MPSC सहायक रासायनिक विश्लेषक (Assistant Chemical Analyser) सिलेबस — पूरे टॉपिक, आसान हिंदी में
सहायक रासायनिक विश्लेषक (Assistant Chemical Analyser), न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला संचालनालय — सामान्य राज्य सेवा, गट-ब, गृह विभाग — का MPSC सिलेबस एक टॉपिक-सूची है: 4 विषय-खंड और उनके नीचे 17 उप-प्रविष्टियाँ, और हर एक इस पेज पर दी गई है। इसमें न अंक लिखे हैं, न समय, न negative marking।
आधिकारिक सिलेबस पेज खोलेंPDF आधिकारिक साइट पर खुलेगा। नीचे उसी सिलेबस का हर टॉपिक आसान भाषा में समझाया गया है — पढ़ने के लिए PDF खोलना ज़रूरी नहीं।
आधिकारिक सिलेबस से तैयार · आधिकारिक लिंक से पुष्टि कर सकते हैं
यह MPSC दस्तावेज़ है क्या, और यह क्या तय करता है ↑
इस पद के लिए महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग जो दस्तावेज़ प्रकाशित करता है वह छोटा और बहुत सीधा है। वह पद का नाम बताता है, वह संस्थान बताता है जिसके अंतर्गत पद आता है — Directorate of Forensic Science Laboratories यानी न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला संचालनालय — सेवा और गट बताता है, General State Services तथा Group-B, और नियंत्रक विभाग बताता है, जो गृह विभाग है। इसके बाद वह ठीक एक काम करता है: 2 पन्नों में एक ही तालिका छापता है, जिसमें Sr. No. का एक कॉलम है और Topic का दूसरा, और उसमें विषय गिना दिए गए हैं।
यह ढाँचा जितना दिखता है उससे ज़्यादा मायने रखता है। यह राज्य की न्यायालयिक विज्ञान व्यवस्था के भीतर एक प्रयोगशाला का पद है, और चारों विषय-खंड विश्लेषणात्मक तकनीक के ही खंड हैं: उपकरण क्या नापता है, नमूना कैसे तैयार होता है, और परिणाम को भरोसेमंद कब माना जाए। दस्तावेज़ में न कोई सामान्य अध्ययन का खंड है, न कोई भाषा का प्रश्नपत्र, न करेंट अफ़ेयर्स। किसी भी भर्ती का पैटर्न जो भी निकले, यह फ़ाइल इतना साफ़ कह रही है कि परखा जाने वाला विषय-ज्ञान न्यायालयिक केसवर्क पर लागू विश्लेषणात्मक रसायन है।
| बात | दस्तावेज़ में जो दिखता है |
|---|---|
| पद | Assistant Chemical Analyser (सहायक रासायनिक विश्लेषक) |
| संस्थान | Directorate of Forensic Science Laboratories (न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला संचालनालय) |
| सेवा और गट | General State Services, Group-B (सामान्य राज्य सेवा, गट-ब) |
| नियंत्रक विभाग | Home Department (गृह विभाग) |
| कहाँ प्रकाशित है | महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की अपनी वेबसाइट mpsc.gov.in पर, उसकी परीक्षा सिलेबस सूची में |
| फ़ाइल में है क्या | एक ही तालिका — Sr. No. का कॉलम और Topic का कॉलम, कुल 2 पन्नों में |
| सिलेबस कितना बड़ा है | 4 क्रमांकित टॉपिक, और उनके नीचे 17 अक्षर-वाली प्रविष्टियाँ (यह गिनती हमारी है — दस्तावेज़ कोई कुल नहीं बताता) |
| परीक्षा पैटर्न | इस दस्तावेज़ में नहीं है: न अंक, न समय, न प्रश्नों की संख्या, न negative marking, न कोई न्यूनतम प्रतिशत |
| फ़ाइल की भाषा | पूरी अंग्रेज़ी — जो प्रति हमने पढ़ी उसमें मराठी में कुछ भी नहीं है |
| फ़ाइल पर तारीख़ | 13 अगस्त 2026 — यही तारीख़ MPSC की सिलेबस सूची में इस फ़ाइल के सामने दर्ज है, और यही PDF के भीतर का निर्माण-समय भी है |
चारों विषय-खंड, एक नज़र में ↑
प्रविष्टियों में उतरने से पहले पूरा सिलेबस एक जगह। बीच का कॉलम MPSC का अपना शब्द-प्रयोग है, बिना बदले। दाएँ कॉलम की गिनती हमारी है: दस्तावेज़ अपने टॉपिक क्रमांकित तो करता है, पर उनके नीचे की अक्षर-वाली प्रविष्टियाँ कभी गिनता नहीं — इसलिए हमने ख़ुद फ़ाइल से गिनी हैं और उन्हें अपनी निकाली हुई संख्या बताकर ही लिख रहे हैं, आधिकारिक आँकड़ा बताकर नहीं।
सूची का आकार ख़ुद एक जानकारी है। Analytical Chemistry पूरे सिलेबस की विधि-शब्दावली तय करता है — नमूना लेना, अंशांकन, सांख्यिकी, अनुमापन, भारात्मक विश्लेषण, पृथक्करण — और उसके बाद के तीनों खंड उसी शब्दावली को क्रम से अकार्बनिक नमूनों, कार्बनिक नमूनों और जैविक नमूनों पर लगाते हैं। Biochemistry सबसे बड़ा खंड है, और वही रोज़ के न्यायालयिक केसवर्क के सबसे पास बैठता है।
| क्रमांक | टॉपिक, दस्तावेज़ के अपने शब्दों में | उसके नीचे की प्रविष्टियाँ (हमारी गिनती) |
|---|---|---|
| 1 | Analytical Chemistry | 5, अक्षर a से e तक |
| 2 | Analytical Techniques in Inorganic Chemistry for Different Inorganic Samples | 3, अक्षर a से c तक |
| 3 | Analytical Techniques in Organic Chemistry | 3, अक्षर a से c तक |
| 4 | Analytical Techniques in Biochemistry | 6, अक्षर a से f तक |
यह दस्तावेज़ कोई परीक्षा पैटर्न नहीं देता, और हम अपनी तरफ़ से नहीं गढ़ेंगे ↑
सिलेबस ढूँढ़ने वाले ज़्यादातर लोग असल में पैटर्न चाहते हैं: कितने प्रश्न, कितने अंक, कितना समय, negative marking है या नहीं। यह फ़ाइल इनमें से किसी का जवाब नहीं देती। यही बात साफ़-साफ़ कह देना अकेला ईमानदार रास्ता है, क्योंकि दूसरा रास्ता — कहीं और से उठाकर अंकों की एक भरोसे भरी तालिका बना देना और उसे सिलेबस बता देना — वही है जिससे उम्मीदवार ऐसे प्रश्नपत्र की तैयारी कर बैठता है जो होता ही नहीं।
यह फ़ाइल MPSC की परीक्षा सिलेबस सूची में प्रकाशित है, उस विज्ञापन से अलग जो कोई भर्ती शुरू करता है — और पढ़ने में भी वैसी ही है: यह तय करती है कि क्या-क्या पूछा जा सकता है, यह नहीं कि प्रश्नपत्र किस आकार का होगा। अंक, समय, प्रश्नों की संख्या, negative marking, पात्रता, आयु, शुल्क, रिक्तियाँ और तारीख़ें — ये सब किसी ख़ास भर्ती के विज्ञापन की चीज़ें हैं। अगर कोई पेज इस पद के लिए अंक-योजना बताए और स्रोत में सिलेबस का नाम ले, तो वह इस दस्तावेज़ का नाम नहीं ले रहा।
| उम्मीदवार क्या जानना चाहता है | क्या यह दस्तावेज़ बताता है? |
|---|---|
| कौन-कौन से टॉपिक पूछे जा सकते हैं | हाँ — चारों विषय-खंड और उनके नीचे की हर प्रविष्टि, नीचे पूरी दी गई है |
| कुल अंक | नहीं। दस्तावेज़ में अंक लिखे ही नहीं हैं |
| प्रश्नपत्र का समय | नहीं |
| प्रश्नों की संख्या | नहीं |
| Negative marking | नहीं। यह शब्द पूरे दस्तावेज़ में कहीं नहीं आता |
| न्यूनतम या अर्हक प्रतिशत | नहीं |
| प्रश्नपत्र का माध्यम | नहीं |
| पात्रता, आयु, शुल्क, रिक्तियाँ, तारीख़ें | नहीं। ये विज्ञापन की चीज़ें हैं, सिलेबस फ़ाइल की नहीं |
एक नज़र में
| संचालक संस्था | Maharashtra Public Service Commission (MPSC) |
| पद का नाम | Assistant Chemical Analyser |
| विभाग | Directorate of Forensic Science Laboratories (DFSL), Home Department, Government of Maharashtra |
| आधिकारिक वेबसाइट | mpsc.gov.in |
| राज्य | Maharashtra |
टॉपिक 1 — Analytical Chemistry, पूरी पाँचों प्रविष्टियाँ ↑
दस्तावेज़ का पहला टॉपिक, एक-एक प्रविष्टि करके। बायाँ कॉलम MPSC का अपना शब्द-प्रयोग है, ज्यों का त्यों, उसके विराम-चिह्नों सहित। दायाँ कॉलम हमारी समझ है कि हर प्रविष्टि असल में क्या माँग रही है और उसे कैसे पढ़ना चाहिए।
यह खंड आगे आने वाली हर चीज़ की विधि-शब्दावली है। अंशांकन, सांख्यिकी और पृथक्करण के जो विचार यहाँ रखे गए हैं, उनके बिना बाक़ी तीनों खंड समझ में ही नहीं आते।
| आधिकारिक सिलेबस में जो लिखा है | इसमें क्या आता है और तैयारी कैसे करें |
|---|---|
| Basic aspects - Sampling-solid, liquid and gas, molecular and equivalent weight, molarity, molality, normality, solution preparations in w/w, w/v and v/v, mole concept, concentrations, ppm, ppb and ppt etc. Calibration and validation- Calibration curve, regression analysis, external standard, internal standard, standard addition method etc। | Basic aspects (बुनियादी बातें) और Calibration and validation (अंशांकन तथा सत्यापन) — एक ही entry में दो अलग काम हैं, और दोनों गणित के हैं जो परीक्षा में समय की तंगी में करने पड़ते हैं। इसमें ठोस, द्रव और गैस का sampling, आणविक तथा तुल्यांकी भार, molarity, molality और normality, w/w, w/v तथा v/v में विलयन बनाना, mole concept, और ppm, ppb तथा ppt जैसी सांद्रता की इकाइयाँ आती हैं; दूसरे हिस्से में calibration curve, regression analysis, external standard, internal standard और standard addition method हैं। सीधी बात यह है कि molarity, molality और normality के बीच बिना अटके आना-जाना आना चाहिए, और बोतल के लेबल पर लिखे w/w, w/v तथा v/v का असली मतलब पता होना चाहिए — बहुत सूक्ष्म मात्रा वाली जाँच इन्हीं इकाइयों में लिखी जाती है। standard addition method को नाम से नहीं, कारण से याद रखिए: यही वह तरीक़ा है जो तब काम आता है जब नमूने का matrix ख़ुद माप में दख़ल दे रहा हो। |
| Statistical treatment of the results - accuracy, precision, sensitivity, detection limit. Errors and their types, mean, median, standard deviation, relative standard deviation, Gaussian curve, t-test, F-test, confidence interval. Criteria for selection of analytical methods- Accuracy, precision, sensitivity, selectivity, specificity, detection limit। | Statistical treatment of the results (परिणामों का सांख्यिकीय विश्लेषण) — यही वह entry है जो किताबी उम्मीदवार और प्रयोगशाला वाले उम्मीदवार को चुपचाप अलग कर देती है। इसमें accuracy, precision, sensitivity और detection limit; त्रुटियाँ और उनके प्रकार, mean, median, standard deviation, relative standard deviation, Gaussian curve, t-test, F-test तथा confidence interval; और विधि चुनने के मानदंड आते हैं। ध्यान दीजिए कि accuracy और precision पर्यायवाची नहीं हैं, और यही फ़र्क़ पूछा जाता है; इसी तरह standard deviation और relative standard deviation का अंतर, तथा यह कि t-test औसतों की तुलना के लिए है और F-test प्रसरण की तुलना के लिए। detection limit इस entry में दो बार आया है — एक बार आँकड़े के रूप में और एक बार विधि चुनने की कसौटी के रूप में। यह दोहराव दस्तावेज़ का अपना इशारा है: आपको बताना आना चाहिए कि कोई विधि इस नमूने के लिए उपयुक्त क्यों है, सिर्फ़ उसका नाम गिना देना काफ़ी नहीं। |
| Titrimetry - Different types of titrations such as acid-base, complexometric, redox, precipitation, etc. different standards used for standardisation such as primary standard and secondary standard. Potentiometric and conductometric titration and their applications। | Titrimetry (अनुमापन / आयतनमिति) — पुरानी गीली रसायन विधि, जो आज भी फ़ोरेंसिक प्रयोगशाला में चलती है और इसीलिए आज भी पूछी जाती है। इसमें acid-base, complexometric, redox तथा precipitation जैसे अनुमापन के प्रकार, मानकीकरण में काम आने वाले primary standard और secondary standard, तथा potentiometric व conductometric titration और उनके उपयोग आते हैं। किसी भी titration को इन चार परिवारों में से एक में रख पाना, और यह बता पाना कि उसका अंतिम बिंदु किस चीज़ से पहचाना जाता है — यही इस entry का मुख्य कौशल है। primary और secondary standard का फ़र्क़ बार-बार पूछा जाने वाला छोटा सवाल है: primary standard इतना शुद्ध और स्थिर होता है कि सीधे तौलकर इस्तेमाल हो जाए, जबकि secondary standard को पहले किसी primary standard के सामने मानकीकृत करना पड़ता है। potentiometric और conductometric अनुमापन ठीक वहीं काम आते हैं जहाँ रंग वाला indicator हार जाता है — रंगीन, धुँधले या बहुत पतले घोल में। |
| Gravimetric and thermogravimetric analysis - Precipitation, different types of precipitants used in gravimetric analysis. pH requirement for precipitation. Quantitative analysis. Thermogravimetric analysis-Mass spectrometry for qualitative and quantitative analysis. Problems। | Gravimetric and thermogravimetric analysis (भारात्मक तथा तापभारात्मक विश्लेषण) — भार नापकर मात्रा निकालने का तरीक़ा, इसलिए पूरी entry इसी पर टिकी है कि जिस अवक्षेप को आप तौल रहे हैं वह भरोसेमंद कैसे बने। इसमें अवक्षेपण, gravimetric analysis में काम आने वाले अलग-अलग precipitant, अवक्षेपण के लिए ज़रूरी pH, मात्रात्मक विश्लेषण, तथा thermogravimetric analysis और गुणात्मक-मात्रात्मक विश्लेषण के लिए mass spectrometry आते हैं। pH ग़लत हुआ तो दो में से एक नुक़सान तय है — या तो अवक्षेपण अधूरा रह जाएगा, या साथ में अशुद्धि भी बैठ जाएगी। दो बातें ग़ौर करने लायक़ हैं: दस्तावेज़ ने mass spectrometry को इसी entry से जोड़ा है, और entry का आख़िरी शब्द Problems है — यानी यहाँ वर्णन नहीं, गणना माँगी जा रही है। |
| Separation techniques - Extraction, different distillation methods such as vacuum distillation, steam distillation, fractional distillation etc. Purification and identification of substances। | Separation techniques (पृथक्करण की विधियाँ) — नमूना तैयार करने का असली बेंच-कौशल, और यहाँ गिनाई गई हर विधि का अपना कारण है। इसमें extraction, तथा vacuum distillation, steam distillation और fractional distillation जैसी आसवन विधियाँ, और पदार्थों का शुद्धिकरण व पहचान आते हैं। vacuum distillation उन यौगिकों के लिए है जो उबलने से पहले ही विघटित हो जाते हैं; steam distillation उन वाष्पशील यौगिकों के लिए है जो पानी में नहीं घुलते — सुगंधित तेलों और कई विषों का पारंपरिक रास्ता; और fractional distillation उन मिश्रणों के लिए जिनके क्वथनांक पास-पास बैठते हैं। entry का अंत शुद्धिकरण और पहचान पर होता है, और यही इस पूरे खंड का मक़सद है: परिणाम उतना ही भरोसेमंद होगा जितना शुद्ध वह नमूना था जिस पर माप की गई। |
टॉपिक 2 — Analytical Techniques in Inorganic Chemistry, पूरी तीनों प्रविष्टियाँ ↑
दस्तावेज़ में इस टॉपिक का पूरा नाम Analytical Techniques in Inorganic Chemistry for Different Inorganic Samples है, और आख़िरी शब्द ही निर्देश हैं: हर प्रविष्टि किसी सिद्धांत से नहीं, किसी नमूने के प्रकार से बँधी हुई है।
| आधिकारिक सिलेबस में जो लिखा है | इसमें क्या आता है और तैयारी कैसे करें |
|---|---|
| Spectroscopy and chromatography for inorganic sample analysis - Atomic absorption, atomic emission, and inductively coupled plasma-atomic emission and Mass spectrometry (ICP-AES and ICP-MS). UV-Visible spectroscopy with qualitative and quantitative analysis, Jobs Method. Applications. Ion exchange chromatography- Analysis of various inorganic cations and anions। | Spectroscopy and chromatography for inorganic sample analysis (अकार्बनिक नमूनों के लिए स्पेक्ट्रोस्कोपी तथा क्रोमैटोग्राफी) — तत्वों की पहचान और उनकी मात्रा नापने वाली entry। इसमें atomic absorption, atomic emission, ICP-AES तथा ICP-MS, गुणात्मक-मात्रात्मक विश्लेषण के साथ UV-Visible spectroscopy, Jobs Method, और अकार्बनिक धनायनों तथा ऋणायनों के विश्लेषण के लिए ion exchange chromatography आते हैं। atomic absorption और atomic emission एक ही परमाणु संक्रमण को दो तरफ़ से देखते हैं — एक सोखी गई रोशनी नापता है, दूसरा निकली हुई। ICP-AES तथा ICP-MS उसी विचार के प्लाज़्मा-स्रोत वाले रूप हैं, और बहुत सूक्ष्म मात्रा तक ICP-MS ही पहुँचता है। Job's method, जो दस्तावेज़ में Jobs Method छपा है, संकुल का अनुपात निकालने की सतत-परिवर्तन विधि है और UV-Visible का जाना-पहचाना गणना वाला सवाल है। असल केसवर्क में ion exchange वाला हिस्सा पानी, मिट्टी और अवशेष के नमूनों पर लगता है। |
| Microscopy for inorganic sample analysis - Trace and heavy metal, glass, soil, and liquid samples analysis using scanning electron microscopy (SEM), Energy dispersive spectroscopy (EDS) | Microscopy for inorganic sample analysis (अकार्बनिक नमूनों के लिए सूक्ष्मदर्शिकी) — इसे एक ही वाक्य में याद रखिए: तस्वीर के साथ तत्वों की पहचान। इसमें scanning electron microscopy (SEM) और energy dispersive spectroscopy (EDS) की मदद से trace तथा भारी धातु, काँच, मिट्टी और द्रव नमूनों का विश्लेषण आता है। SEM बहुत ऊँचे आवर्धन पर तस्वीर देता है, और उससे जुड़ा EDS ठीक उसी बिंदु की तात्विक संरचना बता देता है जिसे आप देख रहे हैं। यही जोड़ी कणों वाली जाँच में सबसे भरोसेमंद मानी जाती है — गोली चलने के अवशेष, काँच और पेंट के टुकड़े, भारी धातु के निशान। दस्तावेज़ ने चार तरह के नमूने अलग से गिनाए हैं, इसलिए हर नमूने के लिए एक पंक्ति तैयार रखिए कि वह पहचान में क्या जोड़ता है। |
| Electroanalytical techniques- Coulometry and its types, amperometry, voltammetry, cyclic voltammetry, stripping voltammetry, polarography, | Electroanalytical techniques (वैद्युत-विश्लेषणात्मक विधियाँ) — पूरी entry को एक ही सवाल से खोलिए: क्या स्थिर रखा जा रहा है और क्या नापा जा रहा है। इसमें coulometry और उसके प्रकार, amperometry, voltammetry, cyclic voltammetry, stripping voltammetry तथा polarography आते हैं। coulometry आवेश गिनता है और Faraday के नियम से सीधे पदार्थ की मात्रा दे देता है। amperometry स्थिर विभव पर धारा नापता है। voltammetry विभव को बदलते हुए धारा पढ़ता है — इसीलिए cyclic voltammetry अभिक्रिया की उत्क्रमणीयता बताता है, और stripping voltammetry, जिसमें पहले जमाव और फिर विभव-स्वीप होता है, धातुओं की बहुत सूक्ष्म मात्रा तक पहुँच जाता है। ध्यान रहे कि यह entry दस्तावेज़ में अल्पविराम पर ख़त्म होती है, इसलिए polarography को आख़िरी गिनाया गया उदाहरण मानिए, विषय का अंत नहीं। |
टॉपिक 3 — Analytical Techniques in Organic Chemistry, पूरी तीनों प्रविष्टियाँ ↑
तीन प्रविष्टियाँ, पर आकार में बराबर नहीं। पृथक्करण वाली प्रविष्टि अकेले TLC से लेकर solid phase extraction तक जाती है और लगभग हर क़दम पर एक क्रोमैटोग्राफ़िक विधि का नाम लेती है — पूरे सिलेबस की सबसे बड़ी इकाई यही है।
| आधिकारिक सिलेबस में जो लिखा है | इसमें क्या आता है और तैयारी कैसे करें |
|---|---|
| Spectroscopy - Theory and application of UV Visible, IR(FTIR), Raman, NMR, Mass spectrometry, Interpretation of spectra, Structure Elucidation | Spectroscopy (स्पेक्ट्रोस्कोपी) — मंज़िल है structure elucidation यानी संरचना का निर्धारण, और ये तकनीकें उस तक पहुँचने के रास्ते हैं। इसमें UV Visible, IR (FTIR), Raman, NMR तथा mass spectrometry का सिद्धांत और उपयोग, स्पेक्ट्रम की व्याख्या, और संरचना निर्धारण आते हैं। हर तकनीक अलग सवाल का जवाब देती है: UV-Visible संयुग्मन बताती है, IR और Raman क्रियात्मक समूह, NMR कार्बन-हाइड्रोजन का ढाँचा, और mass spectrometry अणुभार तथा टुकड़ों का पैटर्न। IR और Raman एक-दूसरे की जगह नहीं लेतीं, एक-दूसरे की पूरक हैं — जो कंपन एक में कमज़ोर दिखता है वही दूसरी में साफ़ आता है। परीक्षा में असली कौशल जोड़-मिलाकर व्याख्या करना है: दिए गए सारे स्पेक्ट्रम पर खरी उतरने वाली एक ही संरचना निकालना। अभ्यास उन्हीं यौगिक-वर्गों पर कीजिए जो इस पद के काम में सचमुच आते हैं। |
| Separation techniques – Theory and application in chemical analysis of TLC, HPTLC, GC, GCMS, LCMS, HRMS, column chromatography, paper chromatography. HPLC- Ion exchange chromatography, Adsorption chromatography, Normal and Reverse phase chromatography, solid phase extraction, | Separation techniques तथा HPLC (पृथक्करण की विधियाँ) — दस्तावेज़ की सबसे लंबी तकनीक-सूची, और इसे आठ अलग-अलग नोट्स के बजाय एक तुलना-तालिका से याद करना बेहतर है: stationary phase, mobile phase, क्या पकड़ में आता है, और किस नमूने पर चलती है। इसमें TLC, HPTLC, GC, GCMS, LCMS, HRMS, column chromatography तथा paper chromatography, और HPLC के अंतर्गत ion exchange, adsorption, normal तथा reverse phase chromatography और solid phase extraction आते हैं। TLC और HPTLC छानने वाला पहला क़दम हैं। GC वाष्पशील पदार्थों के लिए है, और GC-MS वह पुष्टि करने वाली जोड़ी है जो retention time और mass spectrum एक साथ दे देती है। जो यौगिक बहुत ध्रुवीय या नाज़ुक हैं और GC के inlet में टिक नहीं पाते, वे LC-MS पर जाते हैं; HRMS सटीक द्रव्यमान और इसलिए आणविक सूत्र देता है। HPLC वाले हिस्से में normal phase और reverse phase का फ़र्क़ इसी से पहचानिए कि दोनों में से ध्रुवीय कौन-सा है, और solid phase extraction को दौड़ से पहले की सफ़ाई मानिए। यह entry भी दस्तावेज़ में अल्पविराम पर ख़त्म होती है। |
| Organic analysis - Pharmaceutical and Narcotic drugs psychotropic substances, alcohol estimation, petroleum products, paints and dyes, rubber, plastic, fibres, organic poisons such as insecticides, pesticides, herbicides, etc। | Organic analysis (कार्बनिक विश्लेषण) — यही असल केसवर्क वाली entry है, और इसमें तकनीकों के बजाय नमूनों के प्रकार गिनाए गए हैं; यही इशारा है कि इसे दोहराना कैसे है। इसमें औषधीय तथा नारकोटिक दवाएँ और मन:प्रभावी पदार्थ, अल्कोहल का आकलन, पेट्रोलियम उत्पाद, पेंट और रंजक, रबर, प्लास्टिक तथा रेशे, और कीटनाशक व खरपतवारनाशक जैसे कार्बनिक विष आते हैं। हर नमूने के लिए तीन बातें तैयार रखिए: उसमें नापा क्या जाता है, ऊपर की entries में से किस तकनीक से नापा जाता है, और सकारात्मक परिणाम का मतलब क्या निकलता है। entry के अंत में etc. लिखा है, यानी दस्तावेज़ ख़ुद कह रहा है कि यह सूची उदाहरण भर है, बंद सूची नहीं। |
टॉपिक 4 — Analytical Techniques in Biochemistry, पूरी छहों प्रविष्टियाँ ↑
दस्तावेज़ का सबसे बड़ा खंड, और वही जो सबसे कम रसायन के सिलेबस जैसा और सबसे ज़्यादा किसी न्यायालयिक प्रयोगशाला की काम-सूची जैसा पढ़ा जाता है — DNA, प्रतिरक्षा-परख, वैद्युतकणसंचलन, और रक्त तथा शारीरिक द्रवों की जाँच।
इस खंड की एक प्रविष्टि में आधिकारिक फ़ाइल की अपनी छपाई की ग़लती है। हमने उसे बाएँ कॉलम में चुपचाप सुधारा नहीं है, दाएँ कॉलम में बता दिया है — क्योंकि बायाँ कॉलम वही है जो MPSC ने प्रकाशित किया।
| आधिकारिक सिलेबस में जो लिखा है | इसमें क्या आता है और तैयारी कैसे करें |
|---|---|
| Biomolecules - Structure, functions and estimation of carbohydrates, lipids, proteins, nucleic acids and biological buffers। | Biomolecules (जैव अणु) — संरचना, कार्य, और वह शब्द जो जवाब तय करता है: estimation यानी मात्रा का आकलन। इसमें कार्बोहाइड्रेट, लिपिड, प्रोटीन, न्यूक्लिक अम्ल और जैविक बफ़र आते हैं। हर अणु के साथ उसकी पारंपरिक आकलन-विधि भी याद रखिए: कौन-सा assay, वह असल में नापता क्या है, और उसमें दख़ल कौन-सी चीज़ देती है। जैविक बफ़र इसी entry में एक व्यावहारिक कारण से रखे गए हैं — लगभग हर जैव-रासायनिक आकलन किसी तय pH पर चलता है, इसलिए बफ़र चुनना परीक्षण की रूपरेखा का हिस्सा है, बाद में जोड़ी गई बात नहीं। |
| Molecular biology - DNA isolation, DNA quantification, PCR, RT-PCR, RFLP (Restriction Transcriptase Polymerase Chain Reaction), ELISA, RIA (Radio Immuno Assay), Antigen -Antibody reactions। | Molecular biology (आणविक जीवविज्ञान) — DNA का काम शुरू से आख़िर तक: निष्कर्षण, मात्रा-निर्धारण, प्रवर्धन और पहचान। इसमें DNA isolation, DNA quantification, PCR, RT-PCR, RFLP, ELISA, RIA तथा प्रतिजन-प्रतिरक्षी अभिक्रियाएँ आती हैं। PCR और RT-PCR का फ़र्क़ एक-एक वाक्य में बता पाना चाहिए, और ELISA तथा RIA का भी — दोनों प्रतिरक्षा-परख हैं, एक में एंज़ाइम का लेबल लगता है और दूसरे में रेडियो-लेबल — जिनके नीचे का सिद्धांत प्रतिजन-प्रतिरक्षी अभिक्रिया ही है। एक चेतावनी, जो हमारी है, दस्तावेज़ की नहीं: इस entry में RFLP का विस्तार Restriction Transcriptase Polymerase Chain Reaction लिखा है। वह विस्तार असल में RT-PCR का है; RFLP का मानक विस्तार Restriction Fragment Length Polymorphism होता है। बायाँ कॉलम हमने ज्यों का त्यों छापा है, क्योंकि वही MPSC ने प्रकाशित किया है, और यह टिप्पणी इसलिए लगाई है ताकि कोई यह ग़लत विस्तार हमसे न सीख ले। |
| Separation techniques- SDS-PAGE, One dimension (PAGE) and two dimension electrophoresis, Isoelectric focusing, Gel filtration Chromatography, Affinity chromatography, High voltage electrophoresis, Agarose electrophoresis, Capillary electrophoresis। | Separation techniques (वैद्युतकणसंचलन तथा पृथक्करण) — एक ही परिवार, जिसे इस सवाल से क्रम में रखिए कि अलग क्या हो रहा है और किस बल से। इसमें SDS-PAGE, एक-आयामी (PAGE) तथा द्वि-आयामी वैद्युतकणसंचलन, isoelectric focusing, gel filtration chromatography, affinity chromatography, उच्च वोल्टेज वैद्युतकणसंचलन, तथा agarose और capillary electrophoresis आते हैं। SDS-PAGE प्रोटीन को आकार से अलग करता है, क्योंकि डिटर्जेंट हर श्रृंखला को लगभग एक जैसा आवेश-भार अनुपात दे देता है। isoelectric focusing उसकी जगह समविभव बिंदु से अलग करता है। द्वि-आयामी वैद्युतकणसंचलन इन्हीं दोनों को क्रम से चलाना है, इसीलिए वह उतना सुलझा देता है जितना अकेले कोई नहीं कर पाता। gel filtration बिना किसी क्षेत्र के सिर्फ़ आकार से अलग करता है, और affinity chromatography किसी ख़ास बंधन-साथी से। agarose वाली जेल DNA के लिए है, और capillary electrophoresis वह उच्च-विभेदन तथा कम-आयतन वाला रूप है जिस पर आज का DNA प्रोफ़ाइलिंग चलता है। |
| Isotope tracer technique: Basic concepts, Principles, advantages, limitations, and applications in biochemistry। | Isotope tracer technique (समस्थानिक अनुरेखक विधि) — छोटी entry, और दस्तावेज़ ने ख़ुद इसका ढाँचा दे दिया है: बुनियादी अवधारणाएँ, सिद्धांत, लाभ, सीमाएँ, और जैव रसायन में उपयोग। यह लिखित उत्तर का बना-बनाया कंकाल है, इसलिए इसे इसी क्रम में तैयार कीजिए। लाभ हैं संवेदनशीलता, और किसी एक चिह्नित परमाणु को पूरे पथ में पीछा कर पाना; सीमाएँ हैं रख-रखाव, सुरक्षा, अनुज्ञप्ति और कचरे का निपटान। जो उत्तर सीमाओं का नाम भी लेता है, वह रटे हुए जैसा नहीं, प्रयोगशाला के अनुभव जैसा पढ़ा जाता है। |
| Enzymes- Enzyme classification, Isoenzymes, DNA polymerase, Enzyme kinetics (basic) | Enzymes (एंज़ाइम) — वर्गीकरण, समएंज़ाइम, DNA polymerase और गतिकी। दस्तावेज़ का अपना शब्द basic इस entry की गहराई तय कर देता है: Michaelis-Menten, Km तथा Vmax का मतलब, और यह कि आम अवरोधन के प्रकार इन्हें किस तरफ़ खिसकाते हैं। isoenzymes को एक अलग पंक्ति दीजिए — वही अभिक्रिया, पर अलग-अलग आणविक रूप, और यही उन्हें उपयोगी संकेतक बनाता है। DNA polymerase का नाम यहाँ अलग से इसलिए लिया गया है क्योंकि पिछली entry का प्रवर्धन इसी एंज़ाइम पर चलता है। |
| Blood and other body fluids and hair examinations for humans and animals - Blood group system, Semen examination, Saliva, Urine, Hair, Sweat, Biological stains and preservations। | Blood and other body fluids and hair examinations (रक्त, अन्य शारीरिक द्रव तथा बाल की जाँच) — पारंपरिक सीरम-विज्ञान वाली entry, और यही वह हिस्सा है जो साफ़ बता देता है कि यह पद किसी रसायन विभाग का नहीं, फ़ोरेंसिक प्रयोगशाला का है। इसमें रक्त समूह प्रणाली, वीर्य की जाँच, लार, मूत्र, बाल और पसीना — मनुष्यों तथा जानवरों दोनों के लिए — और जैविक धब्बे व उनका परिरक्षण आते हैं। प्रजाति वाला सवाल entry में लिखा हुआ है, इसलिए उसे छोड़िए मत। entry का अंत जैविक धब्बों और परिरक्षण पर होता है, और व्यवहार में यही सबसे पहले होता है: नमूना ठीक से सुरक्षित न रखा गया तो ऊपर बताई गई पूरी जाँच का कोई मोल नहीं रह जाता। |
इस तरह की सूची को पढ़ने का तरीक़ा ↑
यह सिलेबस तकनीक के हिसाब से बना है, किताब के अध्यायों के हिसाब से नहीं — और अध्याय-वार दोहराना ही इस पर समय बर्बाद करने का सबसे आम तरीक़ा है। गिनी-चुनी विधियाँ चारों खंडों में अलग-अलग कपड़े पहनकर लौटती रहती हैं: क्रोमैटोग्राफी अकार्बनिक आयनों के लिए ion exchange बनकर आती है, कार्बनिक पदार्थों के लिए TLC, GC और HPLC बनकर, और जैव अणुओं के लिए gel filtration तथा affinity chromatography बनकर। हर विधि को एक ही बार ढंग से सीखिए — सिद्धांत, वह क्या अलग करती या नापती है, और क्या नहीं कर सकती — और फिर नमूनों के प्रकार उसी के नीचे रखते जाइए।
एक तालिका बनाइए और उसे एक पन्ने में रखिए: तकनीक, सिद्धांत, क्या नापती है, किस नमूने पर चलती है, और उसकी सीमा। इस सिलेबस की हर प्रविष्टि उसी तालिका की एक पंक्ति में सिमट जाती है, और दस्तावेज़ जिन प्रविष्टियों को सबसे ज़्यादा विस्तार से लिखता है उन्हें सबसे ज़्यादा पंक्तियाँ मिलनी चाहिए।
दो बातें दस्तावेज़ अपने विराम-चिह्नों से ही बता देता है। कई प्रविष्टियों में etc. लिखा है, और दो प्रविष्टियाँ सीधे अल्पविराम पर ख़त्म होती हैं — यानी वे सूचियाँ उदाहरण भर हैं, बंद नहीं; गिनाए गए नामों से एक क़दम आगे तक तैयारी रखिए। और सांख्यिकी वाली प्रविष्टि पूरे सिलेबस में सबसे ऊपर, हर उपकरण से पहले बैठी है। प्रयोगशाला के पद में यह बता पाना कि परिणाम भरोसेमंद क्यों है, परिणाम निकाल पाने से पहले की चीज़ मानी जाती है।
यह दस्तावेज़ जो नहीं बताता — और वह कहाँ मिलेगा ↑
सिलेबस की फ़ाइल दायरा तय करती है। वह उम्मीदवार के हर सवाल का जवाब नहीं देती, और ईमानदारी इसी में है कि उन ख़ाली जगहों को भरोसे भरे अंदाज़े से भरने के बजाय नाम लेकर बता दिया जाए।
नीचे लिखी हर बात के लिए MPSC की अपनी वेबसाइट ही एकमात्र भरोसेमंद स्रोत है। ये सब इस दस्तावेज़ में हैं ही नहीं — कहीं छिपी हुई नहीं हैं।
- परीक्षा पैटर्न। अंक, समय, प्रश्नों की संख्या, negative marking और कोई भी अर्हक प्रतिशत इस फ़ाइल में नहीं हैं; ये उस भर्ती के विज्ञापन से तय होते हैं।
- पात्रता। शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, अनुभव और अधिवास से जुड़ी शर्तें यहाँ नहीं लिखी हैं।
- रिक्तियाँ और आरक्षण। दस्तावेज़ में न रिक्तियों की संख्या है, न श्रेणीवार ब्योरा।
- आवेदन शुल्क और आवेदन का तरीक़ा। इस फ़ाइल में नहीं है।
- तारीख़ें। इस दस्तावेज़ में न परीक्षा की तारीख़ है, न आवेदन की अवधि, न कोई समय-सारणी।
- कट-ऑफ़ और परिणाम। ये परीक्षा के बाद MPSC प्रकाशित करता है, और सिलेबस से पहले से इनका अंदाज़ा कभी नहीं लगाया जा सकता।
- मराठी संस्करण। जो प्रति हमने पढ़ी वह पूरी अंग्रेज़ी में है; MPSC इस सिलेबस का मराठी रूप प्रकाशित करेगा तो वह इसी सूची पर मिलेगा।
- किताबें। सिलेबस टॉपिक की सूची है, पढ़ने की सूची नहीं — दस्तावेज़ कोई पुस्तक नहीं बताता।
- MPSC की परीक्षा सिलेबस सूची, वही पेज जिस पर यह फ़ाइल रखी है: https://mpsc.gov.in/examination_syllabus/18
- MPSC का मुख्य पेज: https://mpsc.gov.in
- अपनी जाँच से एक व्यावहारिक चेतावनी, 2 सितंबर 2026 को की गई: MPSC सिलेबस के लिए जो छोटे mpsc.gov.in/downloadFile/ वाले लिंक इधर-उधर घूमते हैं, वे हमारे लिए फ़ाइल नहीं खोल पाए — साइट ने पहले अपना ऐप-शेल लौटाया और फिर पेज-मौजूद-नहीं वाला संदेश दिखाया। PDF तक ऊपर दी गई सिलेबस सूची वाले पेज से जाइए और इस पद वाली पंक्ति खोलिए।
महत्वपूर्ण लिंक
FAQ — आपके सवाल, सीधे जवाब
यह परीक्षा कौन-सी संस्था कराती है?
Maharashtra Public Service Commission (MPSC)
यह किस पद के लिए है?
Assistant Chemical Analyser
यह भर्ती किस विभाग के लिए है?
Directorate of Forensic Science Laboratories (DFSL), Home Department, Government of Maharashtra
इसकी आधिकारिक वेबसाइट कौन-सी है?
mpsc.gov.in
MPSC की और अपडेट
आधिकारिक स्रोत: आधिकारिक वेबसाइट ↗. कोई भी कदम उठाने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर पुष्टि ज़रूर करें।
अस्वीकरण: SarkariReady किसी सरकारी संस्था से संबद्ध नहीं है। यह लेख आधिकारिक नोटिफिकेशन के आधार पर लिखा गया है — कोई भी कदम उठाने से पहले तिथियां, फीस और पात्रता हमेशा आधिकारिक वेबसाइट पर जांच लें। कोई गलती दिखे तो हमें बताएं, हम तुरंत सुधारेंगे।
किसी एजेंट या वेबसाइट को सरकारी नौकरी के लिए पैसे न दें — शिकायत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर करें।