-XV — शरीर-क्रिया विज्ञान का इतिहास और नवीनतम प्रगतिनई तकनीकों के विकास और विषय की प्रगति में शरीर-क्रिया वैज्ञानिकों का योगदान। यूनिट के अंत में विषय की नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

Bio-Chemistry — 14 यूनिट, PDF के पेज 7 से 11 तक ↑

चौदह यूनिट हैं, और पहली यूनिट जैव-रसायन की है ही नहीं — वह प्रयोगशाला की है: यंत्र, सुरक्षा, जैव-चिकित्सा कचरा और गुणवत्ता प्रबंधन। जो उम्मीदवार सिर्फ़ चयापचय के मार्ग पढ़ते हैं, वे पूरी एक यूनिट के अंक छोड़ देते हैं।

Unit-II से XII तक क्रम वही है जो MD Biochemistry में होता है — प्रोटीन संरचना से लेकर अलग-अलग चयापचय और फिर अंग-कार्य जाँच तक। आख़िरी दो यूनिट का नाम ही Special Topics A और B है, और कैंसर, AIDS, बुढ़ापा, मुक्त मूलक, जैव-सूचना विज्ञान, साक्ष्य-आधारित प्रयोगशाला चिकित्सा तथा अम्ल-क्षार संतुलन वहीं रखे गए हैं।

यूनिट / क्रमइसमें क्या-क्या आता है
Unit-I — जैव-रसायन प्रयोगशाला (Biochemistry Laboratory)द्रव्यमान का मापन, बुनियादी गणनाएँ और विलयन बनाना। प्रयोगशाला की ज़रूरी बातें: काँच के उपकरण, बुनियादी यंत्र, जैविक द्रवों का संग्रह व परिरक्षण, रक्त लेने की विधियाँ, पृथक्करण, सावधानियाँ, भंडारण और नमूने की ढुलाई। सुरक्षित प्रयोगशाला व्यवहार: ख़तरनाक रसायनों और संक्रमण के जोखिम, प्राथमिक उपचार तथा आपात उपचार। यंत्र और तकनीकें: pH मीटर, कलरिमेट्री, स्पेक्ट्रोफ़ोटोमेट्री, इलेक्ट्रोफ़ोरेसिस, क्रोमैटोग्राफी, ISE, मास स्पेक्ट्रोमेट्री, फ़्लो साइटोमेट्री, केमिलुमिनेसेंस, रेडियोइम्यूनोऐसे, ELISA, ऑटोएनालाइज़र, आर्टेरियल ब्लड गैस एनालाइज़र और इनके नैदानिक उपयोग। जैव-चिकित्सा कचरा प्रबंधन: ख़तरनाक कचरे का वर्गीकरण और निपटान की प्रक्रिया। समग्र गुणवत्ता प्रबंधन: गुणवत्ता प्रक्रियाएँ, आश्वासन, आकलन व नियंत्रण, क्वालिटी कंट्रोल चार्ट, सिक्स सिग्मा, प्रत्यायन और प्रमाणन।
Unit-II — प्रोटीन संरचना और कार्यअमीनो अम्ल तथा पेप्टाइड: वर्गीकरण व अभिक्रियाएँ, पेप्टाइड बंध, जैविक रूप से सक्रिय पेप्टाइड, पृथक्करण तकनीकें। प्रोटीन: गुण, कार्य, वर्गीकरण, संगठन, अनुक्रम विश्लेषण, प्रोटीन का ग़लत मुड़ना (misfolding), मात्रात्मक आकलन, नैदानिक पक्ष। प्लाज़्मा प्रोटीन: कार्य और नैदानिक महत्व। एंज़ाइम: वर्गीकरण व नामकरण, सह-एंज़ाइम, क्रिया-विधि, उत्प्रेरण, गतिकी, सक्रियता को प्रभावित करने वाले कारक तथा नियमन, अवरोधन, आइसोएंज़ाइम, आकलन विधियाँ, नैदानिक उपयोग, चिकित्सकीय एंज़ाइम। हीम प्रोटीन: हीमोग्लोबिन व मायोग्लोबिन की संरचना और कार्य, ऑक्सीजन डिसोसिएशन वक्र, एलोस्टेरिक प्रभाव, गौण हीमोग्लोबिन, हीमोग्लोबिनोपैथी।
Unit-III — चयापचय का समग्र परिचयउपवास, भुखमरी और भरपेट अवस्था में चयापचय का ढलना, तथा चयापचयी ईंधनों का आपसी रूपांतरण। अंगों की चयापचयी तस्वीर — मस्तिष्क, कंकाल पेशी, हृदय पेशी, वसा ऊतक, यकृत, हृदय, गुर्दा और लाल रक्त कोशिकाएँ — और गर्भावस्था, स्तनपान, आघात व गंभीर बीमारी के दौरान चयापचयी बदलाव।
Unit-IV — जैव-ऊर्जा और कार्बोहाइड्रेट चयापचयजैविक ऑक्सीकरण, श्वसन शृंखला और ऑक्सीडेटिव फ़ॉस्फ़ोरिलेशन: उच्च ऊर्जा फ़ॉस्फ़ेट, रेडॉक्स विभव, संबंधित एंज़ाइम, इलेक्ट्रॉन परिवहन शृंखला, परिवहन तंत्र, नैदानिक पक्ष। सिट्रिक अम्ल चक्र: उभयचयी भूमिका, अभिक्रियाएँ, ऊर्जा-गणित, नियमन। कार्बोहाइड्रेट चयापचय: कार्य, वर्गीकरण, गुण व अभिक्रियाएँ, ग्लाइकोसैमिनोग्लाइकन, आहारीय चयापचय, ग्लूकोज़ ट्रांसपोर्टर, ग्लाइकोलिसिस और पाइरुवेट का ऑक्सीकरण, ग्लाइकोजन चयापचय, पेंटोस फ़ॉस्फ़ेट व अन्य हेक्सोज़ मार्ग, ग्लूकोनियोजेनेसिस और रक्त शर्करा का नियंत्रण, मधुमेह और उसका प्रयोगशाला निदान, अल्कोहल, अमीनो शर्करा, रक्त-समूह पदार्थ, प्रोटियोग्लाइकन तथा ग्लाइकोप्रोटीन का चयापचय, और नैदानिक पक्ष।
Unit-V — वसा (लिपिड) चयापचयलिपिड, वसा अम्ल, प्रोस्टाग्लैंडिन और इकोसैनॉइड के कार्य, वर्गीकरण व गुण। आहारीय लिपिड चयापचय, वसा अम्लों का ऑक्सीकरण तथा जैव-संश्लेषण, ऑक्सीकरण बिगड़ने से होने वाले रोग, फ़ॉस्फ़ोलिपिड, ग्लाइकोस्फिंगोलिपिड व इकोसैनॉइड चयापचय, कीटोन बॉडी और एसिलग्लिसरॉल चयापचय, लिपिड का परिवहन व भंडारण, वसा ऊतक का चयापचय, फैटी लिवर, लिपोट्रॉपिक कारक, कोलेस्ट्रॉल चयापचय, एथेरोस्क्लेरोसिस में डिस्लिपिडेमिया की भूमिका, कार्डियक बायोमार्कर और नैदानिक पक्ष।
Unit-VI — प्रोटीन और अमीनो अम्ल चयापचयअमीनो अम्ल चयापचय: आहारीय प्रोटीन चयापचय, प्रोटीन तथा अमीनो नाइट्रोजन का अपचय, अमोनिया चयापचय, यूरिया चक्र और उससे जुड़े विकार, कार्बन कंकाल का अपचय, अमीनो अम्लों का विशेष उत्पादों में रूपांतरण, अनावश्यक अमीनो अम्लों का संश्लेषण, चयापचयी दोष। हीम का संश्लेषण और विघटन: संरचना, जैव-संश्लेषण व अपघटन, पॉरफ़ाइरिया, बिलीरुबिन चयापचय, पीलिया।
Unit-VII — न्यूक्लियोटाइड चयापचयप्यूरीन तथा पिरिमिडीन न्यूक्लियोटाइड का जैव-संश्लेषण, अपघटन और नियमन, और इनके चयापचय के विकार।
Unit-VIII — पोषणऊर्जा चयापचय और पोषण: मनुष्य की ऊर्जा ज़रूरत, आहारीय वसा, कार्बोहाइड्रेट व प्रोटीन का महत्व, भोजन का कैलोरी मान, श्वसन गुणांक, BMR, विशिष्ट गतिक क्रिया, आहारीय रेशा, संतुलित आहार, ग्लाइसेमिक सूचकांक, एंटरल तथा पूर्ण पैरेंटरल पोषण, और पोषण-विकार — प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण, मोटापा, एथेरोस्क्लेरोसिस। इलेक्ट्रोलाइट, जल संतुलन और शरीर-द्रव: जल संतुलन, सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड, मैग्नीशियम, नैदानिक पक्ष। खनिज चयापचय: प्रमुख तथा सूक्ष्म तत्व, और उनकी कमी या अधिकता से बनने वाली स्थितियाँ। विटामिन: स्रोत, जैव-रासायनिक कार्य, RDA, नैदानिक लक्षण, और स्वास्थ्य व रोग में भूमिका।
Unit-IX — हॉर्मोनहॉर्मोन का वर्गीकरण और अंतःस्रावी हॉर्मोन की क्रिया-विधि; हॉर्मोन का उत्पादन, परिवहन व भंडारण, नैदानिक पक्ष सहित।
Unit-X — सूचना-वाहक वृहद अणुओं की संरचना, कार्य और प्रतिकृतिन्यूक्लियोटाइड और न्यूक्लिक अम्ल: संघटन, कृत्रिम न्यूक्लियोटाइड, DNA की संरचना, कार्य व उच्चतर संगठन, और RNA की संरचना, प्रकार तथा कार्य। आणविक आनुवंशिकी, पुनर्योजी (recombinant) व जीनोमिक तकनीक: वंशानुक्रम के सिद्धांत और नियम, recombinant DNA तकनीक तथा आनुवंशिक अभियांत्रिकी की प्रक्रियाएँ, उपयोग, DNA संकरण, DNA अनुक्रमण। DNA का संगठन, प्रतिकृति और मरम्मत: क्रोमैटिन, उच्चतर संगठन, गुणसूत्र, मानव माइटोकॉन्ड्रियल DNA, कोशिका चक्र, DNA पुनर्संयोजन, प्रोकैरियोट व यूकैरियोट में प्रतिकृति, अवरोधक, मरम्मत तंत्र और दोषपूर्ण मरम्मत से जुड़े रोग। RNA संश्लेषण: दोनों में क्रिया-विधि, अवरोधक, रूपांतरण, रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन। प्रोटीन संश्लेषण और आनुवंशिक कोड: कोड के लक्षण, उत्परिवर्तन, वॉबल परिकल्पना, क्रिया-विधि, अवरोधक, अनुवाद-पश्चात प्रसंस्करण। जीन अभिव्यक्ति का नियमन, जीन प्रवर्धन, एपिजेनेटिक बदलाव, मोटिफ़।
Unit-XI — चयापचय की जन्मजात त्रुटियाँआनुवंशिक रोग का आणविक आधार व परिणाम, जन्मजात चयापचयी त्रुटियों का निदान और उपचार, प्रसव-पूर्व निदान तथा आनुवंशिक परामर्श।
Unit-XII — अंग-कार्य जाँचेंयकृत, गुर्दा, आमाशय, अधिवृक्क, थायरॉइड और अग्न्याशय की कार्य-जाँचें, उनके नैदानिक पक्ष सहित।
Unit-XIII — विशेष विषय Aबाह्य कोशिकीय आधात्री (ECM): कोलेजन, इलास्टिन तथा अन्य मुख्य ECM प्रोटीन के संरचनात्मक व क्रियात्मक गुण, हड्डी और उपास्थि, और इनसे जुड़े रोग। इम्यूनोकेमिस्ट्री: प्रतिजन, प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया, एंटीबॉडी विविधता, इम्यूनोग्लोबुलिन की संरचना, वर्ग व कार्य, जीन स्थानांतरण, मोनोक्लोनल एंटीबॉडी, MHC, कॉम्प्लीमेंट तंत्र, टीके, पैराप्रोटीनीमिया। पेशी जैव-रसायन: कंकाल पेशी का प्रोटीन संघटन, संकुचन की क्रिया-विधि, ऊर्जा का स्रोत, पेशी-विकार। ज़ेनोबायोटिक चयापचय: चरण और प्रभाव। शरीर-द्रव: दूध, कोलोस्ट्रम, मस्तिष्क-मेरु द्रव, एम्नियोटिक, जलोदर व फुफ्फुसावरणी द्रव, नेत्रोद। पर्यावरणीय जैव-रसायन: वायु प्रदूषक, भोजन में विषैले पदार्थ, न्यूरोटॉक्सिन, भारी धातु विषाक्तता, व्यावसायिक व औद्योगिक जोखिम, संक्षारक तथा उत्तेजक, अति जलवायु का स्वास्थ्य पर असर, प्रदूषकों से जुड़े रोग। चिकित्सा में रेडियो-आइसोटोप: निदान, उपचार और शोध में उपयोग।
Unit-XIV — विशेष विषय Bकैंसर का जैव-रसायन: कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि, कार्सिनोजेनेसिस, आनुवंशिक क्षति के कारण, ओंकोजीन, ट्यूमर सप्रेसर जीन, एपोप्टोसिस, कैंसर चिकित्सा का जैव-रासायनिक आधार, ट्यूमर मार्कर, कैंसर-रोधी दवाएँ, एपिजेनेटिक तंत्र, नैदानिक पक्ष। AIDS का जैव-रसायन और उसका प्रयोगशाला निदान। बुढ़ापे का जैव-रसायन और उसके सिद्धांत। मुक्त मूलक तथा प्रति-ऑक्सीकारक: शरीर में ऑक्सीजन मूलकों के स्रोत, स्कैवेंजर तंत्र, प्रति-ऑक्सीकारकों का प्रो-ऑक्सीडेंट बनना, लिपिड परऑक्सीकरण, मुक्त मूलक और रोग। जैव-सूचना विज्ञान व कंप्यूटरी जीव-विज्ञान: जीनोमिक्स, मानव जीनोम परियोजना, संसाधन, प्रोटीन की पहचान। साक्ष्य-आधारित प्रयोगशाला चिकित्सा: अवधारणा, परिभाषा, उद्देश्य और रोज़मर्रा के काम में उसका उपयोग। अम्ल-क्षार संतुलन: अम्ल व क्षार, हेंडरसन-हैसलबाख समीकरण, बफ़र तंत्र, pH का नियमन, ऐनायन गैप, संतुलन बिगड़ना, नैदानिक पक्ष। यूनिट के अंत में विषय की नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

Pathology — 29 Recent Advances विषय और 25 मुख्य विषय, पेज 11 से 17 ↑

इस दस्तावेज़ में Pathology अकेला ऐसा विषय है जो मुख्य सिलेबस से पहले Recent Advances की सूची से शुरू होता है — पूरे उनतीस विषय, जो टॉपिक-समूह की तरह नहीं, शीर्षकों की तरह छपे हैं। वे किसी जर्नल की सूची जैसे लगते हैं, पर हैं परीक्षा के दायरे में — इसलिए यहाँ पहले और पूरे दिए गए हैं।

इसके बाद मुख्य सिलेबस पच्चीस क्रमांकित विषयों में चलता है — कोशिका क्षति से लेकर तंत्र-वार विकृति, फिर साइटोपैथोलॉजी, प्रयोगशाला यंत्र, रक्ताधान और जैव-चिकित्सा कचरा तक।

क्रमसिलेबस में दिया गया Recent Advances विषय
1ठोस अंग प्रत्यारोपण की एंटीबॉडी-जनित अस्वीकृति
2मातृ-मृत्यु का शव-परीक्षण
3नॉन-स्मॉल-सेल फेफड़ा कार्सिनोमा का वर्गीकरण और उपचार
4मोटापे की विकृति-विज्ञान
5कैंसर में स्तरित (stratified) चिकित्सा और हिस्टोपैथोलॉजिस्ट की भूमिका
6गैस्ट्रिक कार्डिया तथा बैरेट अन्नप्रणाली की श्लेष्मा विकृति
7पुनर्जनन तथा नियोप्लास्टिक यकृत-कोशिका पिंडों की विकृति
8बृहदान्त्र और मलाशय के सेरेटेड घाव
9दीर्घकालिक सूजनकारी आंत्र रोग की विकृति पर ताज़ा जानकारी
10आंत्र-पथ के MALT लिंफोमा का निदान और उपचार
11हिस्टोपैथोलॉजिस्ट के लिए मेडिकल पुनर्मान्यता
12ह्यूमन पैपिलोमावायरस की आणविक जाँच
13स्वास्थ्य और रोग में टेंसिन
14स्नातक पाठ्यक्रम में विकृति-विज्ञान
15लार ग्रंथि का प्राथमिक कार्सिनोमा — चुनी हुई नई प्रगतियाँ
16कैंसर का फैलाव और मेटास्टेसिस: एपिथीलियल-मेसेनकाइमल संक्रमण की अवधारणा
17नियोप्लास्टिक प्रगति में मैट्रिक्स मेटालोप्रोटीनेज़ (MMP) — अभी हम कहाँ हैं
18ऑस्टियोआर्थराइटिस — नई अवधारणाएँ
19त्वचीय स्यूडोलिंफोमा
20गर्भाशय-ग्रीवा जाँच के लिए लिक्विड बेस्ड साइटोलॉजी
21बचपन के मृदु-ऊतक ट्यूमर के निदान में चूक की जगहें
22शैशव में अचानक अप्रत्याशित मृत्यु
23बिना चीर-फाड़ या कम चीर-फाड़ वाला शव-परीक्षण
24जैव-आतंकवाद
25स्तन कैंसर के पूर्वानुमानी तथा रोग-निदानी आणविक मार्कर
26हिस्टोपैथोलॉजी में डिजिटल फ़ोटोग्राफ़ी
27वयस्क स्टेम कोशिकाएँ और ट्रांसडिफ़रेंशिएशन
28कठिन प्रोस्टेट बायोप्सी में इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री की भूमिका
29नैदानिक विकृति-विज्ञान में साइटोकेराटिन इम्यूनोस्टेनिंग प्रोफ़ाइल
मुख्य विषयसिलेबस उसके नीचे क्या गिनाता है
1 — कोशिका क्षतिकारण और तंत्र: इस्कीमिक, विषैली और एपोप्टोसिस। प्रतिवर्ती क्षति: प्रकार, आकारिकी, हायलिन तथा वसीय बदलाव। अपरिवर्तनीय क्षति: नेक्रोसिस के प्रकार, गैंग्रीन। कैल्सीकरण: डिस्ट्रॉफ़िक और मेटास्टैटिक। बाह्य-कोशिकीय संचय: एमिलॉयडोसिस — वर्गीकरण, रोगजनन, आकारिकी।
2 — सूजन और मरम्मततीव्र सूजन: लक्षण, कारण, संवहनी तथा कोशिकीय घटनाएँ, और उसके आकारिकीय प्रकार। सूजन की कोशिकाएँ व मध्यस्थ। दीर्घकालिक सूजन: कारण, प्रकार, अविशिष्ट तथा ग्रैन्युलोमेटस, उदाहरण सहित। घाव का प्राथमिक व द्वितीयक भरना, उसे तेज़ या धीमा करने वाले कारक, और जटिलताएँ।
3 — प्रतिरक्षा-विकृतिप्रतिरक्षा तंत्र का संगठन, कोशिकाएँ, एंटीबॉडी और प्रतिक्रिया का नियमन। अतिसंवेदनशीलता: प्रकार व उदाहरण, एंटीबॉडी तथा कोशिका-जनित ऊतक क्षति। स्वप्रतिरक्षी रोग, जैसे सिस्टेमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस। अंग प्रत्यारोपण: अस्वीकृति का प्रतिरक्षात्मक आधार और ग्राफ़्ट-बनाम-होस्ट प्रतिक्रिया।
4 — संक्रामक रोगमाइकोबैक्टीरियल: क्षय रोग और कुष्ठ। जीवाणुजन्य: पायोजेनिक, टाइफ़ाइड, डिप्थीरिया, ग्राम-ऋणात्मक संक्रमण, बैसिलरी पेचिश, सिफ़लिस। विषाणुजन्य: पोलियो, हर्पीज़, रेबीज़, खसरा, रिकेट्सियल व क्लैमाइडियल संक्रमण। कवकजन्य रोग और अवसरवादी संक्रमण। परजीवीजन्य: मलेरिया, फ़ाइलेरिया, अमीबियासिस, कालाज़ार, सिस्टिसरकोसिस, हाइडैटिड। AIDS: कारण, फैलने के तरीक़े, रोगजनन, विकृति, जटिलताएँ, जाँच प्रक्रियाएँ, संक्रमित सामग्री का रख-रखाव और स्वास्थ्य शिक्षा।
5 — रक्त-संचार की गड़बड़ियाँशोफ़ (oedema): रोगजनन और प्रकार। फेफड़ा, यकृत व प्लीहा का दीर्घकालिक शिरा-अवरोध। थ्रॉम्बोसिस और एम्बोलिज़्म: बनना, परिणति, प्रभाव। इन्फार्क्शन: प्रकार, सामान्य स्थान, गैंग्रीन। शॉक: रोगजनन, प्रकार, आकारिकीय बदलाव।
6 — वृद्धि की गड़बड़ियाँएट्रोफ़ी, हाइपरट्रॉफ़ी, हाइपरप्लेज़िया, हाइपोप्लेज़िया, मेटाप्लेज़िया, विकृति, एजेनेसिस, डिसप्लेज़िया। नियोप्लेज़िया: कारण, वर्गीकरण, हिस्टोजेनेसिस, जैविक व्यवहार, सौम्य व दुर्दम, कार्सिनोमा तथा सारकोमा। दुर्दम नियोप्लेज़िया: श्रेणी व चरण, स्थानीय और दूरस्थ फैलाव। कार्सिनोजेनेसिस: पर्यावरणीय, रासायनिक, वायरल, व्यावसायिक तथा वंशानुगत कारक और कैंसर का आणविक आधार। ट्यूमर और शरीर का पारस्परिक प्रभाव: पैरानियोप्लास्टिक सिंड्रोम सहित प्रणालीगत असर, ट्यूमर इम्यूनोलॉजी। प्रयोगशाला निदान: साइटोलॉजी, बायोप्सी, ट्यूमर मार्कर। मृदु ऊतकों के ट्यूमर और ट्यूमर-जैसी स्थितियाँ।
7 — विविध विकारऑटोसोमल तथा लिंग-सहलग्न विकार, उदाहरण सहित। प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण और विटामिन की कमी के विकार। विकिरण से चोट। वर्णक तथा खनिज चयापचय के विकार — बिलीरुबिन, मेलानिन, हीमोसाइडरिन।
8 — रक्त-विकृतिरक्ताल्पता: वर्गीकरण और नैदानिक लक्षण। पोषण-जनित: लौह, फ़ोलिक अम्ल तथा विटामिन B12 की कमी, परनीशियस एनीमिया सहित। हीमोलिटिक: वर्गीकरण और जाँच। वंशानुगत हीमोलिटिक: थैलेसीमिया, सिकल सेल, हेरेडिटरी स्फ़ेरोसाइटोसिस, G6PD की कमी। अर्जित हीमोलिटिक: मलेरिया, कालाज़ार, स्वप्रतिरक्षी, एलोइम्यून, दवा-जनित, माइक्रोएंजियोपैथिक। रक्तस्राव-रोधी तंत्र के विकार: प्लेटलेट की कमी, ITP, दवा-जनित, द्वितीयक। कोऐगुलोपैथी: थक्का कारक की कमी, हीमोफ़ीलिया, DIC और एंटीकोऐगुलेंट नियंत्रण। श्वेत कोशिका विकार: ल्यूकोसाइटोसिस, ल्यूकोपीनिया, ल्यूकीमॉइड प्रतिक्रिया। तीव्र व दीर्घकालिक ल्यूकीमिया: वर्गीकरण और निदान। मल्टीपल मायलोमा तथा डिसप्रोटीनीमिया। रक्ताधान: समूह-निर्धारण व क्रॉस मैचिंग, प्रतिकूल प्रतिक्रियाएँ, HIV और हेपेटाइटिस समेत संक्रमण का ख़तरा। मायलोडिसप्लास्टिक सिंड्रोम। मायलोप्रोलिफ़रेटिव विकार: पॉलीसाइथीमिया, मायलोफ़ाइब्रोसिस।
9 — हृदय-रक्तवाहिनी विकृतितीव्र आमवाती ज्वर: कारण-रोगजनन, आकारिकीय बदलाव और जटिलताएँ, रूमेटिक हृदय रोग सहित। संक्रामक अंतर्हृद्शोथ: कारण-रोगजनन, बदलाव, जटिलताएँ। एथेरोस्क्लेरोसिस और इस्कीमिक हृदय रोग, हृद्पेशी रोधगलन। उच्च रक्तचाप और उससे जुड़ा हृदय रोग। जन्मजात हृदय रोग: ASD, VSD, फ़ैलो चतुष्टय, द्विवलनी महाधमनी कपाट, PDA। पेरिकार्डाइटिस। कार्डियोमायोपैथी।
10 — श्वसन विकृतिश्वास-नली वृक्ष और वायुकोष्ठ भित्ति की सामान्य व बदली हुई संरचना; श्वास-नली के सूजनकारी रोग — क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, ब्रोंकिएक्टेसिस। न्यूमोनिया: लोबार, ब्रोंको, इंटरस्टीशियल। फेफड़े का फोड़ा: कारण-रोगजनन, आकारिकी, जटिलताएँ। फुफ्फुसीय क्षय रोग: प्राथमिक व द्वितीयक, प्लूराइटिस सहित प्रकार। एम्फ़ाइसीमा: प्रकार और रोगजनन। ट्यूमर: फेफड़े के उपकला दुर्दम नियोप्लाज़्म और उनके कारण। अवरोधक तथा प्रतिबंधक फेफड़ा रोग की अवधारणा — क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, एम्फ़ाइसीमा, अस्थमा। नासाग्रसनी व स्वरयंत्र के ट्यूमर। व्यावसायिक फेफड़ा रोग: एंथ्रेकोसिस, सिलिकोसिस, ऐस्बेस्टोसिस, मेसोथीलियोमा। एटेलेक्टेसिस और हायलिन मेम्ब्रेन रोग।
11 — गुर्दा और मूत्र-मार्ग विकृतिबिगड़े हुए कार्य की बुनियाद और मूत्र-परीक्षण। ग्लोमेरुलोनेफ़्राइटिस: वर्गीकरण, प्राथमिक प्रोलिफ़रेटिव व नॉन-प्रोलिफ़रेटिव, द्वितीयक (SLE, पॉलीआर्टेराइटिस, एमिलॉयडोसिस, मधुमेह)। गुर्दा रोगों की नैदानिक प्रस्तुति: नेफ़्राइटिक तथा नेफ़्रोटिक सिंड्रोम, तीव्र गुर्दा विफलता, बार-बार रक्तमेह, CRF। तीव्र गुर्दा विफलता: एक्यूट ट्यूबुलर व कॉर्टिकल नेक्रोसिस। पाइलोनेफ़्राइटिस, रिफ़्लक्स नेफ़्रोपैथी, इंटरस्टीशियल नेफ़्राइटिस। गुर्दा कोशिका ट्यूमर: रीनल सेल कार्सिनोमा, नेफ़्रोब्लास्टोमा। मूत्राशय: सिस्टाइटिस, कार्सिनोमा। बढ़ती गुर्दा विफलता और अंतिम चरण का गुर्दा रोग। गुर्दे के रक्तवाहिनी विकार। मूत्र-मार्ग का क्षय रोग। पथरी और अवरोधक नेफ़्रोपैथी। गुर्दे की जन्मजात विकृति, पॉलीसिस्टिक किडनी।
12 — आंत्र-पथ की विकृतिमुख विकृति: ल्यूकोप्लाकिया, मुख-गुहा तथा अन्नप्रणाली का कार्सिनोमा। पेप्टिक अल्सर: कारण-रोगजनन व जटिलताएँ, जठरशोथ के प्रकार। आमाशय के ट्यूमर: सौम्य, पॉलिप, लियोमायोमा, दुर्दम, एडिनोकार्सिनोमा और अन्य। छोटी आंत के सूजनकारी रोग: टाइफ़ाइड, क्षय, क्रोन रोग, अपेंडिसाइटिस। बड़ी आंत के सूजनकारी रोग: अमीबिक कोलाइटिस, बैसिलरी पेचिश, अल्सरेटिव कोलाइटिस। छोटी व बड़ी आंत के ट्यूमर: पॉलिप, कार्सिनॉइड, कार्सिनोमा, लिंफोमा। अग्न्याशयशोथ। लार ग्रंथि के ट्यूमर। इस्कीमिक तथा स्यूडोमेम्ब्रेनस एंटरोकोलाइटिस, डाइवर्टिकुलाइटिस। कुअवशोषण: सीलिएक रोग, ट्रॉपिकल स्प्रू व अन्य कारण। अग्न्याशय के ट्यूमर: अंतःस्रावी, बहिःस्रावी और पेरिऐम्पुलरी।
13 — यकृत और पित्त-मार्ग विकृतिपीलिया: प्रकार, कारण-रोगजनन और भेद। हेपेटाइटिस: तीव्र व दीर्घकालिक, कारण, रोगजनन, विकृति। सिरोसिस: कारण, वर्गीकरण, विकृति, जटिलताएँ। पोर्टल उच्च रक्तचाप: प्रकार और लक्षण। पित्ताशय के रोग: कोलेसिस्टाइटिस, पथरी, कार्सिनोमा। यकृत के ट्यूमर: हेपेटोसेल्युलर, मेटास्टैटिक, ट्यूमर मार्कर।
14 — लसीका-जालिका तंत्रलिम्फैडेनाइटिस: अविशिष्ट, ग्रैन्युलोमेटस, हॉजकिन लिंफोमा। नॉन-हॉजकिन लिंफोमा: वर्गीकरण और आकारिकी। प्लीहा के रोग: प्लीहा-वृद्धि और उसके प्रभाव।
15 — प्रजनन तंत्रगर्भाशय-ग्रीवा के रोग: ग्रीवाशोथ, ग्रीवा कार्सिनोमा, कारण, कोशिकीय निदान। मासिक चक्र की अवस्थाओं पर हॉर्मोन का असर, उनकी ऊतकीय तस्वीर और उससे जुड़ी असामान्यताएँ। गर्भाशय के रोग: एंडोमेट्रियल हाइपरप्लेज़िया व कार्सिनोमा, एडिनोमायोसिस, चिकनी पेशी के ट्यूमर। ट्रोफ़ोब्लास्टिक रोग: हाइडेटिफ़ॉर्म मोल और कोरियोकार्सिनोमा। स्तन के रोग: स्तनशोथ, फोड़ा, फ़ाइब्रोसिस्टिक रोग, नियोप्लास्टिक घाव, फ़ाइब्रोएडिनोमा, कार्सिनोमा, फ़ाइलोड्स ट्यूमर। प्रोस्टेट: नोड्युलर हाइपरप्लेज़िया, कार्सिनोमा। अंडाशय और वृषण के ट्यूमर। शिश्न का कार्सिनोमा। श्रोणि सूजन रोग, सैल्पिंजाइटिस सहित। जननांग क्षय रोग।
16 — अस्थि विकृतिऑस्टियोमाइलाइटिस: तीव्र, दीर्घकालिक, क्षय-जनित। चयापचयी रोग: रिकेट्स व ऑस्टियोमलेशिया, ऑस्टियोपोरोसिस, हाइपरपैराथायरॉइडिज़्म। ट्यूमर: प्राथमिक, ऑस्टियोसारकोमा, ऑस्टियोक्लास्टोमा, यूइंग सारकोमा, कॉन्ड्रोसारकोमा, मेटास्टैटिक। गठिया: रूमेटॉइड, ऑस्टियोइड और क्षय-जनित। हड्डी टूटने के बाद जुड़ने की प्रक्रिया।
17 — अंतःस्रावी विकृतिमधुमेह: प्रकार, रोगजनन, विकृति। थायरॉइड के गैर-नियोप्लास्टिक घाव: आयोडीन की कमी से घेंघा, स्वप्रतिरक्षी थायरॉइडाइटिस, थायरोटॉक्सिकोसिस, मिक्सिडीमा। थायरॉइड के ट्यूमर: एडिनोमा और कार्सिनोमा — पैपिलरी, फ़ॉलिक्युलर, मेड्युलरी, एनाप्लास्टिक। अधिवृक्क रोग: कॉर्टिकल हाइपरप्लेज़िया, क्षय, कॉर्टेक्स व मेड्युला के ट्यूमर। पैराथायरॉइड हाइपरप्लेज़िया और ट्यूमर।
18 — तंत्रिका विकृतिसूजनकारी विकार: पायोजेनिक व क्षय-जनित मेनिंजाइटिस, मस्तिष्क फोड़ा, ट्यूबरकुलोमा। CNS ट्यूमर: प्राथमिक ग्लायोमा और मेनिंजियोमा, तथा मेटास्टैटिक। CSF और उसकी गड़बड़ियाँ: मस्तिष्क शोफ़, बढ़ा हुआ इंट्राक्रेनियल दबाव। मस्तिष्क-रक्तवाहिनी रोग: एथेरोस्क्लेरोसिस, थ्रॉम्बोसिस, एम्बोलिज़्म, एन्यूरिज़्म, हाइपोक्सिया, रोधगलन और रक्तस्राव।
19 — त्वचा विकृतित्वचा के ट्यूमर: स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा, बेसल सेल कार्सिनोमा और मेलानोमा, उपांगीय ट्यूमर, तथा सामान्य ग़ैर-नियोप्लास्टिक त्वचा रोग।
20 — मृदु ऊतकों के ट्यूमरसामान्य प्रोसेसिंग और फ़्रोज़न सेक्शन। सहायक नैदानिक जाँचें, इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री, ट्यूमर मार्कर और उनकी व्याख्या।
21 — आणविक आनुवंशिकीहाइब्रिड DNA तकनीकें और रोगों में उनका उपयोग।
22 — कोशिका-विकृति (Cytopathology)नमूना लेने की प्रक्रियाएँ और निदान की व्याख्या। शरीर-द्रव, मूत्र-मार्ग, स्त्री जननांग-मार्ग, एम्नियोटिक द्रव तथा आँसू की एक्सफ़ोलिएटिव साइटोलॉजी। फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी। इम्प्रिंट, क्रश स्मीयर और बायोप्सी सेडिमेंट साइटोलॉजी। सेक्स क्रोमैटिन बॉडी के लिए बक्कल स्मीयर।
23 — प्रयोगशाला के उच्च-तकनीक यंत्रइन जाँचों की तकनीक, प्रक्रिया, सिद्धांत और नैदानिक व्याख्या का ज्ञान: हीमैटोलॉजी ऑटो-एनालाइज़र, फ़्लो साइटोमीटर, पॉलिमरेज़ चेन रिएक्शन (PCR), इलेक्ट्रोकेमिलुमिनेसेंट इम्यूनोऐसे (ECLIA), हाई परफ़ॉर्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी (HPLC), इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप, फ़ेज़ कॉन्ट्रास्ट माइक्रोस्कोप, फ़्लोरेसेंट माइक्रोस्कोप और इलेक्ट्रोफ़ोरेसिस।
24 — रक्ताधान का विवेकपूर्ण व सुरक्षित उपयोगब्लड बैंकिंग की प्रक्रियाएँ और रक्त घटकों को बनाना तथा उनका भंडारण।
25 — प्रयोगशाला जैव-चिकित्सा कचरासंग्रह, पृथक्करण और निपटान के सिद्धांत। विषय के अंत में नवीनतम प्रगति भी जोड़ी गई है।

Microbiology — एक सामान्य खंड और छह अक्षर-वाले खंड, पेज 17 से 19 ↑

Microbiology यूनिट में नहीं बँटा है। यह General Microbiology से शुरू होता है और फिर A से F तक चलता है: जीवाणु विज्ञान, प्रतिरक्षा विज्ञान, कवक विज्ञान, विषाणु विज्ञान, परजीवी विज्ञान, और व्यावहारिक सूक्ष्म-जीव विज्ञान के साथ नवीनतम प्रगति।

इनमें परजीवी विज्ञान अकेला ऐसा खंड है जो पैराग्राफ़ के बजाय सूची में लिखा है — प्रोटोज़ोआ से लेकर विविध परजीवियों तक तेरह अलग प्रविष्टियाँ — इसलिए अपनी तैयारी जाँचने के लिए यही सबसे आसान जगह है।

यूनिट / क्रमइसमें क्या-क्या आता है
सामान्य सूक्ष्म-जीव विज्ञानऐतिहासिक परिचय; सूक्ष्मदर्शन और माइक्रोमेट्री; यंत्रों का उपयोग व रख-रखाव; जैव-सुरक्षा उपाय, कंटेनमेंट सुविधाएँ और सूक्ष्मजैविक सामग्री की ढुलाई; निर्जर्मीकरण व विसंक्रमण, स्टेरिलिटी जाँच और संकेतक; सूक्ष्मजीवों का नामकरण तथा वर्गीकरण; मानव शरीर की सामान्य वनस्पति; जल, दूध और वायु का सूक्ष्म-जीव विज्ञान व उसका उपयोग; नैदानिक नमूनों का संग्रह, ढुलाई और प्रसंस्करण; संक्रमण का प्रयोगशाला निदान, संवर्धन माध्यम व विधियाँ, अभिरंजक और पहचान-जाँचें, स्टॉक कल्चर का रख-रखाव; प्रयोगशाला पशुओं की देखभाल, उपयोग व प्रयोग-तकनीक; सूक्ष्मजैविक संक्रमण, आणविक आनुवंशिकी और उनके उपयोग।
A — जीवाणु विज्ञान (Bacteriology)जीवाणुओं की आकारिकी, शरीर-क्रिया, वर्गीकरण, संवर्धन लक्षण, विषाणुता कारक, प्रतिजनता और दवा-प्रतिरोध के तंत्र; अवायवीयता; चिकित्सा-महत्व के जीवाणुओं की पहचान की पारंपरिक तथा नई आणविक विधियाँ — ग्राम-धनात्मक कोकाई (स्टैफ़िलोकोकस, स्ट्रेप्टोकोकस, न्यूमोकोकस), ग्राम-ऋणात्मक कोकाई (नाइसीरिया, पेप्टोस्ट्रेप्टोकोकस), ग्राम-ऋणात्मक बैसिलाई (एंटरोबैक्टीरिएसी परिवार, हीमोफ़िलस, बोर्डेटेला, ब्रूसेला और अन्य नाज़ुक जीव), ग्राम-धनात्मक बैसिलाई (कोराइनबैक्टीरियम, B. anthracis, क्लोस्ट्रिडियम, माइकोबैक्टीरियम); क्षय रोग और नॉन-ट्यूबरकुलर माइकोबैक्टीरिया, Mycobacterium leprae, एक्टिनोमाइसेट्स, रिकेट्सिएसी, ओरिएंटिया, एर्लिकिया व कॉक्सिएला, क्लैमाइडिया व क्लैमाइडोफ़िला, माइकोप्लाज़्मा व यूरियाप्लाज़्मा, ट्रेपोनीम, बोरेलिया, लेप्टोस्पाइरा, अन्य नॉन-स्पोर अवायवीय तथा कम मिलने वाले जीवाणु; संवर्धन में न उगने वाले रोगजनकों की पहचान; और जीवाणु-रोधी दवा का चुनाव।
B — प्रतिरक्षा विज्ञान (Immunology)संक्रमण और प्रतिरक्षा; प्रतिजन, एंटीबॉडी, कॉम्प्लीमेंट तथा प्रतिजन-एंटीबॉडी अभिक्रिया — ELISA, इम्यूनोक्रोमैटोग्राफी और ब्लॉटिंग जैसी सरल, तेज़ व स्वचालित तकनीकों के संदर्भ में; प्रतिरक्षा तंत्र की संरचना व कार्य, प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया, उसे नापने की विधियाँ और उपयोग; अतिसंवेदनशीलता, प्रतिरक्षा-न्यूनता रोग, स्वप्रतिरक्षा; प्रत्यारोपण और दुर्दमता की प्रतिरक्षा-विज्ञान, HLA टाइपिंग व ऊतक मिलान; रोग निदान में मोनोक्लोनल एंटीबॉडी; इम्यूनोप्रोफ़ाइलैक्सिस, इम्यूनोमॉड्यूलेशन और इम्यूनोथेरेपी; इम्यूनोहीमैटोलॉजी तथा आधान-जनित संक्रमण (TTI); और प्रतिरक्षा विज्ञान में प्रयोगशाला चूहों (suckling, SCID, nude, knock-out) का उपयोग।
C — कवक विज्ञान (Mycology)चिकित्सा-महत्व के कवकों के सामान्य गुण, नामकरण, वर्गीकरण और आकारिकी; कवक संक्रमण की महामारी-विज्ञान, रोगजनन, नैदानिक लक्षण, रोकथाम, नियंत्रण व उपचार; प्रयोगशाला निदान — संवर्धन तकनीकें (स्लाइड कल्चर, स्कॉच टेप तैयारी, जर्म ट्यूब जाँच, कॉर्नमील अगर, आकारिकी से पहचान, शर्करा किण्वन व स्वांगीकरण जाँच, एक्सो-एंटीजन जाँच) तथा ग़ैर-संवर्धन तकनीकें (सीरोलॉजी, पशु-अंतःक्षेपण, आणविक विधियाँ) — त्वचीय, अधस्त्वचीय, गहरे, प्रणालीगत और अवसरवादी माइकोसिस के लिए, जो यीस्ट, यीस्ट-सदृश कवक, हायलोहाइफ़ोमाइसीज़, फ़ीयोहाइफ़ोमाइसीज़, फ़ाइकोमाइसीज़ और द्विरूपी कवकों से होते हैं; और कवक-रोधी दवाएँ, इन-विट्रो संवेदनशीलता जाँच व प्रतिरोध का तंत्र।
D — विषाणु विज्ञान (Virology)विषाणुओं के सामान्य गुण, नामकरण, वर्गीकरण और प्रतिकृति; प्रयोगशाला निदान की संवर्धन व ग़ैर-संवर्धन विधियाँ; विशेष संवर्धन तकनीकें जैसे शेल वायल कल्चर और अंडा-अंतःक्षेपण; नमूनों का संग्रह, ढुलाई तथा प्रसंस्करण; विषाणु पहचान की नई तकनीकें; विषाणु-पोषक संबंध, विषाणु आनुवंशिकी और रोगजनन — DNA विषाणु, RNA विषाणु, बैक्टीरियोफ़ेज, प्रियॉन समेत धीमे विषाणु, सामान्य तथा कैंसरकारी विषाणु, हेपेटाइटिस व HIV के विशेष संदर्भ के साथ; विविध विषाणु — SARS व कोरोना, ज़ीका, एवियन इन्फ़्लुएंज़ा; वायरल रक्तस्रावी बुख़ार; और विषाणु टीके व विषाणु-रोधी दवाएँ।
E — परजीवी विज्ञान (Parasitology)सामान्य परिचय: वर्गीकरण, पोषक, पोषक-परजीवी संबंध, संचरण, महामारी-विज्ञान, जीवन चक्र, रोगजनन, प्रतिरक्षा-विज्ञान, प्रयोगशाला निदान और उपचार। फिर क्रम से: प्रोटोज़ोआ का परिचय, सामान्य लक्षण व वर्गीकरण; अमीबा, मुक्तजीवी अमीबा सहित; आंत्रीय तथा जननांगी फ़्लैजेलेट; रक्त-फ़्लैजेलेट; मलेरिया परजीवी और बेबीसिया; अवसरवादी कॉक्सीडियन परजीवी; विविध प्रोटोज़ोआ; कृमि-विज्ञान — सामान्य लक्षण, आकारिकी व जीवन चक्र; सेस्टोड; ट्रेमेटोड (फ़्लूक); आंत्रीय सूत्रकृमि और निम्न प्राणियों के सूत्रकृमि; दैहिक सूत्रकृमि; तथा विविध परजीवी और उनका प्रयोगशाला निदान।
F — व्यावहारिक सूक्ष्म-जीव विज्ञान, दायरा और नवीनतम प्रगतिजैव-चिकित्सा कचरा प्रबंधन और संक्रामक कचरे का निपटान; दवा-प्रतिरोध की निगरानी, ख़ासकर MRSA, VRSA, VISA, VRE और ग्राम-ऋणात्मक बैसिलाई में ESBL; अस्पताल-जनित संक्रमण और उनका नियंत्रण; महामारी-वैज्ञानिक टाइपिंग विधियाँ व प्रकोप प्रबंधन; अवसरवादी संक्रमण, HIV/AIDS के विशेष संदर्भ में; कम ख़र्चीली, सरल और तेज़ नैदानिक तकनीकें; संक्रामक रोगों की महामारी-विज्ञान, आर्थ्रोपोड-जनित रोग तथा ज़ूनोसिस सहित; जैविक युद्ध और जैव-आतंकवाद; जीन हेरफेर, आनुवंशिक अभियांत्रिकी, जीन क्लोनिंग व जीन थेरेपी; संक्रामक कारक और कैंसर का संबंध; उभरते तथा दोबारा उभरते संक्रामक रोग; PCR, TMA, DNA प्रोब जैसी आणविक जाँचों में नई प्रगति; स्वचालन, गुणवत्ता नियंत्रण व आश्वासन; रोगाणु-रोधी चिकित्सा, दवा-प्रतिरोध और एंटीमाइक्रोबियल स्टीवर्डशिप; तथा नए टीकों का विकास। सिलेबस यह भी जोड़ता है कि इन विषयों से जुड़ी सभी प्रायोगिक तकनीकें और सूक्ष्म-जीव विज्ञान से जुड़ा कोई भी अन्य विषय इसमें शामिल है।

Pharmacology — 17 यूनिट, पेज 19 से 22 ↑

सत्रह यूनिट हैं और सब बुलेट सूची में लिखी हैं, पैराग्राफ़ में नहीं — इसलिए इस दस्तावेज़ में इसे सीधे चेकलिस्ट में बदलना सबसे आसान है।

अंत में वज़न कहाँ है, यह देख लीजिए: Unit-XIV से XVII तक जैव-रासायनिक औषध विज्ञान, नैदानिक औषध विज्ञान, शोध पद्धति और जैव-सांख्यिकी हैं — चार यूनिट, जो दवाओं का औषध विज्ञान हैं ही नहीं, और जो सिर्फ़ दवा-वर्ग दोहराने वाले उम्मीदवार कभी नहीं पढ़ते।

यूनिट / क्रमइसमें क्या-क्या आता है
Unit-I — बुनियादी और नैदानिक औषध विज्ञानऔषध विज्ञान का इतिहास व विकास; संरचना-सक्रियता संबंध और उसका महत्व; औषध विज्ञान की रासायनिक नाम-पद्धति; जैविक झिल्लियों के आर-पार दवा का जाना; दवा का अवशोषण, वितरण और प्लाज़्मा प्रोटीन से जुड़ाव; जैव-रूपांतरण, उत्सर्जन और उन्हें प्रभावित करने वाले कारक; क्रिया-विधि; दवा-दवा अंतःक्रिया और चिकित्सा-जनित विकार; फार्माकोजेनेटिक्स; नशे की लत और उसका प्रबंधन; भ्रूण-विकृति व कैंसरजनकता तथा उन्हें जाँचने की विधियाँ; और दवा-प्रतिरोध।
Unit-II — स्वायत्त तंत्रिका तंत्रANS के शारीरिक व क्रियात्मक पहलू; कोलिनर्जिक एगोनिस्ट और एंटीकोलिनर्जिक दवाएँ; न्यूरोमस्कुलर ब्लॉकिंग दवाएँ तथा न्यूरोमस्कुलर व गैंग्लियोनिक ब्लॉकर की स्क्रीनिंग; एंटीकोलिनेस्टरेज़ दवाएँ और उनके रिएक्टिवेटर; ग्राही तंत्र और एड्रीनर्जिक ग्राहियों का औषधीय लक्षण-वर्णन; कैटेकोलामाइन का जैव-संश्लेषण व निकलना और उसे प्रभावित करने वाले कारक; कैटेकोलामाइन का औषध विज्ञान और चिकित्सकीय उपयोग; ग़ैर-कैटेकोलामाइन सिम्पैथोमिमेटिक दवाएँ; तथा अल्फ़ा व बीटा एड्रीनर्जिक ब्लॉकर।
Unit-III — CNS और परिधीय तंत्रिका तंत्रCNS में तंत्रिका-हॉर्मोनी संचरण की शरीर-क्रिया व औषध विज्ञान; पार्किंसनिज़्म तथा अन्य तंत्रिका-क्षयकारी रोगों की रोग-क्रिया और प्रबंधन; बेहोशी से पहले की दवाएँ और निश्चेतना के चरण; सामान्य निश्चेतक; स्थानीय निश्चेतक और उनकी स्क्रीनिंग; ओपिओइड ग्राही, एनकेफ़ैलिन व एंडोर्फ़िन; ओपिओइड दर्दनाशक और उनके प्रतिरोधी; दर्दनाशक, ज्वररोधी तथा सूजनरोधी दवाएँ; अवसादरोधी; मनोविकाररोधी और लिथियम; शामक व निद्राकारी; चिंतारोधी; केंद्रीय पेशी-शिथिलक और उनकी जाँच विधियाँ; अल्कोहल; CNS उत्तेजक तथा संज्ञान-वर्धक; नशीली दवाओं का दुरुपयोग; और मिर्गीरोधी दवाएँ।
Unit-IV — हृदय-रक्तवाहिनी तंत्रहृदय की अनियमित गति की रोग-क्रिया और उपचार; हृदय विफलता की रोग-क्रिया और उपचार; इस्कीमिक हृदय रोग की रोग-क्रिया और उपचार; उच्च रक्तचाप-रोधी दवाएँ तथा उपचार; और परिधीय रक्तवाहिनी रोग की दवाएँ।
Unit-V — रोगाणु-रोधी दवाएँपरिचय, क्रिया-विधि और रोगाणु-रोधी चिकित्सा के सिद्धांत; सल्फ़ोनामाइड; बीटा-लैक्टम प्रतिजैविक; टेट्रासाइक्लिन और क्लोरैम्फ़ेनिकॉल; अमीनोग्लाइकोसाइड; मैक्रोलाइड; क्विनोलोन और मूत्र-मार्ग संक्रमण का उपचार; अमीबा-रोधी दवाएँ; मलेरिया-रोधी; क्षय-रोधी; कुष्ठ-रोधी; कवक-रोधी; विषाणु-रोधी; कृमि-रोधी; कैंसर-रोधी; और अन्य रोगाणु-रोधी दवाएँ।
Unit-VI — अंतःस्रावी विज्ञानएंड्रोजन और एनाबॉलिक स्टेरॉइड; अधिवृक्क स्टेरॉइड, लिंग हॉर्मोन तथा गर्भनिरोधक दवाएँ; हाइपोथैलेमिक व पीयूष हॉर्मोन; अग्न्याशयी हॉर्मोन; मधुमेह-रोधी दवाएँ; थायरॉइड और थायरॉइड-रोधी दवाएँ; कैल्शियम चयापचय तथा अस्थि-खनिजीकरण पर असर डालने वाली दवाएँ; और गर्भाशय पर काम करने वाली दवाएँ।
Unit-VII — गुर्दा तंत्रमूत्रवर्धक और मूत्ररोधी दवाएँ।
Unit-VIII — ऑटाकॉइडहिस्टामिन और हिस्टामिन-रोधी; 5-HT, उसके एगोनिस्ट व प्रतिरोधी तथा माइग्रेन का उपचार; प्रोस्टाग्लैंडिन, ल्यूकोट्रायीन और प्लेटलेट सक्रियक कारक; तथा एर्गोट क्षाराभ।
Unit-IX — श्वसन तंत्रखाँसी, दमा (ब्रोंकियल अस्थमा) और COPD का उपचार।
Unit-X — आंत्र-पथअम्ल-पेप्टिक रोगों का उपचार; वमनकारी और वमनरोधी दवाएँ; तथा क़ब्ज़, दस्त और सूजनकारी आंत्र रोग की दवाएँ।
Unit-XI — रक्तहीमैटिनिक और एरिथ्रोपोइटिन; थक्का बनाने व रोकने वाली दवाएँ, एंटीप्लेटलेट तथा थ्रॉम्बोलिटिक; वसा-न्यूनकारी दवाएँ; और प्लाज़्मा विस्तारक तथा शॉक की औषध चिकित्सा।
Unit-XII — विविध विषयकैंसर-रोधी दवाएँ; इम्यूनोथेरेपी; जीन थेरेपी; चीलेटिंग दवाएँ; विटामिन, टीके, सीरम, इम्यूनोग्लोबुलिन; त्वचा-रोग औषध विज्ञान; और प्रतिरोधी व विसंक्रामक (antiseptics, disinfectants)।
Unit-XIII — व्यावहारिक औषध विज्ञानरक्तवाहिनी-सक्रिय पेप्टाइड; फार्माकोइकोनॉमिक्स; फार्माकोजेनेटिक्स; फार्माकोएपिडेमियोलॉजी; खेलों में दवाएँ और डोपिंग जाँच; फार्माकोजीनोमिक्स; माइक्रोडोज़िंग; पशु-प्रयोगों के विकल्प; नई दवा के विकास में जैव-प्रौद्योगिकी की भूमिका; स्वास्थ्य व रोग में मुक्त मूलकों की भूमिका; नई दवा-वितरण प्रणालियाँ; औषध विज्ञान के नोबेल विजेता; और फार्माकोविजिलेंस।
Unit-XIV — जैव-रासायनिक औषध विज्ञानऔषध विज्ञान व विष विज्ञान की विश्लेषण विधियाँ; पदार्थों की पहचान और मात्रा नापने के सिद्धांत — क्रोमैटोग्राफी, स्पेक्ट्रोफ़ोटोमेट्री, फ़्लेम फ़ोटोमेट्री, स्पेक्ट्रो-फ़्लोरो फ़ोटोमेट्री, HPLC, गैस क्रोमैटोग्राफी और मास स्पेक्ट्रोमेट्री; रेडियोइम्यूनोऐसे समेत प्रतिरक्षा-आधारित जाँचों के सिद्धांत और उनका महत्व; तथा रेडियोसक्रिय पदार्थों से ट्रेसर तकनीक और उनका मापन।
Unit-XV — नैदानिक औषध विज्ञाननैदानिक औषध विज्ञान के सामान्य सिद्धांत — डायनामिक्स, काइनेटिक्स, प्रतिकूल दवा प्रतिक्रिया (ADR) और दवा के असर को बदलने वाले कारक; क्लिनिकल फार्माकोकाइनेटिक्स, सांद्रता-प्रभाव संबंध व उसके मानक, लक्ष्य-सांद्रता रणनीति, प्लैटो सिद्धांत और पॉपुलेशन फार्माकोकाइनेटिक्स; चिकित्सकीय दवा निगरानी; ADR की निगरानी व रोकथाम; जैव-उपलब्धता तथा जैव-समतुल्यता अध्ययन; प्लेसीबो; नैदानिक परीक्षणों की रूपरेखा और संचालन; दवा विकास के चरण (Phase 1, 2, 3, 4); बहुत छोटी और बहुत बड़ी उम्र में दवा चिकित्सा — नवजात, बुज़ुर्ग; गर्भावस्था व स्तनपान में दवा; चिकित्सा-जनित विकार; पर्ची की जाँच और शोध-पत्र तथा प्रचार सामग्री का आलोचनात्मक मूल्यांकन; और नैदानिक परीक्षण व दवा चिकित्सा के नैतिक तथा क़ानूनी पहलू।
Unit-XVI — शोध पद्धतिप्रयोगशाला पशुओं को रखना और उनका प्रजनन; नियामक दिशा-निर्देश (CPCSEA) और पशु-प्रयोगों के विकल्प; दवा विकास — प्री-क्लिनिकल और क्लिनिकल; दवा संबंधी नियम; प्री-क्लिनिकल इन-विट्रो व इन-विवो कार्य; बायोऐसे और उसका महत्व; औषध विज्ञान की स्क्रीनिंग विधियाँ — ANS, CNS (शामक, निद्राकारी, मनोसक्रिय, चिंतारोधी, अवसादरोधी, दौरारोधी, स्थानीय निश्चेतक, पार्किंसन-रोधी, NSAIDS, ओपिओइड), श्वसन दवाएँ, CVS (एंटी-एंजाइनल, उच्च रक्तचाप-रोधी, अतालता-रोधी, CHF की दवाएँ), मूत्रवर्धक स्क्रीनिंग, GIT दवाएँ (पेप्टिक अल्सर, वमनकारी-वमनरोधी, दस्तरोधी), ऑक्सीटोसिन व टोकोलिटिक, और हॉर्मोन (मुखीय शर्करा-न्यूनकारी, प्रजनन व गर्भनिरोधक दवाओं की स्क्रीनिंग) पर दवा की क्रिया जाँचने के लिए; पशुओं में तीव्र, उप-तीव्र व दीर्घकालिक विषाक्तता अध्ययन; प्रोटोकॉल बनाना और शोध-प्रबंध लिखना; तथा शोध-पत्र, रिपोर्ट लिखना और वैज्ञानिक पत्रिकाओं की समीक्षा।
Unit-XVII — जैव-सांख्यिकीसामान्य बंटन और यादृच्छिक संख्याएँ; माध्य, बहुलक, माध्यिका, मानक विचलन, मानक त्रुटि; Z जाँच और P मान; स्टूडेंट t जाँच (युग्मित व अयुग्मित), काई-वर्ग जाँच; एक, दो और K प्रतिदर्श समस्याओं के लिए नॉन-पैरामीट्रिक जाँच; ANOVA; सहसंबंध, सरल तथा बहु रैखिक समाश्रयण; और महामारी-वैज्ञानिक सांख्यिकी। विषय के अंत में नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

Forensic Medicine — 19 क्रमांकित विषय, पेज 23 से 24 ↑

उन्नीस क्रमांकित विषय हैं, और उनके भीतर का बँटवारा देख लेना चाहिए: 1 से 6 तक क़ानून, प्रक्रिया और पहचान है, 7 से 14 तक चोटें, मृत्यु और न्यायालयिक मनोरोग विज्ञान, और 15 से 19 तक विष विज्ञान।

सिलेबस ख़ुद चार क़ानूनों का नाम लेता है — MTP अधिनियम 1971, PCPNDT अधिनियम, मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 1987 और ख़तरनाक औषधि अधिनियम — और सिलेबस में जिन क़ानूनों का नाम लिखा हो, वही सबसे सीधे-सीधे पूछे जाते हैं।

क्रमसिलेबस में दिया गया विषय
1चिकित्सक से जुड़ा क़ानून।
2क़ानूनी प्रक्रिया और इंक्वेस्ट; अलग-अलग अदालतें और उनके अधिकार; मेडिको-लीगल रिपोर्ट; मृत्यु-पूर्व कथन और मृत्यु-पूर्व गवाही; चिकित्सक गवाह; पेशेवर गोपनीयता और विशेषाधिकार-प्राप्त संवाद; पेशेवर तथा सहभागी लापरवाही; चेतावनी सूचना और निंदनीय आचरण; प्रतिनिधिक दायित्व; और सहमति।
3मेडिको-लीगल शव-परीक्षण — सड़े हुए और क्षत-विक्षत शव, कंकाल की जाँच तथा क़ब्र से शव निकालना (exhumation) सहित।
4मृत्यु और मृत्यु के बाद शरीर में बदलाव; मृत्यु के प्रकार; अचानक मृत्यु; मृत्यु का क्षण और मृत्यु की क़ानूनी उपधारणा।
5जीवित और मृत की पहचान — नस्ल, लिंग व आयु का निर्धारण और उनके मेडिको-लीगल पहलू — उँगलियों के निशान तथा DNA फ़िंगरप्रिंट, मानवमिति, निशान (scar), गोदना, व्यवसाय-जनित चिह्न, इंटरसेक्स और दाँत सहित।
6रक्त धब्बे, वीर्य धब्बे, बाल और रेशों की जाँच; न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला; और आर्टिफ़ैक्ट।
7हिंसक श्वासावरोधी मृत्यु — फाँसी, गला घोंटना, थ्रॉटलिंग, दम घुटना, डूबना, आघातजन्य श्वासावरोध और कैफ़े कोरोनरी।
8तापजन्य चोटें — जलना, खौलते द्रव से जलना, ठंड और गर्मी, बिजली, वज्रपात तथा विकिरण।
9यांत्रिक चोटें और उनके मेडिको-लीगल पहलू, मृत्यु-पूर्व व मृत्यु-पश्चात चोट और चोट की आयु का निर्धारण सहित।
10क्षेत्रीय चोटें — खोपड़ी का टूटना, कपाल के भीतर रक्तस्राव, मस्तिष्क आघात, कॉन्ट्रेकूप चोट, मेरुदंड की चोट, तथा छाती और पेट की चोट।
11नपुंसकता और बंध्यता; कृत्रिम गर्भाधान; कौमार्य; गर्भ और प्रसव के चिह्न और उनके मेडिको-लीगल पहलू।
12यौन अपराध और बलात्कार, बलात्कार क़ानून में हाल के बदलाव सहित; अप्राकृतिक यौन अपराध और विभिन्न यौन विकृतियाँ।
13प्राकृतिक और आपराधिक गर्भपात: MTP अधिनियम 1971, PCPNDT अधिनियम, आपराधिक गर्भपात में डॉक्टर का कर्तव्य, तथा शिशु-हत्या — जीवित जन्मा, मृत जन्मा और मृत-प्रसव और उनसे जुड़ी जाँचें।
14न्यायालयिक मनोरोग विज्ञान: डेलिरियम, भ्रम, मतिभ्रम, आवेग, मनोविकृति और तंत्रिका-विकृति; बुद्धि-लब्धि; मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 1987; असली और बनावटी मानसिक बीमारी; मानसिक रोगी को नियंत्रित रखना; और विक्षिप्त व्यक्ति की दीवानी व फ़ौजदारी ज़िम्मेदारी।
15न्यायालयिक विष विज्ञान: सामान्य बातें; विभिन्न अधिनियमों और ख़तरनाक औषधि अधिनियम के तहत ज़हर की बिक्री; ज़हरों का वर्गीकरण; ज़हर की क्रिया और उसमें बदलाव; जीवित तथा मृत में विषाक्तता का निदान; विसरा का परिरक्षण; और संदिग्ध विषाक्तता में चिकित्सक के कर्तव्य।
16संक्षारक, अधात्विक और धात्विक ज़हर और उनके मेडिको-लीगल पहलू — नैदानिक तस्वीर, उपचार और पोस्टमॉर्टम निष्कर्ष सहित।
17कीटनाशक और खरपतवारनाशी; साँप के काटने समेत जैविक उत्तेजक; और भोजन-जनित विष।
18निद्राकारी ज़हर — अफ़ीम और उसके उत्पाद; मादक ज़हर — एथिल तथा मिथाइल अल्कोहल; भ्रमकारी ज़हर — धतूरा, भाँग, कोकीन; नशे की लत और निर्भरता; और नशे के आदी व्यक्ति का प्रबंधन।
19हृदय पर असर करने वाले ज़हर — अकोनाइट और HCN; मेरुदंड पर असर करने वाले ज़हर; और श्वासावरोधक — CO, सीवर गैस तथा युद्ध गैस। विषय के अंत में नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

Community Medicine — चार अलग पदों के लिए एक ही 29-विषय सिलेबस, पेज 24 से 33 ↑

सामुदायिक चिकित्सा के उम्मीदवार के लिए इस दस्तावेज़ की सबसे काम की बात यही है, और दस पेजों में फैली होने के कारण छूट भी आसानी से जाती है। यही सिलेबस चार बार छपा है — 8A, 8B, 8C और 8D के रूप में: Assistant Professor तथा Assistant Professor I/c UTHC/RTHC [Level-11] पद के लिए, Epidemiologist-cum-Assistant Professor के लिए, Statistician-cum-Assistant Professor के लिए, और Lady Medical Officer के लिए।

हमने चारों हिस्सों को स्पेसिंग और पेज-फ़ुटर हटाकर अक्षर-दर-अक्षर मिलाया। वे बिल्कुल एक जैसे हैं — वही उनतीस विषय, वही क्रम, और epidemiologist या statistician पद के लिए कहीं कुछ अतिरिक्त नहीं। यानी एक तैयारी चारों पेपरों के लिए काफ़ी है। यह मिलान हमारा किया हुआ है; दस्तावेज़ ख़ुद ऐसा कोई दावा नहीं करता।

क्रमसिलेबस में दिया गया विषय (8A, 8B, 8C और 8D — चारों में एक ही)
1सामुदायिक चिकित्सा का इतिहास, अवधारणाएँ और व्यवहार; चिकित्सा तथा जन-स्वास्थ्य सेवाओं का विकास; निवारक, सामाजिक और सामुदायिक चिकित्सा के सिद्धांत; सामुदायिक निदान; मेंडल का नियम, आनुवंशिक रोग और आनुवंशिक परामर्श।
2स्वास्थ्य और रोग की अवधारणाएँ; उनके आयाम; स्वास्थ्य के निर्धारक; स्वास्थ्य की पारिस्थितिकी; स्वास्थ्य व रोग के सूचक; रोग संचरण की गतिकी; हिमखंड परिघटना; रोकथाम और हस्तक्षेप के स्तर; तथा जीवनशैली-जनित रोग।
3सामाजिक और व्यवहारिक विज्ञान — समाजशास्त्र, सामाजिक मनोविज्ञान, सामाजिक मानव-विज्ञान: समाज व संस्कृति की अवधारणा; परिवार तथा समुदाय की संरचना, उसके लक्षण और कार्य; समूह गतिकी; नेतृत्व के तरीक़े; सामाजिक स्तरीकरण; सामाजिक बदलाव; शहरीकरण और उसकी समस्याएँ; सीखने के सिद्धांत; संप्रेषण की प्रक्रिया; स्वास्थ्य व रोग से जुड़े सांस्कृतिक कारक; सामाजिक तनाव और विचलित व्यवहार; चिकित्सा-सामाजिक कार्य; अस्पताल समाजशास्त्र; और शहरी झुग्गियों की स्वास्थ्य समस्याएँ।
4जैव-सांख्यिकी तथा स्वास्थ्य सांख्यिकी का परिचय; जनगणना और आँकड़ों के अन्य स्रोत; आँकड़ों का संग्रह व प्रस्तुति; केंद्रीय प्रवृत्ति तथा विचरण के माप; प्रारंभिक सांख्यिकीय विश्लेषण; सार्थकता जाँच; प्रतिचयन और उसकी विधियाँ; प्रायोगिक व समुदाय-आधारित अध्ययनों की रूपरेखा; स्वास्थ्य आँकड़ों का दायरा, स्रोत और उपयोग; परिकल्पना की जाँच; जीवन-सारणी; सहसंबंध व समाश्रयण विश्लेषण; और शोध पद्धति के प्रकार तथा स्वास्थ्य में उनका महत्व।
5व्यावहारिक पोषण: पोषण के सिद्धांत; पोषण की ज़रूरतें; संतुलित आहार; कमी से होने वाले रोग; पोषण आकलन; कुपोषण की पारिस्थितिकी और उसे रोकने के तरीक़े; भोजन के विष; खाद्य प्रसंस्करण व परिरक्षण; आम खाद्य पदार्थों का पोषण मूल्य; आहार और रोग; खाद्य योज्य, फ़ोर्टिफ़िकेशन व संवर्धन; पोषण से जुड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम; पोषण निगरानी; और खाद्य सुरक्षा अधिनियम।
6व्यक्तिगत और पर्यावरणीय स्वास्थ्य; रोग रोकने तथा स्वास्थ्य बढ़ाने के लिए भौतिक व जैविक पर्यावरण का नियंत्रण; जल, वायु, आर्द्रता, संवातन, प्रकाश, विकिरण, शोर और आवास का स्वास्थ्य पर असर और बचाव के उपाय; मौसम-संबंधी पर्यावरण और मापक यंत्र; पीने योग्य जल का आकलन। कचरा निपटान: प्रकार, संग्रह की विधियाँ, भंडारण व निपटान; मानव मल और नगरपालिका कचरे का सुरक्षित निपटान; शिविर स्वच्छता; ई-कचरा निपटान; वैश्विक तापन; और स्वास्थ्य सेवा में एक्सपोज़र से पहले व बाद की रोकथाम दवा।
7आपदा: परिभाषा, प्राकृतिक आपदाओं की तैयारी और प्रतिक्रिया; आपदाओं के प्रकार; आपदा में प्रतिक्रिया और ट्राइएज; राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण; और स्वास्थ्य पर असर।
8अस्पताल में जैव-चिकित्सा कचरे का वर्गीकरण व प्रबंधन और उससे जुड़ा क़ानून।
9स्वास्थ्य शिक्षा: उद्देश्य, तरीक़े, सिद्धांत और विधियाँ; स्वास्थ्य में संप्रेषण, उसके प्रकार और माध्यम; स्वास्थ्य परामर्श; और GATHER पद्धति तथा स्वास्थ्य व रोग में उसका उपयोग।
10महामारी-विज्ञान के उद्देश्य और उपयोग; उसकी पद्धतियाँ; दर और अनुपात; रुग्णता तथा मृत्यु दर का मापन; महामारी-वैज्ञानिक अध्ययन; संबंध और कारणता; संक्रामक रोग महामारी-विज्ञान; रोग संचरण; रोग नियंत्रण के सिद्धांत व विधियाँ; महामारी की जाँच; और IDSP।
11प्रतिरक्षा: सक्रिय व निष्क्रिय प्रतिरक्षा और टीकाकरण सामग्री; इतिहास से लेकर हाल की प्रगति; टीके के बाद प्रतिकूल घटनाएँ; समुदाय में टीका-कवरेज का आकलन; कोल्ड चेन; और राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम।
12रोग की जाँच-छँटनी (screening) की अवधारणा; उसके उपयोग; उसके प्रकार; और स्क्रीनिंग जाँच का मूल्यांकन।
13हृदय रोग, कोरोनरी रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर, मोटापा, अंधता और दुर्घटनाओं की महामारी-विज्ञान; तथा ग़ैर-संचारी रोगों से जुड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम।
14संचारी रोगों की महामारी-विज्ञान और रोकथाम: वायु-जनित, आंत्र तथा कीट-जनित संक्रमण; पशु-जनित रोग; सतही संक्रमण; यौन संचारित रोग और HIV/AIDS; उभरते व दोबारा उभरते संक्रामक रोग; भोजन-जनित विषाक्तता; परजीवी संक्रमण; अस्पताल-जनित संक्रमण; रोग उन्मूलन व समाप्ति की कसौटियाँ; और विभिन्न संचारी रोगों के राष्ट्रीय कार्यक्रम।
15मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की समस्याएँ; प्रसव-पूर्व, प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल; सामाजिक प्रसूति-विज्ञान; शिशुओं व बच्चों की देखभाल; कम वज़न का जन्म; शिशु आहार और दूध छुड़ाना; वृद्धि व विकास; पूर्व-विद्यालयी बच्चों की देखभाल; अंडर-फ़ाइव क्लिनिक; बच्चे के अधिकार; MCH देखभाल के सूचक; सामाजिक बाल-चिकित्सा; विद्यालय स्वास्थ्य सेवाएँ; दिव्यांग बच्चों की देखभाल; बच्चों की व्यवहार समस्याएँ; बाल श्रम; ICDS; NHM; प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य और IMNCI; किशोर स्वास्थ्य; लैंगिक मुद्दे व महिला सशक्तिकरण; PCPNDT अधिनियम; और PEM व कुपोषण उपचार केंद्र।
16निवारक वृद्धावस्था चिकित्सा: बुज़ुर्गों की स्वास्थ्य समस्याएँ और उपाय; स्वस्थ बुढ़ापे की दिशा में कार्य; वृद्धजन संबंधी राष्ट्रीय नीति; बुज़ुर्गों से दुर्व्यवहार; और वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाले लाभ।
17जनसांख्यिकी: जनसांख्यिकीय चक्र, चर और प्रवृत्तियाँ; विश्व जनसंख्या प्रवृत्ति; भारत की जनसंख्या समस्या; स्वास्थ्य व परिवार कल्याण में सामाजिक विपणन कार्यक्रम; परिवार कल्याण सेवाएँ — परिवार नियोजन, गर्भनिरोधक विधियाँ, MTP और परिवार नियोजन के तरीक़े; राष्ट्रीय जनसंख्या नीति; गर्भनिरोधक विधियों का मूल्यांकन; और प्रजनन सूचक।
18व्यावसायिक स्वास्थ्य: भौतिक, रासायनिक, जैविक और मानसिक जोखिम; रोकथाम के सिद्धांत; औद्योगिक विष विज्ञान — सीसा, आर्सेनिक, क्रोमियम, पारा और सल्फ़र डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फ़ाइड व फ़्लोरीन जैसी गैसें; अरगोनॉमिक्स; व्यावसायिक दुर्घटनाएँ; बीमारी से अनुपस्थिति; ESI अधिनियम समेत क़ानून; और उद्योग में महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा।
19मानसिक स्वास्थ्य: मानसिक रोगों के प्रकार और रोकथाम; भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ; मद्यपान; नशीली दवाओं की निर्भरता व लत; और धूम्रपान के ख़तरे, रोकथाम तथा क़ानून।
20प्रशासनिक प्रक्रिया के सिद्धांत: नियोजन, प्रबंधन और मूल्यांकन; विभिन्न समितियाँ; स्वास्थ्य नीति; संचालन अनुसंधान; स्वास्थ्य प्रबंधन के कार्य; पर्यवेक्षण को प्रबंधन उपकरण की तरह इस्तेमाल करना; PERT; स्वास्थ्य सेवा का वित्तपोषण; और प्रबंधन की समस्याएँ व उनके समाधान।
21त्रिस्तरीय व्यवस्था, तथा केंद्र और राज्य की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली।
22राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम व नीतियाँ, और जन-स्वास्थ्य क़ानून।
23अंतर्राष्ट्रीय तथा स्वैच्छिक स्वास्थ्य संस्थाएँ और स्वास्थ्य क्षेत्र में उनकी भूमिका; वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम; रोगों का अंतर्राष्ट्रीय सांख्यिकीय वर्गीकरण; अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों से जुड़े जन-स्वास्थ्य पहलू; जैव-आतंकवाद; और SDG।
24सामुदायिक चिकित्सा में सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग, कंप्यूटर अनुप्रयोग और टेलीमेडिसिन।
25शोध पद्धति।
26महामारी-विज्ञान के सिद्धांत।
27महामारी-वैज्ञानिक अध्ययन — वर्णनात्मक, विश्लेषणात्मक और प्रायोगिक।
28जैव-सांख्यिकी: उसका दायरा और उपयोग; सांख्यिकीय आँकड़ों का संग्रह, वर्गीकरण व प्रस्तुति; आँकड़ों का विश्लेषण और व्याख्या; सूचना निकालना, सूचकांक (दर और अनुपात) निकालना तथा तुलना करना; और अध्ययनों की रूपरेखा में सांख्यिकीय विधियों का उपयोग — उपयुक्त प्रतिचयन विधि व प्रतिदर्श आकार चुनना, सही सार्थकता जाँच लगाना, और सांख्यिकीय सारणियों का उपयोग।
29संबंध और कारणता। सिलेबस के अंत में विषय की नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

General Medicine — 18 यूनिट, पेज 34 से 38 ↑

अठारह यूनिट रोमन अंकों में हैं और सब विषय-सूची की तरह लिखी हैं। दस्तावेज़ में Unit-II और Unit-III दोनों का शीर्षक Infectious Diseases है — पहली में जीवाणु व कवक रोग हैं, दूसरी में विषाणु, प्रोटोज़ोआ और परजीवी रोग, इसलिए इन्हें एक ही बड़े हिस्से के दो भाग की तरह पढ़िए।

आख़िरी यूनिट भरती की नहीं है। वयस्क टीकाकरण, खेल व यात्रा चिकित्सा, शोध पद्धति और नैदानिक शोध की नैतिकता, एपिजेनेटिक्स, सर्केडियन जीव-विज्ञान तथा टेलोमियर रोग — सबका नाम वहीं लिखा है, और ये सब पूछे जा सकते हैं।

यूनिट / क्रमइसमें क्या-क्या आता है
I — चिकित्सा की बुनियादनैदानिक चिकित्सा में निर्णय लेना; स्वास्थ्य सेवा की सुरक्षा व गुणवत्ता; अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा; नैदानिक चिकित्सा के नैतिक प्रश्न; नैदानिक औषध विज्ञान के सिद्धांत; फार्माकोजीनोमिक्स; चिकित्सा और सही पर्ची; समन्वित स्वास्थ्य पद्धतियाँ; स्वास्थ्य सेवा में सूचना प्रौद्योगिकी; जीवनशैली-जनित रोग।
II — संक्रामक रोगसमुदाय-जनित संक्रमण के नैदानिक लक्षण-समूह; स्वास्थ्य-सेवा से जुड़े संक्रमण; ग्राम-धनात्मक और ग्राम-ऋणात्मक जीवाणुओं से होने वाले रोग; माइकोबैक्टीरियल रोग; कवक रोग और उनका उपचार; स्पाइरोकीट रोग; रिकेट्सियल रोग, क्लैमाइडिया व माइकोप्लाज़्मा; जीवाणु रोगों की चिकित्सा; अन्य जीवाणु संक्रमण।
III — संक्रामक रोग (आगे)DNA विषाणु, RNA विषाणु और प्रतिरक्षा-न्यूनता विषाणु से संक्रमण; प्रोटोज़ोआ संक्रमण; कृमि संक्रमण; कीट व कृंतक-जनित रोग; संक्रामक रोग के सिद्धांत; यौन संचारित रोग; HIV तथा अन्य रेट्रो विषाणु से संक्रमण; अज्ञात कारण के बुख़ार का आकलन।
IV — वृद्धावस्था और महिला स्वास्थ्यबुढ़ापे का जीव-विज्ञान; गर्भावस्था के चिकित्सा-विकार; उपशामक तथा जीवन के अंतिम दिनों की देखभाल; पारिवारिक चिकित्सा का अभ्यास; बुढ़ापे से जुड़ी नैदानिक समस्याएँ; जेरिएट्रिक जायंट्स; किशोरावस्था के विकार; सार्कोपेनिक मोटापा; बुज़ुर्गों में दुर्बलता; चिकित्सा में महिलाएँ और नेतृत्व।
V — हृदय-रक्तवाहिनी तंत्र के विकारहृदय रोगी तक पहुँचने का तरीक़ा; हृदय विफलता; कपाट रोग; जन्मजात हृदय रोग; परिधीय रक्तवाहिनी रोग और उच्च रक्तचाप; कोरोनरी हृदय रोग; ग़ैर-आक्रामक कार्डियक इमेजिंग; धीमी और तेज़ अतालता; कार्डियोमायोपैथी व मायोकार्डाइटिस।
VI — श्वसन तंत्रश्वसन रोगी तक पहुँचने का तरीक़ा; व्यावसायिक व पर्यावरणीय फेफड़ा रोग; COPD और अस्थमा; इंटरस्टीशियल फेफड़ा रोग; फुफ्फुसावरण तथा मीडियास्टिनम के रोग; संवातन के विकार; स्लीप एप्निया; फेफड़ा प्रत्यारोपण; श्वसन रोगों की नैदानिक प्रक्रियाएँ; अतिसंवेदनशीलता न्यूमोनिया; ब्रोंकिएक्टेसिस और सिस्टिक फ़ाइब्रोसिस।
VII — क्रिटिकल केयरगंभीर रोगी तक पहुँचने का तरीक़ा और नैदानिक प्रक्रियाएँ; तीव्र श्वसन कष्ट सिंड्रोम; श्वसन विफलता; यांत्रिक संवातन सहायता; शॉक और उसका प्रबंधन; हृदय गति रुकना और अचानक हृदय मृत्यु; कोमा; उच्च रक्तचाप संकट; अम्ल-क्षार विकार; द्रव व इलेक्ट्रोलाइट संतुलन।
VIII — गुर्दा और मूत्र-मार्ग के विकारतीव्र गुर्दा चोट; दीर्घकालिक गुर्दा रोग; डायलिसिस; गुर्दा प्रत्यारोपण; ग्लोमेरुलर रोग; ट्यूबुलोइंटरस्टीशियल रोग; गुर्दे की रक्तवाहिनी चोट; डायबिटीज़ इन्सिपिडस; रीनल ट्यूबुलर एसिडोसिस; अस्थि व खनिज चयापचय।
IX — आंत्र-पथ के विकारआंत्र तथा यकृत रोग तक पहुँचने का तरीक़ा; GI एंडोस्कोपी; आमाशय और अन्नप्रणाली के रोग; अवशोषण के विकार; सूजनकारी आंत्र रोग; इरिटेबल बाउल सिंड्रोम; विषाणु व विषजन्य हेपेटाइटिस; यकृत कार्य का आकलन; मद्य-जनित यकृत रोग; ग़ैर-मद्य फैटी लिवर रोग।
X — गठिया-विज्ञान (Rheumatology)स्वास्थ्य और रोग में प्रतिरक्षा तंत्र; एनाफ़िलैक्सिस, पित्ती और एंजियोएडिमा; स्वप्रतिरक्षी विकार; SLE और एंटीफ़ॉस्फ़ोलिपिड सिंड्रोम; स्पॉन्डिलोआर्थराइटिस; वैस्कुलाइटिस सिंड्रोम; सूजनकारी मायोपैथी; स्क्लेरोडर्मा व संबंधित विकार; रूमेटॉइड आर्थराइटिस; जोड़ों और आस-पास के ऊतकों के विकार।
XI — अंतःस्रावी विज्ञानअंतःस्रावी विकारों तक पहुँचने का तरीक़ा; न्यूरोहाइपोफ़ाइसिस के विकार; पीयूष विकार; थायरॉइड व पैराथायरॉइड विकार; अधिवृक्क विकार; स्वप्रतिरक्षी पॉलीएंडोक्राइन सिंड्रोम; लिंग विकास के विकार; पुरुष तथा स्त्री प्रजनन तंत्र के विकार; रजोनिवृत्ति और उसके बाद की हॉर्मोन चिकित्सा।
XII — मधुमेह और चयापचयी सिंड्रोमअग्न्याशयशोथ (तीव्र व दीर्घकालिक); मोटापा; चयापचयी सिंड्रोम; मधुमेह — निदान और वर्गीकरण; गर्भावस्था का मधुमेह; मधुमेह का प्रबंधन व चिकित्सा; उसकी जटिलताएँ; लिपोप्रोटीन चयापचय; मध्यवर्ती चयापचय के विकार; निम्न रक्त शर्करा।
XIII — तंत्रिका विज्ञान Iतंत्रिका तंत्र के रोगों तक पहुँचने का तरीक़ा; न्यूरो-इमेजिंग; दौरे और मिर्गी; मस्तिष्क आघात; माइग्रेन तथा अन्य सिरदर्द; अल्ज़ाइमर रोग और डिमेंशिया; पार्किंसन रोग; गति-विकार; मोटर न्यूरॉन रोग; मल्टिपल स्क्लेरोसिस।
XIV — तंत्रिका विज्ञान IIस्वायत्त तंत्रिका तंत्र; कपाल तंत्रिकाओं के रोग; मेरुरज्जु के रोग; तंत्रिका तंत्र के संक्रमण; परिधीय तंत्रिका रोग; तंत्रिका-पेशी संधि के विकार; पेशी रोग; क्रॉनिक फ़टीग सिंड्रोम; मानसिक विकार; नशीली दवाओं और शराब की निर्भरता।
XV — रक्त-विज्ञानस्टेम कोशिका और प्रत्यारोपण; हाइपोप्रोलिफ़रेटिव तथा पोषण-जनित रक्ताल्पता; हीमोग्लोबिनोपैथी व वंशानुगत रक्ताल्पता; अस्थि-मज्जा विफलता और मायलोडिसप्लेज़िया; पॉलीसाइथीमिया वेरा तथा मायलोप्रोलिफ़रेटिव विकार; आधान जीव-विज्ञान; थक्का विकार; धमनी व शिरा घनास्त्रता; एंटीप्लेटलेट, एंटीकोऐगुलेंट और फ़ाइब्रिनोलिटिक दवाएँ; हीमोलिटिक रक्ताल्पता।
XVI — कैंसर-विज्ञानतीव्र और दीर्घकालिक ल्यूकीमिया; लिंफोमा; प्लाज़्मा कोशिका विकार; कैंसर की आपात स्थितियाँ; कैंसर चिकित्सा के सिद्धांत; ठोस ट्यूमर; पैरानियोप्लास्टिक सिंड्रोम; अज्ञात प्राथमिक स्थान का कार्सिनोमा; कैंसर आनुवंशिकी।
XVII — विषाक्तता, पर्यावरणीय और आनुवंशिक रोगभारी धातु विषाक्तता व दवा की अधिक मात्रा; चिकित्सा-आतंकवाद; साँप का काटना; ऊँचाई से जुड़ी बीमारियाँ; ताप-नियमन विकार; वयस्क रोगों की भ्रूणकालीन जड़ें; ऑर्गेनोफ़ॉस्फ़ोरस, सेल्फ़ॉस व अन्य विषाक्तता; विकिरण के ख़तरे; सूक्ष्मजैविक जीनोम और संक्रामक रोग; नैदानिक चिकित्सा में आनुवंशिकी का उपयोग।
XVIII — नवीनतम प्रगति और विविधवयस्क टीकाकरण; खेल तथा यात्रा चिकित्सा; रोगों में आहार; शोध पद्धति और नैदानिक शोध की नैतिकता; स्वास्थ्य व रोग में व्यायाम और योग; शल्य रोगियों का चिकित्सकीय मूल्यांकन; रोग व उपचार में एपिजेनेटिक्स की भूमिका; स्वास्थ्य में सर्केडियन जीव-विज्ञान की भूमिका; उभरती न्यूरोथेरेप्यूटिक तकनीकें; टेलोमियर रोग तथा अन्य नई प्रगतियाँ।

Tuberculosis and Respiratory Diseases — 27 यूनिट, पेज 38 से 41 ↑

सत्ताईस यूनिट हैं, और सबसे ज़्यादा वज़न एक ही यूनिट पर है: क्षय रोग वाली Unit-XV इस विषय की बाक़ी सब यूनिटों से लंबी है और उसमें जाँच के तरीक़े, दवा-प्रतिरोधी रूप, विशेष परिस्थितियाँ तथा राष्ट्रीय कार्यक्रम — सबका नाम लिखा है।

दस्तावेज़ में Unit-XIX की जगह "Unti-XIX" छपा है। यह मूल दस्तावेज़ की छपाई की चूक है, कोई यूनिट ग़ायब नहीं है — गिनती I से XXVII तक बिना नागा चलती है।

यूनिट / क्रमइसमें क्या-क्या आता है
Unit-Iफेफड़ा चिकित्सा और क्षय रोग का इतिहास, भारतीय योगदान पर ज़ोर के साथ।
Unit-IIसामान्य फेफड़े का विकास (भ्रूण-विज्ञान), वृद्धि और संरचना; सामान्य फेफड़ा कार्य के शारीरिक सिद्धांत; अलग-अलग अवस्थाओं में फेफड़े — व्यायाम, गर्भावस्था, बुढ़ापा, ऊँचाई, गोताखोरी; फेफड़े की जन्मजात विकृतियाँ।
Unit-IIIश्वसन रोगों से जुड़ी प्रतिरक्षा-विज्ञान, सूक्ष्म-जीव विज्ञान और औषधीय पहलू; फार्माकोविजिलेंस।
Unit-IVश्वसन लक्षणों वाले रोगी तक पहुँचने का तरीक़ा और नैदानिक प्रक्रियाएँ — रेडियोग्राफ़िक इमेजिंग, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी, न्यूक्लियर इमेजिंग, फेफड़ा कार्य-जाँच, धमनी रक्त गैस विश्लेषण, ब्रोंकोस्कोपी व थोरैकोस्कोपी, EBUS, FeNO जाँच, ब्रोंकोप्रोवोकेशन जाँच और एरोसोल चिकित्सा।
Unit-V — फेफड़ा संक्रमणतीव्र व दीर्घकालिक श्वसन-मार्ग संक्रमण, वायरल न्यूमोनिया (स्वाइन फ़्लू) सहित; समुदाय-जनित और अस्पताल-जनित न्यूमोनिया; प्रतिरक्षा-कमज़ोर रोगियों में न्यूमोनिया; ठीक न होने वाला न्यूमोनिया; फेफड़े का फोड़ा; ब्रोंकिएक्टेसिस।
Unit-VI — अवरोधक वायुमार्ग रोगदीर्घकालिक अवरोधक वायुमार्ग रोग; दमा; ब्रोंकियोलाइटिस; सिस्टिक फ़ाइब्रोसिस; फेफड़े का बुलस रोग।
Unit-VII — फेफड़े के ट्यूमरफेफड़े के नियोप्लास्टिक और ग़ैर-नियोप्लास्टिक रोग; एकल फुफ्फुसीय गाँठ; प्लूरल मेसोथीलियोमा।
Unit-VIII — धूम्रपानचलन, महामारी-विज्ञान, दुष्प्रभाव और छुड़ाने के उपाय।
Unit-IX — व्यापक इंटरस्टीशियल फेफड़ा रोगइडियोपैथिक और ग़ैर-इडियोपैथिक फुफ्फुसीय फ़ाइब्रोसिस।
Unit-Xव्यावसायिक फेफड़ा विकार, जैविक व अजैविक धूल के संपर्क सहित; वायु प्रदूषण, घर के भीतर का प्रदूषण भी; वैश्विक तापन का स्वास्थ्य पर असर।
Unit-XIदवा-जनित फेफड़ा विकार, विकिरण से हुई चोट सहित; दवा-जनित श्वसन आपात स्थितियाँ।
Unit-XII — फेफड़े के रक्त-संचार विकारफुफ्फुसीय उच्च रक्तचाप और कोर पल्मोनेल; तीव्र श्वसन कष्ट सिंड्रोम; फुफ्फुसीय थ्रॉम्बोएम्बोलिक रोग और रोधगलन; फुफ्फुसीय धमनी-शिरा विकृतियाँ।
Unit-XIII — प्रतिरक्षा-जनित विकारसारकॉइडोसिस; अतिसंवेदनशीलता न्यूमोनाइटिस; इओसिनोफ़िलिक फेफड़ा विकार; फुफ्फुसीय वैस्कुलाइटिस; श्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाले संयोजी ऊतक रोग।
Unit-XIV — वायुकोष्ठीय रोगवायुकोष्ठीय रक्तस्राव (प्राथमिक व द्वितीयक); पल्मोनरी एल्वियोलर प्रोटीनोसिस; एल्वियोलर माइक्रोलिथियासिस।
Unit-XV — क्षय रोगप्रतिरक्षा-विज्ञान और रोगजनन; निदान की पारंपरिक तथा नई विधियाँ (CBNAAT, LPA, MGIT, BACTEC, MODS); विभेदक निदान; फुफ्फुसीय क्षय का प्रबंधन; जटिलताएँ और उनका प्रबंधन; बच्चों तथा बुज़ुर्गों का क्षय रोग; मिलियरी और फैला हुआ क्षय; क्षय के अलावा दूसरे माइकोबैक्टीरिया (MOTT); फेफड़े के बाहर का क्षय — लिम्फ नोड, फुफ्फुसावरण, हृदयावरण, मूत्र-जनन तंत्र, आंत, हड्डी-जोड़, CNS और त्वचा; HIV और TB; MDR व XDR क्षय की रोकथाम और प्रबंधन; मधुमेह और TB; न्यूमोकोनियोसिस और TB; विशेष परिस्थितियों में TB का उपचार, MDR सहित; RNTCP, DOTS और DOTS PLUS समेत क्षय नियंत्रण; BCG टीका और मैंटू जाँच; राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP); और क्षय रोग की सूचना देना (notification)।
Unit-XVI — मीडियास्टिनम के रोगविकास संबंधी विकार; सौम्य व दुर्दम, प्राथमिक तथा द्वितीयक नियोप्लाज़्म।
Unit-XVII — फुफ्फुसावरण के विकारप्लूरल गतिकी और जल-संचय; ग़ैर-नियोप्लास्टिक तथा नियोप्लास्टिक प्लूरल रोग; न्यूमोथोरैक्स, हीमोथोरैक्स और काइलोथोरैक्स; पायोथोरैक्स और ब्रोंको-प्लूरल फ़िस्टुला; प्लूरल रोगों का प्रबंधन।
Unit-XVIII — फेफड़ा चिकित्सा में क्रिटिकल केयरक्रिटिकल केयर के सिद्धांत; ग़ैर-आक्रामक संवातन; आक्रामक यांत्रिक संवातन सहायता।
Unit-XIXफेफड़ा रोगों के फेफड़े के बाहर दिखने वाले लक्षण।
Unit-XXश्वसन रोगों के शल्य पहलू, VATS और प्लूरोस्कोपी सहित, तथा वक्ष शल्य रोगी का ऑपरेशन से पहले और बाद का मूल्यांकन।
Unit-XXIजमाव और घुसपैठ वाले विकार; हिस्टियोसाइटोसिस X; लिम्फैंजियोलियोमायोमैटोसिस; फेफड़ों से जुड़ी जन्मजात चयापचयी त्रुटियाँ।
Unit-XXII — नींद से जुड़े फेफड़ा रोगनींद की शरीर-क्रिया; नैदानिक पॉलीसोम्नोग्राफी; अवरोधक स्लीप एप्निया का प्रबंधन; नींद में साँस से जुड़े अन्य सिंड्रोम।
Unit-XXIIIडायाफ़्राम के रोग।
Unit-XXIVछाती की दीवार के विकार।
Unit-XXVफेफड़ा प्रत्यारोपण।
Unit-XXVIनिवारक फेफड़ा चिकित्सा: वायु-जनित संक्रमण की रोकथाम और फेफड़ा रोगों में टीकाकरण।
Unit-XXVIIक्षय रोग तथा श्वसन चिकित्सा की मौजूदा दिशाएँ और नई प्रगतियाँ — लेज़र चिकित्सा, एम्फ़ाइसीमा का कॉइलिंग उपचार, क्रायोबायोप्सी, ब्रोंकियल थर्मोप्लास्टी, ब्रोंकियल धमनी एम्बोलाइज़ेशन, फेफड़ा पुनर्वास कार्यक्रम, और फेफड़ा कैंसर तथा ILD में उपशामक देखभाल। विषय के अंत में नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

Dermatology, Venereology and Leprosy — 14 यूनिट, पेज 41 से 43 ↑

चौदह यूनिट हैं, और ये बुलेट के बजाय लंबी अल्पविराम वाली सूचियों में लिखी हैं — इसलिए कोई प्रविष्टि नज़र से छूट जाना आसान है। कुष्ठ, उपदंश व जन्मजात उपदंश और दूसरे यौन संचारित जीवाणु रोग Unit-III के भीतर हैं, विषाणु, कवक तथा परजीवी संक्रमण के साथ।

Unit-XIV पूरी तरह सौंदर्य और प्रक्रिया वाली त्वचा-चिकित्सा है — फ़िलर, बोटुलिनम टॉक्सिन, केमिकल पील, लेज़र व ऊर्जा-आधारित उपकरण, PRP और PRFM — और शास्त्रीय त्वचा-विज्ञान की तैयारी में यही यूनिट सबसे ज़्यादा छूटती है।

यूनिट / क्रमइसमें क्या-क्या आता है
Unit-Iत्वचा का इतिहास, संरचना और कार्य; त्वचा की विकृति-विज्ञान और उसके सामान्य सिद्धांत; त्वचा रोग का निदान; त्वचा रोगों की महामारी-विज्ञान; आनुवंशिकी और त्वचा; सूजन, प्रतिरक्षा-विज्ञान व एलर्जी; प्रकाश-जीव विज्ञान; चोट पर त्वचा की प्रतिक्रिया और घाव भरना; लंबे समय चलने वाले त्वचा रोगों का मानसिक तथा सामाजिक असर; दवाओं से प्रतिकूल प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया; त्वचा पर दवा पहुँचाना; नैदानिक औषध विज्ञान।
Unit-IIत्वचा रोग के समग्र प्रबंधन के सिद्धांत; त्वचा-विज्ञान में मापन और आकलन के सिद्धांत; साक्ष्य-आधारित त्वचा-विज्ञान के सिद्धांत; सामयिक (topical) चिकित्सा, प्रणालीगत चिकित्सा, त्वचा शल्य, फोटोथेरेपी, फोटोडायनामिक चिकित्सा, त्वचा लेज़र चिकित्सा और रेडियोथेरेपी के सिद्धांत।
Unit-IIIविषाणु संक्रमण; जीवाणु संक्रमण; माइकोबैक्टीरियल संक्रमण; कुष्ठ; उपदंश और जन्मजात उपदंश; अन्य यौन संचारित जीवाणु रोग; HIV और त्वचा; कवक संक्रमण; परजीवी रोग; आर्थ्रोपोड।
Unit-IVसोरायसिस और संबंधित विकार; पिटिरियासिस रूब्रा पिलैरिस; लाइकेन प्लेनस व लाइकेनॉइड विकार; ग्राफ़्ट-बनाम-होस्ट रोग; एक्ज़िमा वाले विकार; सेबोरिक डर्मेटाइटिस; एटॉपिक एक्ज़िमा; पित्ती; बिना चकत्ते वाला बार-बार होने वाला एंजियो-एडिमा; अर्टिकेरियल वैस्कुलाइटिस; त्वचा पर दिखने वाले ऑटोइन्फ़्लेमेटरी रोग; मास्टोसाइटोसिस; प्रतिक्रियात्मक सूजनकारी एरिथेमा; एडमांटियाडेस-बेहचेट रोग; न्यूट्रोफ़िलिक डर्मेटोसिस; इम्यूनोबुलस रोग; ल्यूपस एरिथेमेटोसस; एंटीफ़ॉस्फ़ोलिपिड सिंड्रोम; डर्मेटोमायोसाइटिस; मिश्रित संयोजी ऊतक रोग; रूमेटॉइड रोग के त्वचा-लक्षण; सिस्टेमिक स्क्लेरोसिस; मॉर्फ़िया तथा संबंधित निशान बनाने और कठोर करने वाले सूजनकारी त्वचा रोग।
Unit-Vत्वचीय एमिलॉयडोसिस; त्वचीय म्यूसिनोसिस; त्वचीय पॉरफ़ाइरिया; त्वचा और अधस्त्वचीय ऊतक का कैल्सीकरण; ज़ैंथोमा तथा वसा चयापचय व भंडारण की गड़बड़ियाँ; त्वचा पर असर डालने वाले पोषण विकार; मधुमेह में त्वचा विकार।
Unit-VIवंशानुगत कॉर्निफ़िकेशन विकार; वंशानुगत एकैंथोलिटिक विकार; एक्टोडर्मल डिसप्लेज़िया; वंशानुगत बाल विकार; नाख़ून और उसकी वृद्धि के आनुवंशिक दोष; रंजकता के आनुवंशिक विकार; आनुवंशिक फफोला रोग; कोलेजन, इलास्टिन व त्वचीय आधात्री के आनुवंशिक विकार; त्वचा की रक्तवाहिनियों को प्रभावित करने वाले विकार; वसा ऊतक के आनुवंशिक विकार; जन्मजात तिल और त्वचा की अन्य विकास-विकृतियाँ; गुणसूत्र विकार; पॉइकिलोडर्मा सिंड्रोम; त्वचा-लक्षणों वाले DNA मरम्मत विकार; समय से पहले बुढ़ापे वाले सिंड्रोम; हैमार्टोनियोप्लास्टिक सिंड्रोम; वंशानुगत चयापचयी रोग; वंशानुगत प्रतिरक्षा-न्यूनता।
Unit-VIIखुजली, प्रुरिगो और लाइकेन सिम्प्लेक्स; श्लेष्मा-त्वचा दर्द सिंड्रोम; त्वचा को प्रभावित करने वाली तंत्रिका स्थितियाँ; मनो-त्वचा विज्ञान और मनो-त्वचीय रोग।
Unit-VIIIअर्जित एपिडर्मल केराटिनाइज़ेशन विकार; अर्जित रंजकता विकार; अर्जित बाल विकार; मुँहासे; रोज़ेशिया; हाइड्रैडेनाइटिस सप्युरेटिवा; पाइलोसिबेशियस इकाई के अन्य अर्जित विकार; स्वेद ग्रंथियों के विकार; नाख़ून और नाख़ून इकाई के अर्जित विकार; त्वचीय संयोजी ऊतक के अर्जित विकार; त्वचा के ग्रैन्युलोमेटस विकार; सारकॉइडोसिस; पैनिक्युलाइटिस; अधस्त्वचीय वसा के अन्य अर्जित विकार।
Unit-IXपुरपुरा; त्वचीय वैस्कुलाइटिस; शिरा तथा धमनी विकारों से होने वाले त्वचा रोग; उन्हीं से होने वाले अल्सर; लसीका वाहिनियों के विकार; चेहरे का लाल होना (flushing और blushing)।
Unit-Xखोपड़ी, बाहरी कान, आँख-पलक-भौं, मुख-गुहा व होंठ, पुरुष जननांग, स्त्री जननांग, तथा पेरिनियल व गुदा के आस-पास की त्वचा के रोग; स्टोमा और फ़िस्टुला की त्वचा-जटिलताएँ; गर्भावस्था के त्वचा रोग; नवजात के त्वचा रोग; शैशव के त्वचा रोग और रक्तवाहिनी-अर्बुद।
Unit-XIदवाओं से होने वाली सामान्य तथा गंभीर त्वचा प्रतिक्रियाएँ; कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के त्वचा दुष्प्रभाव; अवैध नशीली दवाओं से होने वाले त्वचा रोग; धातु विषाक्तता के त्वचा लक्षण; त्वचा की यांत्रिक चोट; दबाव से चोट और दबाव-अल्सर; ठंड व गर्मी पर त्वचा की प्रतिक्रिया; जलना और ताप-चोट; प्रकाश-संवेदनशीलता रोग; एलर्जिक संपर्क डर्मेटाइटिस; उत्तेजक संपर्क डर्मेटाइटिस; व्यावसायिक त्वचा-विज्ञान; डंक और काटना।
Unit-XIIसौम्य मेलानोसाइटिक वृद्धि और तिल; सौम्य केराटिनोसाइटिक एकैंथोमा; त्वचीय सिस्ट; लिम्फ़ोसाइटिक घुसपैठ; त्वचीय हिस्टियोसाइटोसिस; मृदु-ऊतक ट्यूमर और ट्यूमर-जैसी स्थितियाँ; त्वचा उपांगों के ट्यूमर; कापोसी सारकोमा; त्वचीय लिंफोमा; बेसल सेल कार्सिनोमा; स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और उसके पूर्व-घाव; मेलानोमा — उसकी नैदानिक-विकृति, शल्य और प्रणालीगत उपचार; मेलानोमा व तिल की डर्मोस्कोपी; मर्केल सेल कार्सिनोमा; प्रतिरक्षा-कमज़ोर रोगी में त्वचा कैंसर।
Unit-XIIIभीतरी कैंसर के त्वचा-संकेत; त्वचा और रक्त-निर्माण व प्रतिरक्षा तंत्र के विकार; त्वचा और अंतःस्रावी विकार; त्वचा और हृदय, श्वसन तंत्र, पाचन तंत्र, गुर्दा-मूत्र मार्ग तथा पेशी-कंकाल तंत्र के विकार।
Unit-XIVत्वचा का बूढ़ा होना; कॉस्मेस्यूटिकल; मृदु ऊतक भराव (फ़िलर); बोटुलिनम टॉक्सिन का सौंदर्य उपयोग; केमिकल पील; लेज़र और ऊर्जा-आधारित उपकरण; प्लेटलेट रिच प्लाज़्मा (PRP) व PRFM; ऑटोइनोक्युलेशन। विषय के अंत में नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

Psychiatry — 15 यूनिट, पेज 43 से 46 ↑

पंद्रह यूनिट हैं। इनमें दो सबसे भारी हैं: Unit-XI, जिसमें मनो-औषध विज्ञान दवा-दर-दवा और वर्ग-दर-वर्ग गिनाया गया है, और Unit-XII तथा XIII, जिनमें पूरा बाल मनोरोग विज्ञान और उसका उपचार है।

वर्गीकरण वाली यूनिट छोटी है पर निर्णायक — सिलेबस में DSM-V, ICD-10 और मसौदा ICD-11 तीनों का नाम है, इसलिए इन प्रणालियों का आपसी फ़र्क़ पूछा जा सकता है।

यूनिट / क्रमइसमें क्या-क्या आता है
Unit-Iजीवन-चक्र में मानव विकास; मृत्यु, मरण और शोक; सामान्यता की अवधारणा तथा मन की बदलती अवधारणाएँ। मस्तिष्क और व्यवहार: क्रियात्मक व व्यवहारिक तंत्रिका शरीर-रचना, तंत्रिका शरीर-क्रिया और तंत्रिका रसायन, न्यूरो-इमेजिंग, विद्युत-शरीर-क्रिया, मनो-तंत्रिका-अंतःस्रावी विज्ञान, मनो-तंत्रिका-प्रतिरक्षा विज्ञान, कालचक्र जीव-विज्ञान और तंत्रिका आनुवंशिकी। मनो-सामाजिक विज्ञानों का योगदान: जीन पियाजे, संलग्नता सिद्धांत, अधिगम सिद्धांत, आक्रामकता, समाजशास्त्र व नीतिशास्त्र, मानव-विज्ञान और अंतर-सांस्कृतिक मनोरोग विज्ञान, स्मृति, महामारी-विज्ञान, जैव-सांख्यिकी तथा शोध पद्धति; नैदानिक तंत्रिका-मनोवैज्ञानिक जाँच। व्यक्तित्व और मनोविकृति के सिद्धांत: सिगमंड फ़्रॉयड और शास्त्रीय मनोविश्लेषण, एरिक एरिक्सन, तथा मनोविश्लेषण व मनोविज्ञान से निकले संप्रदाय।
Unit-IIमनोरोगी की नैदानिक जाँच; मनोरोग विज्ञान के लक्षण और चिह्न; मनोरोग वर्गीकरण — DSM-V, ICD-10 और ICD-11 (मसौदा)।
Unit-IIIडेलिरियम, डिमेंशिया, स्मृति-लोप और अन्य संज्ञानात्मक विकार; किसी सामान्य चिकित्सा स्थिति से होने वाले मानसिक विकार; संज्ञानात्मक विकारों का परिचय व सिंहावलोकन; और नशीले पदार्थों से जुड़े विकार, उनके परिचय सहित।
Unit-IVसिज़ोफ़्रेनिया और अन्य मनोविकृतियाँ: सिज़ोफ़्रेनिया की अवधारणा और समस्या का फैलाव, आनुवंशिकी, पर्यावरणीय महामारी-विज्ञान, विकासात्मक मॉडल, न्यूरो-इमेजिंग, तथा तंत्रिका-मनोरोग लक्षणों का सिज़ोफ़्रेनिया के तंत्रिका जीव-विज्ञान व तंत्रिका विकृति से संबंध; नैदानिक लक्षण और मनोविकृति; मनो-सामाजिक, दैहिक, पुनर्वास तथा समन्वित उपचार; कार्यात्मक परिणाम; सिज़ोफ़्रेनिया स्पेक्ट्रम विकृति और उपचार; अन्य मनोविकृतियाँ — तीव्र व क्षणिक मनोविकृति, संक्षिप्त मनोविकृति, सिज़ोफ़्रेनिफ़ॉर्म विकार, भ्रम-विकार तथा साझा मनोविकृति, सिज़ोअफ़ेक्टिव विकार, प्रसवोत्तर मनोविकृति, मनोविकृति वाले संस्कृति-बद्ध सिंड्रोम और psychosis NOS — तथा उनका उपचार; और जल्दी पहचान व हस्तक्षेप से जुड़े विशेष प्रश्न।
Unit-Vभाव-विकार (mood disorders): इतिहास, वैचारिक सिंहावलोकन, महामारी-विज्ञान, आनुवंशिकी, तंत्रिका जीव-विज्ञान, अंतर्मन तथा पारस्परिक पहलू, नैदानिक लक्षण; और अवसाद, उन्माद व द्विध्रुवी विकारों का प्रबंधन, मनोचिकित्सा सहित।
Unit-VIचिंता विकार — पैनिक डिसऑर्डर, एगोराफ़ोबिया, भय, OCD, PTSD, तीव्र तनाव विकार और GAD सहित; सोमैटोफ़ॉर्म विकार; फ़ैक्टिशियस विकार; विघटनकारी (dissociative) विकार।
Unit-VIIसामान्य मानव लैंगिकता तथा लैंगिक व लिंग-पहचान विकार; आहार विकार; नींद विकार; आवेग-नियंत्रण विकार; समायोजन विकार।
Unit-VIIIव्यक्तित्व विकार। चिकित्सा स्थितियों को प्रभावित करने वाले मनोवैज्ञानिक कारक: मनो-दैहिक चिकित्सा का इतिहास, आंत्र विकार, मोटापा, हृदय, श्वसन, अंतःस्रावी व चयापचयी विकार, मनो-त्वचीय तथा पेशी-कंकाल विकार, तनाव और मनोरोग, मनो-कैंसर विज्ञान, परामर्श-संपर्क मनोरोग। ऐसी अन्य स्थितियाँ जिन पर नैदानिक ध्यान जा सकता है: बहाना बनाना (malingering), वयस्क असामाजिक व्यवहार, अपराध व हिंसा, सीमावर्ती बौद्धिक क्षमता और पढ़ाई की समस्याएँ।
Unit-IXसंस्कृति-बद्ध सिंड्रोम। विशेष रुचि के क्षेत्र: मनोरोग और प्रजनन चिकित्सा, मासिक-पूर्व विषाद विकार, आनुवंशिक परामर्श, जीवन के अंतिम दिनों व उपशामक देखभाल, मृत्यु-मरण-शोक, वयस्कों का शारीरिक तथा यौन शोषण, यातना से बचे लोग, वैकल्पिक व पूरक स्वास्थ्य पद्धतियाँ, सैन्य और आपदा मनोरोग, मनोरोग विज्ञान के प्रसिद्ध नामित प्रकरण, और संबंधों की समस्याएँ।
Unit-Xमनोरोग की आपात स्थितियाँ: आत्महत्या और अन्य आपात स्थितियाँ।
Unit-XIमनोचिकित्सा और जैविक चिकित्सा: मनो-औषध विज्ञान के सामान्य सिद्धांत, फार्माकोकाइनेटिक्स व दवा अंतःक्रिया, दवा विकास तथा स्वीकृति की प्रक्रिया; दवा-जनित गति-विकार; एंटीहिस्टामिन; बार्बिट्यूरेट और वैसी ही दवाएँ; बेंज़ोडायज़ेपीन ग्राही एगोनिस्ट व प्रतिरोधी; बुप्रोपियोन; बुस्पिरोन; कैल्शियम चैनल अवरोधक; कोलिनेस्टरेज़ अवरोधक; डोपामिन ग्राही प्रतिरोधी (सामान्य एंटीसाइकोटिक); लिथियम; मिर्टाज़ापीन; MAO अवरोधक; नेफ़ाज़ोडोन; ओपिओइड ग्राही एगोनिस्ट — मेथाडोन, लेवोमेथाडिल, ब्यूप्रेनॉर्फ़ीन; ओपिओइड ग्राही प्रतिरोधी — नाल्ट्रेक्सोन, नाल्मेफ़ीन; SNRI; SSRI; सेरोटोनिन-डोपामिन प्रतिरोधी (एटिपिकल या दूसरी पीढ़ी के एंटीसाइकोटिक); सिम्पैथोमिमेटिक व डोपामिन एगोनिस्ट; थायरॉइड हॉर्मोन; ट्रैज़ोडोन; ट्राइसाइक्लिक व टेट्रासाइक्लिक; विद्युत-आक्षेप चिकित्सा; तंत्रिका-शल्य उपचार और डीप ब्रेन स्टिम्युलेशन; अन्य औषधीय व जैविक चिकित्सा; दवा संवर्धन; और प्रजनन हॉर्मोन चिकित्सा — सिद्धांत तथा व्यवहार।
Unit-XIIबाल मनोरोग विज्ञान: परिचय व सिंहावलोकन, सामान्य बाल विकास, सामान्य किशोरावस्था, और शिशु, बालक तथा किशोर की मनोरोग जाँच; मानसिक मंदता; अधिगम विकार; व्यापक विकास विकार; ध्यान-न्यूनता विकार; विघटनकारी व्यवहार विकार; शैशव व प्रारंभिक बचपन के आहार विकार; टिक विकार; मल-मूत्र नियंत्रण के विकार; शैशव, बचपन और किशोरावस्था के अन्य विकार; बच्चों व किशोरों में भाव-विकार; बच्चों में चिंता विकार; कम उम्र में शुरू होने वाला सिज़ोफ़्रेनिया।
Unit-XIIIबाल मनोरोग उपचार: व्यक्तिगत मनो-गतिक चिकित्सा, अल्पकालिक मनोचिकित्सा, संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा, समूह चिकित्सा, परिवार चिकित्सा, बाल मनो-औषध विज्ञान, आंशिक अस्पताल व बाह्य-रोगी व्यवहार सेवाएँ, आवासीय तथा भर्ती उपचार, और समुदाय-आधारित उपचार। बाल मनोरोग के विशेष क्षेत्र: डे-केयर, गोद लेना व पालक देखभाल के मनोरोग पहलू, बाल दुर्व्यवहार, बीमारी और अस्पताल पर बच्चों की प्रतिक्रिया, HIV तथा AIDS के मनोरोग परिणाम, बच्चों-किशोरों का असामाजिक व्यवहार, विघटनकारी विकार, पहचान की समस्या व बॉर्डरलाइन विकार, किशोरों में नशा, न्यायालयिक मनोरोग, नैतिक प्रश्न, विद्यालय परामर्श, मनोरोगों की रोकथाम, न्यूरो-इमेजिंग, बाल मानसिक स्वास्थ्य सेवा शोध, और बच्चों पर आतंकवाद का असर।
Unit-XIVवयस्कावस्था और वृद्धावस्था मनोरोग विज्ञान।
Unit-XVअस्पताल तथा सामुदायिक मनोरोग विज्ञान; मनोरोग शिक्षा; नैतिकता और न्यायालयिक मनोरोग; मनोरोग विज्ञान का अतीत व भविष्य — व्यवहारिक लत और आणविक मनोरोग विज्ञान। विषय के अंत में नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

Paediatrics — 20 विषय और उनके लगभग 250 उप-विषय, पेज 46 से 52 ↑

बाल-चिकित्सा दस्तावेज़ के बाक़ी हिस्सों से अलग ढंग से लिखी गई है: बीस क्रमांकित विषय, और हर विषय के भीतर अलग-अलग क्रमांकित उप-विषय — सब मिलाकर लगभग ढाई सौ नामित प्रविष्टियाँ। उम्मीदवार के लिए यह सुविधा है, क्योंकि चेकलिस्ट सिलेबस ने ख़ुद बना दी है।

अकेले नवजात चिकित्सा में इकतीस उप-विषय हैं और श्वसन में सत्ताईस — यानी पेपर का वज़न इन्हीं दो पर साफ़ दिखता है।

यूनिट / क्रमइसमें क्या-क्या आता है
1 — वृद्धि और विकासवृद्धि व विकास के सिद्धांत; बचपन और किशोरावस्था में सामान्य वृद्धि-विकास; गर्भकालीन आयु का आकलन; वृद्धि के प्रतिरूप; ग्रोथ चार्ट; ममता कार्ड; असममित वृद्धि; कंकाल डिसप्लेज़िया; विकास में देरी और उसका आकलन; आयु का निर्धारण; यौन परिपक्वता और उसकी गड़बड़ियाँ; किशोरावस्था की समस्याएँ।
2 — नवजात चिकित्साप्रसव-कालीन देखभाल; लेबर रूम में देखभाल; नवजात पुनर्जीवन; समय-पूर्व जन्म; सामान्य नवजात; अधिक जोखिम वाला नवजात; अस्पताल में देखभाल और छुट्टी के बाद फ़ॉलो-अप; नवजात स्क्रीनिंग; पर्सिस्टेंट पल्मोनरी हाइपरटेंशन; ऑक्सीजन चिकित्सा, HFNC और CPAP; नवजात संवातन; आम क्षणिक परिघटनाएँ; कम जन्म-वज़न और SGA; नवजात आहार तथा पैरेंटरल पोषण; मानव दुग्ध बैंक; श्वसन कष्ट; एप्निया; गर्भकालीन जोखिम कारक और भ्रूण पर उनका असर; गर्भस्थ निदान व भ्रूण चिकित्सा; संक्रमण; नवजात पीलिया; तंत्रिका विकार; ताप-नियमन और उसके विकार, कंगारू मदर केयर सहित; रक्ताल्पता व रक्तस्राव विकार; आंत्र विकार; जन्मजात विकृतियाँ; जन्मजात चयापचयी त्रुटियाँ और नवजात स्क्रीनिंग; नवजात दौरे; विकास-सहायक देखभाल; नवजात में द्रव व इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन; जानलेवा तीव्र घटनाएँ और SIDS।
3 — पोषणमाँ का स्वास्थ्य और बच्चे पर उसका असर; शिशु तथा छोटे बच्चे का पोषण; MAA कार्यक्रम; पूरक आहार; प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण और गंभीर तीव्र कुपोषण; किशोर पोषण; प्रणालीगत बीमारियों में पोषण प्रबंधन (सीलिएक रोग, यकृत-पित्त विकार, नेफ़्रोटिक सिंड्रोम); कम वज़न वाले शिशु का पोषण; जल्दी शुरुआत और केवल स्तनपान; विटामिन की कमी के रोग; सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी; मोटापा व चयापचयी सिंड्रोम; नवजात और बच्चों में पैरेंटरल तथा एंटरल पोषण; बच्चों में हाइपरलिपिडेमिया।
4 — हृदय-रक्तवाहिनीभ्रूण परिसंचरण; CVS का गर्भकालीन विकास; जन्मजात हृदय रोग (नीले और बिना नीले); संक्रामक अंतर्हृद्शोथ; हृद्पेशी रोग (कार्डियोमायोपैथी, मायोकार्डाइटिस); आमवाती ज्वर और रूमेटिक हृदय रोग; अतालता; हृदयावरण के रोग; प्रणालीगत उच्च रक्तचाप; हृदय विफलता और उसका प्रबंधन; ECG की बुनियाद; इकोकार्डियोग्राफी।
5 — श्वसननाक के जन्मजात व अर्जित विकार; टॉन्सिल और एडेनॉइड; ऊपरी तथा निचले श्वसन मार्ग की जन्मजात विकृतियाँ; स्वरयंत्र, श्वासनली व श्वसनी में बाहरी वस्तु; स्वरयंत्र और श्वासनली के अर्बुद; ब्रोंकाइटिस; एस्पिरेशन न्यूमोनिया; तीव्र न्यूमोनिया; पीब वाला फेफड़ा रोग; एटेलेक्टेसिस; एम्फ़ाइसीमा और अति-स्फीति; फेफड़ा शोफ़; ऊपरी श्वसन मार्ग संक्रमण; अवरोधक स्लीप एप्निया; तीव्र सूजनकारी ऊपरी वायुमार्ग अवरोध; सबग्लॉटिक संकुचन (तीव्र व दीर्घकालिक); ब्रोंकियोलाइटिस; GER; बार-बार होने वाला तथा इंटरस्टीशियल न्यूमोनिया; फेफड़ा सिस्ट; दमा; ब्रोंकिएक्टेसिस; प्लूरल इफ़्यूज़न; मीडियास्टिनल गाँठ; फेफड़े से हवा का रिसाव; सिस्टिक फ़ाइब्रोसिस; फेफड़ा कार्य-जाँच।
6 — आंत्र और यकृत रोगमुख-गुहा के रोग; निगलने तथा अन्नप्रणाली के विकार; H. pylori संक्रमण और पेप्टिक अल्सर; कुअवशोषण सिंड्रोम व सीलिएक रोग; इरिटेबल बाउल सिंड्रोम; हेपेटाइटिस; दीर्घकालिक यकृत रोग; सिरोसिस और पोर्टल उच्च रक्तचाप; पेप्टिक अल्सर रोग; अन्नप्रणाली व आमाशय में बाहरी वस्तु; आंत्र अवरोध; तीव्र, लगातार और दीर्घकालिक दस्त; सूजनकारी आंत्र रोग; यकृत विफलता; विल्सन रोग; यकृत के चयापचयी रोग; यकृत प्रत्यारोपण; प्रोटीन खोने वाली एंटरोपैथी; शिशु कोलेस्टेसिस; यकृत फोड़ा; पोर्टल उच्च रक्तचाप।
7 — गुर्दा और मूत्र-मार्ग विकारतीव्र व दीर्घकालिक ग्लोमेरुलोनेफ़्राइटिस; हीमोलिटिक यूरेमिक सिंड्रोम; VUR और गुर्दे पर निशान; रीनल ट्यूबुलर विकार; जन्मजात तथा वंशानुगत गुर्दा विकार; पोस्टीरियर यूरेथ्रल वाल्व; नेफ़्रोटिक सिंड्रोम; मूत्र-मार्ग संक्रमण; अवरोहित न हुए वृषण; प्रणालीगत रोगों में गुर्दे की भागीदारी; गुर्दा व मूत्राशय की पथरी; हाइड्रोनेफ़्रोसिस, मूत्र-त्याग की गड़बड़ी; विल्म्स ट्यूमर; गुर्दा प्रत्यारोपण; तीव्र और दीर्घकालिक गुर्दा विफलता; पेरिटोनियल डायलिसिस, हीमोडायलिसिस तथा सतत गुर्दा प्रतिस्थापन चिकित्सा।
8 — तंत्रिका विकारदौरे और बिना-दौरे वाली आकस्मिक घटनाएँ; मेनिंजाइटिस; मस्तिष्क फोड़ा; तीव्र मस्तिष्कशोथ और ज्वर-जनित एन्सेफ़ैलोपैथी; न्यूरोसिस्टिसरकोसिस व अन्य तंत्रिका परजीवी रोग; बच्चों में स्ट्रोक; तंत्रिका-चयापचयी और तंत्रिका-क्षयकारी विकार; तंत्रिका-पेशी विकार; अधिगम अक्षमताएँ; तीव्र शिथिल पक्षाघात और AFP निगरानी; बचपन के गति-विकार; विकृतियाँ; बचपन की मिर्गी और उसके सिंड्रोम; कोमा; गिलियन-बारे सिंड्रोम; सेरेब्रल पाल्सी; मानसिक मंदता; अटैक्सिया; CNS ट्यूमर; मस्तिष्क तथा मेरुरज्जु की आघात-चोट; तंत्रिका तंत्र के अर्जित तीव्र व दीर्घकालिक डिमाइलिनेटिंग विकार; हाइड्रोसेफ़ेलस; न्यूरो-इमेजिंग; तंत्रिका विद्युत-शरीर-क्रिया (EEG, EMG, तंत्रिका चालन अध्ययन, उद्दीपित विभव)।
9 — रक्त-विज्ञान और कैंसर-विज्ञानकमी-जनित रक्ताल्पता; अप्लास्टिक एनीमिया; थ्रॉम्बोसाइटोपीनिया; रक्त घटक चिकित्सा; अस्थि-मज्जा व स्टेम सेल प्रत्यारोपण; मायलोडिसप्लास्टिक सिंड्रोम; हॉजकिन और नॉन-हॉजकिन लिंफोमा; अति-थक्का अवस्थाएँ; हीमोलिटिक रक्ताल्पता; पैनसाइटोपीनिया; आधान से जुड़े संक्रमण; तीव्र व दीर्घकालिक ल्यूकीमिया; हॉजकिन रोग; न्यूरोब्लास्टोमा; ज्वर के साथ न्यूट्रोपीनिया; रक्तस्राव-रोधी तंत्र के विकार; फ़्लो साइटोमेट्री; बचपन के ठोस ट्यूमर।
10 — अंतःस्रावी विज्ञानपीयूष की कमी व अधिकता; यौवन विकार; अधिवृक्क अपर्याप्तता; एड्रीनोजेनिटल सिंड्रोम; निम्न रक्त शर्करा; जननग्रंथि की गड़बड़ी और इंटरसेक्स; डायबिटीज़ इन्सिपिडस; थायरॉइड की कमी व अधिकता; कुशिंग सिंड्रोम; छोटा क़द; मोटापा; मधुमेह।
11 — संक्रमणजीवाणु संक्रमण; कवक संक्रमण; रिकेट्सियल संक्रमण; प्रोटोज़ोआ व परजीवी संक्रमण; HIV; महामारी नियंत्रण और संक्रमण रोकथाम; विषाणु संक्रमण; माइकोप्लाज़्मा; क्षय रोग; अस्पताल-जनित संक्रमण; बचपन का टीकाकरण; जैव-चिकित्सा कचरा।
12 — आपात और क्रिटिकल केयरशॉक की आपात देखभाल; श्वसन विफलता; स्टेटस एपिलेप्टिकस; द्रव-इलेक्ट्रोलाइट गड़बड़ी और उसकी चिकित्सा; विषाक्तता; बिच्छू व साँप का काटना; हृदय-श्वसन गति रुकना; तीव्र गुर्दा विफलता; तीव्र गंभीर दमा; अम्ल-क्षार गड़बड़ी; दुर्घटनाएँ; संवातन (आक्रामक व ग़ैर-आक्रामक)।
13 — प्रतिरक्षा और गठिया-विज्ञानगठिया (तीव्र व दीर्घकालिक); T और B कोशिका विकार; संयोजी ऊतक विकार; प्रतिरक्षा-न्यूनता सिंड्रोम; बच्चों के स्वप्रतिरक्षी विकार।
14 — नाक-कान-गलातीव्र व दीर्घकालिक कर्णशोथ; डिप्थीरिया के बाद तालु पक्षाघात; तीव्र/दीर्घकालिक टॉन्सिलाइटिस और एडेनॉइड; बाहरी वस्तु; चालन तथा तंत्रिका-जनित बहरापन; एलर्जिक राइनाइटिस व साइनसाइटिस; कॉक्लियर इम्प्लांट; श्रवण का आकलन।
15 — त्वचा रोगचकत्तेदार बीमारियाँ; रंजकता विकार; पीबदार संक्रमण; स्टीवन-जॉनसन सिंड्रोम; सेबोरिक डर्मेटाइटिस; पित्ती; इक्थियोसिस; रक्तवाहिनी घाव; फफोलेदार विकार; कवक व परजीवी रोग; एक्ज़िमा; दवा से चकत्ते; बाल झड़ना।
16 — आँख की समस्याएँअपवर्तन और समंजन; रतौंधी; भेंगापन; समय-पूर्व जन्म की रेटिनोपैथी; दृष्टि तंत्रिका क्षय; आंशिक या पूर्ण दृष्टि हानि और मोतियाबिंद; कोरियोरेटिनाइटिस; कंजंक्टाइवा व कॉर्निया के विकार; रेटिनोब्लास्टोमा; पैपिलेडेमा; मोतियाबिंद; एमॉरोसिस।
17 — व्यवहार और विकास संबंधी विकाररोमिनेशन; बिस्तर गीला करना; नींद विकार; साँस रोक लेने के दौरे; भाव-विकार; ध्यान-न्यूनता अति-सक्रियता विकार; पिका; एनकोप्रेसिस; आदत-विकार; चिंता विकार; ग़ुस्से के दौरे; व्यापक विकास विकार और ऑटिस्टिक विकास विकार।
18 — सामाजिक बाल-चिकित्साबाल स्वास्थ्य से जुड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम; बाल श्रम; दिव्यांगता और पुनर्वास; बाल स्वास्थ्य व जनसंख्या की राष्ट्रीय नीति; बाल दुर्व्यवहार और उपेक्षा; गोद लेना; बच्चे के अधिकार; बाल अपराध; IMS अधिनियम; बेबी फ़्रेंडली हॉस्पिटल इनिशिएटिव; स्तनपान नीति; ICDS।
19 — आनुवंशिकीवंशानुक्रम के सिद्धांत; गुणसूत्र विकार; बहुकारकीय व बहुजीनी विकार; प्रसव-पूर्व निदान; वंशावली बनाना; एकल जीन विकार; आनुवंशिक निदान; आणविक आनुवंशिकी।
20 — अस्थि-रोगमुख्य जन्मजात अस्थि विकृतियाँ; हड्डी और जोड़ के संक्रमण — पीबदार तथा क्षय-जनित; रिकेट्स; आम अस्थि ट्यूमर। विषय के अंत में नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

Child Psychologist — छह पेपर और 78 यूनिट, पेज 52 से 62 ↑

दस्तावेज़ की यह सबसे लंबी प्रविष्टि है और सबसे ज़्यादा कम आँकी जाने वाली भी। Child Psychologist का सिलेबस एक सूची नहीं है: यह छह अलग-अलग विषय-समूह हैं — Psychosocial Foundations of Behavior (भाग A और मनोविकृति विज्ञान वाला भाग B), Biological Foundations of Behavior (CNS की शरीर-रचना-शरीर-क्रिया-जैव-रसायन वाला भाग A और तंत्रिका-मनोविज्ञान वाला भाग B), Psychiatry, Psychotherapy and Counseling, Behavioral Medicine, और Statistics।

दस्तावेज़ से गिनने पर दस पेजों में कुल 78 यूनिट बनती हैं। अकेले सांख्यिकी वाले हिस्से में बारह यूनिट हैं और वह बहुचर विश्लेषण तथा प्रतिदर्श आकार के आकलन तक जाता है — यानी इस सिलेबस के ज़्यादातर नैदानिक पेपरों से भारी सांख्यिकीय माँग।

यूनिट — Psychosocial Foundations of Behavior — भाग A और भाग B (मनोविकृति विज्ञान)इसमें क्या-क्या आता है
Unit-Iपरिचय: पेशे और व्यवहार का सिंहावलोकन; इतिहास व विकास; पेशेवर भूमिका और कार्य; मौजूदा मुद्दे तथा रुझान; विशेषज्ञता के क्षेत्र; नैतिक व क़ानूनी प्रश्न; आचार संहिता।
Unit-IIमानसिक स्वास्थ्य और बीमारी: मानसिक स्वास्थ्य सेवा — बीते और आज; मानसिक रोग से जुड़ा कलंक तथा रवैया; स्वास्थ्य व बीमारी की अवधारणा; मनो-गतिक, व्यवहारिक, संज्ञानात्मक, मानवतावादी, अस्तित्ववादी और जैविक मॉडल।
Unit-IIIमहामारी-विज्ञान: भारतीय संदर्भ के अध्ययन; सर्वेक्षण के लिए उपलब्ध व मानकीकृत उपकरण; मानसिक रोग के सामाजिक-सांस्कृतिक सहसंबंध; धर्म और मानसिक स्वास्थ्य; मनोवैज्ञानिक कुशल-क्षेम तथा जीवन-गुणवत्ता — माप और उन्हें प्रभावित करने वाले कारक।
Unit-IVस्व और संबंध: मानसिक स्वास्थ्य व बीमारी में आत्म-अवधारणा, आत्म-छवि, आत्म-बोध और आत्म-नियमन; सीखी हुई असहायता तथा आरोपण सिद्धांत; सामाजिक कौशल मॉडल; मानसिक रोग के पारस्परिक व संप्रेषण मॉडल; तनाव-प्रवृत्ति मॉडल, लचीलापन, सामना करना और सामाजिक सहारा।
Unit-Vपारिवारिक प्रभाव: शुरुआती अभाव और आघात; उपेक्षा व दुर्व्यवहार; संलग्नता; अलगाव; अपर्याप्त पालन-पोषण; वैवाहिक कलह और तलाक़; बिगड़े हुए साथी-संबंध; संवाद की शैली; परिवार पर बोझ; भावनात्मक अनुकूलन; व्यक्त भावनाएँ और रोग की वापसी।
Unit-VIसामाजिक प्रभाव: नस्ल, लिंग और जातीयता के आधार पर भेदभाव; सामाजिक वर्ग व ढाँचा, ग़रीबी और बेरोज़गारी; पूर्वाग्रह, सामाजिक बदलाव तथा अनिश्चितता; अपराध व बाल-अपराध; सामाजिक तनाव और हिंसा; शहरी दबाव; यातना और आतंकवाद; संस्कृति का झटका; प्रवास; भारत के संदर्भ में धर्म व लिंग से जुड़े प्रश्न।
Unit-VIIदिव्यांगता: परिभाषा और वर्गीकरण; दिव्यांगता के मनो-सामाजिक मॉडल; असर, ज़रूरतें व समस्याएँ; दिव्यांगता के आकलन तथा प्रमाणन से जुड़े प्रश्न — क्षेत्र और माप।
Unit-VIIIपुनर्वास: तरीक़े; पुनर्वास प्रक्रिया में हस्तक्षेप; दिव्यांगता के साथ ढलने के मॉडल; परिवार व देखभाल करने वालों के प्रश्न; मानसिक रोगियों के अधिकार; सशक्तिकरण; स्वस्थ होने में सहारा।
Unit-IXनीतियाँ और अधिनियम: पुनर्वास नीतियाँ व अधिनियम; सरकार तथा स्वैच्छिक संस्थाओं से सहायता, रियायतें, सामाजिक लाभ और सहारा; आज की चुनौतियाँ; पुनर्वास की नैतिकता और पेशेवर आचार संहिता।
Unit-Xमनोविकृति विज्ञान का परिचय: परिभाषा; सामान्यता व असामान्यता की अवधारणा; असामान्यता की नैदानिक कसौटियाँ; आयामी बनाम श्रेणीबद्ध तथा प्रोटोटाइप मॉडल; वर्गीकरण और वर्गीकरण-प्रणालियाँ, उनकी विश्वसनीयता व उपयोगिता; चलन में मौजूद प्रणालियाँ, उनके लाभ और सीमाएँ।
Unit-XIलक्षण और चिह्न: चेतना, ध्यान, गति-व्यवहार, दिक्-काल बोध, आत्म-अनुभव, वाणी, विचार, बोध, भाव और स्मृति के विकार।
Unit-XIIमनोवैज्ञानिक सिद्धांत: मुख्य नैदानिक विकारों के मनो-गतिक, व्यवहारिक, संज्ञानात्मक, मानवतावादी, पारस्परिक, मनो-सामाजिक तथा अन्य प्रमुख मॉडल — चिंता, मनोग्रस्ति-बाध्यता, सोमैटोफ़ॉर्म, विघटनकारी, समायोजन, लैंगिक, नशा, व्यक्तित्व, आत्महत्या, बचपन-किशोरावस्था, मनोविकृति, भाव-विकार और संस्कृति-विशिष्ट विकार।
Unit-XIIIभारतीय चिंतन: मानसिक स्वास्थ्य और बीमारी की अवधारणा; मानसिक रोगों का नामकरण व वर्गीकरण; सामाजिक पहचान और स्तरीकरण (वर्णाश्रम व्यवस्था); संज्ञान, भाव, व्यक्तित्व तथा अभिप्रेरणा की अवधारणाएँ और उनके विकार।
यूनिट — Biological Foundations of Behavior — भाग A (CNS की शरीर-रचना, शरीर-क्रिया व जैव-रसायन) और भाग B (तंत्रिका-मनोविज्ञान)इसमें क्या-क्या आता है
Unit-Iमस्तिष्क की शरीर-रचना: प्रमुख विभाग; कॉर्टिकल तथा सब-कॉर्टिकल भागों की सतही और भीतरी बनावट; भागों के आपसी तंत्रिका-संबंध; मस्तिष्क की रक्त आपूर्ति व CSF तंत्र; कोशिकीय संरचना और मॉड्यूलर संगठन।
Unit-IIकोशिकाओं की संरचना और कार्य: तंत्रिका तंत्र की कोशिकाएँ (न्यूरॉन, सहायक कोशिकाएँ, रक्त-मस्तिष्क अवरोध); न्यूरॉन के भीतर संचार (झिल्ली विभव, क्रिया विभव); न्यूरॉनों के बीच संचार (न्यूरोट्रांसमीटर, न्यूरोमॉड्युलेटर और हॉर्मोन)।
Unit-IIIमस्तिष्क का जैव-रसायन: जैव-रासायनिक व चयापचयी पक्ष; चिकित्सा आनुवंशिकी; गुणसूत्रों की संरचना और कार्य; आनुवंशिकी की आणविक विधियाँ; आनुवंशिक विविधता; समष्टि आनुवंशिकी; एकल जीन वंशानुक्रम; कोशिका-आनुवंशिक विकृतियाँ; बहुकारकीय वंशानुक्रम; आनुवंशिक रोगों का जैव-रसायन।
Unit-IVसंवेदी और गति तंत्र का तंत्रिका जीव-विज्ञान: संवेदी तंत्र का संगठन — ग्राहक, रिले न्यूरॉन, थैलेमस और अलग-अलग संवेदनाओं का कॉर्टिकल प्रसंस्करण; परिधि (मांसपेशी तर्कु), थैलेमस, बेसल गैंग्लिया, ब्रेनस्टेम, अनुमस्तिष्क तथा प्रमस्तिष्क कॉर्टेक्स के मुख्य गति-तंत्र।
Unit-Vआंतरिक परिवेश का नियमन: लिम्बिक, स्वायत्त और तंत्रिका-अंतःस्रावी तंत्र की भूमिका; रेटिकुलर फ़ॉर्मेशन तथा नींद-जागरण को नियंत्रित करने वाले अन्य तंत्रिका आधार।
Unit-VIव्यवहार का तंत्रिका जीव-विज्ञान: प्रेरणाएँ, अभिप्रेरणा, भूख, प्यास, काम, भाव, सीखना और स्मृति के तंत्रिका-जैविक पहलू।
Unit-VIIमनो-औषध विज्ञान: सिद्धांत (फार्माकोकाइनेटिक्स, दवा की प्रभावशीलता, बार-बार देने का असर); दवा की क्रिया-स्थल — उत्पादन, भंडारण, निकलना, ग्राही, पुनर्ग्रहण और नष्ट होना; न्यूरोट्रांसमीटर व न्यूरोमॉड्युलेटर (एसिटाइलकोलीन, मोनोऐमीन, अमीनो अम्ल, पेप्टाइड, लिपिड)।
Unit-VIIIतंत्रिका-मनोविज्ञान का परिचय: मस्तिष्क की बनावट और कार्य का संबंध; एक अलग विषय के रूप में इसका उदय; मस्तिष्कीय संगठन का तर्क; कार्यों का स्थानीकरण व पार्श्वीकरण; नैदानिक तथा संज्ञानात्मक तंत्रिका-मनोवैज्ञानिकों के तरीक़े और पद्धतियाँ।
Unit-IXफ़्रंटल लोब सिंड्रोम: नियामक कार्यों की गड़बड़ी; ध्यान की प्रक्रियाएँ; भाव; स्मृति और बौद्धिक क्रिया; भाषा तथा गति-कार्य।
Unit-Xटेम्पोरल लोब सिंड्रोम: विशिष्ट इंद्रियाँ — श्रवण, संतुलन और समेकन कार्य; सीखने व स्मृति की गड़बड़ियाँ; भाषा, भाव, समय-बोध और चेतना।
Unit-XIपैराइटल और ऑक्सिपिटल लोब सिंड्रोम: संवेदी कार्य तथा शरीर-प्रतिरूप बोध की गड़बड़ी; एग्नोसिया व अप्रैक्सिया; दृश्य-स्थान बोध की गड़बड़ी; रंग-बोध; लिखने और पढ़ने की क्षमता।
Unit-XIIतंत्रिका तथा मनोरोग स्थितियों का तंत्रिका-मनोवैज्ञानिक चित्र: हंटिंग्टन रोग, पार्किंसन रोग, प्रोग्रेसिव सुप्रान्यूक्लियर पाल्सी, थैलेमिक क्षयकारी रोग, मल्टिपल स्क्लेरोसिस, कॉर्टिकल व सब-कॉर्टिकल डिमेंशिया, अल्ज़ाइमर डिमेंशिया, AIDS डिमेंशिया कॉम्प्लेक्स, तथा मुख्य मनोरोग सिंड्रोम — मनोविकृति, भाव-विकार, आत्महत्या, चिंता विकार और अन्य भावनात्मक व व्यवहारिक सिंड्रोम।
Unit-XIIIमानव मस्तिष्क की क्रियात्मक मैपिंग: QEEG, EP व ERP, PET, SPECT, fMRI।
Unit-XIVतंत्रिका-मनोवैज्ञानिक आकलन: परिचय, सिद्धांत, प्रासंगिकता, दायरा और संकेत, तथा बच्चों के आकलन से जुड़ी विशेष बातें।
Unit-XVतंत्रिका-मनोवैज्ञानिक पुनर्वास: आघात-जनित मस्तिष्क चोट और मस्तिष्क रोग के बाद पुनर्वास के सिद्धांत, उद्देश्य व विधियाँ; कंप्यूटर-आधारित पुनर्प्रशिक्षण, न्यूरोफ़ीडबैक तथा संज्ञानात्मक सहायकों का दायरा।
यूनिट — Psychiatry (मनोरोग विज्ञान)इसमें क्या-क्या आता है
Unit-Iपरिचय: नैदानिक साक्षात्कार और निदान तक पहुँचने का तरीक़ा; केस हिस्ट्री; मानसिक स्थिति परीक्षण; मनोरोग सूचना का संगठन व प्रस्तुति; नैदानिक सूत्रीकरण; चलन में मौजूद वर्गीकरण प्रणाली।
Unit-IIमनोविकृतियाँ: सिज़ोफ़्रेनिया, भाव-विकार, भ्रम-विकार और अन्य मनोविकृतियाँ — प्रकार, नैदानिक लक्षण, कारण और प्रबंधन।
Unit-IIIतंत्रिका-विकृति, तनाव-जनित और सोमैटोफ़ॉर्म विकार — प्रकार, नैदानिक लक्षण, कारण और प्रबंधन।
Unit-IVव्यक्तित्व और व्यवहार के विकार: विशिष्ट व्यक्तित्व विकार; मनो-सक्रिय पदार्थों से होने वाले मानसिक व व्यवहारिक विकार; आदत और आवेग विकार; लैंगिक विकार तथा शिथिलता — प्रकार, लक्षण, कारण और प्रबंधन।
Unit-Vजैविक मानसिक विकार: डिमेंशिया, डेलिरियम और तंत्रिका व प्रणालीगत रोगों से जुड़ी स्थितियाँ — प्रकार, लक्षण, कारण और प्रबंधन।
Unit-VIबचपन और किशोरावस्था के व्यवहारिक, भावनात्मक तथा विकास संबंधी विकार — प्रकार, लक्षण, कारण और प्रबंधन।
Unit-VIIमानसिक मंदता: वर्गीकरण, कारण और प्रबंधन।
Unit-VIIIमानसिक विकारों का तंत्रिका जीव-विज्ञान: मनोविकृति, भाव-विकार, आत्महत्या, चिंता विकार, नशा-विकार और अन्य भावनात्मक व व्यवहारिक सिंड्रोम के तंत्रिका-जैविक सिद्धांत।
Unit-IXचिकित्सा के तरीक़े: दवाएँ, ECT, मनो-शल्य, मनोचिकित्सा और व्यवहार चिकित्सा; निवारक तथा पुनर्वास रणनीतियाँ — हाफ़-वे होम, शेल्टर्ड वर्कशॉप, डे केयर और संस्थागत देखभाल।
Unit-Xपरामर्श-संपर्क मनोरोग विज्ञान: सामान्य अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मनोरोग परामर्श।
यूनिट — Psychotherapy and Counseling (मनोचिकित्सा और परामर्श)इसमें क्या-क्या आता है
Unit-Iमनोचिकित्सा का परिचय: परिभाषा, उद्देश्य, पेशेवर चिकित्सकों का प्रशिक्षण; नैतिक व क़ानूनी प्रश्न; अधिकार और ज़िम्मेदारियाँ; सहमति तथा नाबालिग़ों की स्वीकृति; सत्रों की योजना और अभिलेख; ढाँचा बनाना व लक्ष्य तय करना; पहले और बाद का आकलन; साक्ष्य-आधारित चिकित्सा का व्यवहार।
Unit-IIचिकित्सकीय संबंध: रोगी और चिकित्सक के लक्षण; बीमारी, तकनीक तथा संबंध को प्रभावित करने वाले अन्य कारक।
Unit-IIIसाक्षात्कार: उद्देश्य, तकनीक और प्रकार; संरचित तथा असंरचित साक्षात्कार; सूक्ष्म कौशल, खुले प्रश्न, स्पष्टीकरण, प्रतिबिंबन, सहजीकरण और सामना कराना; चुप्पियाँ; शाब्दिक व अशाब्दिक पक्ष।
Unit-IVभाव-केंद्रित मनोचिकित्सा: उद्गम, आधार, सूत्रीकरण, प्रक्रिया, तकनीक, चरण, परिणाम, संकेत और मौजूदा शोध — मनो-गतिक, अल्पकालिक, मानवतावादी, अस्तित्ववादी, गेस्टाल्ट, व्यक्ति-केंद्रित, एडलेरियन, लेन-देन विश्लेषण, यथार्थ चिकित्सा, सहारा देने वाली चिकित्सा, नैदानिक सम्मोहन, खेल चिकित्सा, मनो-नाट्य, तथा योग, ध्यान, शवासन, प्राणिक हीलिंग, रेकी और ताई ची जैसे प्राच्य तरीक़ों के संदर्भ में।
Unit-Vव्यवहार चिकित्सा: उद्गम, बुनियाद, सिद्धांत व पद्धति, आलोचनाएँ, अनुभवजन्य स्थिति, व्यवहार आकलन, सूत्रीकरण और उपचार-लक्ष्य; असंवेदीकरण (कल्पना में, वास्तविक, संवर्धित, सहायता सहित); विलोपन (क्रमिक सामना, फ़्लडिंग व प्रतिक्रिया रोकथाम, इम्प्लोज़न, गुप्त विलोपन, नकारात्मक अभ्यास, उद्दीपक तृप्ति); कौशल प्रशिक्षण (मुखरता प्रशिक्षण, मॉडलिंग, व्यवहार पूर्वाभ्यास); ऑपरेंट विधियाँ (टोकन इकोनॉमी, कंटिंजेंसी प्रबंधन); विमुखता विधियाँ; आत्म-नियंत्रण विधियाँ (विचार रोकना, विरोधाभासी अभिप्राय); बायोफ़ीडबैक (EMG, GSR, EEG, तापमान, EKG); व्यवहार परामर्श; समूह व्यवहार तरीक़े; व्यवहारिक परिवार तथा वैवाहिक चिकित्सा।
Unit-VIसंज्ञानात्मक चिकित्सा: संज्ञानात्मक मॉडल, सिद्धांत व मान्यताएँ, तकनीकें, संकेत और मौजूदा स्थिति — विवेकपूर्ण भाव-व्यवहार चिकित्सा, संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा, संज्ञानात्मक विश्लेषणात्मक चिकित्सा, द्वंद्वात्मक व्यवहार चिकित्सा, समस्या-समाधान चिकित्सा, माइंडफ़ुलनेस आधारित चिकित्सा, स्कीमा-केंद्रित चिकित्सा, संज्ञानात्मक पुनर्संरचना और अन्य मुख्य मॉडल।
Unit-VIIप्रणालीगत चिकित्सा: उद्गम, सैद्धांतिक मॉडल, सूत्रीकरण, प्रक्रिया, तकनीक, चरण, परिणाम, संकेत और मौजूदा शोध — परिवार चिकित्सा, वैवाहिक चिकित्सा, समूह चिकित्सा, लैंगिक चिकित्सा, पारस्परिक चिकित्सा तथा अन्य प्रमुख चिकित्सा के संदर्भ में।
Unit-VIIIशारीरिक चिकित्सा: उद्गम, आधार, सूत्रीकरण, प्रक्रिया, तकनीक, चरण, परिणाम, संकेत और मौजूदा स्थिति — क्रमिक पेशी शिथिलन, ऑटोजेनिक प्रशिक्षण, बायोफ़ीडबैक, नेत्र-गति असंवेदीकरण व पुनर्प्रसंस्करण (EMDR), तथा अन्य साक्ष्य-आधारित चिकित्सा।
Unit-IXपरामर्श: परिभाषा और लक्ष्य, तकनीकें, व्यवहारिक, संज्ञानात्मक तथा मानवतावादी तरीक़े, परामर्श प्रक्रिया, परामर्श सिद्धांत, और अलग-अलग क्षेत्रों की परामर्श विधियाँ।
Unit-Xविशेष स्थितियों में चिकित्सा: जान-बूझकर की गई आत्म-क्षति, शोक, आघात, मानव-निर्मित या प्राकृतिक आपदा के पीड़ित, संकट, व्यक्तित्व विकार, दीर्घकालिक मानसिक रोग, नशा, HIV/AIDS, अधिगम अक्षमता, मानसिक मंदता और ऐसी अन्य स्थितियाँ जहाँ समन्वित या मिश्रित तरीक़ा ही आधार होता है।
Unit-XIबच्चों की चिकित्सा: अलग-अलग तरीक़ों का परिचय; मनोविश्लेषणात्मक चिकित्सा (आना फ़्रॉयड, मेलानी क्लाइन, डोनाल्ड विनिकॉट); विकासात्मक, अंतर्मुखी व बहिर्मुखी विकारों के लिए विशेष व्यवहार तथा खेल तकनीकें; मनो-शारीरिक और दीर्घकालिक शारीरिक बीमारी में चिकित्सा; माता-पिता व परिवार परामर्श; किशोरों की चिकित्सा।
Unit-XIIमनो-शिक्षा (चिकित्सकीय शिक्षा): परिवार तथा देखभाल करने वालों को जानकारी और भावनात्मक सहारा; चिकित्सकीय शिक्षा के मॉडल; स्वस्थ होने, रोग लौटने से रोकने और सफल पुनर्वास के लिए साझा प्रयास हेतु परिवार परामर्श।
Unit-XIIIमनो-सामाजिक पुनर्वास: पुनर्वास सेवाएँ और संसाधन; दिव्यांगता के चिकित्सकीय व मनो-सामाजिक पक्ष; आकलन; समूह चिकित्सा, सहारा देने वाली चिकित्सा और अन्य प्रमाणित मनोचिकित्साएँ — मुख्य तथा परिधीय सदस्यों के लिए।
Unit-XIVभारतीय संदर्भ में मनोचिकित्सा: वैदिक काल से मनोवैज्ञानिक उपचार की ऐतिहासिक दृष्टि तथा आयुर्वेद और योग की पद्धतियाँ; आज की दृष्टि; भारतीय व्यवहार में सामाजिक-सांस्कृतिक प्रश्न; प्रक्रिया व परिणाम पर चल रहा शोध।
Unit-XVआज के प्रश्न और शोध: साक्ष्य-आधारित व्यवहार, प्रबंधित देखभाल, और प्रक्रिया व परिणाम से जुड़ा शोध।
यूनिट — Behavioral Medicine (व्यवहारिक चिकित्सा)इसमें क्या-क्या आता है
Unit-Iपरिचय: परिभाषा और दायरा; स्वास्थ्य व बीमारी पर मनोवैज्ञानिक तथा व्यवहारिक असर; तनाव पर तंत्रिका-अंतःस्रावी, न्यूरोट्रांसमीटर और तंत्रिका-प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाएँ; नकारात्मक भाव-प्रवृत्ति, व्यवहार-प्रतिरूप और सामना करने की शैलियाँ; रोग के मनो-शारीरिक मॉडल; स्वास्थ्य व्यवहार के सैद्धांतिक मॉडल; स्वास्थ्य, बीमारी और स्वास्थ्य सेवा में मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों का दायरा तथा उपयोग।
Unit-IIकेंद्रीय तंत्रिका तंत्र: बड़े CNS रोगों में संज्ञानात्मक, व्यक्तित्व, व्यवहारिक और भावनात्मक गड़बड़ियाँ — मस्तिष्क-रक्तवाहिनी (स्ट्रोक, वैस्कुलर डिमेंशिया), विकासात्मक (सेरेब्रल पाल्सी), क्षयकारी (पार्किंसन), आघातजन्य (मस्तिष्क व मेरुरज्जु चोट), दौरे वाले (मिर्गी) और संक्रामक (AIDS डिमेंशिया); आकलन तथा मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप और पुनर्वास की विधियाँ।
Unit-IIIहृदय-रक्तवाहिनी तंत्र: मनो-सामाजिक, व्यक्तित्व, जीवनशैली और स्वास्थ्य-आदत के प्रश्न; उच्च रक्तचाप, हृदयाघात और CABG के बाद बीमारी तथा क्षमता-हानि से जूझने की मनो-व्यवहारिक प्रतिक्रियाएँ; जीवन-गुणवत्ता व कुशल-क्षेम; मनोवैज्ञानिक प्रबंधन के प्रमाणित तरीक़े।
Unit-IVश्वसन तंत्र: भड़काने वाले कारक जैसे भावनात्मक उत्तेजना और बाहरी उद्दीपन; बिगाड़ने वाले कारक जैसे चिंता व घबराहट के लक्षण; अस्थमा तथा अन्य वायुमार्ग रोगों में द्वितीयक लाभ और आत्म-सम्मान की कमी जैसे असर; प्रबंधन में सहायक मनोवैज्ञानिक, व्यवहारिक और बायोफ़ीडबैक रणनीतियाँ।
Unit-Vआंत्र-पथ: क्रियात्मक आंत्र विकारों — इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, सूजनकारी आंत्र रोग, पेप्टिक अल्सर, अन्नप्रणाली विकार — में व्यक्तित्व लक्षण और तनाव व सामना करने की शैली समेत मनोवैज्ञानिक कारकों का आकलन; मनोचिकित्सा, व्यवहार परिवर्तन, संज्ञानात्मक पुनर्संरचना, बायोफ़ीडबैक तथा शिथिलन प्रशिक्षण की भूमिका।
Unit-VIमूत्र-जनन, गुर्दा और प्रजनन तंत्र: पुरुष तथा स्त्री लैंगिक शिथिलता के मनो-सामाजिक प्रश्न; मूत्र-त्याग की समस्याएँ, प्राथमिक व द्वितीयक बिस्तर गीला करना सहित; अंतिम चरण का गुर्दा रोग और डायलिसिस; प्राथमिक तथा द्वितीयक बंध्यता; प्रमाणित मनोवैज्ञानिक व व्यवहारिक हस्तक्षेप।
Unit-VIIत्वचा-विज्ञान: सोरायसिस, दीर्घकालिक पित्ती, डर्मेटाइटिस और बाल झड़ने जैसी मनो-त्वचीय स्थितियों में तनाव व चिंता की भूमिका; आत्म-सम्मान, देह-छवि और मनोदशा पर उनका असर; शिथिलन, तनाव प्रबंधन, परामर्श तथा बायोफ़ीडबैक की भूमिका।
Unit-VIIIकैंसर-विज्ञान: कैंसर से जुड़े मनो-सामाजिक प्रश्न — जीवन-गुणवत्ता, इनकार, शरीर में बदलाव पर शोक, उपचार का डर, दुष्प्रभाव, छोड़ दिए जाने का भय, रोग की वापसी और लचीलापन; आकलन उपकरण; तथा व्यक्ति और परिवार के लिए हस्तक्षेप के लक्ष्य व चिकित्सा तकनीकें।
Unit-IXHIV/AIDS: भारत में HIV सेवा कार्यक्रम का ढाँचा; जाँच से पहले और बाद का परामर्श; रोग बढ़ने के साथ उठने वाले मनो-सामाजिक प्रश्न और उनका समाधान; संक्रमित वयस्कों, बच्चों तथा परिवार व देखभाल करने वालों का मनोवैज्ञानिक आकलन और हस्तक्षेप; HAART चिकित्सा; संक्रमण के अलग-अलग चरणों में तंत्रिका-मनोवैज्ञानिक निष्कर्ष; रोकथाम, जागरूकता और जोखिम वाली आबादी में हस्तक्षेप।
Unit-Xदर्द: दर्द के अनुभव और व्यवहार में लगी शारीरिक तथा मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाएँ; तीव्र व दीर्घकालिक दर्द की तीव्रता, व्यवहार और उससे जुड़ी अक्षमता नापने के उपकरण; संज्ञानात्मक, व्यवहारिक, बायोफ़ीडबैक तथा सम्मोहन चिकित्सा जैसे मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप।
Unit-XIअंतिम अवस्था के रोगी: मृत्यु और मरण की चिकित्सकीय, धार्मिक तथा आध्यात्मिक परिभाषाएँ; मरते व्यक्ति और शोकग्रस्त परिवार का मनोविज्ञान; बुरी ख़बर देने के तरीक़े; शोक परामर्श; कैंसर, AIDS और अन्य असाध्य रोगों में जीवन के अंतिम दिनों के दर्द व अन्य लक्षणों का प्रबंधन; हॉस्पिस में काम करने के पेशेवर प्रश्न, अपनी मृत्यु-चिंता से जूझना भी; इच्छा-मृत्यु — प्रकार तथा पक्ष-विपक्ष के तर्क।
Unit-XIIअन्य सामान्य नैदानिक स्थितियाँ: उन सामान्य चिकित्सा परिस्थितियों में मनोवैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग और उसका तर्क जहाँ मनोवैज्ञानिक सेवा से नतीजे बेहतर होते दिखते हैं — मधुमेह, नींद विकार, मोटापा, दंत-चिकित्सा की चिंता, जलने की चोट, ऑपरेशन से पहले और बाद, अंग-विच्छेदन की तैयारी, अंगदाता व प्राप्तकर्ता का मूल्यांकन, प्रत्यारोपण से पहले-बाद, अंग प्रतिस्थापन, हीमोफ़ीलिया, इंद्रिय-हानि, आमवाती रोग, असामान्य रोग-व्यवहार और स्वास्थ्य-चिंता।
Unit-XIIIआज के प्रश्न: स्वास्थ्य मनोविज्ञान, मनो-शरीर-क्रिया विज्ञान, मनो-तंत्रिका-प्रतिरक्षा विज्ञान, मनो-जीव विज्ञान और समाज-जीव विज्ञान में शोध व प्रगति और उनके निहितार्थ; तथा मस्तिष्क के जीव-विज्ञान पर मनोचिकित्सा का असर।
यूनिट — Statistics (सांख्यिकी)इसमें क्या-क्या आता है
Unit-Iपरिचय: ज्ञान प्राप्त करने की विधियाँ, वैज्ञानिक पद्धति और उसके लक्षण; व्यवहार विज्ञानों में मापन की समस्याएँ; मापन के स्तर — नामिक, क्रमिक, अंतराल और अनुपात मापनी; परीक्षण निर्माण — मद विश्लेषण, तथा विश्वसनीयता, वैधता व मानक स्थापित करने की अवधारणा और विधियाँ।
Unit-IIप्रतिचयन: प्रायिकता और ग़ैर-प्रायिकता प्रतिचयन; सरल यादृच्छिक, स्तरित, क्रमबद्ध, गुच्छ और बहुचरणीय प्रतिचयन; प्रतिचयन तथा ग़ैर-प्रतिचयन त्रुटियाँ और उन्हें घटाने के तरीक़े।
Unit-IIIप्रायिकता की अवधारणा: प्रायिकता बंटन — सामान्य, प्वासों, द्विपद; वर्णनात्मक सांख्यिकी — केंद्रीय प्रवृत्ति, विचरण, विषमता और ककुदता।
Unit-IVपरिकल्पना जाँच: निर्माण और प्रकार; शून्य तथा वैकल्पिक परिकल्पना; टाइप I व टाइप II त्रुटि; सार्थकता स्तर; जाँच की शक्ति; p-मान; मानक त्रुटि और विश्वास अंतराल की अवधारणा।
Unit-Vपैरामीट्रिक सार्थकता जाँच: आवश्यक शर्तें, t जाँच, सामान्य z जाँच, F जाँच (पोस्ट-हॉक जाँच सहित), एक-मार्गी व द्वि-मार्गी प्रसरण विश्लेषण, सहप्रसरण विश्लेषण, दोहराए गए मापों का प्रसरण विश्लेषण, और सरल रैखिक सहसंबंध तथा समाश्रयण।
Unit-VIनॉन-पैरामीट्रिक सार्थकता जाँच: आवश्यक शर्तें; एक-प्रतिदर्श जाँच — चिह्न जाँच, चिह्न-कोटि जाँच, माध्यिका जाँच, मैक्नेमर जाँच; दो-प्रतिदर्श जाँच — मान-व्हिटनी U, विलकॉक्सन रैंक सम, कोल्मोगोरोव-स्मिरनोव, नॉर्मल स्कोर और काई-वर्ग जाँच; k-प्रतिदर्श जाँच — क्रुस्कल-वालिस, फ़्रीडमैन, एंडरसन-डार्लिंग और क्रैमर-वॉन मिसेस जाँच।
Unit-VIIप्रायोगिक अभिकल्प: यादृच्छिकीकरण, पुनरावृत्ति, पूर्ण यादृच्छिक अभिकल्प, यादृच्छिक ब्लॉक अभिकल्प, गुणनखंड अभिकल्प, क्रॉसओवर अभिकल्प, एकल-विषय अभिकल्प और ग़ैर-प्रायोगिक अभिकल्प।
Unit-VIIIमहामारी-वैज्ञानिक अध्ययन: भावी और पूर्वव्यापी अध्ययन, केस-कंट्रोल तथा कोहोर्ट अध्ययन; दरें, संवेदनशीलता, विशिष्टता, पूर्वानुमानी मान, कप्पा सांख्यिकी, ऑड्स अनुपात, सापेक्ष जोखिम, जनसंख्या-आरोपणीय जोखिम, मैंटल-हेंज़ल जाँच, प्रचलन व घटना-दर; आयु-विशिष्ट, रोग-विशिष्ट और समायोजित दरें तथा दरों का मानकीकरण; संबंध की जाँचें, 2x2 और पंक्ति-स्तंभ आकस्मिकता सारणियाँ।
Unit-IXबहुचर विश्लेषण: परिचय, बहु समाश्रयण, लॉजिस्टिक समाश्रयण, कारक विश्लेषण, गुच्छ विश्लेषण, विभेदक फलन विश्लेषण, पथ विश्लेषण, MANOVA, कैनोनिकल सहसंबंध और बहुआयामी मापन।
Unit-Xप्रतिदर्श आकार का आकलन: माध्य के आकलन, अनुपात के आकलन, दो माध्यों की तुलना और दो अनुपातों की तुलना के लिए प्रतिदर्श आकार तय करना।
Unit-XIआँकड़ों का गुणात्मक विश्लेषण: अंतर्वस्तु विश्लेषण और मनो-सामाजिक शोध की गुणात्मक विधियाँ।
Unit-XIIकंप्यूटर का उपयोग: व्यवहार विज्ञान में संबंधित सांख्यिकीय पैकेज का उपयोग और उसकी सीमाएँ।

General Surgery — चार भाग और 73 प्रविष्टियाँ, पेज 62 से 67 ↑

General Surgery चार अक्षर-वाले भागों में बँटा है — शल्य शरीर-रचना, शल्य शरीर-क्रिया, शल्य विकृति-विज्ञान, और नैदानिक शल्य समस्याएँ — और चारों मिलाकर तिहत्तर क्रमांकित प्रविष्टियाँ बनती हैं।

दो बातें ध्यान से पढ़िए। प्रविष्टि A-22 के साथ दस्तावेज़ में ही लिखा है कि Head, Department of Surgery के अनुसार निचले अंग वाला बिंदु Orthopaedics के सिलेबस में जा सकता है। और प्रविष्टि D-27, जिसका शीर्षक सिर्फ़ General है, उसमें (a) से (u) तक इक्कीस उप-प्रविष्टियाँ हैं — आघात, लैप्रोस्कोपी, रोबोटिक्स, ऑपरेशन थिएटर सुरक्षा, एंडोस्कोपी, ऑडिट, शोध पद्धति और शिक्षण भी उन्हीं में हैं।

A — शल्य शरीर-रचनासिलेबस में क्या लिखा है
1 — Head and Neckमस्तिष्क के भाग — निलय और कपाल के भीतर की रक्तवाहिनी व्यवस्था सहित; स्पाइनोथैलेमिक पथ; गर्दन की बड़ी रक्तवाहिनियाँ; गर्दन के त्रिकोण; श्वासनली; पैरोटिड ग्रंथि, उसके संबंध और फ़ेशियल नर्व; गर्दन के लिम्फ नोड का वितरण।
2 — Thyroid glandथायरॉइड और पैराथायरॉइड ग्रंथि की शरीर-रचना तथा रिकरंट लैरिंजियल नर्व का मार्ग।
3 — Breastस्तन की शरीर-रचना, उसकी लसीका निकासी और कक्ष (axilla) के लिम्फ नोड की व्यवस्था।
4 — Chestछाती की दीवार, फेफड़े, फुफ्फुसावरण, हृदय और बड़ी रक्तवाहिनियों की शरीर-रचना; अन्नप्रणाली का मार्ग और महाधमनी व एज़ाइगस शिरा से उसके संबंध; वक्ष वाहिनी।
5 — Stomachरक्त आपूर्ति और लसीका निकासी, तथा वेगस नर्व का मार्ग।
6 — Duodenumपेरिटोनियल परतें और अग्न्याशय के शीर्ष से संबंध।
7 — Small Intestineमालरोटेशन, वाइटेलोइंटेस्टाइनल डक्ट, यूराकस और मेकेल डाइवर्टिकुलम।
8 — Large Intestineअपेंडिक्स — उसकी अलग-अलग स्थितियाँ और उनका नैदानिक महत्व; पेरिटोनियल परतें; बड़ी आंत की रक्त आपूर्ति व लसीका निकासी।
9 — Rectum and anusपेरिटोनियल परतें; रक्त व लसीका व्यवस्था; गुदा झिल्ली; हिल्टन रेखा और पेरिनियल मांसपेशियों से संबंध; विकास संबंधी विकृतियाँ।
10 — Liverयकृत के शारीरिक और शल्य खंड, रक्त आपूर्ति तथा यकृत के भीतर की नलिका व्यवस्था।
11 — Gall bladderसिस्टिक डक्ट और सिस्टिक धमनी की शारीरिक विविधताएँ (हिपैटिक धमनी के संदर्भ में); यकृत के बाहर की पित्त प्रणाली की शरीर-रचना।
12 — Pancreasपोर्टल शिरा, इन्फ़ीरियर मेसेंटेरिक शिरा और IVC से संबंध; लेसर सैक की सीमाएँ।
13 — Spleenरक्त आपूर्ति और अग्न्याशय की पूँछ, बृहदान्त्र, गुर्दा, डायाफ़्राम व आमाशय से संबंध।
14 — Diaphragmविकास, विभिन्न छिद्र (hiatus) और उनमें से गुज़रने वाली रचनाओं से संबंध।
15 — Retroperitoneal areaलसीका वाहिनियाँ, वक्ष वाहिनी, लिम्फ नोड, सिम्पैथेटिक शृंखला, और बड़ी रक्तवाहिनियों की शरीर-रचना।
16 — Kidney and uretersविकास संबंधी विकृतियाँ, रक्त आपूर्ति और मूत्रवाहिनी का मार्ग।
17 — Suprarenalरक्त आपूर्ति, शिरा निकासी और गुर्दे से संबंध।
18 — Urinary bladder and prostateशरीर-रचना और मलाशय व मूत्रवाहिनी से संबंध।
19 — Urethraलंबाई, विभिन्न भाग और विकास संबंधी विकृतियाँ।
20 — Penisलसीका निकासी और क्रूरा का जुड़ाव।
21 — Testisविकास संबंधी विकृतियाँ, जैसे अवरोहित न हुआ और ग़लत जगह उतरा वृषण।
22 — Extremitiesऊपरी अंग: हाथ, प्रकोष्ठ और भुजा के पेशी-कक्ष तथा रेडियल, मीडियन व अल्नर जैसी नाड़ियों और रक्तवाहिनियों का मार्ग। निचला अंग: धमनी आपूर्ति व शिरा निकासी, और पैर, टाँग तथा जाँघ के पेशी-कक्ष। सिलेबस में साथ में लिखा है कि Head, Department of Surgery के अनुसार निचले अंग वाला यह बिंदु General Surgery के बजाय Orthopaedics के सिलेबस में रखा जा सकता है।
23 — Abdominal wallवंक्षण नाल, फ़ीमोरल नाल, नाभि और उदर भित्ति की शल्य शरीर-रचना, तथा पेट के विभिन्न शल्य चीरे।
B — शल्य शरीर-क्रियासिलेबस में क्या लिखा है
1 — Thyroidआयोडीन चयापचय और पीयूष-थायरॉइड हॉर्मोन अक्ष।
2 — Breastस्तन पर विभिन्न हॉर्मोन के प्रभाव।
3 — Chestश्वसन की क्रिया, रक्त-गतिकी पर उसका असर, हृदय परिसंचरण, और उच्च रक्तचाप के शल्य कारण।
4 — Stomachअम्ल बनने की क्रिया।
5 — Intestineछोटी और बड़ी आंत की स्रावी तथा अवशोषण क्रिया।
6 — Rectum and anusमल-त्याग की क्रिया।
7 — Liverपित्त स्राव की क्रिया, आंत्र-यकृत परिसंचरण और यकृत के विभिन्न चयापचयी कार्य।
8 — Gall bladderपित्त-पथरी बनने की क्रिया।
9 — Pancreasअग्न्याशय का बहिःस्रावी व अंतःस्रावी स्राव और अग्न्याशयशोथ की रोग-क्रिया।
10 — Spleenप्लीहा के कार्य।
11 — Diaphragmजठर-अन्नप्रणाली भाटा।
12 — Kidneyतीव्र व दीर्घकालिक गुर्दा विफलता के संदर्भ में मूत्र बनने की क्रिया।
13 — Suprarenalविभिन्न हॉर्मोन बनने की शरीर-क्रिया।
14 — Urinary bladderमूत्र-त्याग की क्रिया और वेसिको-यूरेटरिक रिफ़्लक्स।
15 — Testisवृषण के जनन और अंतःस्रावी कार्य।
16 — Critical careआघात पर शरीर की प्रतिक्रिया; गंभीर शल्य रोगी का पोषण; एंटरल व पैरेंटरल पोषण; शॉक; जलना; रक्ताधान; द्रव, इलेक्ट्रोलाइट और अम्ल-क्षार संतुलन; ARDS, SIRS तथा बहु-अंग विफलता; घाव भरने की शरीर-क्रिया; थक्का बनने की क्रिया; उदर कक्ष सिंड्रोम।
C — शल्य विकृति-विज्ञानसिलेबस में क्या लिखा है
1बायोप्सी के प्रकार और नमूनों का परिरक्षण।
2ट्यूमर का बनना, सुविभेदित कोशिकाएँ, टोटिपोटेंट कोशिकाएँ, नियोप्लाज़्म के ऊतकीय लक्षण, और स्टेम सेल चिकित्सा।
3सौम्य और दुर्दम ट्यूमर, जीन थेरेपी तथा ट्यूमर मार्कर।
4ट्यूमर की श्रेणी और चरण।
5घाव भरने में गड़बड़ी, नेक्रोटाइज़िंग फ़ैसाइटिस, गैंग्रीन और सीक्वेस्ट्रम।
6लिपोमा, फ़ाइब्रोमा, ऑस्टियोमा, एडिनोमा और पैपिलोमा जैसे सौम्य ट्यूमर की विकृति।
7विभिन्न प्राथमिक दुर्दम ट्यूमर और द्वितीयक ट्यूमर।
D — नैदानिक शल्य समस्याएँ (प्रस्तुति, निदान, जटिलताएँ और उपचार)सिलेबस में क्या लिखा है
1 — Head and Neckहाइड्रोसेफ़ेलस, मेनिंगोसील, एन्सेफ़ेलोसील; कपाल के भीतर की चोट (कंट्यूज़न, कंकशन, लैसरेशन, एक्स्ट्राड्यूरल व सबड्यूरल रक्तस्राव, मिडल मेनिंजियल रक्तस्राव, लूसिड इंटरवल); ग्रीवा कशेरुका फ़्रैक्चर; मस्तिष्क ट्यूमर; कटा होंठ और कटा तालु; थायरोग्लॉसल सिस्ट; ब्रैंकियल सिस्ट व फ़िस्टुला; फ़ैरिंजियल पाउच; लिम्फ नोड की वृद्धि — सूजनकारी, क्षय-जनित और दुर्दम; गर्दन में लिम्फ नोड बायोप्सी के संकेत तथा वर्जनाएँ; लार ग्रंथियों और लसीका तंत्र के रोग।
2 — Thyroidथायरॉइडाइटिस के प्रकार, थायरोटॉक्सिकोसिस, मिक्सिडीमा, क्रिटिनिज़्म, एकल थायरॉइड गाँठ, सरल व बहुगाँठ घेंघा, थायरॉइड कैंसर, और थायरॉइड कार्सिनोमा के प्रबंधन के विवाद।
3 — Parathyroid and breastपैराथायरॉइड एडिनोमा, हाइपरपैराथायरॉइडिज़्म, दुर्दमता और MEN। स्तन: स्तन की जाँच, ANDI, डक्ट एक्टेसिया, गैलेक्टोसील, प्रसवोत्तर फोड़ा, जन्मजात विकार, वसा नेक्रोसिस, तीव्र व अर्ध-तीव्र सूजन, निप्पल से असामान्य स्राव, क्षय, एक्टिनोमाइकोसिस, मोंडोर रोग, फ़ाइलोड्स ट्यूमर, स्तन कार्सिनोमा (विकृति, कारण, चरण, नैदानिक रूप और उपचार — शल्य, रेडियोथेरेपी, प्रणालीगत तथा हॉर्मोन चिकित्सा, नई दिशाओं सहित), गाइनेकोमैस्टिया, पुरुष स्तन का कार्सिनोमा, लिपोमा, सारकोमा और मेटास्टेसिस।
4 — Chestपसली टूटना, फ़्लेल चेस्ट, हीमो-न्यूमोथोरैक्स, फेफड़े की चोट, बड़ी रक्तवाहिनियों की चोट, शल्य एम्फ़ाइसीमा, कार्डियक टैम्पोनेड, टेंशन न्यूमोथोरैक्स, प्लूरल इफ़्यूज़न, एम्पाइमा, फेफड़े में एपिकल छाया, ब्रोंकोजेनिक कार्सिनोमा और फेफड़े में द्वितीयक ट्यूमर।
5 — Oesophagusसंक्षारक से संकुचन, अन्नप्रणाली का कैंसर, बोरहावे सिंड्रोम और वैरिसेल रक्तस्राव।
6 — Stomachहाइपरट्रॉफ़िक पाइलोरिक स्टेनोसिस, पेप्टिक अल्सर और उसका फटना, आमाशय-निकास अवरोध, आमाशय के सौम्य व दुर्दम ट्यूमर, ज़ोलिंगर-एलिसन सिंड्रोम प्रकार I और II, अम्ल-पेप्टिक रोग तथा आमाशय कैंसर में H. pylori की भूमिका, और ऊपरी GI रक्तस्राव।
7 — Intestineआंत्र अवरोधन (atresia), एक्ज़ोम्फ़ेलोस मेजर, खुली वाइटेलो-इंटेस्टाइनल डक्ट, मेकेल डाइवर्टिकुलम, आंत्र अवरोध, छोटी आंत के ट्यूमर, आंत, सीकम व बड़ी आंत का क्षय, सीकम और बड़ी आंत का कैंसर, अल्सरेटिव कोलाइटिस व क्रोन रोग और उनका शल्य प्रबंधन, शॉर्ट गट सिंड्रोम, इंटससेप्शन, गैस्ट्रोजेजुनल बाइपास, बैरिएट्रिक व मेटाबोलिक शल्य, पारिवारिक एडिनोमेटस पॉलिपोसिस, निचला GI रक्तस्राव, मेसेंटेरिक इस्कीमिया, आंत्र विफलता और आंत्र प्रत्यारोपण।
8 — Rectum and anusबंद गुदा, हर्शस्प्रुंग रोग, बवासीर, गुदा-नालव्रण, गुदा-विदर, पॉलिप और एडिनोमा, गुदा-मलाशय कार्सिनोमा — आधुनिक प्रबंधन के विशेष संदर्भ में, लो एंटीरियर रिसेक्शन और सर्कुलर स्टेप्लर का महत्व।
9 — Liverयकृत की चोट, यकृत फोड़ा, हाइडैटिड रोग, यकृत के सौम्य व दुर्दम ट्यूमर, द्वितीयक ट्यूमर, पोर्टल उच्च रक्तचाप, यकृत का शल्य निष्कासन और यकृत प्रत्यारोपण।
10 — Gall bladderपित्त-पथरी, तीव्र व दीर्घकालिक कोलेसिस्टाइटिस, पथरी की जटिलताएँ, पित्ताशय का कैंसर और ऑपरेशन के बाद पित्त का रिसाव।
11 — Common bile ductबिलियोमा, हीमोबिलिया, पित्त-नलिका संकुचन, कोलैंजाइटिस, कोलैंजियोकार्सिनोमा, अवरोधक पीलिया और पेरिऐम्पुलरी कार्सिनोमा।
12 — Pancreasअग्न्याशय की चोट, तीव्र व दीर्घकालिक अग्न्याशयशोथ और उसका नया प्रबंधन, अग्न्याशय के अंतःस्रावी ट्यूमर, तीव्र अग्न्याशयशोथ के रोगजनन की नई समझ, अग्न्याशय की गाँठें, अग्न्याशय का कैंसर और अग्न्याशय प्रत्यारोपण।
13 — Spleenप्लीहा फोड़ा, हाइपरस्प्लेनिज़्म, प्लीहा की चोट, प्लीहा-वृद्धि, प्लीहा के ट्यूमर, पोर्टल उच्च रक्तचाप, प्लीहा का स्व-प्रत्यारोपण, स्प्लेनोरैफ़ी और प्लीहा निकालने के बाद होने वाला गंभीर संक्रमण (OPSI)।
14 — Diaphragmडायाफ़्राम हर्निया, इवेंट्रेशन, डायाफ़्राम की चोट और छाती-पेट को भेदने वाली चोटें।
15 — Retroperitoneum and peritoneumरेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर, रेट्रोपेरिटोनियल फ़ाइब्रोसिस, पेरिटोनाइटिस, पेट के भीतर फोड़ा, बर्स्ट ऐब्डोमेन, मेसेंटेरिक सिस्ट, स्यूडोमिक्सोमा पेरिटोनी, पेरिटोनियल नियोप्लाज़्म और तीव्र मेसेंटेरिक लिम्फैडेनाइटिस।
16 — Kidneyजन्मजात विकृतियाँ, गुर्दे की चोट, गुर्दा पथरी, हाइड्रोनेफ़्रोसिस, पायोनेफ़्रोसिस, पेरिनेफ़्रिक फोड़ा, गुर्दे का क्षय, गुर्दा ट्यूमर और पैरामैलिग्नेंट एपुडोमा, गुर्दा प्रत्यारोपण तथा दाता नेफ़्रेक्टॉमी।
17 — Ureterमूत्रवाहिनी की पथरी और प्रत्यारोपण, PUJ अवरोध, मूत्रवाहिनी की चोट और यूरेटरो-रीनो-स्कोपी।
18 — Suprarenalफ़ियोक्रोमोसाइटोमा, इंसिडेंटलोमा, एड्रीनोकॉर्टिकल कार्सिनोमा, न्यूरोब्लास्टोमा और उनका शल्य प्रबंधन।
19 — Urinary bladder and prostateमूत्राशय का एक्स्ट्रोफ़ी, पोस्टीरियर यूरेथ्रल वाल्व, मूत्राशय की चोट, पथरी, रक्तमेह, सिस्टाइटिस, क्षय, डाइवर्टिकुलम, सौम्य व दुर्दम ट्यूमर, तीव्र और दीर्घकालिक प्रोस्टेटाइटिस, सौम्य प्रोस्टेट वृद्धि, प्रोस्टेट कैंसर, मूत्र रुकना, मूत्र असंयम और तात्कालिकता।
20 — Urethraमूत्रमार्ग की चोट, संकुचन, पथरी, हाइपोस्पेडियास और एपिस्पेडियास।
21 — Penisफ़ाइमोसिस, मीटल स्टेनोसिस, पैराफ़ाइमोसिस, बैलेनाइटिस, अल्सर और कैंसर, प्रायपिज़्म तथा स्तंभन दोष।
22 — Testisअवरोहित न हुआ वृषण, एक्टोपिक वृषण, तीव्र वृषणशोथ, दीर्घकालिक एपिडिडाइमो-ऑर्काइटिस, वृषण मरोड़, हाइड्रोसील, वैरिकोसील, हीमेटोसील, वृषण के ट्यूमर और उनके प्रबंधन की नई दिशाएँ।
23 — Upper extremitiesमृदु ऊतक की चोटें — तंत्रिका, मांसपेशी और रक्तवाहिनी की चोट सहित, सर्वाइकल रिब और रेनॉड रोग।
24 — Skinअल्सर, ट्यूमर, स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा, बेसल सेल कार्सिनोमा, सारकोमा, मेलानोमा, कापोसी सारकोमा और घाव का प्रबंधन।
25 — Lower limbवैरिकोज़ शिराएँ, DVT, मृदु ऊतक, मांसपेशी, रक्तवाहिनी व तंत्रिका की चोट, परिधीय रक्तवाहिनी रोग, कंपार्टमेंट सिंड्रोम और सबफ़ेशियल परफ़ोरेटर की एंडोस्कोपिक बंदी।
26 — Herniaपरिभाषा और वर्गीकरण; आंतरिक हर्निया (डायाफ़्रामिक, पैराड्यूओडेनल, ट्रांसमेसेंटेरिक); बाहरी हर्निया (वंक्षण, फ़ीमोरल, एपिगैस्ट्रिक, नाभि, पैरा-अम्बिलिकल और चीरा-जनित); और वंक्षण क्षेत्र की लैप्रोस्कोपिक शरीर-रचना।
27 — General (21 sub-entries, a to u)आघात — पॉलीट्रॉमा, पुनर्जीवन और ट्राइएज; रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी तथा ट्यूमर मार्कर; बुनियादी व उन्नत लैप्रोस्कोपिक शल्य; रोबोटिक शल्य और टेली-सर्जरी; निश्चेतना — एंडोट्रेकियल इंट्यूबेशन, ट्रेकियोस्टॉमी, हृदय गति रुकना, पुनर्जीवन व ऑपरेशन टेबल पर मृत्यु, एपिड्यूरल और स्पाइनल निश्चेतना; ऑपरेशन थिएटर की सुरक्षा, डिज़ाइन व बनावट, ऑटोक्लेव तथा प्लाज़्मा निर्जर्मीकरण सहित; संक्रामक शल्य रोग — गैंग्रीन, टिटनेस, नेक्रोटाइज़िंग फ़ैसाइटिस, मधुमेह-पैर, कार्बंकल, शल्य-स्थल संक्रमण, उसकी रोकथाम और एंटीबायोटिक का उपयोग; AIDS और सार्वभौमिक सावधानियाँ; नैदानिक प्रक्रियाएँ — IVP, बेरियम अध्ययन, MRI, CT, PET, वर्चुअल एंडोस्कोपी, डॉप्लर, USG; एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएँ — गैस्ट्रोस्कोपी, ERCP, इसोफ़ेगोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी, कैप्सूल एंडोस्कोपी, सिस्टोस्कोपी और मूत्रवाहिनी कैथीटेराइज़ेशन; NOTES; परीक्षा और साक्षात्कार के समय तक की नई शल्य प्रगतियाँ; प्लास्टिक सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी, बाल शल्य और आंत्र शल्य की बुनियाद; विभिन्न ऑपरेशन प्रक्रियाएँ; जैव-चिकित्सा कचरा प्रबंधन; शल्य में लेज़र; सर्जिकल ऑडिट; साक्ष्य-आधारित शल्य; डे-केयर सर्जरी; शोध पद्धति; और शिक्षण के प्रकार।

Orthopaedics — 12 यूनिट, पेज 67 से 68 ↑

बारह छोटी यूनिट — इस तरह के विषयों में दस्तावेज़ की सबसे छोटी प्रविष्टि। इसी वजह से यहाँ हर यूनिट मायने रखती है: छोड़ने लायक भरती कुछ है ही नहीं।

Unit-XI पर ध्यान दीजिए, क्योंकि काग़ज़ पर वह दूसरे विषय की है: भौतिक चिकित्सा व पुनर्वास, व्यावसायिक चिकित्सा, विद्युत-निदान, इलेक्ट्रोमायोग्राफी, कृत्रिम अंग, ऑर्थोटिक्स और दिव्यांगता आकलन — सब अस्थि-रोग के सिलेबस के भीतर हैं।

यूनिट / क्रमइसमें क्या-क्या आता है
Unit-Iअस्थि-रोग से जुड़े बुनियादी और व्यावहारिक चिकित्सा विज्ञान — शरीर-रचना, शरीर-क्रिया, जैव-रसायन, औषध विज्ञान, विकृति-विज्ञान और सूक्ष्म-जीव विज्ञान।
Unit-IIहड्डी और जोड़ के संक्रमण: पीबदार, क्षय, उपदंश, कवकजन्य, सालमोनेला, ब्रूसेला, HIV तथा विषाणुजन्य।
Unit-IIIजन्मजात विकृतियाँ और विकास संबंधी विरूपताएँ, उनका निदान व प्रबंधन।
Unit-IVआघात-विज्ञान — सामान्य रूप में और गति-तंत्र के संदर्भ में; आघात के उपचार के सिद्धांत; परिधीय तंत्रिका की चोटें; इलिज़ारोव के सिद्धांत और उनका उपयोग।
Unit-Vमेरुदंड के रोग, विकृतियाँ और चोटें।
Unit-VIचयापचयी अस्थि विकार; स्वप्रतिरक्षी अस्थि व जोड़ विकार, जैसे रूमेटॉइड आर्थराइटिस, एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस और फ़्लोरोसिस।
Unit-VIIअस्थि ट्यूमर, तथा अंग बचाने (limb salvage), कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी की नई दिशाएँ।
Unit-VIIIअंगों की हड्डियों और जोड़ों से होने वाले अंग-विच्छेदन तथा डिसआर्टिक्युलेशन।
Unit-IXअंगों के क्षयकारी विकार, जैसे कूल्हे व घुटने के जोड़ और मेरुदंड का ऑस्टियोआर्थराइटिस — निदान और प्रबंधन।
Unit-Xनवीनतम प्रगति: आर्थ्रोस्कोपिक शल्य, जोड़ प्रतिस्थापन, मेरुदंड शल्य, CT स्कैन, MRI, बोन स्कैन, PET स्कैन, बोन बैंक, स्टेम कोशिकाओं की भूमिका, न्यूनतम चीर-फाड़ वाली तकनीक और सूक्ष्मदर्शी शल्य।
Unit-XIभौतिक चिकित्सा और पुनर्वास — व्यावसायिक चिकित्सा, विद्युत-निदान तथा इलेक्ट्रोमायोग्राफी सहित; कृत्रिम अंग व ऑर्थोटिक्स की पूरी अवधारणा; शारीरिक दिव्यांगता का आकलन।
Unit-XIIआपदा प्रबंधन और पॉलीट्रॉमा प्रबंधन। विषय के अंत में नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

Oto-Rhino-Laryngology (ENT) — 24 प्रविष्टियाँ, पेज 68 से 70 ↑

ENT यूनिट में नहीं, चौबीस बिना-नंबर वाले पैराग्राफ़ में लिखा है, और हर पैराग्राफ़ अपने आप में एक विषय है। यहाँ उन्हें उसी क्रम में गिन दिया गया है जिस क्रम में दस्तावेज़ में छपे हैं, ताकि पढ़ते समय कोई छूटे नहीं।

चौबीस में से छह नैदानिक ENT हैं ही नहीं — चिकित्सा शिक्षा प्रौद्योगिकी, शोध पद्धति, साक्ष्य-आधारित चिकित्सा व उत्तम नैदानिक व्यवहार, रेडियोलॉजी, रेडियोथेरेपी और न्यूक्लियर मेडिसिन — और एक और है चिकित्सा न्यायशास्त्र तथा नैतिकता।

क्रमसिलेबस में दिया गया विषय
1नाक व परानासल साइनस, जबड़ा, कान, संतुलन तंत्र, टेम्पोरल हड्डी, मुख-गुहा, ग्रसनी, स्वरयंत्र, श्वासनली-श्वसनी वृक्ष, अन्नप्रणाली, गर्दन (लार ग्रंथि, थायरॉइड, पैराथायरॉइड और गर्दन के अवकाश सहित), नेत्रकोटर, खोपड़ी का आधार तथा उससे जुड़ा मेनिंजियल तंत्र व मस्तिष्क, केंद्रीय श्रवण-वाणी-भाषा-संतुलन क्षेत्र, कपाल तंत्रिकाएँ और संबंधित लसीका-रक्त तथा तंत्रिका तंत्र की व्यावहारिक भ्रूण-विज्ञान व शरीर-रचना।
2स्वर-उत्पादन, वाणी व भाषा, साँस, श्वसन, अश्रु-स्राव, ध्वनि और श्रवण, संतुलन तंत्र (परिधीय तथा केंद्रीय वेस्टिबुलर पथ सहित), गंध, स्वाद, चबाना, निगलना, CSF की शरीर-क्रिया और कपाल तंत्रिकाओं के कार्य की व्यावहारिक शरीर-क्रिया।
3नाक व परानासल साइनस, जबड़ा, कान, टेम्पोरल हड्डी, चेहरा, मुख-गुहा, ग्रसनी, स्वरयंत्र, श्वासनली-श्वसनी वृक्ष, अन्नप्रणाली, गर्दन, नेत्रकोटर, खोपड़ी का आधार (मेनिंजियल तंत्र, मस्तिष्क व कपाल तंत्रिकाओं सहित), तथा वाणी और भाषा की संरचना, कार्य व विकृति जाँचने की नैदानिक विधियाँ।
4श्रवण आकलन की विभिन्न जाँचों की व्यावहारिक भौतिकी, उपकरण, पद्धति और व्याख्या, तथा अलग-अलग नैदानिक स्थितियों व आयु-वर्गों में उनका उपयोग।
5संतुलन आकलन की विभिन्न जाँचों की व्यावहारिक भौतिकी, उपकरण, पद्धति और व्याख्या, तथा अलग-अलग नैदानिक स्थितियों व आयु-वर्गों में उनका उपयोग।
6चिकित्सा शिक्षा प्रौद्योगिकी — योग्यता-आधारित चिकित्सा शिक्षा, समेकित शिक्षण और शिक्षण के नए साधन व तरीक़े सहित।
7शोध पद्धति — विभिन्न शोध अभिकल्प, जैव-सांख्यिकी और प्रतिचयन तथा पक्षपात जैसे संबंधित कारक सहित।
8साक्ष्य-आधारित चिकित्सा और उत्तम नैदानिक व्यवहार की बुनियाद।
9चेहरे की सौंदर्य, प्लास्टिक और पुनर्रचना प्रक्रियाओं — राइनोप्लास्टी, ओटोप्लास्टी, कर्ण-पल्लव पुनर्रचना सहित — के सिद्धांत, तकनीक व नैदानिक उपयोग, तथा ENT, सिर-गर्दन और खोपड़ी-आधार की विकृतियों में नई प्रगतियाँ।
10घाव भरने जैसे सामान्य विकृति पहलू, और ENT रोगों की विकृति व रोगजनन; तथा ओटोलैरिंगोलॉजी से जुड़े औषध विज्ञान, आनुवंशिकी, कोशिका-विज्ञान, रक्त-विज्ञान, रक्ताधान और प्रतिरक्षा-विज्ञान।
11ENT, खोपड़ी-आधार तथा सिर-गर्दन के ट्यूमर के लिए लक्षित चिकित्सा के सिद्धांत, तकनीक और नैदानिक उपयोग — जीन थेरेपी, आणविक जीव-विज्ञान और इम्यूनोथेरेपी सहित।
12इन्हीं ट्यूमरों से जुड़ी कीमोथेरेपी दवाओं के सिद्धांत, तकनीक और उपयोग।
13ENT, खोपड़ी-आधार और सिर-गर्दन के आघात तथा आपात स्थितियों के प्रबंधन के सिद्धांत, तकनीक और नए तरीक़े — फ़्रैक्चर, CSF रिसाव, बाहरी वस्तु, वायुमार्ग अवरोध, रक्तस्राव, चेहरे व गर्दन की चोट, बहरापन और चक्कर सहित।
14ENT, खोपड़ी-आधार और सिर-गर्दन की प्रक्रियाओं में निश्चेतना के सिद्धांत व तकनीकें, नए तरीक़ों सहित।
15कान, नाक, गला, सिर-गर्दन, खोपड़ी-आधार, स्वरयंत्र, श्वासनली और अन्नप्रणाली के रोगों की विकृति, नैदानिक रूप, निदान तथा चिकित्सकीय, शल्य व पुनर्वास प्रबंधन — जन्मजात, विकासात्मक, सूजनकारी, संक्रामक, नियोप्लास्टिक, आघातजन्य, तंत्रिका, प्रतिरक्षा और अज्ञात-कारण रोग सहित।
16खोपड़ी-आधार के विभिन्न विकारों का आकलन और प्रबंधन — पीयूष, नेत्रकोटर, CP कोण, विभिन्न कपाल गर्त, इन्फ़्राटेम्पोरल व टेरिगोपैलेटाइन फ़ोसा और क्लाइवस सहित।
17बच्चों और बुज़ुर्गों में कान, नाक, गला, सिर-गर्दन तथा खोपड़ी-आधार के विकारों के प्रबंधन के सिद्धांत।
18इन्हीं विकारों से जुड़ी निवारक और सामुदायिक चिकित्सा के सिद्धांत।
19नींद के विकारों के निदान, आकलन और प्रबंधन के सिद्धांत।
20इस क्षेत्र की नई प्रगतियाँ और उनसे जुड़ी तकनीकी अवधारणाएँ तथा नैदानिक उपयोग — कंप्यूटर, लेज़र, पावर्ड उपकरण, ऊर्जा-वितरण उपकरण, नेविगेशन, एंडोस्कोप, श्रवण यंत्र व इम्प्लांट, कॉक्लियर और ब्रेनस्टेम इम्प्लांट, स्टीरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी, गामा नाइफ़, साइबर नाइफ़, रोबोटिक्स, अल्ट्रासोनिक शल्य उपकरण, ऑप्टिकल फ़्लोरेसेंस और सूक्ष्मदर्शी सहित।
21संबंधित रेडियोलॉजिकल जाँचों तथा हस्तक्षेपों की अवधारणा, तकनीक, नैदानिक उपयोग व व्याख्या, और ENT, सिर-गर्दन तथा खोपड़ी-आधार की विकृतियों में नए तरीक़े।
22संबंधित रेडियोथेरेपी तरीक़ों की अवधारणा, तकनीक और नैदानिक उपयोग तथा इस क्षेत्र की नई प्रगतियाँ।
23संबंधित न्यूक्लियर मेडिसिन तरीक़ों की अवधारणा, तकनीक, नैदानिक उपयोग व व्याख्या तथा इस क्षेत्र की नई प्रगतियाँ।
24नैदानिक व्यवहार में चिकित्सा न्यायशास्त्र और नैतिकता के सिद्धांत। विषय के अंत में नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

Ophthalmology — 22 क्रमांकित विषय और अंत की 2 प्रविष्टियाँ, पेज 70 से 72 ↑

बाईस क्रमांकित विषय हैं, और क्रम संरचना से शुरू होता है — शरीर-रचना, शरीर-क्रिया, प्रकाशिकी और अपवर्तन — फिर बाहर की ओर पलक व अश्रु तंत्र से नेत्रकोटर तक, और भीतर की ओर लेंस, ग्लूकोमा, कॉर्निया, रेटिना तथा यूविया तक जाता है।

दो प्रविष्टियाँ विषय की समाप्ति-पंक्ति के बाद, नवीनतम प्रगति वाली टिप्पणी के नीचे छपी हैं: प्रॉप्टोसिस — कारण और प्रबंधन, तथा नेत्र सूक्ष्म-जीव विज्ञान। इन्हें यहाँ क्रम 23 और 24 पर रखा गया है ताकि इस पेज से पढ़ने वाले से वे छूट न जाएँ।

क्रमसिलेबस में दिया गया विषय
1आँख की बुनियादी शरीर-रचना।
2आँख की शरीर-क्रिया।
3आँख की प्रकाशिकी और अपवर्तन।
4पलकें: सौम्य गाँठें व सिस्ट, सौम्य त्वचीय ट्यूमर, सौम्य रंजित घाव, सौम्य उपांगीय ट्यूमर, अन्य सौम्य ट्यूमर, दुर्दम ट्यूमर, पलक के बालों के विकार, एलर्जी विकार, जीवाणु व विषाणु संक्रमण, ब्लेफ़ेराइटिस, पलक का गिरना, एक्ट्रोपियन, एंट्रोपियन, अन्य अर्जित विकार, पलक व आँख के आस-पास की सौंदर्य शल्य, जन्मजात विकृतियाँ।
5अश्रु निकासी तंत्र: शरीर-क्रिया, आँख से पानी आने के कारण, आकलन, अर्जित तथा जन्मजात अवरोध, अश्रु शल्य, दीर्घकालिक कैनालिक्युलाइटिस, डैक्रियोसिस्टाइटिस।
6नेत्रकोटर: थायरॉइड नेत्र रोग, संक्रमण, ग़ैर-संक्रामक सूजन रोग, रक्तवाहिनी विकृतियाँ, कैरोटिको-कैवर्नस फ़िस्टुला, सिस्ट, ट्यूमर, आँख निकाले जाने के बाद की गुहा, क्रेनियोसिनोस्टोसिस।
7सूखी आँख के विकार: परिभाषा, शरीर-क्रिया, वर्गीकरण, श्यॉग्रेन सिंड्रोम, नैदानिक लक्षण, विशेष जाँचें और उपचार।
8कंजंक्टाइवा: जीवाणु, विषाणु और एलर्जी नेत्रश्लेष्मलाशोथ, फफोलेदार श्लेष्मा-त्वचा रोगों में नेत्रश्लेष्मलाशोथ, अन्य प्रकार और अपकर्षण।
9एपिस्क्लेरा और स्क्लेरा: एपिस्क्लेराइटिस, प्रतिरक्षा-जनित तथा संक्रामक स्क्लेराइटिस, स्क्लेरा का रंग बदलना, नीला स्क्लेरा और अन्य स्थितियाँ।
10लेंस: अर्जित मोतियाबिंद, उम्र-जनित मोतियाबिंद का प्रबंधन, मोतियाबिंद शल्य की नई तकनीकें, जन्मजात मोतियाबिंद, एक्टोपिया लेंटिस, आकार की असामान्यताएँ, और IOL डिज़ाइन की नई प्रगतियाँ।
11ग्लूकोमा: टोनोमेट्री, गोनियोस्कोपी, दृष्टि तंत्रिका का आकलन, इमेजिंग, पेरिमेट्री, नेत्र उच्च दाब, प्राथमिक खुला-कोण और सामान्य-दाब ग्लूकोमा, प्राथमिक बंद-कोण ग्लूकोमा, द्वितीयक ग्लूकोमा का वर्गीकरण, स्यूडोएक्सफ़ोलिएशन, पिगमेंट डिस्पर्शन, नव-रक्तवाहिनी, सूजनकारी, लेंस-जनित तथा आघातजन्य ग्लूकोमा, इरिडोकॉर्नियल एंडोथीलियल सिंड्रोम, नेत्र ट्यूमर, उपकला वृद्धि व इरिडोस्किसिस में ग्लूकोमा, प्राथमिक जन्मजात ग्लूकोमा, इरिडोकॉर्नियल डिसजेनेसिस, फ़ैकोमैटोसिस में ग्लूकोमा, ग्लूकोमा की दवाएँ और नई दवाएँ, लेज़र चिकित्सा, ट्रैबेक्युलेक्टॉमी, बिना भेदन वाली शल्य, फ़िल्ट्रेशन शल्य में एंटीमेटाबोलाइट और ड्रेनेज शंट।
12कॉर्निया: बुनियादी संरचना व कार्य, लिम्बल स्टेम कोशिकाएँ और उनका नैदानिक उपयोग, नेत्र सतह का पुनर्वास, जाँच व आकलन तकनीकें, कॉर्निया-जनित अंधता और उसकी महामारी-विज्ञान, कॉर्निया के संक्रामक, प्रतिरक्षा-जनित, चयापचयी तथा जन्मजात रोग, कंजंक्टाइवल-कॉर्नियल डिसप्लेज़िया व कैंसर, कॉर्नियल डिस्ट्रॉफ़ी और अपकर्षण, कॉर्निया की शल्य चिकित्सा तथा उसमें नई खोजें, और आधुनिक आई बैंकिंग — उसकी प्रगति और चुनौतियाँ।
13रेटिना: रेटिना इमेजिंग व निदान, रेटिना से जुड़े मूल विज्ञान, आनुवंशिकी, वंशानुगत रेटिना व कोरॉइड रोग, मैक्युलर डिस्ट्रॉफ़ी, रेटिना की रक्तवाहिनी बीमारियाँ, उम्र-जनित मैक्युलर रोग, रेटिना और कोरॉइड के सूजनकारी व संक्रामक रोग, रेटिना का अलग होना और उसके नए उपचार, कंचाभ द्रव व रेटिना की शल्य, रेटिना-कोरॉइड के ट्यूमर, एंडोफ़्थैल्माइटिस और कृत्रिम दृष्टि।
14यूवियल ऊतक: यूवाइटिस का वर्गीकरण, आँख में प्रतिरक्षा तंत्र, नैदानिक लक्षण, विशेष जाँचें, उपचार के सिद्धांत, प्रतिरक्षा-दमनकारी दवाओं की भूमिका, मध्यवर्ती यूवाइटिस, स्पॉन्डिलोआर्थ्रोपैथी, बाल-गठिया, आंत्र रोग तथा गुर्दा रोग में यूवाइटिस, सारकॉइडोसिस, बेहचेट सिंड्रोम, टॉक्सोप्लाज़्मोसिस, टॉक्सोकैरियासिस, अन्य परजीवी यूवाइटिस, प्रतिरक्षा-न्यूनता में यूवाइटिस, अन्य विषाणु, कवक व जीवाणु यूवाइटिस, व्हाइट डॉट सिंड्रोम, प्राथमिक स्ट्रोमल कोरॉइडाइटिस तथा अन्य अग्र व पश्च यूवाइटिस।
15नेत्र ट्यूमर: सौम्य, दुर्दम व पूर्व-दुर्दम एपिबल्बर ट्यूमर, आइरिस के ट्यूमर और सिस्ट, सिलियरी बॉडी के ट्यूमर, कोरॉइड के ट्यूमर, रेटिना के तंत्रिका तथा रक्तवाहिनी ट्यूमर, प्राथमिक इंट्राऑक्युलर लिंफोमा, रेटिनल पिगमेंट एपिथीलियम के ट्यूमर और पैरानियोप्लास्टिक सिंड्रोम।
16भेंगापन: एम्ब्लायोपिया, नैदानिक आकलन, हेटरोफ़ोरिया, वर्जेंस असामान्यताएँ, एसोट्रोपिया, एक्सोट्रोपिया, विशेष सिंड्रोम, अल्फ़ाबेट पैटर्न और शल्य चिकित्सा।
17तंत्रिका-नेत्र विज्ञान: न्यूरो-इमेजिंग, दृष्टि तंत्रिका, पुतली की प्रतिक्रियाएँ, कायस्मा, कायस्मा के पीछे के पथ, नेत्र-गति तंत्रिकाएँ, नेत्र-गति के सुप्रान्यूक्लियर विकार, निस्टैग्मस, कैरोटिड संकुचन, कपाल के भीतर एन्यूरिज़्म, नेत्र पेशी रोग, न्यूरोफ़ाइब्रोमैटोसिस, माइग्रेन और चेहरे की ऐंठन।
18नेत्र औषध विज्ञान।
19आघात: पलक की चोट, नेत्रकोटर की हड्डी टूटना, नेत्रगोलक की चोट और रासायनिक चोटें।
20अंधता के कारण और उसकी रोकथाम — NPCB तथा Vision 2020 सहित।
21प्रणालीगत रोगों के नेत्र-लक्षण, जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, AIDS, गुर्दा विकार और थायरॉइड रोग।
22नैदानिक विधियाँ और नेत्र विज्ञान की नवीनतम प्रगति।
23प्रॉप्टोसिस — कारण और प्रबंधन (विषय के अंत में दिया गया)।
24नेत्र सूक्ष्म-जीव विज्ञान (विषय के अंत में दिया गया)।

Obstetrics and Gynaecology — एक ही 8-बिंदु सिलेबस, दो बार छपा, पेज 72 से 74 ↑

यह सिलेबस दो बार आता है: 18A के रूप में Obstetrics and Gynaecology के लिए, और 18B के रूप में Assistant Professor / Antenatal Care Incharge तथा Maternity and Child Welfare Officer पदों [Level-11] के लिए। हमने दोनों हिस्सों को स्पेसिंग हटाकर अक्षर-दर-अक्षर मिलाया — विषय-पाठ बिल्कुल एक जैसा है; फ़र्क़ सिर्फ़ इतना कि 18B में उप-बिंदुओं की गिनती खिसक गई है और (i), (ii), (iii) की जगह (iv), (v), (vi) छपा है।

एक प्रविष्टि पर चुप रहने के बजाय ध्यान देना ज़रूरी है — बिंदु 6, जिसकी टिप्पणी उसी पंक्ति में दी गई है।

विषयसिलेबस उसके नीचे क्या गिनाता है
1 — Basic Sciencesप्रसूति एवं स्त्री रोग से जुड़ी बुनियादी तथा व्यावहारिक शरीर-रचना, शरीर-क्रिया, जैव-रसायन, औषध विज्ञान, विकृति-विज्ञान, सूक्ष्म-जीव विज्ञान, अंतःस्रावी विज्ञान और आनुवंशिकी।
2 — Obstetricsसामान्य प्रसूति; अधिक जोखिम व गंभीर प्रसूति; ऑपरेटिव प्रसूति और व्यावहारिक निश्चेतना; प्रसूति में इमेजिंग; प्रसव-पूर्व निदान तथा भ्रूण चिकित्सा; नवजात चिकित्सा; सामाजिक प्रसूति।
3 — Gynaecologyस्त्री रोग की पूरी शृंखला, उनकी जाँच और प्रबंधन; ऑपरेटिव स्त्री रोग के सभी पहलू; प्रजनन अंतःस्रावी विज्ञान और बंध्यता; स्त्री रोग कैंसर-विज्ञान; किशोर तथा वृद्धावस्था स्वास्थ्य व स्त्री रोग; स्तन रोग; प्रसूति-स्त्री रोग के मेडिको-लीगल पहलू और यौन हमले की पीड़िता की जाँच; प्रजनन-मार्ग के संक्रमण।
4 — Contraceptionजनसंख्या नियंत्रण, परिवार कल्याण और नियोजन; सांख्यिकीय जनसांख्यिकी; MTP और समग्र गर्भपात देखभाल।
5 — Recent Advancesविषय की नवीनतम प्रगति।
6 — Health programmes and policiesस्वास्थ्य कार्यक्रम और नीतियाँ। दस्तावेज़ में यह प्रविष्टि "NATIONAL & STATE (Rajasthan)" लिखी है — यानी जम्मू-कश्मीर के सिलेबस में राजस्थान। हमने इसे जैसा छपा है वैसा ही रखा है, सुधारा नहीं; उम्मीदवार राष्ट्रीय कार्यक्रम तैयार करें, राज्य वाले हिस्से को भर्ती करने वाले राज्य के कार्यक्रमों के रूप में लें, और औपचारिक स्पष्टीकरण चाहिए तो JKPSC से पूछें।
7 — Biomedical research and medical education technologyजैव-चिकित्सा शोध और चिकित्सा शिक्षा प्रौद्योगिकी।
8 — Basic communication skills and counsellingबुनियादी संवाद कौशल और परामर्श। विषय के अंत में नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

Radiodiagnosis — 6 यूनिट और उनके भीतर 47 प्रविष्टियाँ, पेज 74 से 76 ↑

छह यूनिट हैं, पर असली गिनती उनके भीतर है: सैंतालीस क्रमांकित प्रविष्टियाँ, जिनमें तेरह रेडियोलॉजिकल भौतिकी की हैं और दस रेडियोग्राफी व प्रसंस्करण तकनीक की। यह सिलेबस सिर्फ़ नैदानिक पढ़ाई से तैयार नहीं होता।

नाम लेकर लिखी गई नियामक सामग्री बहुत पूछी जाने लायक है — संशोधनों सहित PC-PNDT अधिनियम, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, और विकिरण नियंत्रण के लिए e-LORA, AERB तथा ICRP।

यूनिटसिलेबस उसके नीचे क्या गिनाता है
Unit-I — Basic Scienceशरीर-रचना: भ्रूण-विज्ञान, सभी तंत्रों की स्थूल और अनुप्रस्थ-काट शरीर-रचना। विकृति-विज्ञान: सभी अंग-तंत्रों को प्रभावित करने वाले प्रणालीगत रोगों की स्थूल आकारिकी। शरीर-क्रिया: सभी तंत्रों व अंगों की बुनियादी शरीर-क्रिया।
Unit-II — Clinical Radio-diagnosis (13 entries)हर तंत्र के रोगों की इमेजिंग और व्याख्या: पेशी-कंकाल (मांसपेशी, मृदु ऊतक, हड्डी व जोड़ — जन्मजात, सूजनकारी, आघातजन्य, अंतःस्रावी व चयापचयी, नियोप्लास्टिक तथा अन्य); श्वसन (छाती की दीवार, डायाफ़्राम, फुफ्फुसावरण व वायुमार्ग, फेफड़ा संक्रमण, रक्तवाहिनियाँ और ट्यूमर, व्यापक फेफड़ा रोग, मीडियास्टिनल रोग, छाती की चोट, ऑपरेशन के बाद का फेफड़ा और ICU में X-ray); हृदय-रक्तवाहिनी — जन्मजात व अर्जित, तथा सामान्य रेडियोलॉजी, अल्ट्रासाउंड, कलर डॉप्लर, CT, MRI, एंजियोग्राफी और आइसोटोप अध्ययन की भूमिका; आंत्र-पथ तथा यकृत-पित्त-अग्न्याशय, तीव्र उदर और पेट की चोट सहित; मूत्र-जनन तंत्र; केंद्रीय तंत्रिका तंत्र — सिर, गर्दन और मेरुदंड; आपात चिकित्सा में इमेजिंग; प्रसूति व स्त्री रोग में इमेजिंग; स्तन इमेजिंग और हस्तक्षेप प्रक्रियाएँ; ENT, नेत्र तथा दंत इमेजिंग; अंतःस्रावी ग्रंथियों व चयापचयी रोगों की इमेजिंग; नैदानिक रेडियोन्यूक्लाइड इमेजिंग; और इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी।
Unit-III — Radiological Physics (13 entries)विकिरण व पदार्थ के सामान्य गुण और नाभिकीय भौतिकी तथा रेडियोसक्रियता की बुनियाद; X-किरण व गामा किरण की पदार्थ से अंतःक्रिया; X-ray बनाने वाले उपकरण; स्क्रीन-फ़िल्म रेडियोग्राफी; फ़िल्म प्रसंस्करण — डार्क रूम, ड्राई प्रोसेसिंग, लेज़र व ड्राई केमिस्ट्री कैमरा, आर्टिफ़ैक्ट; फ़्लोरोस्कोपी — IITV, डिजिटल और फ़्लैट पैनल इकाइयाँ सहित; डिजिटल रेडियोग्राफी — कंप्यूटेड तथा फ़्लैट पैनल; अन्य उपकरण — डॉप्लर सहित अल्ट्रासाउंड, CT, DEXA, MRI और DSA; कंट्रास्ट मीडिया (बेरियम, आयोडीनयुक्त, MR व अल्ट्रासाउंड) के प्रकार, रासायनिक संघटन, क्रिया-विधि, मात्रा, देने का रास्ता, प्रतिकूल प्रतिक्रिया और उसका प्रबंधन; न्यूक्लियर मेडिसिन — सिंटिग्राफी, बोन स्कैन, SPECT व PET, विभिन्न अंग-तंत्रों में आइसोटोप और नई प्रगतियाँ; विकिरण जीव-विज्ञान, ख़तरे, सुरक्षा और डोसिमेट्री; चित्र-गुणवत्ता व गुणवत्ता आश्वासन; और भारत तथा विदेश में विकिरण का नियामक नियंत्रण — e-LORA, AERB, ICRP।
Unit-IV — General and specialized radiography and processing techniques (10 entries)प्रसंस्करण तकनीकें — डार्क रूम और ड्राई प्रोसेसिंग सहित; पेशी-कंकाल तंत्र की रेडियोग्राफी, अंगों सहित; छाती, मेरुदंड, उदर तथा श्रोणि की रेडियोग्राफी; खोपड़ी, नेत्रकोटर व साइनस की रेडियोग्राफी; आंत्र-पथ, यकृत-पित्त मार्ग और अग्न्याशय की कंट्रास्ट तकनीक व व्याख्या; केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की; छाती सहित हृदय-रक्तवाहिनी तंत्र की; और प्रसूति-स्त्री रोग सहित मूत्र-जनन तंत्र की; बाल रेडियोलॉजी — MCU, जेनिटोग्राम और अस्थि-आयु सहित; तथा दंत, पोर्टेबल और आपात रेडियोग्राफी।
Unit-V — Recent advances in radio-diagnosis and imaging (11 entries)अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी, 3-D प्रिंटिंग, 3-D व 4-D अल्ट्रासोनोग्राफी; डिजिटल मैमोग्राफी, टोमोसिंथेसिस और स्टीरियोटैक्टिक बायोप्सी; ड्यूल एनर्जी CT, CT फ़्लोरोस्कोपी, CT एंजियोग्राफी और MDCT; फ़ंक्शनल MRI, DTI तथा उन्नत MR अनुक्रम; PET-CT और PET-MR; साक्ष्य-आधारित रेडियोलॉजी; रेडियो-निदान में कृत्रिम बुद्धि; न्यूक्लियर मॉलिक्युलर इमेजिंग; रेडियो-निदान में नैदानिक व चिकित्सकीय हस्तक्षेप और उनके उपकरण; फ़िल्म-रहित विभाग और टेलीरेडियोलॉजी के लिए PACS तथा RIS; और आधुनिक इमेजिंग विभाग की योजना।
Unit-VI — Ethical and medico-legal issuesमेडिको-लीगल इमेजिंग रिपोर्टिंग, संशोधनों सहित PC-PNDT अधिनियम और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम; नैतिक प्रश्न, डॉक्टर-मरीज़ संबंध, तथा चित्र की व्याख्या व रिपोर्टिंग से जुड़े प्रश्न। विषय के अंत में नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

Radiotherapy — 6 यूनिट और 41 विषय-खंड, पेज 76 से 85 ↑

इस दस्तावेज़ में Radiotherapy दस पेज घेरता है — किसी भी दूसरे विषय से ज़्यादा — और इसकी वजह Unit-I है। नाम उसका Basic Sciences है, पर उसमें पूरा विकिरण भौतिकी का पाठ्यक्रम है — किरण-आँकड़े, उपचार-योजना, इलेक्ट्रॉन बीम चिकित्सा, ब्रैकीथेरेपी, गुणवत्ता आश्वासन और AERB का नियामक रास्ता — और उसके बाद विकिरण जीव-विज्ञान, न्यूक्लियर मेडिसिन तथा नैदानिक परीक्षण।

Unit-II से VI तुलना में छोटी हैं: नैदानिक रेडियोथेरेपी, नैदानिक कीमोथेरेपी, संबद्ध शल्य विषय, उपशामक देखभाल, और शोध-प्रशिक्षण-प्रशासन। जो उम्मीदवार सिर्फ़ नैदानिक यूनिट पढ़ेगा, वह इस पेपर का लगभग एक-तिहाई ही तैयार कर रहा है।

Unit-I — बुनियादी विज्ञानसिलेबस उसके नीचे क्या गिनाता है
Anatomyकैंसर-विज्ञान से जुड़ी शरीर-रचना, अनुप्रस्थ-काट शरीर-रचना और महत्वपूर्ण रचनाओं का आपसी संबंध।
Pathologyकैंसर से जुड़ी सामान्य विकृति-विज्ञान: दुर्दम रूपांतरण; ट्यूमर निदान की कसौटियाँ; बायोप्सी सामग्री का स्थूल, ऊतकीय व कोशिकीय उपयोग और महत्व; ट्यूमर मार्कर; कोशिका-आनुवंशिकी; आणविक विकृति-विज्ञान; इम्यूनोहिस्टोकेमिस्ट्री; ट्यूमर का वर्गीकरण — उद्गम, ऊतकीय, व्यवहारिक और प्रतिरक्षात्मक; ठोस ट्यूमर, लिंफोमा व ल्यूकीमिया का नामकरण; दुर्दमता के अंतःस्रावी पहलू — ट्यूमर से हॉर्मोन बनना, हॉर्मोन का ट्यूमर पर असर और पैराक्राइन प्रभाव; पैरानियोप्लास्टिक सिंड्रोम; कैंसर के कारण; ट्यूमर प्रतिरक्षा-विज्ञान।
Physics — Structure of matterपरमाणु के घटक, परमाणु व द्रव्यमान संख्या, परमाणु और द्रव्यमान-ऊर्जा इकाइयाँ, इलेक्ट्रॉन कोश, परमाणु तथा नाभिकीय ऊर्जा स्तर, नाभिकीय बल व बंधन ऊर्जा; विद्युत-चुंबकीय विकिरण और स्पेक्ट्रम, ऊर्जा का क्वांटीकरण तथा तरंगदैर्घ्य, आवृत्ति और ऊर्जा का संबंध।
Physics — Nuclear transformationsप्राकृतिक और कृत्रिम रेडियोसक्रियता, अल्फ़ा व बीटा क्षय, क्षय नियतांक, सक्रियता, भौतिक, जैविक तथा प्रभावी अर्ध-आयु, माध्य आयु, क्षय प्रक्रियाएँ, रेडियोसक्रिय शृंखला और रेडियोसक्रिय साम्य।
Physics — Production of X-raysX-ray ट्यूब और परिपथ, X-ray बनने की भौतिकी, सतत तथा अभिलाक्षणिक स्पेक्ट्रम, उत्पादन की दक्षता, अंतरिक्ष में X-ray का वितरण, किरण-गुणवत्ता का निर्धारण व मापन, फ़िल्टर और निस्पंदन।
Physics — Interaction of radiation with matterक्षीणन, प्रकीर्णन, अवशोषण और पारगमन; क्षीणन गुणांक तथा अर्ध-मूल्य परत (HVL); ऊर्जा स्थानांतरण व अवशोषण और उनके गुणांक; प्रकाश-विद्युत प्रभाव, कॉम्पटन प्रभाव और युग्म-उत्पादन तथा अलग-अलग फ़ोटॉन ऊर्जाओं पर उनका सापेक्ष महत्व; इलेक्ट्रॉन की अंतःक्रिया — टक्कर व विकिरण हानि, आयनन, उत्तेजन, ऊष्मा उत्पादन, डेल्टा किरण, ध्रुवण प्रभाव, प्रकीर्णन, रोकने की शक्ति, अवशोषित मात्रा और द्वितीयक इलेक्ट्रॉन; आवेशित कणों की अंतःक्रिया — आयनन बनाम ऊर्जा, रोकने की शक्ति, रैखिक ऊर्जा स्थानांतरण (LET), ब्रैग वक्र और कण-परास की परिभाषा।
Physics — Measurement of radiationविकिरण संसूचक — गैस, ठोस-अवस्था, सिंटिलेशन, तापदीप्ति और दृश्य इमेजिंग (फ़िल्म, प्रतिदीप्त पर्दे), उदाहरण सहित; एक्सपोज़र, डोज़ और कर्मा — परिभाषा, पुरानी व नई इकाइयाँ, उनका आपसी संबंध तथा ऊर्जा और पदार्थ के साथ बदलाव; फ़्री एयर और थिम्बल चैंबर से एक्सपोज़र का मापन; चिकित्सा किरणों का अंशांकन, अवधारणाएँ और फ़ैंटम; विकिरण चिकित्सा इकाइयों की गुणवत्ता जाँच; और TG21, IAEA TRS-277 तथा TG51 प्रोटोकॉल, व्यवहार में डोज़ निर्धारण की रूपरेखा सहित।
Physics — Radiotherapy equipmentग्रेंज़ किरण, कॉन्टैक्ट, सतही, ऑर्थोवोल्टेज या गहरी चिकित्सा, सुपरवोल्टेज और मेगावोल्टेज चिकित्सा; चिकित्सा तथा नैदानिक X-ray इकाइयों की तुलना; फ़िल्टर, आउटपुट को प्रभावित करने वाले कारक और शीतलन के सिद्धांत; बीटाट्रॉन; Co-60 इकाइयाँ, उनके सुरक्षा तंत्र व स्रोत कैप्सूल सहित; लीनियर एक्सेलरेटर — इतिहास, विकास, आधुनिक द्वि-मोड लिनैक का विस्तृत वर्णन, लिनैक हेड और उसके घटक, सुरक्षा तंत्र, कंप्यूटर-नियंत्रित लिनैक, रिकॉर्ड व वेरिफ़ाई प्रणाली, तथा Co-60 और लिनैक के तुलनात्मक गुण-दोष; न्यूट्रॉन चिकित्सा के लिए बीटाट्रॉन व साइक्लोट्रॉन; और सिम्युलेटर — एक सामान्य इकाई का विस्तृत वर्णन तथा सिम्युलेटर CT।
Physics — Beam data and dose distributionफ़ोटॉन किरणों के लक्षण, किरण-गुणवत्ता, MV और MeV का फ़र्क़, प्राथमिक व प्रकीर्णित विकिरण; प्रतिशत गहराई डोज़, टिश्यू-एयर अनुपात, स्कैटर एयर अनुपात, टिश्यू-फ़ैंटम अनुपात, टिश्यू मैक्सिमम अनुपात, स्कैटर मैक्सिमम अनुपात, बैक स्कैटर व पीक स्कैटर कारक, ऑफ़-ऐक्सिस अनुपात, और गहराई, क्षेत्र-आकार, स्रोत-त्वचा दूरी, किरण-गुणवत्ता, फ़्लैटनिंग फ़िल्टर तथा टार्गेट सामग्री के साथ इनका बदलना; केंद्रीय अक्ष के गहराई-डोज़ प्रोफ़ाइल; समतुल्य वर्ग अवधारणा, सतही डोज़, त्वचा-बचाव प्रभाव और आउटपुट कारक; SSD तथा SAD तकनीक से Co-60 और एक्सेलरेटर की व्यावहारिक गणनाएँ; बीम प्रोफ़ाइल, आइसोडोज़ वक्र व चार्ट, समतलता, सममिति, पेनम्ब्रा और क्षेत्र-आकार की परिभाषा; शरीर की असमानताएँ — रोगी की बनावट, हड्डी, फेफड़े की गुहा और कृत्रिम अंगों का असर, इंटरफ़ेस प्रभाव तथा इलेक्ट्रॉनिक असंतुलन; वेज फ़िल्टर, वेज कोण व कारक, वेज प्रणालियाँ और आइसोडोज़ वक्र; बोलस, बिल्ड-अप सामग्री और कॉम्पेंसेटर से बनावट व ऊतक-असमानता की भरपाई; और अपसारी तथा अनपसारी ब्लॉक, स्वतंत्र जॉ और मल्टीलीफ़ कोलिमेटर से संवेदनशील ऊतकों की सुरक्षा।
Treatment planning Iफ़ोटॉन किरणों की उपचार-योजना — ICRU 50, संबंधित ICRU रिपोर्ट और NACP शब्दावली सहित; शरीर की बनावट तथा स्थान-निर्धारण — सादा फ़िल्म, फ़्लोरोस्कोपी, CT, MRI, अल्ट्रासोनोग्राफी और सिम्युलेटर से; तिरछे आपतन तथा शरीर की असमानता के लिए सुधार; SSD और आइसोसेंट्रिक (SAD) तकनीक तथा SAD के लाभ; क्षेत्रों का संयोजन — क्षेत्र जोड़ना, समानांतर विपरीत क्षेत्र, अलग-अलग ऊर्जाओं पर रोगी की मोटाई बनाम डोज़ की समरूपता, बहु-क्षेत्र (3 फ़ील्ड, 4 फ़ील्ड बॉक्स आदि) SSD व SAD में, समाकल डोज़, वेज फ़ील्ड तकनीक, घूर्णन चिकित्सा (आर्क और स्किप), स्पर्शरेखी क्षेत्र, भार देकर किरण-संतुलन, पूर्ण तथा अर्ध-शरीर विकिरण, और क्षेत्र-संधियाँ।
Treatment planning IIहस्त-योजना की सीमाएँ; 2D और 3D उपचार-योजना प्रणाली (TPS) का वर्णन; किरण व रोगी का डेटा डालना, इनपुट उपकरण और CT-MR से सीधा जुड़ाव; किरण का चयन तथा स्थापन; बीम्स आई व्यू; डोज़ की गणना और प्रदर्शन — बिंदु डोज़, आइसोडोज़ वक्र व सतह, कलर वॉश; योजना का अनुकूलन; योजना मूल्यांकन के साधन, संचयी तथा अवकल डोज़-वॉल्यूम हिस्टोग्राम सहित; प्रिंट आउटपुट; और योजनाओं का भंडारण व पुनःप्राप्ति।
Alignment and immobilizationबाहरी और भीतरी संदर्भ चिह्न; रोगी को स्थिर रखने का महत्व; स्थिरीकरण के तरीक़े — प्लास्टर ऑफ़ पेरिस व परस्पेक्स कास्ट, बाइट ब्लॉक, शेल, हेडरेस्ट, नेक रोल, अल्फ़ा-क्रैडल, थर्मोप्लास्टिक सामग्री और पॉलीयूरेथेन फ़ोम; और किरण संरेखण के तरीक़े — आइसोसेंट्रिक चिह्न, लेज़र चिह्न तथा आगे-पीछे के पॉइंटर।
Treatment execution and verificationलाइट फ़ील्ड, क्रॉसहेयर, ऑप्टिकल दूरी सूचक और उपचार मशीनों के पैमाने; पोर्ट फ़िल्म तथा इलेक्ट्रॉनिक पोर्टल इमेजिंग उपकरणों से उपचार की जाँच; TLD, डायोड संसूचक, MOSFET और फ़िल्म से रोगी में डोज़ का मापन; और उपचार के दौरान रोगी की स्थिति, लक्ष्य आयतन तथा संवेदनशील आयतन में बदलाव।
Electron beam therapyएक्सेलरेटर से इलेक्ट्रॉन किरण बनाना और इलेक्ट्रॉन के लक्षण; सतही डोज़, प्रतिशत गहराई डोज़, बीम प्रोफ़ाइल, आइसोडोज़ वक्र व चार्ट, समतलता और सममिति; किरण का कोलिमेशन तथा क्षेत्र-आकार व SSD के साथ गहराई-डोज़ और आउटपुट का बदलना; फ़ोटॉन संदूषण; ऊर्जा स्पेक्ट्रम व निर्धारण और गहराई के साथ माध्य ऊर्जा का बदलना; इलेक्ट्रॉन डोसिमेट्री के लिए उपयुक्त मापक यंत्र; और उपचार-योजना — ऊर्जा तथा क्षेत्र-आकार का चुनाव, वायु-अंतराल व तिरछापन, फेफड़ा, हड्डी और वायु-भरी गुहा में ऊतक असमानता, इलेक्ट्रॉन या फ़ोटॉन किरण के साथ क्षेत्र-संधि, बाहरी व भीतरी परिरक्षण, आर्क चिकित्सा, बोलस का उपयोग, पूर्ण त्वचा इलेक्ट्रॉन विकिरण और ऑपरेशन के दौरान विकिरण चिकित्सा।
Brachytherapyआदर्श ब्रैकीथेरेपी स्रोत के गुण; इस्तेमाल होने वाले स्रोत — Ra-226, Cs-137, Ir-192, Au-198, Co-60, I-125, Sr-90, Y-90, Ru-106, Ta-182 तथा नए रेडियोन्यूक्लाइड — उनके भौतिक गुण, रेडियम के ख़तरे, निस्पंदन सहित स्रोत की बनावट और तुलनात्मक लाभ तथा ऐतिहासिक पृष्ठभूमि; विकिरण व डोज़ की इकाइयाँ — सक्रियता, एक्सपोज़र, अवशोषित डोज़, mg-hr, क्यूरी, नष्ट मिली-क्यूरी, मिलीग्राम रेडियम समतुल्य, रॉन्टजन, रैड और ग्रे; स्रोत-सामर्थ्य का निर्धारण और ब्रैकीथेरेपी डोज़ कैलिब्रेटर; तकनीकें — पहले से भरे और बाद में भरे जाने वाले (हस्त तथा दूरस्थ), सतही, अंतरालीय, अंतर-गुहा, अंतर-नलिका और अंतर-रक्तवाहिनी ब्रैकीथेरेपी, निम्न, मध्यम, उच्च व स्पंदित डोज़ दर और रिमोट आफ़्टरलोडिंग मशीनें; डोज़ प्रणालियाँ — मैनचेस्टर प्रणाली की रूपरेखा और पेरिस प्रणाली का कार्य-ज्ञान; उपचार-योजना — रोगी का चयन, आयतन निर्धारण, इम्प्लांट की ज्यामिति, स्रोतों की संख्या, सामर्थ्य व वितरण, स्रोत का स्थान-निर्धारण, डोज़ गणना, डोज़-दर निर्धारण, अभिलेख और ICRU 38; विकिरण सुरक्षा — ब्रैकीथेरेपी सुविधा, कक्ष व उपकरणों की योजना, भंडारण और आवाजाही नियंत्रण, स्रोत सूची, निपटान तथा नियामक शर्तें, और बीटा-किरण ब्रैकीथेरेपी — उपयोग, निरीक्षण, भंडारण, ढुलाई व डोज़ वितरण सहित; और बिना-सील रेडियोन्यूक्लाइड — ग्रहण, वितरण व निष्कासन, नैदानिक व्यवहार में उपयोग की जाने वाली सक्रियता, लक्ष्य ऊतक तथा संवेदनशील अंगों में डोज़ का अनुमान, और रोगी को रेडियोन्यूक्लाइड देने की प्रक्रियाएँ।
Quality assurance in radiotherapy (QART)ESTRO QART का सिंहावलोकन: रेडियोथेरेपी में गुणवत्ता प्रणाली की ज़रूरत, उसकी परिभाषा व व्यावहारिक लाभ, और उस प्रणाली का निर्माण, विकास तथा लागू करना; सिम्युलेटर, उपचार-योजना प्रणाली, Co-60 और लीनियर एक्सेलरेटर की गुणवत्ता जाँच व स्वीकृति परीक्षण।
Radiation protection and regulatory aspectsवैधानिक ढाँचा और ICRP सिफ़ारिशों के पीछे के सिद्धांत; ICRP तथा परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) के राष्ट्रीय विकिरण सुरक्षा मानक; प्रभावी डोज़ सीमाएँ; समय, दूरी और परिरक्षण से सुरक्षा तथा ALARA की अवधारणा; कर्मचारी व क्षेत्र निगरानी — फ़िल्म बैज, TLD बैज, पॉकेट डोसिमीटर, गामा ज़ोन मॉनिटर और सर्वे मीटर; और नई टेलीथेरेपी या ब्रैकीथेरेपी सुविधा लगाने तथा चालू करने के नियामक कदम — रेडियोथेरेपी विकास कार्यक्रम की स्थायी समिति की स्वीकृति, इकाई का टाइप अप्रूवल, साइट योजना व लेआउट (प्राथमिक और द्वितीयक अवरोध, रिसाव तथा प्रकीर्णित विकिरण), स्रोत की ख़रीद, भवन निर्माण, योग्य कर्मचारी, उपकरणों की ख़रीद, स्थापना व प्रदर्शन परीक्षण, अंशांकन, नैदानिक उपयोग के लिए RP&AD की स्वीकृति, तथा अन्य शर्तें — सहमति, NOC और AERB व BARC के RP&AD को समय-समय पर रिपोर्ट।
Advancements in radiation oncologyवर्चुअल सिमुलेशन — सिद्धांत, CT-सिमुलेशन, TPS आधारित वर्चुअल सिमुलेशन, अंतर, गुण-दोष और व्यावहारिक बातें; कॉन्फ़ॉर्मल रेडियोथेरेपी — सिद्धांत, परंपरागत तरीक़ों पर उसके लाभ और उसकी ज़रूरी शर्तें; CRT के तरीक़े — परंपरागत समतलीय किरणों से क्षेत्र को आकार देना, बहु ग़ैर-समतलीय MLC किरणें, स्टीरियोटैक्टिक रेडियोथेरेपी, व्युत्क्रम योजना और IMRT (3D कॉम्पेंसेटर, स्थैतिक स्टेप-एंड-शूट, गतिशील स्लाइडिंग विंडो, डायनेमिक आर्क, माइक्रो-MLC, टोमोथेरेपी) तथा समय-नियंत्रित 4D रेडियोथेरेपी, IMRT के गुण-दोष सहित; स्टीरियोटैक्टिक विकिरण — भौतिकी सिद्धांत, तकनीकें, गामा नाइफ़ और लिनैक आधारित इकाइयाँ जैसे साइबर नाइफ़ व टोमोथेरेपी, SRS और SRT तथा पूर्ण-शरीर स्टीरियोटैक्टिक फ़्रेम; और योजना व उपचार इकाइयों की नेटवर्किंग, PACS सहित — उसके लाभ और रोगी डेटा प्रबंधन।
Planning of a radiotherapy departmentभवन की रूपरेखा, उपकरणों व स्रोतों का चुनाव, स्वीकृति तथा अंशांकन परीक्षण, और रख-रखाव के विभिन्न कदम व प्रक्रियाएँ।
Radiobiologyविकिरण जीव-विज्ञान का परिचय; विकिरण की पदार्थ से अंतःक्रिया; विकिरण-प्रतिक्रिया को प्रभावित करने वाले कारक; रेडियोथेरेपी में विकिरण जीव-विज्ञान की प्रासंगिकता; आयनकारी विकिरण की स्तनधारी कोशिकाओं से अंतःक्रिया; अंगों की विकिरण-संवेदनशीलता व प्रतिक्रियाशीलता तथा चिकित्सीय सूचकांक की अवधारणा; विकिरण के तीव्र प्रभाव; प्रमुख अंगों व ऊतकों पर असर; देर से दिखने वाले दैहिक तथा आनुवंशिक प्रभाव; मानव भ्रूण पर विकिरण का असर; और ट्यूमर का जीव-विज्ञान व विकिरण-प्रतिक्रिया।
Applied radiobiologyअंशीकरण (fractionation) — उसका तर्क और चार R; समय, डोज़ तथा अंशीकरण का संबंध — समप्रभाव वक्र और NSD व CRE जैसे सूत्र, उनकी सीमाएँ, आंशिक सहनशीलता और उसका जोड़, तथा डोज़-प्रतिक्रिया वक्र की ढलान; बहु-लक्ष्य, द्वि-घटक और रैखिक-द्विघात मॉडल, तीव्र व विलंबित प्रभावों के लिए alpha/beta अनुपात और उन्हें निकालने के तरीक़े, समप्रभाव सूत्र, तथा LQ मॉडल के नैदानिक उपयोग — अति-अंशीकरण, त्वरित अंशीकरण, अल्प-अंशीकरण, CHART और विभाजित डोज़ उपचार; निम्न, उच्च तथा स्पंदित डोज़-दर ब्रैकीथेरेपी; विकिरण से रोग-मुक्ति बढ़ाने की नई तकनीकें — सहायक शल्य या कीमोथेरेपी के साथ संयोजन, अति-ताप, हाइपोक्सिक कोशिका संवेदीकारक, उच्च LET विकिरण और फोटोडायनामिक चिकित्सा; और आयतन प्रभाव — उसके सामान्य सिद्धांत, मौजूदा परिकल्पनाएँ तथा सिकुड़ते क्षेत्र की तकनीक।
Combination of radiation and surgeryऑपरेशन से पहले, बाद में और ऑपरेशन के दौरान विकिरण; उसका तर्क, विकिरण-जैविक कारक और मौजूदा नैदानिक नतीजे; उप-नैदानिक रोग का विकिरण, ट्यूमर घटाने वाली शल्य और क्लोनोजेनिक कोशिकाओं की संख्या का महत्व।
Combination of radiation and chemotherapy, and hyperthermiaरेडियो-संवेदीकारक, सहक्रिया, प्रबलन और विरोध की परिभाषाएँ; संवेदीकारकों के प्रकार व क्रिया-विधि; अति-ताप चिकित्सा — स्रोत, तर्क (ऐतिहासिक उदाहरण सहित), लाभ, हानि और ताप-सहिष्णुता; कोशिकीय क्षति की विकिरण से तुलना, तथा अल्ट्रासाउंड, माइक्रोवेव व रेडियो-आवृत्ति के तापीय और अतापीय प्रभाव; शरीर की सामान्य प्रतिक्रियाएँ (प्रतिरक्षा, मेटास्टेसिस); रेडियोथेरेपी व कीमोथेरेपी के साथ उपयोग और संयुक्त तरीक़ों का सर्वोत्तम क्रम; और अति-ताप चिकित्सा के नैदानिक उपयोग की मौजूदा सीमाएँ।
High LET radiationनिम्न LET विकिरण से तुलना; न्यूट्रॉन — स्रोत (Cf-252 और बोरॉन न्यूट्रॉन कैप्चर की रूपरेखा सहित), न्यूट्रॉन के लाभ-हानि, RBE मान, कम डोज़ व कम ऊर्जा वाले न्यूट्रॉन के ख़तरे, रेडियोथेरेपी में उपयोग, निम्न LET के साथ संयोजन और मौजूदा नैदानिक नतीजे; और अन्य उच्च LET कण — प्रोटॉन, मेसॉन तथा उच्च ऊर्जा वाले भारी नाभिक — रेडियोथेरेपी में उनका उपयोग और नतीजे।
Nuclear medicine — radiopharmaceuticalsन्यूक्लियर मेडिसिन में इस्तेमाल होने वाले रेडियोन्यूक्लाइड के भौतिक व रासायनिक लक्षण; रेडियो-फार्मेसी और जनरेटर से बने रेडियोफार्मास्युटिकल; रेडियोन्यूक्लाइड चुनने की कसौटियाँ; उनका जैविक व्यवहार; गुणवत्ता नियंत्रण; शरीर में जमने की क्रिया-विधि; चिकित्सा के लिए रेडियोफार्मास्युटिकल; पॉज़िट्रॉन उत्सर्जक रेडियोन्यूक्लाइड — उनकी तैयारी, नाभिकीय अभिक्रियाओं के मॉड्यूल, टार्गेट अभिक्रियाएँ और रसायन; और विशेष विषय — अस्थि-लक्ष्यी, यकृत-पित्त, ट्यूमर-लक्ष्यी तथा हृदय इमेजिंग के रेडियोफार्मास्युटिकल और शोध में उपयोग होने वाले।
Therapeutic uses of radionuclidesचिकित्सा में आइसोटोप का उपयोग: थायरोटॉक्सिकोसिस; थायरॉइड कैंसर — कम और अधिक दोनों मात्रा में; P-32, Sr-89 तथा Sm-153 से अस्थि दर्द में राहत; और यकृत कैंसर के लिए I-131 लिपियोडोल।
Clinical trialsनैदानिक परीक्षणों की योजना और व्याख्या का सांख्यिकीय आधार: उनके लाभ-हानि, पूर्वव्यापी तथा भावी अध्ययन, नियंत्रित व अनियंत्रित परीक्षण, एकल-अंध और द्वि-अंध अध्ययन, Phase I, II व III परीक्षण, और हेलसिंकी घोषणा के तहत नैतिकता।
Unit-II — नैदानिक रेडियोथेरेपीसिलेबस उसके नीचे क्या गिनाता है
Cancer epidemiology and aetiologyदुनिया और भारत के कैंसर आँकड़े; कैंसर रजिस्ट्री तथा राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम; रजिस्ट्री के आँकड़ों का विश्लेषण; क्षेत्रीय कैंसर केंद्र; और कैंसर की जाँच-छँटनी व रोकथाम।
Patient careरेडियोथेरेपी के लिए आकलन और रेफ़रल प्रणाली; निदान व जाँच; चरण-निर्धारण; उपचार के दौरान और बाद में देखभाल तथा मूल्यांकन; और कैंसर की आपात स्थितियाँ।
Management of the different malignanciesत्वचा कैंसर; केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, नेत्रकोटर और मेरुदंड के ट्यूमर; सिर-गर्दन के ट्यूमर; वक्ष के ट्यूमर; स्तन ट्यूमर; आंत्र-पथ के ट्यूमर; यकृत, पित्ताशय, पित्त-नलिका व अग्न्याशय के ट्यूमर; बच्चों के ट्यूमर; स्त्री रोग संबंधी ट्यूमर; पुरुष मूत्र-जनन तथा मूत्र-मार्ग के ट्यूमर; अंतःस्रावी ट्यूमर; रक्त संबंधी दुर्दमताएँ — ल्यूकीमिया, लिंफोमा और प्लाज़्मा कोशिका अर्बुद; हड्डी व मृदु ऊतक के सारकोमा; अज्ञात मूल का मेटास्टेसिस; AIDS से जुड़ी दुर्दमताएँ; और कैंसर की आपात स्थितियाँ।
Endocrine aspects and related conditionsट्यूमर से हॉर्मोन बनना, हॉर्मोन का ट्यूमर पर असर और पैराक्राइन प्रभाव; पैरानियोप्लास्टिक सिंड्रोम; सौम्य रोग; और वंशानुगत कैंसर सिंड्रोम।
Techniques of radiotherapyछोटे क्षेत्र की निर्देशित किरण चिकित्सा; विस्तारित तथा अनियमित क्षेत्र चिकित्सा; किरण-परिवर्तन चिकित्सा; घूर्णन आर्क चिकित्सा; अंतर-गुहा, अंतरालीय और मोल्ड अनुप्रयोग; उपचार-योजना और प्रस्तुति; मोल्ड रूम की कार्य-पद्धति; सिमुलेशन; कंप्यूटरीकृत उपचार-योजना प्रणाली; नैदानिक डोसिमेट्री; और नुस्ख़ा तथा उसका पालन।
Treatment response and resultउपचार-प्रतिक्रिया आँकने के दिशा-निर्देश — पूर्ण प्रतिक्रिया, आंशिक प्रतिक्रिया, कोई प्रतिक्रिया नहीं और स्थिर रोग; नतीजों के अंतिम बिंदु — स्थानीय-क्षेत्रीय नियंत्रण, रोग की वापसी, मेटास्टेसिस, जीवित रहना और जीवन-गुणवत्ता; और उपचार से जुड़ी रुग्णता का आकलन — विकिरण की जल्दी व देर से दिखने वाली रुग्णता, संयुक्त उपचार की रुग्णता और श्रेणी-प्रणालियाँ।
Unit-III — नैदानिक कीमोथेरेपीसिलेबस उसके नीचे क्या गिनाता है
Basic principles and clinical practice of chemotherapyकीमोथेरेपी दवाओं का वर्गीकरण; नई दवाएँ; एकल दवा चिकित्सा, बहु-औषधि चिकित्सा और विभिन्न संयोजनों, सहायक तथा निवारक चिकित्सा का नैदानिक उपयोग; अलग-अलग दुर्दमताओं में कीमोथेरेपी; क्रमिक और साथ-साथ चलने वाली कीमो-रेडियोथेरेपी में व्यवहार, नतीजे व विषाक्तता; और कीमोथेरेपी में सहायक देखभाल।
Principles underlying the use of chemotherapeutic agentsकोशिका-नाशक दवाओं का वर्गीकरण व क्रिया-विधि, कोशिका मारने के सिद्धांत, दवा-प्रतिरोध तथा चरण व चक्र-विशिष्ट क्रिया; दवा देना — फार्माकोकाइनेटिक्स के सामान्य सिद्धांत और शरीर में दवा की सांद्रता को प्रभावित करने वाले कारक (रास्ता व समय, सक्रियण, प्लाज़्मा सांद्रता, चयापचय, निष्कासन); संयोजन चिकित्सा के सिद्धांत, डोज़-प्रतिक्रिया वक्र, सहायक व पूर्व-सहायक कीमोथेरेपी, शरण-स्थल (sanctuary sites), उच्च मात्रा और क्षेत्रीय कीमोथेरेपी; दवाओं की विषाक्तता — आम वर्गों के जल्दी, मध्यम तथा देर से दिखने वाले आनुवंशिक और दैहिक प्रभाव, और कोशिका-नाशक दवाओं को सुरक्षित सँभालने की सावधानियाँ; अंतःस्रावी हेरफेर और जैविक प्रतिक्रिया परिवर्तक — आम हॉर्मोन दवाओं तथा इंटरफ़ेरॉन, इंटरल्यूकिन व वृद्धि कारकों की क्रिया-विधि और दुष्प्रभाव सहित; नई दवाओं का आकलन और Phase I, II तथा III अध्ययन के सिद्धांत; और जीन थेरेपी।
Immunotherapyविभिन्न दुर्दम स्थितियों में नैदानिक उपयोग, उसकी विषाक्तता और उस विषाक्तता का प्रबंधन।
Unit-IV — संबद्ध विषयसिलेबस उसके नीचे क्या गिनाता है
Allied disciplinesकैंसर से जुड़ी सामान्य शल्य, स्त्री रोग और बाल शल्य के सिद्धांत व व्यवहार; शल्य कैंसर-विज्ञान के बुनियादी सिद्धांत — बायोप्सी, अंग-बचाऊ शल्य, रैडिकल शल्य और उपशामक शल्य; नैदानिक चरण-निर्धारण की विधियाँ तथा TNM वर्गीकरण; सिर-गर्दन, स्तन, वक्ष, उदर, स्त्री रोग, मूत्र-जनन, पेशी-कंकाल और CNS कैंसर की शल्य तकनीक की बुनियाद; रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी व हॉर्मोन चिकित्सा के साथ संयुक्त उपचार; और निवारक कैंसर-विज्ञान — कैंसर की रोकथाम तथा जल्दी पहचान।
Unit-V — उपशामक देखभालसिलेबस उसके नीचे क्या गिनाता है
Palliative careउपशामक देखभाल के दिशा-निर्देश; बढ़े हुए कैंसर के लक्षण; अंतिम अवस्था के रोगियों का प्रबंधन; औषधीय और ग़ैर-औषधीय तरीक़े; दर्द नियंत्रण — वयस्कों तथा बच्चों के लिए WHO दिशा-निर्देश सहित; उपशामक रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी; घर पर देखभाल और हॉस्पिस देखभाल; तथा शारीरिक, सामाजिक, आध्यात्मिक व अन्य पहलू।
Unit-VI — शोध, प्रशिक्षण और प्रशासनसिलेबस उसके नीचे क्या गिनाता है
Research and trainingकैंसर-विज्ञान में शोध और उसे करने का तरीक़ा; जैव-चिकित्सा शोध के दिशा-निर्देश — पशु अध्ययन, दवा अध्ययन और मानव परीक्षण; कैंसर के नैदानिक परीक्षण Phase I/II/III; नैदानिक शोध की नैतिकता; और साक्ष्य-आधारित चिकित्सा।
Administrationरेडियोथेरेपी और कैंसर-विज्ञान का प्रशासन; प्रशासक के रूप में नैदानिक कैंसर-चिकित्सक की भूमिका; रेडियोथेरेपी व कैंसर विभाग कैसे खड़ा किया जाए — ढाँचे और उपकरणों की योजना सहित; कैंसर रजिस्ट्री तथा महामारी-विज्ञान; कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम और जाँच-छँटनी कार्यक्रमों में भूमिका; और सुरक्षा व गुणवत्ता आश्वासन की ज़िम्मेदारियाँ।
Special topicsकैंसर की आपात स्थितियाँ; पूर्ण लसीका विकिरण, शरीर के बाहर विकिरण (ECI) और पूर्ण शरीर विकिरण — उनकी भूमिका व तकनीकें; सौम्य रोगों तथा ट्यूमर-जैसी स्थितियों का विकिरण उपचार; निवारक कैंसर-विज्ञान; और नई विकिरण विधियाँ — प्रोटॉन चिकित्सा, न्यूट्रॉन चिकित्सा, पायन चिकित्सा, कार्बन जैसे उच्च ऊर्जा भारी आयन की चिकित्सा, और अति-ताप चिकित्सा। विषय के अंत में नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

Anaesthesiology — 12 क्रमांकित विषय, पेज 85 से 86 ↑

बारह क्रमांकित विषय हैं, और सारी उप-विशेषताएँ अलग-अलग यूनिट में बँटी नहीं, एक ही प्रविष्टि में रखी हैं — अकेली प्रविष्टि 4 में बाल, हृदय-वक्ष, तंत्रिका-शल्य, अस्थि, न्यूनतम चीर-फाड़, डे-केयर, ENT, नेत्र, दंत, प्रसूति और वृद्धावस्था निश्चेतना — सब आ जाती हैं।

आख़िरी चार प्रविष्टियाँ ही तैयार उम्मीदवार को सिर्फ़ नैदानिक उम्मीदवार से अलग करती हैं: निगरानी व सचेत रह जाना, मेडिको-लीगल पहलू और अभिलेख, जीवन-रक्षक सहायता, तथा शोध पद्धति और सांख्यिकी।

क्रमसिलेबस में दिया गया विषय
1निश्चेतना विज्ञान से जुड़े बुनियादी विज्ञान — शरीर-रचना, शरीर-क्रिया, जैव-रसायन, औषध विज्ञान, भौतिकी और रसायन।
2निश्चेतना और दर्द-निवारण के सिद्धांत व व्यवहार तथा निश्चेतना प्रबंधन; निश्चेतना से जुड़ा नैदानिक विज्ञान, जिसमें आंतरिक चिकित्सा और शल्य की बुनियादी बातें शामिल हैं।
3निश्चेतना से पहले का मूल्यांकन और उपचार; साथ चल रही बीमारियों का निश्चेतना पर असर; निश्चेतना की जटिलताएँ; ऑपरेशन के बाद का प्रबंधन; पोस्ट-एनेस्थीसिया केयर यूनिट।
4विशेषताएँ: बाल निश्चेतना; हृदय-वाहिनी व वक्ष निश्चेतना; तंत्रिका-शल्य निश्चेतना; सामान्य व अस्थि शल्य, न्यूनतम चीर-फाड़ वाली तथा डे-केयर शल्य; ENT, नेत्र और दंत शल्य तथा तंत्रिका व मनोरोग स्थितियों में निश्चेतना; प्रसूति-स्त्री रोग और प्रसव-पीड़ा निवारण; तथा वृद्धावस्था निश्चेतना।
5क्षेत्रीय निश्चेतना।
6अंग प्रत्यारोपण, लेज़र शल्य और एंडोस्कोपिक शल्य में निश्चेतना; ऑपरेशन कक्ष के बाहर निश्चेतना।
7निश्चेतना विज्ञान और दर्द प्रबंधन; क्रिटिकल केयर; वेंटिलेटर; पॉलीट्रॉमा; आपदा चिकित्सा।
8निश्चेतना में निगरानी; निश्चेतना में इलेक्ट्रॉनिक व कंप्यूटर उपकरणों का उपयोग; निश्चेतना के दौरान रोगी का सचेत रह जाना।
9निश्चेतना और दर्द-निवारण की नई प्रगतियाँ तथा मौजूदा अवधारणाएँ।
10निश्चेतना से जुड़े मेडिको-लीगल पहलू; निश्चेतना का अभिलेख रखना और गुणवत्ता आश्वासन।
11बुनियादी और उन्नत जीवन-रक्षक सहायता।
12शोध पद्धति और सांख्यिकी की बुनियाद। विषय के अंत में नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

Physical Medicine and Rehabilitation — 15 यूनिट, पेज 86 से 89 ↑

पंद्रह यूनिट हैं, और यह विषय गहराई से ज़्यादा अपने फैलाव से पहचाना जाता है: अकेली Unit-XI में तंत्रिका चोट, मस्तिष्क चोट, स्ट्रोक, पार्किंसनिज़्म, मल्टिपल स्क्लेरोसिस, पेशी रोग, सेरेब्रल पाल्सी, पोलियो, हृदय व फेफड़ा रोग, कैंसर, मूत्राशय-आंत्र की गड़बड़ी, HIV/AIDS और तंत्रिका-नलिका दोष — सबका पुनर्वास गिनाया गया है।

प्रशासनिक और क़ानूनी यूनिट यहाँ बोनस नहीं हैं — दिव्यांगता क़ानून, कार्यात्मक मूल्यांकन, क्षति की श्रेणी, प्रमाणन के दिशा-निर्देश और दिव्यांगजनों के लिए सरकारी योजनाएँ — सबका नाम Unit-XIV में है।

यूनिटसिलेबस उसके नीचे क्या गिनाता है
Unit-Iपेशी-कंकाल तंत्र (जैव-यांत्रिकी सहित) तथा मूत्र-जनन, हृदय-फेफड़ा और तंत्रिका तंत्र की बुनियादी शरीर-रचना व शरीर-क्रिया; रोग, दिव्यांगता और उपचार के पीछे की बुनियादी विकृति प्रक्रियाएँ; PMR से जुड़े औषध विज्ञान के सिद्धांत; PMR का दर्शन, इतिहास, दायरा और ज़रूरत; बुनियादी अवधारणाएँ — परिभाषाएँ, पुनर्वास टीम और उसके सदस्यों की भूमिका व ज़िम्मेदारी; PMR सेवाओं का संगठन और प्रशासन; दिव्यांगता की प्रक्रिया — क्षति, दिव्यांगता और अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण; तथा दिव्यांगता की रोकथाम, उसके स्तर और उदाहरण।
Unit-IIकैल्शियम व विटामिन D चयापचय, ऑस्टियोपोरोसिस और मधुमेह के जैव-रासायनिक पहलू; PMR में इस्तेमाल होने वाली नैदानिक विधियों (प्रयोगशाला और रेडियोलॉजिकल) के सिद्धांत; सामाजिक तथा व्यावसायिक समस्याओं के आकलन और पुनर्वास प्रबंधन के सिद्धांत; चाल विश्लेषण — शब्दावली, प्रकार व नैदानिक उपयोग; विद्युत-निदान चिकित्सा — सिद्धांत, नैदानिक विधियाँ और व्याख्या; PMR में परिणाम-माप; क्षति की श्रेणी और दिव्यांगता का आकलन; समुदाय-आधारित पुनर्वास; और पुनर्वास नर्सिंग के सिद्धांत व प्रबंधन।
Unit-IIIचिकित्सकीय व्यायाम — सिद्धांत, प्रकार, संकेत और वर्जनाएँ; भौतिक साधन व विधियाँ; मैनिपुलेशन, ट्रैक्शन तथा मालिश; और विद्युत उद्दीपन — हर एक के सिद्धांत, प्रकार, संकेत, वर्जनाएँ और सावधानियाँ।
Unit-IVव्यावसायिक चिकित्सा के सिद्धांत और दायरा; अलग-अलग स्थितियों में दैनिक क्रियाओं (ADL) का तर्क; समन्वित चिकित्सा और PMR; तथा चलने-फिरने के सहायक साधन, व्हीलचेयर व बैठने की प्रणालियाँ।
Unit-Vऊपरी अंग के ऑर्थोटिक उपकरण, स्प्लिंट सहित; निचले अंग के ऑर्थोटिक उपकरण, जूतों में बदलाव सहित; मेरुदंड के ऑर्थोसिस — हर एक के सिद्धांत, प्रकार, सामग्री और संकेत; तथा ऊपरी व निचले अंग के कृत्रिम अंग और अंग-विच्छेदन के बाद पुनर्वास।
Unit-VIकमर दर्द और PMR; गर्दन तथा कंधे का दर्द; विभिन्न पेशी-कंकाल विकार — उनका आकलन, निदान, प्रबंधन और पुनर्वास; और दर्द (तीव्र व दीर्घकालिक) — उसकी रोग-क्रिया, पथ, आकलन, प्रबंधन तथा पुनर्वास।
Unit-VIIगठिया (रूमेटॉइड आर्थराइटिस, ऑस्टियोआर्थराइटिस, एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस सहित), मेरुदंड की विकृति, ऑस्टियोपोरोसिस, जलने की चोट और हीमोफ़ीलिया से पीड़ित व्यक्तियों का समग्र प्रबंधन तथा पुनर्वास।
Unit-VIIIमेरुरज्जु की चोट (आघातजन्य और ग़ैर-आघातजन्य): कारण, रोग-क्रिया, चोट लगने का तरीक़ा, रेडियोलॉजिकल इमेजिंग, आकलन, तीव्र व दीर्घकालिक जटिलताएँ और उनका प्रबंधन, तथा पुनर्वास प्रबंधन।
Unit-IXविभिन्न प्रकार के घाव, उनका प्रबंधन और पुनर्वास; मोटापा व डिस्लिपिडेमिया से पीड़ित तथा जोड़ प्रतिस्थापन, POP कास्ट, फ़्रैक्चर उपचार और शल्य हस्तक्षेप के बाद के व्यक्तियों का पुनर्वास; खेल चिकित्सा के सिद्धांत — खेल चोटों का निदान, आकलन, रोकथाम और प्रबंधन; तथा पुनर्वास शल्य के बुनियादी सिद्धांत, जैसे पोलियो, सेरेब्रल पाल्सी, क्लब फुट व संकुचन में विकृति सुधार, अंग-विच्छेदन स्टंप का पुनर्संशोधन, दबाव-घाव और कंडरा स्थानांतरण।
Unit-Xजोड़ और मृदु ऊतक में इंजेक्शन की विभिन्न तकनीकें (चित्र-निर्देशित या बिना) — संकेत, वर्जनाएँ, सिद्धांत, प्रक्रिया, लाभ-हानि और प्रक्रिया का तर्क; पुनर्वास चिकित्सा में विभिन्न नर्व ब्लॉक तथा मायोन्यूरल ब्लॉक; बोटुलिनम इंजेक्शन; और PMR में प्लास्टर की विभिन्न तकनीकें।
Unit-XIइन स्थितियों से पीड़ित व्यक्तियों का समग्र पुनर्वास: प्लेक्सस या तंत्रिका की चोट, आघातजन्य मस्तिष्क चोट, स्ट्रोक, पार्किंसनिज़्म, मल्टिपल स्क्लेरोसिस, अटैक्सिया व अन्य गति और तंत्रिका-क्षयकारी विकार, मिर्गी, स्वायत्त तंत्र विकार, न्यूरोपैथी, बेल्स पाल्सी, कुष्ठ रोग, पेशी रोग जैसे मायोपैथी, मोटर न्यूरॉन रोग और मायस्थीनिया ग्रेविस, सेरेब्रल पाल्सी, स्पास्टिसिटी, पोलियो और उसके बाद के प्रभाव, हृदय रोग जैसे CAD, हृदयाघात, CABG शल्य, एंजियोप्लास्टी व हृदय प्रत्यारोपण, परिधीय रक्तवाहिनी रोग, फेफड़ा रोग जैसे COPD, ब्रोंकिएक्टेसिस और सिस्टिक फ़ाइब्रोसिस, प्रसूति-स्त्री रोग, कैंसर, निगलने की गड़बड़ी, मूत्राशय व आंत्र की गड़बड़ी, चक्कर, HIV/AIDS, दीर्घकालिक दर्द, तथा मेनिंगोमायलोसील और हाइड्रोसेफ़ेलस जैसे तंत्रिका-नलिका दोष।
Unit-XIIबाल पुनर्वास — ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम विकार, अधिगम अक्षमता और बहु-दिव्यांगता वाले बच्चों सहित; वृद्धावस्था पुनर्वास; और दृष्टि-बाधित, मानसिक मंदता, श्रवण या वाणी-बाधित तथा मानसिक समस्याओं वाले व्यक्तियों के आकलन और पुनर्वास प्रबंधन के सिद्धांत।
Unit-XIIIPMR में चिकित्सकीय व शल्य आपात स्थितियाँ; लैंगिकता और दिव्यांगता; तथा अंग प्रत्यारोपण के बाद और ICU में भर्ती व्यक्तियों का पुनर्वास।
Unit-XIVसाक्ष्य-आधारित चिकित्सा और PMR; दिव्यांगता से जुड़े राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय क़ानून; कार्यात्मक मूल्यांकन, क्षति की श्रेणी, दिव्यांगता आकलन और प्रमाणन तथा उनके दिशा-निर्देश; और सरकार द्वारा दिव्यांगजनों को दी जाने वाली योजनाएँ व लाभ।
Unit-XVबाधा-मुक्त परिवेश और पहुँच से जुड़े प्रश्न; PMR में कंप्यूटर; सहायक तकनीक; नई प्रगतियाँ; पुनर्वास के नैतिक पहलू; और शोध पद्धति। विषय के अंत में नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

Dentistry — 13 यूनिट, पेज 89 से 92 ↑

तेरह यूनिट हैं, और पहली पाँच बुनियादी विज्ञान की हैं — शरीर-रचना, जैव-रसायन, शरीर-क्रिया, सूक्ष्म-जीव विज्ञान और औषध विज्ञान — पर ख़ास तौर पर दंत चिकित्सा के नज़रिए से। नैदानिक शाखाएँ Unit-VI से शुरू होती हैं।

Unit-IX सबसे बड़ी अकेली यूनिट है और उसमें तीन विषय जोड़ दिए गए हैं जो आम तौर पर अलग-अलग पढ़ाए जाते हैं: मुख चिकित्सा, मुख रेडियोलॉजी और मुख विकृति-विज्ञान — न्यायालयिक दंत विज्ञान भी उसी के भीतर है।

यूनिटसिलेबस उसके नीचे क्या गिनाता है
Unit-I — Anatomyसिर और गर्दन की विस्तृत शरीर-रचना तथा अस्थि-विज्ञान; कपाल तंत्रिकाओं का विस्तार से अध्ययन, 5वीं और 7वीं तंत्रिका के कपाल-बाह्य मार्ग सहित।
Unit-II — Biochemistryदंत विज्ञान से जुड़ा जैव-रसायन; हीमोग्लोबिन का बुनियादी रसायन और उसकी परिणति; रक्त समूह; WBC के प्रकार, संख्या, विविधता, कार्य, बनना और परिसंचरण; विटामिन।
Unit-III — Physiologyपीयूष ग्रंथि — हॉर्मोन, क्रियाएँ और गड़बड़ी; तीव्र व दीर्घकालिक सूजन और घाव की मरम्मत; रक्तस्राव, शॉक, मूर्च्छा; रक्त-संचार की गड़बड़ी और उच्च रक्तचाप; दंत चिकित्सा में आपात स्थितियाँ; जन्मजात व आमवाती हृदय रोग; रक्ताल्पता, थक्का दोष और रक्तस्राव रोग; एलर्जी तथा दवा प्रतिक्रियाएँ।
Unit-IV — Microbiologyजीवाणु विज्ञान का परिचय, चिकित्सा तथा दंत जीवाणु विज्ञान के विशेष संदर्भ में; प्रतिरक्षा और टीकाकरण सामग्री।
Unit-V — Pharmacologyहृदय-रक्तवाहिनी दवाएँ, रक्तचाप बढ़ाने वाली दवाएँ और शॉक का उपचार; रक्त पर काम करने वाली दवाएँ — थक्कारोधी, थक्का बनाने वाली और हीमैटिनिक; प्रतिरोधी व संकोचक दवाएँ; एंटीबायोटिक और सूजनरोधी दवाएँ।
Unit-VI — Prosthodonticsपूर्ण डेंचर, RPD और FPD में छाप लेने के सिद्धांत व तकनीकें; टिकाव और स्थिरता के सिद्धांत; जबड़ों का संबंध और उसे दर्ज करने की विधियाँ; पूर्ण डेंचर का प्रसंस्करण व फ़िनिशिंग; तुरंत लगने वाले पूर्ण और आंशिक डेंचर; निकाले जा सकने वाले आंशिक डेंचर के अंग और उनके कार्य; सर्वेयर तथा मुँह की तैयारी; आंशिक डेंचर का डिज़ाइन; एक्रिलिक आंशिक डेंचर; दाँत घिसाई का सिद्धांत; शल्य रिट्रैक्टर; पॉन्टिक व रिटेनर का चुनाव और निर्माण; दंत सामग्री विज्ञान के उद्देश्य तथा दायरा; और दंत सामग्री के मुख्य भौतिक गुण, उनके जैविक पहलुओं सहित।
Unit-VII — Conservative Dentistry and Endodonticsवयस्कों और बच्चों दोनों के लिए भरने की सामग्री; एंडोडोंटिक उपकरणों का तर्क, रख-रखाव व निर्जर्मीकरण; जीवित और निर्जीव पल्प का उपचार; एंडोडोंटिक्स में शल्य उपचार; दाँतों की ब्लीचिंग।
Unit-VIII — Oral Surgeryस्थानीय निश्चेतक दवाएँ; मुख शल्य में एंटीबायोटिक का उपयोग; फ़्रैक्चर की खुली और बंद सेटिंग; दाँत का फँसा रह जाना; दंत इम्प्लांट; फँसे हुए दाँत और जबड़े का टूटना; मुख शल्य की जटिलताएँ तथा उनका प्रबंधन।
Unit-IX — Oral Medicine, Radiology and Oral Pathologyलार ग्रंथियाँ और उनके रोग; दंत शरीर-रचना; मुख की रचनाओं की विकास-गड़बड़ियाँ; ऑस्टियोमाइलाइटिस; दंत क्षय और उसके परिणाम; इनैमल, डेंटिन, पल्प, सीमेंटम, PDL व हड्डी; जीवाणु और कवक संक्रमण; AIDS; मुख रेडियोलॉजी की बुनियाद; पोषण की गड़बड़ी का मुख की रचनाओं पर असर; मुख की श्लेष्मा झिल्ली; मुख व आस-पास की रचनाओं के संक्रमण; मुख-गुहा के सिस्ट और अर्बुद; कैंसर-पूर्व घाव — कारण, विकृति और उपचार; TMJ रोग तथा उनका प्रबंधन; मुख व आस-पास की रचनाओं पर विकिरण का असर; मुख सूक्ष्म-जीव विज्ञान; रक्त-विकार और उनका प्रबंधन; न्यायालयिक दंत विज्ञान; फँसे हुए दाँत और जबड़े का टूटना; तथा मुख शल्य की जटिलताएँ व प्रबंधन।
Unit-X — Orthodonticsसामान्य दंत-मिलान और उसके लक्षण; कुदंत-मिलान — प्रकार, वर्गीकरण और कारण।
Unit-XI — Pedodonticsजबड़ों का विकास और वृद्धि; दाँतों तथा आस-पास की रचनाओं का विकास और कठोर ऊतकों का कैल्सीकरण (सिद्धांतों सहित); दाँतों का निकलना और गिरना; दाँतों व आस-पास की रचनाओं में उम्र के साथ बदलाव; मनोविज्ञान — जन्म से किशोरावस्था तक मानसिक विकास और दंत चिकित्सालय में बच्चे को सँभालना; चोटिल दाँतों का उपचार; मुँह की आदतें और उनका प्रबंधन; तथा पहली स्थायी दाढ़ और स्प्लिंट का महत्व।
Unit-XII — Public Health Dentistryपीने योग्य जल के मानक, जल शुद्धिकरण और कचरा निपटान; जन-स्वास्थ्य दंत चिकित्सक का परिचय, परिभाषा, उद्देश्य और कार्य; विद्यालय तथा दंत जन-स्वास्थ्य कार्यक्रम; डेंटल काउंसिल ऑफ़ इंडिया और इंडियन डेंटल एसोसिएशन में नैतिकता।
Unit-XIII — Periodonticsमसूड़ा और पेरियोडोंटल गड़बड़ियों का वर्गीकरण; मसूड़ों की वृद्धि; इन घावों के स्थानीय व प्रणालीगत कारण; पेरियोडोंटाइटिस और उसके परिणाम; सभी मसूड़ा तथा पेरियोडोंटल गड़बड़ियों का पूर्वानुमान और उपचार; उपचार की योजना, उसके चरण और तर्क; उपलब्ध विभिन्न चिकित्सा उपाय; निवारक पेरियोडोंटिक्स; और फ़ोकल संक्रमण की अवधारणा। विषय के अंत में नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

Blood Bank — 19 यूनिट, पेज 92 से 98 ↑

उन्नीस यूनिट हैं, और उनमें से क़रीब आधी ही प्रयोगशाला विज्ञान की हैं। बाक़ी सेवा और व्यवस्था की हैं — आधान सेवाओं का संगठन व प्रबंधन, समग्र गुणवत्ता प्रबंधन, जैव-सुरक्षा, मेडिको-लीगल पहलू, और स्वचालन तथा कंप्यूटरीकरण।

मेडिको-लीगल यूनिट में दो क़ानूनों का नाम है — औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम (प्रत्यायन सहित) और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम — और उन्हीं के साथ लुक-बैक कार्यक्रम तथा दाता-सूचना भी दी गई है।

यूनिटसिलेबस उसके नीचे क्या गिनाता है
I — History of transfusion medicineइसके विकास के वैज्ञानिक पड़ाव, विश्व युद्धों का असर, और PVC बैग का विकास।
II — Scientific basis of transfusionरक्त के घटकों का जैव-रसायन और शरीर-क्रिया: लाल कोशिका, श्वेत कोशिका व प्लेटलेट का बनना और उनकी आयु; लाल कोशिकाएँ — हीमोग्लोबिन की संरचना व कार्य, चयापचयी मार्ग, झिल्ली की बनावट और कार्य; श्वेत कोशिका तथा प्लेटलेट — संरचना, कार्य व गतिकी; रक्तस्राव रुकने की शरीर-क्रिया — प्लेटलेट की भूमिका, थक्का मार्ग और फ़ाइब्रिनोलिसिस; रक्त प्रवाह व आयतन की गतिकी; लौह तथा बिलीरुबिन चयापचय। प्रतिरक्षा-विज्ञान: बुनियादी सिद्धांत — प्रतिजन, एंटीबॉडी, कॉम्प्लीमेंट, इम्यूनोग्लोबुलिन, प्रतिजन-एंटीबॉडी अभिक्रिया, तरल तथा कोशिकीय प्रतिरक्षा में लिम्फ़ोसाइट; इम्यूनोहीमैटोलॉजी में हाइब्रिडोमा तकनीक की भूमिका; प्रत्यारोपण की प्रतिरक्षा-विज्ञान; HLA और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का आनुवंशिक नियंत्रण। आनुवंशिकी: बुनियादी सिद्धांत और रक्त समूहों की आनुवंशिकी — प्रारूप व जीन-प्रारूप, वंशानुक्रम के सिद्धांत तथा समष्टि आनुवंशिकी।
III — Antigen systems in the formed elementsलाल कोशिका के प्रतिजन, श्वेत कोशिका के प्रतिजन और प्लेटलेट के प्रतिजन।
IV — Blood collection, processing and component preparationरक्तदान का प्रबंधन: दाता जुटाना, स्वैच्छिक रक्तदान प्रणाली, दाताओं की श्रेणियाँ, संभावित दाता की शिक्षा, जागरूकता व सूचना, दाता जुटाने में सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग, दाता सूचना कार्यक्रम, दाता की स्वीकार्यता की कसौटियाँ, दान से पहले, दौरान और बाद में देखभाल, तथा जटिलताओं की रोकथाम व प्रबंधन; रक्त संग्रह — थक्कारोधी, परिरक्षक, प्रक्रिया और रक्तदान शिविर। रक्त घटक: प्रकार, बनाने की विधियाँ, संकेत, मात्रा और देने का तरीक़ा; ल्यूकोडिप्लीशन और उसकी विधियाँ; गुणवत्ता नियंत्रण; पूर्ण रक्त, लाल कोशिका सांद्र, प्लाज़्मा, ग्रैन्युलोसाइट व क्रायोप्रेसिपिटेट का भंडारण; स्टेम कोशिकाएँ — परिधीय रक्त स्टेम सेल, गर्भनाल रक्त और डेंड्रिटिक कोशिका; तथा प्लाज़्मा विभाजन — विषाणु निष्क्रियकरण, एकल दाता व पूलिंग और नई विधियाँ।
V — Pre-transfusion testingअनुकूलता जाँच: ABO समूह और Rh टाइपिंग, एंटीबॉडी स्क्रीनिंग, क्रॉस-मैचिंग की विधियाँ तथा नई विधियाँ — सॉलिड फ़ेज़ और जेल तकनीक सहित; आधान-जनित संक्रमण की जाँच — उसकी पद्धति, न्यूक्लिक अम्ल प्रवर्धन तकनीक और नए उभरते रोगजनक; और आधान के लिए रक्त, घटक व प्लाज़्मा उत्पादों का चयन।
VI — Adverse effects of blood transfusionहीमोलिटिक और ग़ैर-हीमोलिटिक आधान प्रतिक्रियाओं की नैदानिक तस्वीर, रोग-क्रिया, जाँच व प्रबंधन; एलर्जिक, एनाफ़ाइलैक्टॉइड तथा एनाफ़ाइलैक्टिक प्रतिक्रियाएँ; रक्त के विभिन्न घटकों के प्रति एलोइम्यूनाइज़ेशन; आधान-जनित जीवाणु, विषाणु व परजीवी संक्रमण; आधान से जुड़ा ग्राफ़्ट-बनाम-होस्ट रोग; आधान से जुड़ी तीव्र फेफड़ा चोट; और अन्य — हीमोसाइडेरोसिस, आयतन अधिभार तथा आधान के बाद पुरपुरा।
VII — Apheresisअफ़ेरेसिस की तकनीक, उपकरण और डिस्पोज़ेबल सामग्री; प्लेटलेट, ग्रैन्युलोसाइट, प्लाज़्मा तथा स्टेम कोशिकाओं के लिए हीमाफ़ेरेसिस — दाता चयन, प्रक्रिया व जटिलताएँ; चिकित्सकीय अफ़ेरेसिस — संकेत, प्रक्रिया और जटिलताएँ; प्लाज़्मा विनिमय तथा लाल कोशिका विनिमय; और इम्यूनोऐडसॉर्प्शन की नई विधियाँ।
VIII — Autologous transfusionबुनियादी सिद्धांत, संकेत और वर्जनाएँ; पहले से रक्त जमा करना; हीमोडाइल्यूशन; ऑपरेशन के दौरान रक्त बचाना (उपकरण सहित); ऑपरेशन के बाद रक्त बचाना; और निर्दिष्ट दान।
IX — Antenatal and neonatal transfusion practiceRh असंगति तथा ABO व अन्य रक्त समूह असंगति की रोग-क्रिया, निदान और प्रबंधन; विनिमय आधान — संकेत, पद्धति व जटिलताएँ; नवजात आधान व्यवहार; दाता-संपर्क घटाने की रणनीतियाँ; संगठित दाता चयन; और गर्भाशय के भीतर आधान।
X — Immunohaematologyप्रतिरक्षा-जनित हीमोलिटिक रक्ताल्पता, प्रतिरक्षा थ्रॉम्बोसाइटोपीनिया और प्रतिरक्षा न्यूट्रोपीनिया का वर्गीकरण, निदान व प्रबंधन, तथा बार-बार आधान पाने वाले रोगियों की इम्यूनोहीमैटोलॉजिकल समस्याएँ।
XI — Haemotherapyरक्ताल्पता की रोग-क्रिया, निदान और प्रबंधन — लौह की कमी, मेगालोब्लास्टिक, अप्लास्टिक, दीर्घकालिक रोगों की रक्ताल्पता, नवजात रक्ताल्पता और वंशानुगत रक्ताल्पताएँ (थैलेसीमिया, सिकल सेल, एंज़ाइम दोष); रक्तस्राव-रोधी तंत्र के विकारों की रोग-क्रिया, निदान व प्रबंधन — हीमोफ़ीलिया, वॉन विलेब्रांड रोग, प्लेटलेट के गुणात्मक तथा मात्रात्मक विकार, DIC, TTP, HIT और अर्जित विकार; तीव्र रक्त-हानि में रोग-क्रिया, निदान और आधान सहायता — शॉक, भारी आधान, तथा सामान्य व विशेष शल्य (कार्डियोपल्मोनरी बाइपास, हीमोडायलिसिस) में आधान सहायता; और रक्त-निर्माण तथा ग़ैर-रक्त-निर्माण दुर्दमताओं में वर्गीकरण, निदान व आधान सहायता।
XII — Transplantationप्रत्यारोपण में आधान सहायता; स्टेम कोशिका प्रत्यारोपण — संग्रह, क्रायो-परिरक्षण, CD34 गिनती व गुणवत्ता नियंत्रण और चढ़ाना; अस्थि-मज्जा प्रत्यारोपण — संग्रह व प्रसंस्करण, ABO बेमेल BMT की इम्यूनोहीमैटोलॉजिकल समस्याएँ और BMT रोगियों को आधान सहायता; गुर्दा तथा यकृत प्रत्यारोपण में आधान सहायता; रक्त उत्पादों का विकिरण — संकेत, मात्रा और दुष्प्रभाव; और ऊतक केंद्र व गर्भनाल रक्त केंद्र।
XIII — Blood substitutes and haemopoietic agentsक्रिस्टलॉयड और कोलॉयड, ऑक्सीजन ढोने वाले यौगिक, हीमैटिनिक का उपयोग, रक्त-निर्माण वृद्धि कारक और प्लाज़्मा उत्पाद।
XIV — Medicolegal considerationsआधान व्यवहार के नैतिक और क़ानूनी पहलू; रक्त धब्बों की पहचान; पितृत्व जाँच; दाता को सूचना और परामर्श; लुक-बैक कार्यक्रम; औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम तथा प्रत्यायन; और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम।
XV — Total quality managementमानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पुस्तिका बनाना; अभिकर्मक व नैदानिक किट, यंत्र, कर्मचारी तथा रक्त-घटकों का गुणवत्ता नियंत्रण; गुणवत्ता आश्वासन — आंतरिक व बाहरी नियंत्रण और प्रवीणता जाँच; अस्पताल आधान समिति; चिकित्सा ऑडिट; टर्नअराउंड समय; और ISO प्रमाणन तथा GMP।
XVI — Organization and management of transfusion servicesरक्त सेवाओं का संगठन व कार्य और अस्पताल की आधान व्यवस्था; दाता जुटाना और प्रेरित करना; ब्लड मोबाइल का संचालन; आधान सेवा का विकास; भंडार नियंत्रण; और फ़ॉर्म, लेबल तथा अभिलेख तैयार करना।
XVII — Biosafetyकर्मचारी, प्रयोगशाला और उपकरणों की सुरक्षा, निर्जर्मीकरण तथा कचरे का निपटान।
XVIII — Modern biological techniquesआधान चिकित्सा में वेस्टर्न ब्लॉट, पॉलिमरेज़ चेन रिएक्शन, SSCP, SSOP और डॉट ब्लॉट संकरण के सिद्धांत, विधियाँ व प्रासंगिकता; पशु प्रयोग और म्यूज़ियम तकनीकें; माइक्रोऐरे; प्रोटियोमिक्स; और आधान चिकित्सा की अन्य नई तकनीकें।
XIX — Automation and computerisationयंत्रीकरण; स्वचालित रक्त समूह निर्धारण व प्रसंस्करण; स्वचालित संक्रमण जाँच; बारकोड का उपयोग; कंप्यूटर का उपयोग; और प्रयोगशाला तथा अस्पताल सूचना प्रणाली। विषय के अंत में नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

Hospital Administration — चार भाग और 36 विषय, पेज 98 से 105 ↑

यह सिलेबस विषय-बनाम-सामग्री की तालिका के रूप में छपा है, और पहली चौदह प्रविष्टियों तक यह चिकित्सा से ज़्यादा MBA के सिलेबस जैसा लगता है: प्रबंधन सिद्धांत, नियोजन, संगठन ढाँचा, कार्यालय प्रक्रिया, संप्रेषण, कार्मिक प्रबंधन, संगठनात्मक व्यवहार, वित्त, सामग्री, जोखिम, सूचना प्रणाली, संचालन अनुसंधान और विपणन।

भाग II इसे वापस स्वास्थ्य पर लाता है — महामारी-विज्ञान, जैव-सांख्यिकी, स्वास्थ्य अर्थशास्त्र और क़ानून — और भाग IV इस काम का व्यावहारिक हिस्सा है, जिसमें अस्पताल की नैदानिक तथा ग़ैर-नैदानिक सेवाएँ एक-एक करके गिनाई गई हैं — शवगृह, धुलाई और अग्निशमन सेवा तक।

भाग I — सामान्य प्रशासन और प्रबंधनसिलेबस उसके नीचे क्या गिनाता है
1 — Development of the management conceptप्रबंधन विज्ञान का इतिहास और विकास; परंपरागत बनाम आधुनिक प्रबंधन; प्रबंधन सिद्धांत का विकास; पेशे के रूप में प्रबंधन; प्रबंधन में नैतिकता।
2 — Management functions and toolsप्रबंधन के स्तर और कौशल; प्रबंधन के कार्य व सिद्धांत; प्रबंधक की चुनौतियाँ; प्रणाली-दृष्टिकोण; कार्यपालक की भूमिका; प्रबंधन के साधन; प्रबंधन शैलियाँ; समितियाँ।
3 — Fundamentals of planning and decision makingयोजनाओं का क्रम और प्रकार; योजना बनाने के चरण; प्रबंधकीय निर्णय-प्रक्रिया।
4 — Organisation structureसंगठन की रूपरेखा और कार्य; अस्पताल का संगठन; ढाँचे और रणनीति का मेल; कार्यात्मक संगठन; लाइन तथा स्टाफ़ अधिकार; अधिकार-प्रत्यायोजन और विकेंद्रीकरण।
5 — Office procedure and disciplinary proceedingsकार्यालय और कार्यालय प्रक्रिया की परिभाषा; सरकारी पत्र लिखना; सेवा नियम व प्रक्रिया; आचरण नियम; अनुशासनात्मक कार्यवाही।
6 — Communicationबुनियादी अवधारणाएँ; संप्रेषण के प्रकार; संप्रेषण की बाधाएँ; अच्छे संप्रेषण के सिद्धांत; स्वास्थ्य सेवा में संप्रेषण।
7 — Personnel management and human resource developmentपरिभाषा और महत्व; कार्य-अध्ययन व विधि-अध्ययन; जनशक्ति नियोजन; भर्ती और चयन; कार्य-विश्लेषण, कार्य-विवरण, कार्य-मूल्यांकन तथा कार्य-संवर्धन; प्रशिक्षण व विकास; कार्य-निष्पादन मूल्यांकन; शिकायत निवारण; अनुपस्थिति।
8 — Organisational behaviour and group dynamicsसमाजशास्त्र, मानव-विज्ञान और मनोविज्ञान की बुनियाद; कार्य-समूहों के लक्षण; OB लैब; संगठनात्मक व्यवहार की गतिकी; अभिप्रेरणा व नेतृत्व; संघर्ष प्रबंधन; लेन-देन विश्लेषण; टीम निर्माण; परिवर्तन प्रबंधन; जोहारी विंडो; शिकायत निवारण प्रणालियाँ।
9 — Financial managementGDP, GNP और राष्ट्रीय आर्थिक नीतियाँ; बजट बनाना और बजट के प्रकार; कार्यशील पूँजी व नक़दी-प्रवाह विश्लेषण; वित्तीय विवरण और अनुपात; तुलन-पत्र; लागत के घटक व लागत लेखांकन; स्थायी संपत्ति और मूल्यह्रास; ब्रेक-ईवन विश्लेषण, लागत-प्रभावशीलता तथा लागत-लाभ विश्लेषण; अस्पतालों में वित्तीय प्रबंधन; अस्पतालों में लागत रोकना।
10 — Material managementसामग्री प्रबंधन का महत्व; माँग और आपूर्ति का सिद्धांत; भंडार नियंत्रण; क्रय चक्र; निविदा प्रणाली; आर्थिक आदेश मात्रा, सुरक्षा भंडार और लीड टाइम; भंडार की प्राप्ति व निरीक्षण; वितरण, मानकीकरण और कोडीकरण; निंदन तथा निपटान; भंडार दस्तावेज़; उपकरण ऑडिट; रसद और आपूर्ति शृंखला प्रबंधन; भंडार प्रबंधन में कंप्यूटर की भूमिका।
11 — Risk managementअरगोनॉमिक्स और अस्पतालों में उसका उपयोग; व्यावसायिक जोखिम; कर्मकार क्षतिपूर्ति अधिनियम; औद्योगिक संबंधों की परिभाषा, दायरा और महत्व।
12 — Information systemसूचना प्रणाली का विश्लेषण और रूपरेखा; प्रबंधकीय नियंत्रण के साधन के रूप में HMIS।
13 — Modern management techniquesप्रबंधन की मात्रात्मक विधियाँ; संचालन अनुसंधान की तकनीकें और स्वास्थ्य सेवा में उनका उपयोग; उद्देश्य-आधारित प्रबंधन।
14 — Marketing managementविपणन की अवधारणा; विपणन रणनीति, मूल्यांकन और नियंत्रण; विपणन सूचना व शोध; बाज़ार और चिकित्सा नैतिकता; विपणन के सामाजिक पहलू; स्वास्थ्य का निजीकरण; सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP); आउटसोर्सिंग; चिकित्सा पर्यटन; कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व।
भाग II — स्वास्थ्य सेवा और स्वास्थ्य प्रशासनसिलेबस उसके नीचे क्या गिनाता है
1 — Development of health services in Indiaस्वास्थ्य सेवाओं का मूल्यांकन; स्वास्थ्य की परिभाषा और आयाम; स्वास्थ्य सेवा पर आई विभिन्न रिपोर्टों की समीक्षा।
2 — Medical sociologyस्वास्थ्य, बीमारी और उपचार के समाजशास्त्रीय पक्ष।
3 — Health and diseaseस्वास्थ्य और रोग की अवधारणा; कुशल-क्षेम की अवधारणा; रोग का प्राकृतिक क्रम और रोकथाम के विभिन्न स्तरों पर अस्पतालों की भूमिका।
4 — Research methodology in health and hospital administrationस्वास्थ्य सूचकों की अवधारणा; सर्वेक्षणों के प्रकार; समस्या चुनना और परिकल्पना बनाना; शोध प्रोटोकॉल लिखना; उद्देश्य तय करना; ग्रंथ-सूची सामग्री; प्रतिदर्श आकार तय करना; आँकड़े जुटाने की तकनीक व साधन; प्रश्नावली और साक्षात्कार तकनीक; अवलोकन तकनीक; आँकड़ों का विश्लेषण; रिपोर्ट लेखन; मापन की त्रुटियाँ।
5 — National health policyराष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017; स्वास्थ्य शिक्षा और संप्रेषण की भूमिका; स्वास्थ्य समितियाँ; राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम; सहस्राब्दि विकास लक्ष्य और सतत विकास लक्ष्य।
6 — Biostatisticsजैव-सांख्यिकी की अवधारणा; आँकड़ों की प्रस्तुति; बारंबारता बंटन; केंद्रीय प्रवृत्ति तथा विचरण के माप; प्रतिचयन और प्रतिचयन त्रुटि; परिकल्पना जाँच; सार्थकता जाँच।
7 — Epidemiologyमहामारी-विज्ञान का विकास और उपयोग; परिभाषाएँ व शब्दावली; रोग का प्राकृतिक क्रम और रोकथाम के स्तरों पर अस्पताल की भूमिका; महामारी-विज्ञान के प्रकार; अध्ययन की विधियाँ; रोग-वितरण के निर्धारक के रूप में सामाजिक-आर्थिक स्थिति और व्यवसाय; कारण-प्रभाव संबंध; अस्पताल-जनित संक्रमण की महामारी-विज्ञान; ग़ैर-संचारी रोग, आघात व सड़क दुर्घटना, मधुमेह और कोरोनरी धमनी रोग की महामारी-विज्ञान; महामारी की जाँच कैसे करें और उसके नियंत्रण में अस्पताल की भूमिका; भारत के आम रोग — उनकी महामारी-विज्ञान और रोकथाम; जाँच-छँटनी व सर्वेक्षण; और स्वास्थ्य सूचकों की अवधारणा — DALY, QALY, दिव्यांगता-समायोजित जीवन प्रत्याशा तथा भौतिक जीवन-गुणवत्ता सूचकांक सहित।
8 — Health statistics and the health information system in Indiaस्वास्थ्य सांख्यिकी की ज़रूरत; आम दरें और अनुपात; घटना व प्रचलन दर; रुग्णता और मृत्यु दर; स्वास्थ्य रिपोर्ट; सूचनीय रोग; स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली; ICD-10 और ICD-11।
9 — Hospital utilization statisticsसामुदायिक सूचकांक — बिस्तर-जनसंख्या अनुपात, अस्पताल भर्ती दर और प्रति व्यक्ति भर्ती दर; अस्पताल उपयोग सूचकांक — औसत दैनिक गणना, बिस्तर अधिभोग दर, बिस्तर परिवर्तन दर, बिस्तर परिवर्तन अंतराल और औसत ठहराव अवधि।
10 — Medical recordsपरिभाषा, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, चिकित्सा अभिलेखों के प्रकार, अभिलेख रखने की अवधि, अभिलेखों का कंप्यूटरीकरण, अभिलेख ऑडिट और चिकित्सा अभिलेख विभाग।
11 — Health economicsस्वास्थ्य अर्थशास्त्र की बुनियाद; माँग और आपूर्ति का विश्लेषण; स्वास्थ्य बीमा योजनाएँ तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ जैसे भारत में CGHS और ESI; अलग-अलग देशों की चिकित्सा सेवा व बीमा प्रणालियाँ।
12 — Population dynamicsजनसांख्यिकी और परिवार नियोजन।
13 — Ethics, laws and Actsचिकित्सा नैतिकता संहिता और चिकित्सकों के कर्तव्य; अस्पताल प्रशासन के क़ानूनी प्रश्न; अस्पतालों पर लागू क़ानून व अधिनियम; मेडिको-लीगल मामले; औद्योगिक संबंध और क़ानून; रोगी के अधिकार तथा सेवा-प्रदाता की ज़िम्मेदारी और चिकित्सकीय लापरवाही; चिकित्सा नैतिकता और जीवन के अंतिम निर्णयों के नैतिक प्रश्न; मृत्यु-पूर्व कथन; और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 32 व 157 तथा मृत्यु प्रमाणपत्र का महत्व।
भाग III — अस्पताल की योजना और अस्पताल प्रशासनसिलेबस उसके नीचे क्या गिनाता है
1 — Hospitalअस्पतालों का इतिहास और विकास; परिभाषा, प्रकार, नियंत्रण, भूमिका व कार्य; आज भारत के अस्पताल — उनकी संख्या, प्रकार, आकार, वितरण, स्वामित्व और उपयोग, तथा उससे जुड़े मुद्दे व रुझान।
2 — Nursing administrationनर्सिंग पेशे का परिचय; नर्सिंग संगठन का ढाँचा; सामाजिक और पेशेवर इकाई के रूप में नर्स; अलग-अलग तरह के अस्पतालों व विभागों में स्टाफ़ के मानक; नर्सिंग पेशे की नई दिशाएँ।
3 — Public relations in hospitalजन-संपर्क।
4 — Employees welfareकल्याण योजनाएँ; व्यावसायिक सुरक्षा; संघर्ष प्रबंधन; तनाव प्रबंधन; परामर्श।
5 — Quality in health servicesगुणवत्ता की अवधारणा; सत्यापन योग्य मानक और मापदंड; विभिन्न गुणवत्ता मॉडल; समग्र गुणवत्ता प्रबंधन; काइज़ेन; लीन प्रबंधन; स्वास्थ्य सेवा में सिक्स सिग्मा; अस्पताल तथा स्वास्थ्य सेवा प्रत्यायन।
6 — Future of hospital administrationकार्य-निष्पादन समीक्षा; अस्पताल सांख्यिकी और गुणवत्ता नियंत्रण; अस्पतालों की नई दिशाएँ; प्रशासकों की चुनौतियाँ; पुनर्संरचना; टेलीमेडिसिन; कृत्रिम बुद्धि।
7 — Hospital planningबदलती स्वास्थ्य सेवा प्रणाली और योजना, डिज़ाइन व स्थान की अवधारणा; अस्पताल की योजना के लिए स्थल सर्वेक्षण; योजना के वृहत् और सूक्ष्म पहलू; अस्पताल भवन का सिंहावलोकन; बाहरी स्थापत्य पक्ष और भू-दृश्य; भीतरी व्यवस्था; अस्पताल की स्वच्छता; प्रकाश और HVAC; डिज़ाइन संबंधी विचार — साक्ष्य-आधारित डिज़ाइन तथा आर्किटेक्ट ब्रीफ़ सहित; विशेष अस्पतालों की योजना व डिज़ाइन; नया अस्पताल लेना और चालू करना; मौजूदा अस्पताल में फेरबदल व वृद्धि; अस्पताल की इंजीनियरिंग सेवाओं की योजना; मरम्मत और रख-रखाव कार्यक्रम; नए अस्पताल के लिए उपकरण योजना; और हरित भवन।
भाग IV — नैदानिक और ग़ैर-नैदानिक सेवाओं का प्रशासनसिलेबस उसके नीचे क्या गिनाता है
1 — Clinical servicesबाह्य-रोगी सेवाएँ; शल्य सेवाएँ; ऑपरेशन विभाग; बाल, दंत व मैक्सिलो-फ़ेशियल तथा मनोरोग सेवाएँ; रेडियो-निदान और रेडियोथेरेपी सेवाएँ; दुर्घटना व आपात सेवाएँ; अस्पताल प्रयोगशाला सेवाएँ; प्रसूति-स्त्री रोग सेवाएँ; गहन चिकित्सा इकाई; डायलिसिस इकाई; डे-केयर इकाइयाँ; अस्थि-मज्जा प्रत्यारोपण इकाई; न्यूक्लियर मेडिसिन; लिथोट्रिप्सी केंद्र; भौतिक चिकित्सा केंद्र; बर्न्स सेंटर; कैंसर उपचार केंद्र; ट्रॉमा सेंटर; वृद्धावस्था सेवाएँ; एंटीबायोटिक नीति; मानक सावधानियाँ; स्पिल प्रबंधन; और स्वास्थ्य सेवा में व्यावसायिक जोखिम व सुरक्षा।
2 — Non-clinical services and administrative procedureपूछताछ और पंजीकरण; भर्ती कार्यालय; निरीक्षण तथा चिकित्सा अधीक्षक का दौरा; अस्पताल के स्थायी आदेश; अस्पताल कल्याण सेवाएँ; भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी और अस्पताल; नर्सिंग सेवाएँ; वार्ड प्रबंधन — कल्याण व मनोरंजन सुविधाओं सहित; साफ़-सफ़ाई, कीट नियंत्रण सहित; चिकित्सा भंडार और फ़ार्मेसी सेवाएँ; रक्त बैंक व आधान सेवाएँ; केंद्रीय निर्जर्मीकरण विभाग (CSSD); आहार सेवाएँ; लिनन तथा धुलाई सेवाएँ; अस्पताल इंजीनियरिंग सेवाएँ; अग्निशमन सेवाएँ; एम्बुलेंस सेवाएँ; मृत्यु से जुड़े दस्तावेज़; शवगृह; उपकरण प्रबंधन; अस्पताल के भीतर और बाहर परिवहन; जैव-चिकित्सा तथा ठोस कचरा प्रबंधन; अस्पताल सूचना प्रणाली (HIS); संक्रमण नियंत्रण की संरचनात्मक ज़रूरतें; अस्पताल फ़ॉर्मूलरी और आवश्यक दवा सूची; रोगी की प्रतिक्रिया व छुट्टी की प्रक्रिया; आपदा प्रबंधन; अग्नि सुरक्षा; अस्पताल की सुरक्षा; उद्यम संसाधन नियोजन (ERP); और अस्पताल के मीडिया संबंध व विपणन तथा ग़ैर-लाभकारी संस्थाएँ। विषय के अंत में नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

Medical Record Officer — 10 विषय-खंड, पेज 106 से 108 ↑

यह पद नैदानिक नहीं है, और उसका सिलेबस यही दिखाता है: बुनियादी चिकित्सा विज्ञान के पाँच खंड परिचय स्तर पर, फिर वे तीन खंड जो असल में इस काम को परिभाषित करते हैं — चिकित्सा कोडिंग, चिकित्सा शब्दावली और चिकित्सा अभिलेख व्यवहार — और उसके बाद अस्पताल प्रशासन तथा सांख्यिकी।

पूरी प्रविष्टि में कोडिंग वाला खंड सबसे ठोस है। उसमें ICD-10 का खंड-दर-खंड नाम है, डैगर व ऐस्टरिस्क के दोहरे कोड, नौवें और दसवें संशोधन का अंतर, ICF, तथा मृत्यु और रुग्णता कोडिंग के अलग-अलग नियम-समूह।

खंडसिलेबस उसके नीचे क्या गिनाता है
A — Anatomyसामान्य परिचय: शरीर-रचना और शरीर-क्रिया की परिभाषा, शरीर-रचना के प्रकार (तंत्र-वार सहित), शरीर का वर्णन करने वाले स्थान-सूचक शब्द और शरीर के विभिन्न भागों का वर्णन; शरीर की कोशिकाएँ व ऊतक और सामान्य ऊतक-विज्ञान; तथा त्वचा व स्तन, अस्थि-विज्ञान, जोड़, स्नायु, प्रावरणी व बर्सा, पेशी-कंकाल, हृदय-रक्तवाहिनी, श्वसन, लसीका, मूत्र-जनन, अंतःस्रावी और पाचन तंत्र, रक्त व रक्त बनाने वाले अंग, विशिष्ट इंद्रियाँ, तथा भ्रूण-विज्ञान का शारीरिक वर्णन।
B — Physiologyऊतकों के विशेषीकरण पर परिचयात्मक व्याख्यान; होमियोस्टैसिस और स्तनधारियों में उसका महत्व; रक्त तथा लसीका तंत्र; हृदय-रक्तवाहिनी तंत्र; उत्सर्जन तंत्र, त्वचा और ताप-नियमन; श्वसन तंत्र; पाचन तंत्र व चयापचय; अंतःस्रावी विज्ञान; प्रजनन तंत्र; तंत्रिका तंत्र; विशिष्ट इंद्रियाँ; और मांसपेशियाँ।
C — Pathologyनैदानिक विकृति-विज्ञान का परिचय — रोगों की परिभाषा और वर्गीकरण, तथा विभिन्न नैदानिक घावों व ट्यूमर (सौम्य और दुर्दम) का वर्गीकरण।
D — Microbiologyविषय का परिचय; रोग फैलने के तरीक़े; प्रतिरक्षा-आधारित निदान का सिद्धांत; और जीवाणु, परजीवी, विषाणु तथा कवक संक्रमण के प्रयोगशाला निदान के सिद्धांत।
E — Biochemistryजैव-रसायन की परिभाषा; शर्करा, प्रोटीन और वसा तथा उनके चयापचय की प्रारंभिक जानकारी; रक्त के घटक, एंज़ाइम सहित, और रोगों में उनका बदलना; रोगों में CSF, जलोदर द्रव व फुफ्फुसावरणी द्रव का संघटन; कार्य-जाँचें जैसे LFT, GTT, AHT और गुर्दा कार्य की क्लीयरेंस जाँच; जाँचें जैसे रेडियोसक्रिय आयोडीन ग्रहण, रेडियोइम्यूनोऐसे, प्रोटीन-बद्ध आयोडीन, pH, PO2 और PCO2; विटामिन की कमी तथा अंतःस्रावी रोगों की बुनियादी जानकारी; और मूत्र के सामान्य व असामान्य घटक।
F — Medical codingकोडिंग का अर्थ और परिभाषा; ICD-10 के खंड 1, 2 और 3 की संरचना — डैगर व ऐस्टरिस्क के दोहरे कोड और ICD-10 की परिपाटियाँ सहित; सूचकांक का सही उपयोग और कोडिंग पुस्तकें कैसे इस्तेमाल करें; नौवें और दसवें संशोधन का अंतर; वर्गीकरण परिवार तथा स्वास्थ्य वर्गीकरण, ICF सहित; ICD के विकास का इतिहास; मृत्यु-कोडिंग के नियम (संशोधन नियम सहित) और रुग्णता-कोडिंग के नियम, कोडिंग नियमों का सार, अभ्यास तथा ICD-10 कोडिंग टिप्पणियों का सार।
G — Medical terminologyचिकित्सा शब्दावली की परिभाषा, उद्देश्य और महत्व; रंग, प्रतीक और अंक; उपसर्ग, प्रत्यय व मूल शब्द; और पेशी-कंकाल, त्वचा, परिसंचरण-लसीका, श्वसन, पाचन, मूत्र-जनन, अंतःस्रावी तथा तंत्रिका तंत्र, मनोरोग, प्रसूति-स्त्री रोग और आँख-कान से जुड़े शारीरिक, नैदानिक, शल्य, रेडियोलॉजिकल व नैदानिक शब्दों और संक्षेपों का उद्गम।
Medical record practiceचिकित्सा अभिलेख का संक्षिप्त इतिहास, उसकी परिभाषा, लक्षण और महत्व; अभिलेख की सामग्री तथा घटक; चिकित्सा अभिलेख विभाग की ज़रूरत और उसके कार्य; अभिलेख की ज़िम्मेदारी — अस्पताल प्रशासक, डॉक्टर, नर्स और पैरा-मेडिकल कर्मचारी; विभाग का संगठन व प्रबंधन, चिकित्सा अभिलेख समितियाँ और चिकित्सा ऑडिट समितियाँ; अभिलेख का उद्गम व विकास, भर्ती कार्यालय के संगठन सहित; छुट्टी पाए भर्ती रोगियों के अभिलेखों का नियंत्रण तथा मात्रात्मक व गुणात्मक विश्लेषण; अभिलेखों की क्रम-संख्या, फ़ाइलिंग, पुनःप्राप्ति और भंडारण; सूचकांक व सूचकांक नियंत्रण; अभिलेखों के क़ानूनी पहलू — क़ानूनी प्रक्रिया, चिकित्सा क़ानून व नैतिकता, पहचान, चिकित्सा शव-परीक्षण, मृत्यु और मृत्यु के बाद के बदलाव तथा उनके मेडिको-लीगल पहलू, केस स्टडी सहित; अभिलेखों को रखना, सुरक्षित करना और नष्ट करना; और बाह्य-रोगी अभिलेख सेवाओं का संगठन।
Hospital administrationअस्पतालों की परिभाषा, कार्य और प्रकार; प्रबंधन के कार्य (POSDCORB); और विभिन्न अस्पताल सेवाओं का परिचय — रोगी देखभाल सेवाएँ, सहायक सेवाएँ, संस्था-परिधि सेवाएँ और सामुदायिक सेवाएँ।
General statistics for the Medical Record Officerसांख्यिकी का परिचय; आँकड़े जुटाने की विधियाँ; केंद्रीय प्रवृत्ति के माप — सरल औसत, गुणोत्तर व हरात्मक माध्य, बहुलक और माध्यिका; विचरण के माप — मानक विचलन, परास, प्रसरण और औसत विचलन; प्रतिचयन — परिभाषा तथा यादृच्छिक, क्रमबद्ध, स्तरित और गुच्छ विधियाँ; सहसंबंध व समाश्रयण — महत्व, रैखिक सहसंबंध, सहसंबंध गुणांक और रैखिक समाश्रयण; काल-श्रेणी विश्लेषण — अवधारणा, उपयोगिता और घटक; सार्थकता जाँच; आँकड़ों की चित्रात्मक प्रस्तुति; प्रायिकता — अवधारणा और परिभाषा; और सांख्यिकी के उपयोग।

Librarian — एक General Studies पेपर और पुस्तकालय विज्ञान के 10 खंड, पेज 109 से 115 ↑

इस दस्तावेज़ में Librarian अकेली ऐसी प्रविष्टि है जो एक अलग सामान्य पेपर से शुरू होती है: Paper-1, General Studies and Mental Ability, जिसमें छह विषय गिनाए गए हैं। उसके बाद पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के दस खंड बिना नंबर वाले शीर्षकों में हैं।

योजना बनाने से पहले छपा हुआ पाठ ध्यान से पढ़िए। Paper-1 में भारत का इतिहास और भूगोल "with a focus on AP" माँगा गया है, पुस्तकालय आंदोलन वाले खंड में आंध्र प्रदेश का नाम है, व्यावसायिक संघों में APLA है, और क़ानून वाले खंड में A.P. Public Library Act का विस्तृत अध्ययन माँगा गया है। ये शब्द जम्मू-कश्मीर के दस्तावेज़ में ऐसे ही छपे हैं और हमने इन्हें चुपचाप सुधारा नहीं है; उम्मीदवार भारत वाला हिस्सा पूरा तैयार करें, राज्य-विशेष हिस्सों को भर्ती करने वाले राज्य के अपने पुस्तकालय क़ानून और आंदोलन की ओर इशारा मानें, और अगर यह फ़र्क़ उनकी तैयारी बदलता हो तो JKPSC से स्पष्टीकरण माँगें।

Paper-1 — General Studies and Mental Abilityसिलेबस में दिया गया विषय
1सामान्य विज्ञान: विज्ञान और तकनीक की आज की प्रगति तथा उसके असर, रोज़मर्रा के अनुभव और अवलोकन की बातें भी — उतनी ही, जितनी किसी सुशिक्षित व्यक्ति से अपेक्षित है जिसने किसी वैज्ञानिक विषय का विशेष अध्ययन न किया हो।
2राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएँ।
3भारत का इतिहास — विषय की व्यापक सामान्य समझ, उसके सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक पहलुओं सहित, तथा (जैसा दस्तावेज़ में छपा है) AP और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन पर ज़ोर।
4विश्व भूगोल और भारत का भूगोल, तथा (जैसा छपा है) AP पर ज़ोर।
5भारतीय राजव्यवस्था और अर्थव्यवस्था — देश की राजनीतिक प्रणाली, ग्रामीण विकास, तथा भारत में नियोजन व आर्थिक सुधार सहित।
6मानसिक योग्यता, तर्कशक्ति और निष्कर्ष निकालना।
पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान का खंडसिलेबस उसके नीचे क्या गिनाता है
Library, information and societyपुस्तकालय-विज्ञान का दर्शन और नैतिकता; प्राचीन तथा आधुनिक पुस्तकालय; सामाजिक संस्था के रूप में पुस्तकालय और उसके कार्य; औपचारिक व अनौपचारिक शिक्षा में पुस्तकालय की भूमिका; उपयोगकर्ता अध्ययन और शिक्षा; व्यावसायिक शिक्षा तथा भारत में पुस्तकालय शिक्षा; पुस्तकालय विज्ञान के पाँच नियम; पुस्तकालयों के प्रकार — राष्ट्रीय, सार्वजनिक, शैक्षणिक और विशेष, तथा राष्ट्रीय पुस्तकालय कोलकाता, राष्ट्रीय विज्ञान पुस्तकालय व राज्य केंद्रीय पुस्तकालय; भारत में और (जैसा छपा है) आंध्र प्रदेश में पुस्तकालय आंदोलन; पुस्तकालय सहयोग, संसाधन-साझाकरण कार्यक्रम और भारत के लाइब्रेरी कंसोर्शिया; व्यावसायिक संघ — IFLA, ALA, ILA, IASLIC, IATLIS, APLA, ALSD के उद्देश्य, कार्य व गतिविधियाँ; संस्थाएँ — NASSDOC, DESIDOC, UNESCO, NISCAIR; क़ानून — ज़रूरत, उद्देश्य और लाभ, भारत में पुस्तकालय क़ानून, A.P. Public Library Act का विस्तृत अध्ययन तथा भारत के पुस्तकालय अधिनियमों का सिंहावलोकन; बौद्धिक संपदा अधिकार और कॉपीराइट अधिनियम; पुस्तक परिदान अधिनियम; UNESCO सार्वजनिक पुस्तकालय घोषणापत्र; सूचना का स्वरूप — आँकड़ा, सूचना और ज्ञान, सूचना के प्रकार, लक्षण, गुण, उपयोग व मूल्य, सूचना विस्फोट, सूचना समाज, सूचना विज्ञान और सूचना उद्योग; सूचना संप्रेषण — सूचना चक्र, संप्रेषण के प्रकार व मॉडल, वैज्ञानिक संप्रेषण, औपचारिक-अनौपचारिक माध्यम, बाधाएँ, और सूचना साक्षरता; सूचना का अर्थशास्त्र — सूचना की ज़रूरत, खोज-व्यवहार और सूचना का विपणन; ज्ञान प्रबंधन व डिजिटल पुस्तकालय — ज्ञान, दस्तावेज़ और कंटेंट प्रबंधन, डिजिटल पुस्तकालय, संस्थागत भंडार, ई-लर्निंग तथा वर्चुअल लाइब्रेरी; और इन्फ़ॉर्मेट्रिक्स — उद्धरण व उद्धरण विश्लेषण, लाइब्रामेट्री, बिब्लियोमेट्रिक्स, साइंटोमेट्रिक्स, वेबोमेट्रिक्स तथा ज़िप्फ़, ब्रैडफ़ोर्ड और लोटका के नियम।
Library classificationवर्गीकरण का अर्थ, ज़रूरत और उद्देश्य; आदर्शात्मक सिद्धांत; पुस्तकालय विज्ञान के पाँच नियम; विषयों का बनना, ढाँचा और विकास; प्रमुख पद्धतियों का संक्षिप्त अध्ययन — दशमलव वर्गीकरण (DC) और सार्वभौमिक दशमलव वर्गीकरण (UDC); वर्गीकरण का सामान्य सिद्धांत और रंगनाथन का योगदान; मुख्य वर्ग, कैनोनिकल वर्ग तथा आधार वर्ग; पाँच मूल श्रेणियाँ (PMEST); आइसोलेट — सामान्य आइसोलेट और उनके प्रकार, विशेष आइसोलेट व सहायक अनुसूचियाँ; सहायक क्रम के सिद्धांत; संकेतन के प्रकार; वर्गीकरण के नियम; और कॉल नंबर — वर्ग संख्या, पुस्तक संख्या व उसके प्रकार, तथा संग्रह संख्या।
Library cataloguingपुस्तकालय सूचीकरण के उद्देश्य और कार्य; सूची के प्रकार — भौतिक तथा आंतरिक रूप; सूची-प्रविष्टियों के प्रकार और उनके कार्य; विषय सूचीकरण तथा विषय-शीर्षक सूचियाँ LCSH और SLSH; केंद्रीकृत सूचीकरण; संयुक्त सूची — परिभाषा, उपयोग व कार्य; OPAC और वेब आधारित सूचियाँ; सूचीकरण में इंटरनेट का उपयोग; OCLC तथा WorldCat; सूचीकरण में मानकीकरण और मानक ISBD (M), ISBD (S), ISBD (G); और सूची-प्रविष्टियों की फ़ाइलिंग व क्रम।
Management of library and information centresप्रबंधन के कार्य व सिद्धांत और पुस्तकालयों में उनका उपयोग; वैज्ञानिक प्रबंधन; अलग-अलग पुस्तकालयों व अनुभागों की दिनचर्या और कार्य-प्रवाह; पुस्तक चयन के सिद्धांत तथा सिद्धांत-पद्धतियाँ; चयन व अर्जन, पुस्तक चयन के साधन और ऑनलाइन बुकशॉप; तकनीकी प्रसंस्करण; खुली बनाम बंद पहुँच और स्टैकिंग के सिद्धांत; परिचालन — डे-बुक, लेजर, ब्राउन और न्यूअर्क जैसी चार्जिंग-डिस्चार्जिंग विधियाँ; पुस्तकालय भवन की योजना; संदर्भ व सूचना सेवाएँ; पत्रिका प्रबंधन, अभिलेखन की विधियाँ और अर्जन की समस्याएँ; भंडार सत्यापन की विधियाँ; पुस्तकालय अभिलेखों के प्रकार; पुस्तकालय सांख्यिकी — उद्देश्य और प्रकार; पुस्तकालय समितियों के प्रकार व कार्य; नियम-उपनियम; जन-संपर्क, प्रचार और विस्तार गतिविधियाँ; प्रबंधन के संप्रदाय व शैलियाँ; पुस्तकालय एवं सूचना केंद्रों की योजना — योजना प्रक्रिया और SWOT विश्लेषण; कार्य-निष्पादन मूल्यांकन; प्रबंधन सूचना प्रणाली; परियोजना प्रबंधन और संगठनात्मक नियोजन; गैंट चार्ट तथा PERT/CPM; उद्देश्य-आधारित प्रबंधन; निर्णय प्रक्रिया; अधिकार-प्रत्यायोजन — अधिकार, उत्तरदायित्व व जवाबदेही, उसके दिशा-निर्देश और बाधाएँ; मानव संसाधन प्रबंधन — नियोजन, स्टाफ़िंग, कार्य-विश्लेषण, विवरण व मूल्यांकन, भर्ती, चयन, प्रशिक्षण और पारस्परिक संबंध; अभिप्रेरणा — अवधारणा तथा सिद्धांत; परिवर्तन प्रबंधन — असर, रणनीति और संगठन संस्कृति; वित्तीय प्रबंधन — संसाधन जुटाना, PPBS व शून्य-आधारित बजट, बजटीय नियंत्रण, लागत-प्रभावशीलता तथा लागत-लाभ विश्लेषण, लागत लेखांकन और आउटसोर्सिंग; और गुणवत्ता प्रबंधन — गुणवत्ता ऑडिट, ग्राहक संतुष्टि बनाम गुणवत्ता प्रबंधन, ISO-9000 तथा TQM।
Reference and information sources and servicesसंदर्भ सेवा — तत्काल तथा दीर्घकालिक संदर्भ सेवा, संदर्भ प्रक्रिया, संदर्भ सेवा बनाम सूचना सेवा, वर्तमान जागरूकता सेवा, SDI और रेफ़रल सेवा, सूचना स्रोत तथा संदर्भ स्रोतों का मूल्यांकन; संदर्भ स्रोत — शब्दकोश, विश्वकोश, पंचांग, वर्ष-पुस्तिका, निर्देशिका, हैंडबुक, मैनुअल, समाचार-सार, कॉनकॉर्डेंस, जीवनी व भौगोलिक सूचना स्रोत और इलेक्ट्रॉनिक संसाधन; ग्रंथ-सूची — सामान्य, विशेष, राष्ट्रीय (INB और BNB), व्यापारिक तथा विषय ग्रंथ-सूचियाँ और उन्हें बनाना; ग्रंथ-सूची नियंत्रण — UBC और UAP; सार सेवाएँ — प्रकार और सार के अंग; और अनुक्रमणिका सेवाएँ व उत्पाद, उद्धरण अनुक्रमणिका सहित।
Information technologyIT के घटक; हार्डवेयर का विकास; सॉफ़्टवेयर — ऑपरेटिंग सिस्टम (एकल व बहु-उपयोगकर्ता) और अनुप्रयोग सॉफ़्टवेयर के प्रकार; क्लाइंट-सर्वर तकनीक और सर्वर के प्रकार; संचार तकनीक — दूरसंचार, मॉडेम, स्विचिंग प्रणालियाँ (सर्कुलर, मैसेज, PSS), गेटवे, ईथरनेट, हब व स्विच, संचार माध्यम, बैंडविड्थ, मल्टीप्लेक्सिंग और ISDN; इलेक्ट्रॉनिक सूचना — इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल सूचना, डिजिटल संग्रह, डिजिटल अधिकार प्रबंधन, डिजिटीकरण और उसमें प्रयुक्त सॉफ़्टवेयर-हार्डवेयर, चित्र प्रारूप (JPEG, GIF, BMP), ध्वनि प्रारूप (MPEG, MP3, WAV), ई-दस्तावेज़, ई-संसाधनों का परिरक्षण व संग्रहण, वेबलॉग, विकी और विकिपीडिया; संचार साधन व तकनीक — फ़ैक्स, ई-मेल, टेली व वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग, वॉइस मेल, हाइपरटेक्स्ट और हाइपरमीडिया, लिस्ट-सर्व व इलेक्ट्रॉनिक समूह, ओपन सोर्स तथा स्वामित्व सॉफ़्टवेयर, डिजिटल मानक, प्रोटोकॉल, प्रारूप और अंतर-संचालनीयता, बेतार संचार — नेटवर्किंग, WAP, WLL व सेलुलर संचार, तथा डेटा संचार की अवधारणाएँ — समानांतर व क्रमिक, सिम्प्लेक्स, हाफ़ डुप्लेक्स और फ़ुल डुप्लेक्स; और इंटरनेट संचार — विशेषताएँ व विकास, कनेक्टिविटी के प्रकार, तथा डेटा सुरक्षा — वायरस और सुरक्षा उपाय।
Information retrieval systemsसूचना भंडारण व पुनर्प्राप्ति प्रणाली — घटक और IR साधन, सूचना विश्लेषण, पुनर्पैकेजिंग तथा संघनन, कंटेंट निर्माण व विकास; अनुक्रमण — सिद्धांत और सामान्य सिद्धांत, कंटेंट विश्लेषण, अनुक्रमण भाषाएँ, उनके प्रकार व लक्षण, थिसारस, पूर्व और पश्च समन्वय अनुक्रमण, चेन इंडेक्सिंग, PRECIS, यूनिटर्म, कीवर्ड तथा उद्धरण अनुक्रमण, और कंप्यूटर आधारित अनुक्रमण प्रणालियाँ; ग्रंथ-सूची विवरण के मानक — ISBD, MARC, CCF और MARC 21; मेटाडेटा — MARC तथा डबलिन कोर की विशेषताएँ; डेटा माइनिंग और डेटा वेयरहाउसिंग; डिजिटल ऑब्जेक्ट आइडेंटिफ़ायर (DOI); सूचना पुनर्प्राप्ति — हस्त व स्वचालित विधियाँ, खोज प्रक्रियाएँ और रणनीतियाँ, बूलियन तर्क, प्रश्न तैयार करना, खोज साधन — सर्च इंजन व मेटा-सर्च इंजन, विषय निर्देशिका और गाइड, तथा IR प्रणालियों के मूल्यांकन की कसौटियाँ; और कंप्यूटरीकृत सूचना सेवाएँ — मशीन अनुवाद, कंप्यूटरीकृत सार-लेखन और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण।
Research methodologyबुनियादी अवधारणाएँ — वैधता, विश्वसनीयता, वस्तुनिष्ठता, आत्मनिष्ठता और चर, तर्क व अंतर्ज्ञान; मूल तथा व्यावहारिक शोध, दल-शोध और रिले शोध; वैज्ञानिक पद्धति और भारत में LIS शोध; शोध अभिकल्प — समस्या की पहचान व निर्माण; परिकल्पना — निर्माण, प्रकार और सत्यापन; शोध विधियाँ — सर्वेक्षण, वर्णनात्मक, तुलनात्मक, ऐतिहासिक, प्रायोगिक, केस स्टडी और डेल्फ़ी तकनीक; आँकड़ों के प्रकार — प्राथमिक व द्वितीयक; आँकड़े जुटाने की विधियाँ — प्रश्नावली, साक्षात्कार और अवलोकन, तथा ऐतिहासिक/अभिलिखित द्वितीयक आँकड़े; प्रतिचयन विधियाँ — प्रायिकता प्रतिचयन (सरल यादृच्छिक, क्रमबद्ध, स्तरित), ग़ैर-प्रायिकता प्रतिचयन (कोटा, आकस्मिक, प्रयोजनपूर्ण, अपूर्ण), गुच्छ व बहुचरणीय प्रतिचयन और प्रतिदर्श आकार; आँकड़ा विश्लेषण के साधन — समस्या-माप, विश्वसनीयता व वैधता, वर्णनात्मक सांख्यिकी (माध्य, माध्यिका, बहुलक, मानक विचलन), चित्रात्मक प्रस्तुति (बार आरेख, पाई चार्ट, रेखा ग्राफ़, हिस्टोग्राम), आगमनात्मक सांख्यिकी, संबंध के माप, सहसंबंध गुणांक और काई-वर्ग तथा t जाँच से परिकल्पना परीक्षण; और शोध रिपोर्ट लिखना — विषय-वस्तु, निष्कर्षों की प्रस्तुति, स्टाइल शीट तथा मुद्रित, इलेक्ट्रॉनिक व इंटरनेट संसाधनों का उद्धरण।
Information systems and programmesएक प्रणाली के रूप में सूचना संगठन — बुनियादी अवधारणाएँ, घटक, प्रकार और लक्षण; सूचना प्रणालियों के प्रकार — पुस्तकालय, प्रलेखन केंद्र, सूचना केंद्र, डेटा बैंक, सूचना विश्लेषण केंद्र, रेफ़रल केंद्र, क्लियरिंग हाउस, अभिलेखागार तथा पुनरुत्पादन व अनुवाद केंद्र, उनके कार्य और सेवाएँ सहित; राष्ट्रीय सूचना प्रणाली की योजना व रूपरेखा — NAPLIS, NATIS और राष्ट्रीय सूचना नीति; राष्ट्रीय सूचना प्रणालियाँ — NISCAIR, DESIDOC, NASSDOC, SENDOC, CORD, NCSI, NISSAT, ENVIS; क्षेत्रीय सूचना प्रणालियाँ — ASTINFO, APINESS और SAARC (SDC); वैश्विक सूचना प्रणालियाँ — UNESCO-PGI, INIS, AGRIS, INSPEC, MEDLARS; सूचना उत्पाद व सेवाएँ — प्रकार और उदाहरण, उत्पाद बनाम सेवाएँ, तथा ग्रंथ-सूची, दस्तावेज़ आपूर्ति और अलर्ट सेवाएँ; और सूचना प्रदाता जैसे DIALOG, STN, Derwent, UMI, BLDSC और ISI।
Library automation and networkingकंप्यूटर — कार्य और कंप्यूटर कैसे काम करता है, सामान्य कंप्यूटर शब्दावली, एनालॉग व डिजिटल संकेत, संचरण माध्यम, कंप्यूटर के प्रकार तथा पीढ़ियाँ, आँकड़ा व सूचना, आँकड़ा निरूपण और फ़ाइल संगठन; कंप्यूटर के घटक — हार्डवेयर, इनपुट-आउटपुट उपकरण, भंडारण उपकरण व पोर्ट, सॉफ़्टवेयर के प्रकार, प्रोग्राम, एल्गोरिद्म और फ़्लो चार्ट, ऑप्टिकल भंडारण (CD, DVD), मल्टीमीडिया, आँकड़ा प्रसंस्करण (बैच, ऑनलाइन, टाइम शेयरिंग), प्रोग्रामिंग भाषाएँ (मशीन, असेंबली, उच्च स्तरीय), ऑपरेटिंग सिस्टम (DOS, Windows) और अनुप्रयोग सॉफ़्टवेयर (MS-Word, MS-Access); नेटवर्किंग की अवधारणा व प्रकार; इंटरनेट — ब्राउज़िंग, ब्राउज़र, सेवाएँ, सुविधाएँ, WWW और URL; पुस्तकालय व सूचना केंद्रों में कंप्यूटर; पुस्तकालय स्वचालन — स्वचालन के क्षेत्र, हार्डवेयर-सॉफ़्टवेयर चयन और उसे लागू करना, बारकोड तकनीक — डम्ब/जेनेरिक व स्मार्ट बारकोड और Code 39, तथा RFID; नेटवर्किंग — अवधारणा, ज़रूरत और लाभ, नेटवर्क के बुनियादी घटक, नेटवर्क टोपोलॉजी (स्टार, रिंग, बस, पदानुक्रमिक, ट्री, पूर्ण), बेतार नेटवर्किंग, नेटवर्क के प्रकार (LAN, MAN, WAN), सामान्य नेटवर्क (ERNET, NICNET, INFONET) और पुस्तकालय नेटवर्क (OCLC, INFLIBNET); इंटरनेट — अवधारणा, विशेषताएँ व सेवाएँ, सर्च तथा मेटा-सर्च इंजन, इंटरनेट खोज, वेब ब्राउज़र, इंटरनेट सुरक्षा, इंटरनेट संदर्भ संसाधन और इंटरनेट सूचना स्रोतों का मूल्यांकन; प्रोटोकॉल — TCP/IP, OSI, टेलनेट, FTP, HTTP और Z39.50; हाइपरटेक्स्ट व हाइपरमीडिया तथा मार्कअप भाषाएँ HTML और XML; और वेब कंटेंट विकास व वेब डिज़ाइन — Flash, Macromedia, MS-FrontPage और Dreamweaver जैसे सॉफ़्टवेयर सहित।

Casualty Medical Officer — 14 विषय-खंड, पेज 116 से 123 ↑

दस्तावेज़ की आख़िरी प्रविष्टि और सबसे फैली हुई भी: चौदह विषय-खंड, जिनमें शल्य व अस्थि-रोग, चिकित्सा, प्रसूति-स्त्री रोग, बाल-चिकित्सा, निवारक व सामाजिक चिकित्सा, न्यायालयिक चिकित्सा तथा विष विज्ञान, और उसके बाद शरीर-रचना, शरीर-क्रिया, जैव-रसायन, सूक्ष्म-जीव विज्ञान, औषध विज्ञान, ENT, नेत्र विज्ञान और रेडियोलॉजी — सब माँगे गए हैं।

छपे हुए दस्तावेज़ में गिनती खिसक गई है: अंक 3 दो बार आया है — एक बार प्रसूति-स्त्री रोग के लिए और दूसरी बार बाल-चिकित्सा के लिए — और 6 नंबर का कोई खंड है ही नहीं, सूची 5 (न्यायालयिक चिकित्सा) से सीधे 7 (शरीर-रचना) पर चली जाती है। हमने छपे हुए अंक ही रखे हैं, नए सिरे से नंबर नहीं दिए, ताकि यह पेज और PDF साथ-साथ पढ़े जा सकें। कुछ छूटा नहीं है; खंड चौदह ही हैं।

विषय-खंडसिलेबस उसके नीचे क्या गिनाता है
1 — General Surgery including Orthopaedics (35 entries)घाव भरना; द्रव और इलेक्ट्रोलाइट; पोषण सहायता; घाव संक्रमण, विशेष संक्रमण और AIDS; निर्जर्मीकरण — विधियाँ व सावधानियाँ; प्रत्यारोपण; ट्यूमर; त्वचा रोग, प्लास्टिक सर्जरी और जलना; धमनी, शिरा तथा लसीका विकार; दुर्घटना व आपात शल्य; कटा होंठ और तालु; लार ग्रंथि के विकार; टाँके; थायरॉइड; पैराथायरॉइड व अधिवृक्क ग्रंथि; स्तन; वक्ष — फेफड़े और डायाफ़्राम की चोट व रोग सहित; हृदय; यकृत; प्लीहा; पित्ताशय और पित्त नलिकाएँ; अग्न्याशय; पेरिटोनियम, ओमेंटम, मेसेंटरी तथा रेट्रोपेरिटोनियल अवकाश; छोटी व बड़ी आंत; आंत्र अवरोध; अपेंडिक्स; मलाशय; गुदा व गुदा नाल; हर्निया; मूत्र विज्ञान; अस्थि-भंग; हड्डी के सौम्य और दुर्दम ट्यूमर; हड्डी-जोड़ के चयापचयी तथा ग़ैर-संक्रामक विकार; जोड़ों का पीबदार व क्षय संक्रमण; और मेरुदंड तथा श्रोणि की चोटें और उनका प्रबंधन।
2 — Medicine (13 entries)रोगों के मुख्य लक्षण और प्रस्तुति; आनुवंशिकी; पोषण-जनित रोग; रक्त-विज्ञान; संक्रामक रोग; हृदय-रक्तवाहिनी, श्वसन, गुर्दा-मूत्र मार्ग तथा आंत्र तंत्र के रोग; प्रतिरक्षा तंत्र, संयोजी ऊतक और जोड़ों के रोग; अंतःस्रावी विज्ञान व चयापचय; तंत्रिका विकार; और पर्यावरणीय तथा व्यावसायिक जोखिम।
3 — Obstetrics and Gynaecology (74 entries)प्रसूति: परिचय, मानव अपरा व भ्रूण का विकास और अपरा-गर्भनाल की विकृतियाँ, एम्नियोटिक द्रव, गर्भावस्था के शारीरिक बदलाव, गर्भ का निदान, प्रसूति व श्रोणि परीक्षण तथा विशेष जाँचें, USG और रेडियोलॉजी की भूमिका, प्रसव-पूर्व देखभाल (गर्भावस्था में दवाओं सहित), अधिक जोखिम वाली गर्भावस्था में भ्रूण निगरानी, और सामाजिक प्रसूति; गर्भावस्था के चिकित्सा विकार — रक्ताल्पता, हृदय रोग, मधुमेह व मूत्र में शर्करा, श्वसन रोग, गर्भावस्था तथा प्रसवोत्तर काल के मानसिक विकार, पीलिया, त्वचा रोग, मूत्र-मार्ग संक्रमण (लक्षणहीन बैक्टीरियूरिया व गुर्दा विफलता सहित), और उच्च रक्तचाप विकार; प्रसव-पूर्व रक्तस्राव — प्लेसेंटा प्रीविया, आकस्मिक रक्तस्राव और अपरा से बाहर के कारण, उनका निदान व प्रबंधन; Rh कारक की विकृति, जाँच और प्रबंधन; बहु-गर्भ, अवधि पार गर्भ, गर्भ में वृद्धि रुकना, गर्भ में मृत्यु और बार-बार गर्भपात; गर्भावस्था के साथ शल्य-स्त्री रोग स्थितियाँ; असामान्य स्थिति व प्रस्तुति; सामान्य, समय-पूर्व, असामान्य और लंबा प्रसव; सामान्य श्रोणि तथा भ्रूण की खोपड़ी, सिकुड़ी श्रोणि, CPD, श्रोणि आकलन और अवरुद्ध प्रसव; जननांग व मूत्र तंत्र की चोटें, प्रसूति पक्षाघात और प्रसवोत्तर पतन; सामान्य प्रसवोत्तर काल व संक्रमण; नवजात चिकित्सा; प्रसूति प्रक्रियाएँ। स्त्री रोग: मूत्र-जनन तंत्र की शरीर-रचना व विकास, मासिक चक्र और अंडोत्सर्ग की शरीर-क्रिया, इतिहास लेना, परीक्षण व जाँच, लिंग विभेदन और इंटरसेक्स, रजोरोध, स्त्री-पुरुष दोनों की बंध्यता (नई विधियों सहित), कष्टार्तव, असामान्य गर्भाशय रक्तस्राव, गर्भपात, ट्रोफ़ोब्लास्टिक ट्यूमर, अस्थानिक गर्भ, जननांग संक्रमण, गर्भाशय का खिसकना व पीछे मुड़ना, मूत्र तथा मल असंयम, एंडोमेट्रियोसिस और एडिनोमायोसिस, सौम्य स्थितियाँ व ट्यूमर, खुजली, दीर्घकालिक वल्वल डिस्ट्रॉफ़ी, गर्भाशय के ट्यूमर, अंडाशय के ट्यूमर, जननांग कैंसर, रजोनिवृत्ति, USG व रेडियोलॉजी की भूमिका, बड़ी स्त्री रोग शल्य से पहले-बाद का प्रबंधन और जटिलताएँ, स्त्री रोग शल्य, पहली व दूसरी तिमाही में MTP, गर्भनिरोधन (स्वैच्छिक शल्य गर्भनिरोधन सहित), और जनसांख्यिकी।
3 (as printed) — Paediatrics (11 entries)बाल-चिकित्सा से जुड़े बुनियादी विज्ञान; वृद्धि और विकास; किशोरावस्था; नैदानिक जैव-सांख्यिकी; सामुदायिक बाल-चिकित्सा, राष्ट्रीय कार्यक्रम सहित; टीकाकरण; पोषण की ज़रूरतें और पोषण विकार; संक्रामक रोग, परजीवी संक्रमण सहित; नवजात, शिशु, बच्चों और किशोरों में श्वसन, आंत्र, CNS, मूत्र-जनन तथा रक्त-निर्माण तंत्र के संक्रमण; प्रणालीगत रोग; और नवजात चिकित्सा, गर्भकालीन बाल-चिकित्सा सहित।
4 — Preventive and Social Medicine (17 entries)निवारक व सामाजिक चिकित्सा का इतिहास; स्वास्थ्य और रोग की अवधारणा; पोषण व स्वास्थ्य; सामाजिक विज्ञान और स्वास्थ्य; पर्यावरण व स्वास्थ्य; व्यावसायिक स्वास्थ्य; आनुवंशिकी और स्वास्थ्य; जन-स्वास्थ्य प्रशासन; जनसांख्यिकी व परिवार नियोजन; मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य; प्रतिरक्षा और टीकाकरण; संचारी तथा ग़ैर-संचारी रोगों की महामारी-विज्ञान; विशेष रोगों के राष्ट्रीय नियंत्रण/उन्मूलन कार्यक्रम; नियमित व महत्वपूर्ण स्वास्थ्य आँकड़ों की सूचना प्रणाली; प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल — सिद्धांत, घटक और स्वास्थ्य ढाँचे में उसके स्तर; स्वास्थ्य शिक्षा; और अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य।
5 — Forensic Medicine and Toxicology (24 entries)चोटिल व्यक्ति, बलात्कार पीड़िता, गुदा-मैथुन, बलात्कार के अभियुक्त और नशे में धुत व्यक्ति की मेडिको-लीगल जाँच; मेडिको-लीगल पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया और उसकी ज़रूरी शर्तें; भ्रूण का शव-परीक्षण; मृत्यु के बाद बीता समय निकालना; कंकाल अवशेषों की जाँच; विसरा परिरक्षण की तकनीक; क़ब्र से शव निकालना और पोस्टमॉर्टम; विषाक्त रोगी में डॉक्टर के मेडिको-लीगल कर्तव्य; पंजीकृत चिकित्सक के कर्तव्य; साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया; आग्नेयास्त्र से हुई चोटों का अभिलेख; न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला; फाँसी और गला घोंटने के मामलों में पोस्टमॉर्टम; आयु प्रमाणन; चिकित्सा न्यायशास्त्र; न्यायालयिक मनोरोग विज्ञान; मृत्यु-विज्ञान; भ्रमकारी ज़हर; और आग्नेयास्त्र व बम विस्फोट की चोट।
7 — Anatomy (14 entries, a to n)हृदय-रक्तवाहिनी व लसीका तंत्र — हृदय की रक्त आपूर्ति और लसीका निकासी; थोरैसिक आउटलेट सिंड्रोम; उदर के चतुर्थांश; वर्मीफ़ॉर्म अपेंडिक्स और उसकी स्थितियाँ; पुरुष तथा स्त्री श्रोणि का अंतर; खोपड़ी की त्वचा (scalp) की परतें; गर्दन के त्रिकोण और अग्र त्रिकोण की सामग्री; परानासल साइनस और उनका व्यावहारिक पक्ष; स्वरयंत्र की उपास्थियाँ; कपाल तंत्रिकाओं के नाम; ग्रसनी चाप; हृदय पेशी का ऊतक-विज्ञान; मोटी और पतली त्वचा का अंतर; और वलयाकार अग्न्याशय।
8 — Physiologyतंत्रिका और पेशी — तंत्रिका-पेशी संचरण, पेशी प्रोटीन तथा उत्तेजन-संकुचन युग्मन; रक्त — रक्ताल्पता और रक्तस्राव रुकना; श्वसन तंत्र — श्वसन की यांत्रिकी (दो भागों में); हृदय-रक्तवाहिनी तंत्र — ECG, व्यायाम शरीर-क्रिया, हृदय-वाहिनी प्रतिवर्त, और कंकाल पेशी व त्वचा के परिसंचरण की विशेषताएँ; आंत्र-पथ — GI तंत्र का सामान्य संगठन और दस्त रोग की रोग-क्रिया; पोषण — गर्भावस्था व स्तनपान तथा शैशव और बचपन का आहार; पर्यावरणीय शरीर-क्रिया — ठंडे और गर्म परिवेश में मनुष्य; प्रजनन — प्रजनन तंत्र का परिचय; गुर्दा — रीनल ट्यूबुलर कार्य (दो भागों में) और मूत्र-त्याग; और सामान्य विषय — CSF, दर्द की शरीर-क्रिया, ब्रेन स्टेम, खिंचाव व कंडरा प्रतिवर्त, बेसल गैंग्लिया, वाणी, आँख तथा कान की क्रियात्मक शरीर-रचना (इम्पीडेंस मैचिंग सहित), श्रवण पथ, घ्राण और स्वाद की शरीर-क्रिया।
9 — Biochemistryआणविक जीव-विज्ञान और नैदानिक जैव-रसायन में उसकी भूमिका — DNA व RNA की संरचना और जैव-रासायनिक भूमिका, जीनोम, DNA-RNA चयापचय की बुनियादी अवधारणाएँ, प्रतिकृति, अनुलेखन व अनुवाद और उनके अवरोधकों का महत्व, recombinant DNA तकनीक तथा PCR और चिकित्सा में उनकी भूमिका, जीन थेरेपी, जीनोमिक्स व जैव-सूचना विज्ञान; हॉर्मोन क्रिया का जैव-रासायनिक आधार — कोशिकाओं व ऊतकों के बीच संचार, स्टेरॉइड हॉर्मोन तथा अग्न्याशय, थायरॉइड व पैराथायरॉइड हॉर्मोन की आणविक क्रिया-विधि, संकेत-संचरण, G-प्रोटीन युग्मित ग्राही और द्वितीयक संदेशवाहक, तथा लेप्टिन व एडिपोसाइटोकाइन की भूमिका; और नैदानिक जैव-रसायन — यकृत, गुर्दा, थायरॉइड, अधिवृक्क व अग्न्याशय की कार्य-जाँचें, ट्यूमर मार्कर और वृद्धि कारक, गर्भावस्था-स्तनपान के जैव-रासायनिक बदलाव, जल व इलेक्ट्रोलाइट संतुलन और असंतुलन, अम्ल-क्षार संतुलन व उसके विकार, तथा प्रयोगशालाओं का समग्र गुणवत्ता प्रबंधन — आंतरिक व बाहरी गुणवत्ता नियंत्रण और प्रत्यायन।
10 — Microbiologyसामान्य जीवाणु विज्ञान — निर्जर्मीकरण व विसंक्रमण, संवर्धन माध्यम, रोगाणु-रोधी संवेदनशीलता और जीवाणु आनुवंशिकी; तंत्र-वार जीवाणु विज्ञान — ग्राम-धनात्मक व ग्राम-ऋणात्मक जीवाणु और माइकोबैक्टीरिया; प्रतिरक्षा-विज्ञान — जन्मजात तथा अर्जित प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया, अतिसंवेदनशीलता और स्वप्रतिरक्षा; और विषाणु विज्ञान — DNA व RNA विषाणु, HIV और हर्पीज़ विषाणु।
11 — Pharmacologyसामान्य औषध विज्ञान; स्वायत्त तंत्रिका तंत्र; हृदय-रक्तवाहिनी तंत्र; केंद्रीय तंत्रिका तंत्र; और प्रतिजैविक तथा कीमोथेरेपी।
12 — ENT (10 entries)कर्णशोथ की जटिलताएँ; ओटोस्क्लेरोसिस और टिम्पैनोप्लास्टी; BERA; ध्वनिक न्यूरोमा तथा कान के अन्य ट्यूमर; FESS/ESS; स्वरयंत्र के तंत्रिका रोग; आवाज़ बैठना और ट्यूमर; ट्रेकियोस्टॉमी; थायरॉइड के रोग व ट्यूमर; और AIDS के ENT लक्षण।
13 — Ophthalmology (5 groups, 15 entries)पलकें — एंट्रोपियन, एक्ट्रोपियन और पलक का गिरना; कॉर्निया — कॉर्नियल अल्सर, केराटोकोनस और लेसिक लेज़र; लेंस — बुढ़ापे का मोतियाबिंद, खिसका हुआ लेंस और मल्टीफ़ोकल IOL; रेटिना — मधुमेह रेटिनोपैथी, मैक्युलर होल और रेटिना का अलग होना; और दृष्टि तंत्रिका — तंत्रिका क्षय, पैपिलेडेमा तथा फैली हुई पुतली।
14 — Radiology (7 entries)विकिरण सुरक्षा और ख़तरे; X-ray, अल्ट्रासाउंड, CT तथा MRI की बुनियाद; PET और SPECT की बुनियाद; CT, MRI व PET के नैदानिक संकेत और वर्जनाएँ; कंट्रास्ट मीडिया, उनकी प्रतिकूल प्रतिक्रियाएँ और उनका प्रबंधन; IVP, HSG व बेरियम अध्ययन जैसी रेडियोलॉजिकल जाँचें; और अल्ट्रासोनोग्राफी तथा डॉप्लर। विषय के अंत में नवीनतम प्रगति भी शामिल है।

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ऊपर की हर पंक्ति jkpsc.nic.in पर मौजूद आधिकारिक PDF से आई है, जिसे पेज-दर-पेज पढ़ा गया है। शब्द हमारे हैं; दायरा दस्तावेज़ का है। जहाँ दस्तावेज़ किसी विषय का नाम लेता है, वहाँ यहाँ एक पंक्ति है — कुछ भी 'छोटा है' कहकर छोड़ा नहीं गया, और कुछ भी 'लगता है इसमें आता होगा' कहकर जोड़ा नहीं गया।

Anatomy की Unit-I से Unit-VI स्कैन किए गए कवर पेज पर हैं, जिसमें टेक्स्ट परत है ही नहीं। वे पंक्तियाँ उसी पेज के 300 dpi रेंडर से पढ़ी गईं और फिर तस्वीर से आँख द्वारा मिलाई गईं। बाक़ी हर विषय दस्तावेज़ के अपने टेक्स्ट से लिया गया है।

जहाँ छपा हुआ दस्तावेज़ ख़ुद से उलटा पड़ता है या उसमें साफ़ चूक है — Casualty Medical Officer की सूची में दोहरा नंबर, ग़ायब खंड 6, 18B में खिसकी हुई उप-गिनती, प्रसूति-स्त्री रोग की प्रविष्टि में राजस्थान का ज़िक्र और Librarian पेपर में आंध्र प्रदेश के ज़िक्र — वहाँ हमने जो छपा है वही रखा है और उसी खंड में बता दिया है, चुपचाप सुधार नहीं दिया। जो पेज आधिकारिक दस्तावेज़ को चुपके से ठीक कर देता है, वह आपको वह चीज़ पढ़ा देता है जो परीक्षक ने छापी ही नहीं।

यह पेज संक्षेप करता है। PDF में जो यूनिट आयोग के शब्दों में कई पंक्तियों तक चलती है, वह यहाँ एक सघन पंक्ति में आ सकती है — पर उसमें नाम लिया गया हर विषय मौजूद रहता है। अपने पेपर में क्या-क्या है यह जानने और अपनी तैयारी जाँचने के लिए यह पेज पढ़िए; अपने विषय के ठीक-ठीक छपे शब्दों के लिए ऊपर दी गई सूची से पेज नंबर लेकर PDF खोलिए।

यह पेज उच्च शिक्षा विभाग के Assistant Professor पदों को नहीं समेटता, क्योंकि यह दस्तावेज़ ही उन्हें नहीं समेटता। अगर आप मनोविज्ञान, लोक प्रशासन या अंग्रेज़ी जैसे विषय के कॉलेज शिक्षक पद की तैयारी कर रहे हैं, तो jkpsc.nic.in के syllabus वाले हिस्से में अपने विषय का सिलेबस देखिए — वे विषय-दर-विषय अलग छपते हैं, एक जोड़ी हुई फ़ाइल में नहीं।

  • इस्तेमाल किया गया आधिकारिक दस्तावेज़: Syllabus for Written test (Objective Type) for various posts of Assistant Professor in Health and Medical Education Department, 123 पेज, JKPSC द्वारा jkpsc.nic.in/Pdf/Downloader1.ashx?nid=17993&type=n पर प्रकाशित
  • उस स्कैन के कवर पर हाथ से लिखा नोट है: Annexure to notification no. 30-PSC (DR-P) of 2022, Dated: 31-12-2022 (Page. 1-123)
  • किसी भी पेज के भरोसे पढ़ाई की योजना बनाने से पहले — इस पेज के भरोसे भी — jkpsc.nic.in की PDF से मिला ज़रूर लीजिए।

महत्वपूर्ण लिंक

FAQ — आपके सवाल, सीधे जवाब

यह परीक्षा कौन-सी संस्था कराती है?

Jammu & Kashmir Public Service Commission (JKPSC)

यह किस पद के लिए है?

Assistant Professor (Medical Education Department)

चयन प्रक्रिया क्या है?

आधिकारिक सिलेबस दस्तावेज़ में नहीं बताया गया

इसकी आधिकारिक वेबसाइट कौन-सी है?

jkpsc.nic.in

JKPSC की और अपडेट

और सिलेबस

आधिकारिक स्रोत: आधिकारिक वेबसाइट ↗. कोई भी कदम उठाने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर पुष्टि ज़रूर करें।

अस्वीकरण: SarkariReady किसी सरकारी संस्था से संबद्ध नहीं है। यह लेख आधिकारिक नोटिफिकेशन के आधार पर लिखा गया है — कोई भी कदम उठाने से पहले तिथियां, फीस और पात्रता हमेशा आधिकारिक वेबसाइट पर जांच लें। कोई गलती दिखे तो हमें बताएं, हम तुरंत सुधारेंगे।

किसी एजेंट या वेबसाइट को सरकारी नौकरी के लिए पैसे न दें — शिकायत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर करें।