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APPSC ASWO सिलेबस और परीक्षा पैटर्न — पूरा, आसान हिंदी में

सिलेबस

इस पद के लिए APPSC की प्रकाशित योजना है — दो objective लिखित पेपर और उसके बाद इंटरव्यू: Paper-1 General Studies, 150 अंक और 150 प्रश्न, 150 मिनट; Paper-2 Subject, 300 अंक और 150 प्रश्न, 150 मिनट; और Part-B इंटरव्यू, 50 अंक।

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PDF आधिकारिक साइट पर खुलेगा। नीचे उसी सिलेबस का हर टॉपिक आसान भाषा में समझाया गया है — पढ़ने के लिए PDF खोलना ज़रूरी नहीं।

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Part-A के दो लिखित पेपर और Part-B का इंटरव्यू — पूरी योजना ↑

जो दस्तावेज़ इस पद को नियंत्रित करता है वह एक scheme and syllabus शीट है, कोई भर्ती अधिसूचना नहीं, और वह एक साथ तीन पदों के लिए लिखी गई है — Assistant Tribal Welfare Officers, B.C. Welfare Officer और Social Welfare Officers। तीनों की परीक्षा degree standard पर और objective type में होती है। भर्ती निकलने पर बाक़ी चाहे जो बदले, आयोग इस पद के लिए फ़िलहाल यही पेपर-संरचना प्रकाशित करता है।

एक ढाँचागत बात किताब खोलने से पहले ही समझ लीजिए: Paper-2 में प्रश्न उतने ही हैं और समय भी उतना ही, लेकिन अंक Paper-1 से दुगुने हैं। यानी Paper-2 का हर प्रश्न दो अंक का पड़ता है, जबकि Paper-1 का एक अंक का। प्रति-प्रश्न वाला यह आँकड़ा हमारा अपना भाग है — छपे हुए अंकों में छपे हुए प्रश्नों का भाग देकर निकाला गया, इसलिए DERIVED है; दस्तावेज़ में यह छपा नहीं है। सीधी भाषा में: Paper-2 पर लगाया गया एक घंटा उतना देता है जितना Paper-1 पर लगाए दो घंटे।

Part-B इंटरव्यू है और 50 अंकों का है। शीट उसे न कोई अवधि देती है, न प्रश्नों की संख्या, न अपना कोई सिलेबस।

भागपेपरअंकप्रश्नअवधि
Part-A: लिखित (Objective Type)Paper-1: General Studies150150150 मिनट
Part-A: लिखित (Objective Type)Paper-2: Subject (अनिवार्य पेपर)300150150 मिनट
Part-Bइंटरव्यू50दस्तावेज़ में नहीं दिया गयादस्तावेज़ में नहीं दिया गया
कुल (DERIVED — हमारा जोड़, दस्तावेज़ में छपा नहीं है)Part-A और Part-B मिलाकर500300300 मिनट का लेखन

यह सिलेबस किस आधिकारिक दस्तावेज़ से लिया गया है ↑

इस पन्ने का हर टॉपिक एक ही फ़ाइल से लिया गया है — आंध्र प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा प्रकाशित scheme and syllabus शीट, जो psc.ap.gov.in › 27.pdf पर है। उस पर संदर्भ संख्या C.No: 289/SS/2008 है, वह सचिव के हस्ताक्षर से जारी है और उसकी तारीख़ 01/07/2008 है। आयोग उसे अपनी ही सिलेबस सूची portal-psc.ap.gov.in › GroupsSyllabus.aspx में जोड़ता है, उस पंक्ति पर जिस पर Asst Tribal Welfare Officer लिखा है; शीट का अपना शीर्षक उसी पद के साथ Social Welfare Officers का नाम भी लेता है।

एक दूसरी आधिकारिक फ़ाइल भी यही पुष्टि करती है। APPSC Notification No. 12/2004 का Annexure-II, जो psc.ap.gov.in › 2.pdf पर है, Post Code No. 2 के रूप में Assistant Social Welfare Officers को दर्ज करता है और वही 150, 300 तथा 50 वाली अंक-संरचना देता है। एक फ़र्क़ है, जिसे हम छिपाएँगे नहीं: 2004 वाले annexure में Paper-2 एक वैकल्पिक विषय था, 28 विषयों की सूची में से चुना जाने वाला, जबकि 2008 वाली शीट में Paper-2 एक ही अनिवार्य पेपर है, जिसके छह सेक्शन नीचे दिए गए हैं। 2008 वाली शीट नई है और आयोग फ़िलहाल उसी को जोड़ता है, इसलिए यह पन्ना उसी का अनुसरण करता है।

यह पन्ना आपसे यह नहीं कहेगा कि कोई भर्ती खुली हुई है। जिस दिन यह लिखा गया, 2 सितंबर 2026 को, आयोग की अपनी भर्ती-अधिसूचना सूची portal-psc.ap.gov.in › RecruitmentNotifications.aspx पर Assistant Social Welfare Officer की एक भी अधिसूचना नहीं थी। इसी scheme शीट से संचालित सबसे नज़दीकी जीवित भर्ती है Assistant Tribal Welfare Officer, Notification No.05/2024, दिनांक 09.02.2024। इस सिलेबस से तैयारी ज़रूर कीजिए, पर किसी रिक्ति की योजना बनाने से पहले वह अधिसूचना-पृष्ठ ख़ुद देख लीजिए।

Paper-1: General Studies and Mental Ability (सामान्य अध्ययन और मानसिक योग्यता) — पूरे छह टॉपिक ↑

Paper-1 में 150 मिनट में 150 अंकों के 150 प्रश्न होते हैं, और दस्तावेज़ इसके सिलेबस का शीर्षक General Studies and Mental Ability रखता है। इसमें छह टॉपिक दिए गए हैं। इनके बीच अंकों का कोई बँटवारा नहीं बताया गया, इसलिए जब तक कोई असली प्रश्नपत्र कुछ और न बता दे, इन्हें बराबर वज़न का मानकर चलिए।

छह में से पाँच विषय-सामग्री वाले टॉपिक हैं और छठा reasoning है, जो इकलौता ऐसा है जो सिर्फ़ अभ्यास से सुधरता है। उन पाँच में से दो — इतिहास और भूगोल — पर साफ़ तौर पर आंध्र प्रदेश का ज़ोर दिया गया है, और ये दोनों तथा राजव्यवस्था-अर्थव्यवस्था, तीनों Paper-2 में कहीं ज़्यादा गहराई से दोबारा आते हैं। इन्हें एक ही बार दोनों पेपरों के लिए तैयार करना ही इस सिलेबस को पढ़ने का किफ़ायती तरीक़ा है।

क्र.सिलेबस में दिया गया टॉपिकअसल में क्या पढ़ना है
1General Science (सामान्य विज्ञान); विज्ञान और तकनीक में हो रहे नए विकास और उनके असरदस्तावेज़ ख़ुद इसका स्तर तय कर देता है — इतना, जितना एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति रोज़मर्रा के अनुभव से जानता हो, किसी विज्ञान विषय की विशेष पढ़ाई के बिना। इसलिए सूत्र और व्युत्पत्ति रटने के बजाय यह पढ़िए कि किसी खोज का असर क्या पड़ता है।
2Current events (समसामयिक घटनाएँ) — राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व कीराष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय, दोनों स्तर की घटनाएँ। दस्तावेज़ कोई समय-सीमा नहीं बताता, इसलिए परीक्षा से पहले के बारह महीनों को काम की सीमा मानकर हर महीने का एक पन्ने का नोट बनाइए।
3History of India (भारत का इतिहास) — सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक पक्ष, Indian National Movement (राष्ट्रीय आंदोलन) और आंध्र प्रदेश पर ज़ोरसिलेबस व्यापक सामान्य समझ माँगता है, तारीख़ों की रट नहीं। जिस चीज़ पर नाम लेकर ज़ोर दिया गया है वह है राष्ट्रीय आंदोलन, आंध्र प्रदेश को ध्यान में रखते हुए — और यही वह जगह है जहाँ Paper-2 का Section-II और गहराई में जाता है।
4World Geography (विश्व भूगोल) और Geography of India (भारत का भूगोल), आंध्र प्रदेश पर ज़ोरएक ही टॉपिक में दो पैमाने हैं। आंध्र प्रदेश वाली परत ही Paper-2 में दोबारा लौटती है, जहाँ वर्षा, सिंचाई और क्षेत्रीय असमानता अर्थशास्त्र बनकर सामने आती हैं।
5Indian Polity and Economy (भारतीय राजव्यवस्था और अर्थव्यवस्था) — political system, rural development (ग्रामीण विकास), Planning और economic reforms (आर्थिक सुधार)यहाँ राजव्यवस्था और अर्थव्यवस्था दो अलग टॉपिक नहीं, एक ही टॉपिक हैं। ग्रामीण विकास और सुधारों के दौर का नाम लेकर ज़िक्र है, और ये दोनों Paper-2 के Section-III तथा Section-IV में विस्तार से दोबारा पूछे जाते हैं।
6Mental ability (मानसिक योग्यता) — reasoning (तर्क) और inferences (निष्कर्ष निकालना)Paper-1 का इकलौता ऐसा टॉपिक है जो विषय-सामग्री का नहीं है, और इकलौता ऐसा जो सिर्फ़ समय बाँधकर अभ्यास करने से सुधरता है। दस्तावेज़ केवल reasoning और inference का नाम लेता है, उप-प्रकार नहीं गिनाता।

Paper-2: छह सेक्शन वाला एक अनिवार्य विषय-पेपर ↑

पद असल में Paper-2 से तय होता है — Paper-1 के 150 के मुक़ाबले इसके 300 अंक हैं। दस्तावेज़ इसे Subject (compulsory paper) कहता है। यहाँ न कोई वैकल्पिक विषय चुनना है, न विषय-शाखा के हिसाब से कोई अंतर — हर उम्मीदवार के लिए यह एक ही पेपर है, और पुरानी 2004 वाली योजना से यही सबसे बड़ा फ़र्क़ है।

सिलेबस इसे छह सेक्शन में बाँटता है और हर सेक्शन में पाँच क्रमांकित टॉपिक प्रविष्टियाँ देता है। इस तरह Paper-2 में 30 प्रविष्टियाँ हुईं और दोनों पेपर मिलाकर 36। ये दोनों जोड़ DERIVED हैं: हमने दस्तावेज़ की क्रमांकित प्रविष्टियाँ ख़ुद गिनी हैं, दस्तावेज़ इनमें से कोई आँकड़ा नहीं बताता। दस्तावेज़ यह भी कहीं नहीं कहता कि 300 अंक छह सेक्शन में कैसे बँटते हैं, इसलिए कोई ईमानदार तालिका आपको सेक्शन-वार वज़न नहीं दे सकती — जो तालिका देती है, वह अंदाज़ा लगा रही है।

टॉपिक पढ़ने से पहले छहों सेक्शन का आकार देख लेना ठीक रहेगा। दो सेक्शन इतिहास के हैं, एक राष्ट्रीय और एक आंध्र प्रदेश का। एक संविधान का है। तीन अर्थशास्त्र के हैं, और उन तीन में से दो पूरी तरह राज्य के बारे में हैं। प्रविष्टियाँ गिनें तो 30 में से 15 — Sections II, V और VI — ख़ास तौर पर आंध्र प्रदेश की हैं, और यही इस पेपर की असली परख का सही वर्णन है।

सेक्शनकिस चीज़ कादस्तावेज़ में टॉपिक प्रविष्टियाँ
Section-Iभारत का इतिहास और सांस्कृतिक विरासत, 20वीं सदी के भारतीय इतिहास पर विशेष ज़ोर के साथ5
Section-IIआंध्र प्रदेश का सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास5
Section-IIIभारतीय संविधान का सामान्य परिचय5
Section-IVभारत में नियोजन और भारतीय अर्थव्यवस्था5
Section-Vस्वतंत्रता के बाद आंध्र प्रदेश में भूमि सुधार और सामाजिक बदलाव5
Section-VIआंध्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था — वर्तमान स्थिति, ताक़त और कमज़ोरियाँ5
छहों सेक्शन मिलाकरअनिवार्य विषय-पेपर, हर उम्मीदवार के लिए एक जैसा30 (DERIVED — क्रमांकित प्रविष्टियों की हमारी गिनती)

एक नज़र में

संचालक संस्थाAndhra Pradesh Public Service Commission (APPSC)
पद का नामAssistant Social Welfare Officer (ASWO)
विभागSocial Welfare Department, Government of Andhra Pradesh
कुल पद11
आधिकारिक वेबसाइटwww.psc.ap.gov.in
राज्यAndhra Pradesh

Section-I: भारत का इतिहास और सांस्कृतिक विरासत, 20वीं सदी के भारतीय इतिहास पर विशेष ज़ोर के साथ — पाँचों टॉपिक ↑

Section-I राष्ट्रीय इतिहास है, और दस्तावेज़ का अपना शीर्षक बीसवीं सदी पर ज़ोर देता है। पाँच प्रविष्टियाँ इसे सिंधु घाटी के नगरों से लेकर आज़ादी के बाद के वर्षों तक ले जाती हैं, इसलिए दायरा बहुत बड़ा है और हर प्रविष्टि की गहराई उसी अनुपात में कम। जो उम्मीदवार भारतीय इतिहास की स्कूली रूपरेखा जानता है और नाम लिए गए आंदोलनों को सही जगह रख सकता है, वह उसी स्तर पर उत्तर दे रहा है जो यहाँ माँगा गया है।

अतिरिक्त घंटे कहाँ लगाएँ: चौथी प्रविष्टि पर। वही anti-caste, Dalit, non-Brahmin और self-respect आंदोलनों वाली है, और एक Social Welfare Officer के पेपर के लिए वही सवाल आने की सबसे पक्की जगह है तथा इस सेक्शन में नौकरी के काम से सबसे नज़दीक भी वही है।

क्र.सिलेबस में दिया गया टॉपिकअसल में क्या पढ़ना है
1Indus Civilization; Vedic Civilization; दोनों में अंतर; Varna और Jathi/caste system का विकास; धार्मिक स्थिति; Jainism, Buddhism और अन्य सम्प्रदायों का उदय; Magadha imperialism; Mahayana; Gandhara, Mathura और अन्य कला-शैलियाँपूरा प्राचीन भारत एक ही प्रविष्टि में समेटा गया है, और तुलना सीधे पूछी गई है — सिंधु घाटी के नगर वैदिक बस्तियों से किस बात में अलग थे। जाति-व्यवस्था को परिभाषा नहीं, एक विकास-क्रम के रूप में रखा गया है, जो कल्याण अधिकारी के पेपर के लिए ख़ास मायने रखता है।
2Advent of Islam और उसका प्रभाव; Indian culture पर असर; धार्मिक आंदोलन; Bhakti movements का स्वरूप और महत्व; जनभाषाओं, साहित्य, ललित कला, वास्तुकला और स्मारकों का विकास; Indo-Persian art and architecture; Vijayanagara empire — कला, साहित्य, संस्कृति, सामाजिक-आर्थिक दशा, प्रशासन और पतन; the Great Moghals का योगदान; rise of Shivajiमध्यकालीन भारत, जिसमें युद्ध-अभियानों से ज़्यादा वज़न संस्कृति पर है। विजयनगर इकलौता ऐसा साम्राज्य है जिसे यह प्रविष्टि एक साथ चार तरफ़ से पूछती है, और उसके पतन का अलग से नाम लेती है।
3Stages of colonialism; प्रशासनिक ढाँचे और राजनीति में बदलाव; British supremacy के कारण; भारतीय शक्तियों का सहयोग और उनकी असफलता के कारण; civil rebellions; Revolt of 1857 और उसका असर; राष्ट्रीय चेतना का उदय; Freedom Struggle के तीन चरण (1885-1905, 1905-1920, 1920-47); Gandhian Era का महत्वतीनों चरण तय अवधियों के रूप में दिए गए हैं, इसलिए स्वतंत्रता संग्राम को एक लगातार कहानी की तरह नहीं, इन्हीं खंडों में याद कीजिए। प्रविष्टि यह भी पूछती है कि भारतीय शक्तियाँ हारीं क्यों — सिर्फ़ यह नहीं कि वे हारीं।
4आधुनिक भारत के socio-religious-cultural, anti-caste, Dalit, non-Brahmin तथा Justice/self-respect movements का उदय और विस्तार; समाज-सुधार संस्थाएँ और बुद्धिजीवियों की भूमिका — Raja Ram Mohan Roy, Dayanand Saraswathi, Jyotiba Phule, Narayana Guru, Mahathma Gandhi, Ambedkar और अन्यइस ख़ास पद के लिए Section-I की सबसे भारी प्रविष्टि यही है, और नौकरी के काम से सबसे नज़दीक भी यही है। छह सुधारकों का नाम दिया गया है; सूची खुली है, यानी ये छह न्यूनतम हैं, अंतिम सीमा नहीं।
5Nationalist literature; किसान और मज़दूर आंदोलनों का विकास; anti-feudal तथा anti-colonial संघर्षों में वामपंथी दलों की भूमिका; women's movements का उदय; communalism की उत्पत्ति और विस्तार; मज़दूर-किसान आंदोलन; भारत की आज़ादी और विभाजन; स्वतंत्रता के बाद की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएँबीसवीं सदी का भारत असल में यहीं परखा जाता है, और यही इकलौती प्रविष्टि है जो सिलेबस को 1947 के पार, आज़ादी के बाद की घटनाओं तक ले जाती है।

Section-II: आंध्र प्रदेश का सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास — पाँचों टॉपिक ↑

Section-II वही इतिहास है, पर आंध्र प्रदेश की तरफ़ से कहा गया। पाँच प्रविष्टियाँ सातवाहनों से लेकर राज्य के गठन तक चलती हैं, और Section-I के उलट इनमें तारीख़ें तय हैं: दूसरी प्रविष्टि 1000 AD से 1565 AD की अवधि बाँधती है, और पाँचवीं राज्य के गठन पर बंद हो जाती है। शीट 2008 में प्रकाशित हुई थी, इसलिए उस गठन के बाद की कोई बात इस सिलेबस में नहीं है।

इस सेक्शन में नामों का फल मिलता है। तीसरी और चौथी प्रविष्टि में दस्तावेज़ कवियों, समाज-सुधारकों और संगठनों के नाम गिनाता है; उन नामों की एक अलग शीट बनाइए, हर नाम के आगे एक पंक्ति — सवाल इसी शक्ल में आते हैं।

क्र.सिलेबस में दिया गया टॉपिकअसल में क्या पढ़ना है
1Satavahanas और उनका योगदान; सामाजिक ढाँचा; धार्मिक दशा; साहित्य और चित्रकला का विकास; Ikshvakus का सांस्कृतिक योगदान; आंध्र प्रदेश में Buddhism का विस्तार; Eastern Chalukyas of Vengi का महत्व और सामाजिक-सांस्कृतिक योगदान; तेलुगु भाषा और साहित्य का विकास; शिक्षा; धार्मिक सम्प्रदाय; कला और वास्तुकलाएक ही प्रविष्टि में तीन राजवंश हैं — सातवाहन, इक्ष्वाकु और वेंगी के पूर्वी चालुक्य — और हर एक के बारे में सैन्य नहीं, सांस्कृतिक सवाल पूछा गया है। तेलुगु भाषा और साहित्य सिलेबस में यहीं से घुसते हैं और अगली प्रविष्टि में भी बने रहते हैं।
21000 AD से 1565 AD के बीच Andhra Desha की सामाजिक-सांस्कृतिक और धार्मिक दशा; तेलुगु भाषा-साहित्य का विकास — Nannaya, Molla आदि; ललित कला और वास्तुकला; स्मारक और उनका महत्व; Qutubshahis का तेलुगु भाषा, साहित्य, कला, वास्तुकला और स्मारकों में योगदानयहाँ अवधि तय है — 1000 ई. से 1565 ई. तक — इसलिए इससे बाहर की हर बात आगे-पीछे की प्रविष्टियों में जाती है। दो कवियों का नाम दिया गया है, और क़ुतुबशाही योगदान ख़ास तौर पर तेलुगु के लिए पूछा गया है, फ़ारसी के लिए नहीं।
3Modern Andhra — सामाजिक-सांस्कृतिक जागरण; Brahma Samaj, Arya Samaj, Theosophical Society; Adi-Andhra आंदोलन और Veereshalingam आदि की भूमिका; non-Brahmin, Adi-Andhra/Dalit तथा Justice/self-respect movements; Gurram Joshuva, Boyi Bheemanna, Sri Sri और अन्य; आंध्र में राष्ट्रीय आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम के आंध्र नेता; समाजवादियों और कम्युनिस्टों की भूमिका; anti-zamindari तथा kisan movementsयह Section-I की चौथी प्रविष्टि का आंध्र-रूप है, और नाम गिनने के लिहाज़ से पूरे Paper-2 की सबसे सघन प्रविष्टि है। चार नाम दिए गए हैं; हर एक ऐसा व्यक्ति है जिसे एक कल्याण अधिकारी से जानने की अपेक्षा की जाती है।
4Asafjahi dynasty; तेलंगाना में सामाजिक-सांस्कृतिक जागरण; Adi-Hindu Movement; Nizam Rashtra Janasangham; Andhra Mahasabha; Andhra Saaraswata Parishat; Hyderabad State Congress तथा Vandemataram Movement की भूमिकायह हैदराबाद रियासत वाली धारा है, जो ऊपर की आंध्र वाली धारा से अलग चलती है। चार संगठनों और दो आंदोलनों का नाम है, और हर एक के पीछे अपना उद्देश्य है — नोट्स में हर एक की एक पंक्ति ज़रूर रखिए।
5Telangana People's Armed Struggle; Ittehadul-Muslimeen; Razakars; निज़ाम-विरोधी संघर्ष; निज़ाम के शासन का अंत और Hyderabad State का भारतीय संघ में विलय; आंध्र प्रदेश का गठनयही प्रविष्टि Section-II को बंद करती है, और राज्य के गठन पर आकर रुक जाती है। यह योजना 2008 में प्रकाशित हुई थी, इसलिए सिलेबस उसी गठन तक जाता है और उसके बाद की किसी बात पर कुछ नहीं कहता।

Section-III: भारतीय संविधान का सामान्य परिचय — पाँचों टॉपिक ↑

Section-III संविधान का सामान्य परिचय है — overview शब्द दस्तावेज़ का अपना है, और वही अपेक्षित गहराई तय कर देता है। पाँच प्रविष्टियाँ संविधान के स्वरूप से चलकर उसके तहत बनी कल्याण-व्यवस्था तक पहुँचती हैं।

पाँचवीं प्रविष्टि पूरी तरह कंठस्थ होनी चाहिए। उसमें Prevention of SC and ST Atrocities Act और चार आयोगों का नाम है, और पूरे सिलेबस में यही वह हिस्सा है जो बताता है कि एक कल्याण अधिकारी असल में किस क़ानूनी ज़मीन पर खड़ा होता है।

क्र.सिलेबस में दिया गया टॉपिकअसल में क्या पढ़ना है
1Nature of the Constitution; संवैधानिक विकास; प्रमुख विशेषताएँ; Preamble; Fundamental Rights; Directive Principles of State Policy और दोनों का आपसी संबंध; Fundamental Duties; भारतीय संघ-व्यवस्था की विशिष्टताएँप्रविष्टि मौलिक अधिकारों और नीति-निदेशक तत्वों के बीच का संबंध पूछती है, दो अलग-अलग सूचियाँ नहीं। परीक्षा के लिहाज़ से वही संबंध असली विषय है।
2संघ और राज्य के बीच legislative powers का बँटवारा; Union और States के बीच प्रशासनिक तथा वित्तीय संबंध; constitutional bodies की शक्तियाँ और कार्यकेंद्र-राज्य संबंध तीनों शीर्षकों में, और साथ में संवैधानिक निकाय। दस्तावेज़ यह नहीं बताता कि कौन-कौन से निकाय, इसलिए किसी कोचिंग की छोटी सूची के बजाय संविधान द्वारा बनाए गए सभी निकाय पढ़िए।
3एक-सदनी और द्वि-सदनी विधायिकाएँ; जवाबदेही के कार्य और उसका संकट; विधायिका का ह्रास; delegated legislation; उस पर विधायी तथा न्यायिक नियंत्रण; प्रशासनिक कार्रवाई का judicial reviewSection-III की सबसे सैद्धांतिक प्रविष्टि यही है। प्रत्यायोजित विधान तीन बार आता है — ख़ुद वह चीज़, उस पर दो तरह के नियंत्रण, और न्यायिक समीक्षा — यानी इसी पर इस प्रविष्टि का असली वज़न है।
4संविधान संशोधन; Basic Structure theory; आपातकालीन प्रावधान और विकेंद्रीकरण; community development experiment; Panchayat Raj का 3 tier ढाँचा; 73rd और 74th संशोधन तथा उनका क्रियान्वयनदो संशोधनों का नाम संख्या सहित दिया गया है, और प्रविष्टि सिर्फ़ उनका पाठ नहीं, उनका क्रियान्वयन पूछती है। कल्याण विभाग के फ़ील्ड पद के लिए यही क्रियान्वयन वाला सवाल असली काम का है।
5भारत में Welfare mechanism: Scheduled Castes, Tribes और Minorities के लिए प्रावधान; SC, ST तथा Backward Classes के लिए आरक्षण; Prevention of SC and ST Atrocities Act; राष्ट्रीय एवं राज्य SC और ST आयोग; Women's Commission; राष्ट्रीय एवं राज्य Minorities Commission; Human Rights Commissionयही वह प्रविष्टि है जिसके इर्द-गिर्द यह पद बना है। एक अधिनियम और चार आयोगों का नाम है, और उनमें से दो के लिए दस्तावेज़ राष्ट्रीय तथा राज्य — दोनों स्तर बताता है। एक कल्याण अधिकारी के लिए पूरे पेपर में सवाल आने की सबसे पक्की जगह यही है।

Section-IV: भारत में नियोजन और भारतीय अर्थव्यवस्था — पाँचों टॉपिक ↑

Section-IV राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था है: आय और मानव विकास, नियोजन, ग़रीबी और बेरोज़गारी, मुद्रा और बैंकिंग, तथा लोक-वित्त। पाँच प्रविष्टियाँ, और मिलकर ये किसी भी राज्य सेवा पेपर का मानक अर्थशास्त्र समेट लेती हैं।

पाँच में से दो जान-बूझकर बिना तारीख़ के लिखी गई हैं — हाल की 5 year plan, और 1990 के दशक के बाद के सुधार। इन्हें 2008 की स्थिति नहीं, अपनी परीक्षा वाले साल की स्थिति मानकर पढ़िए; यह शीट दायरे का बयान है, किसी एक साल की तस्वीर नहीं।

क्र.सिलेबस में दिया गया टॉपिकअसल में क्या पढ़ना है
1राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय, human development; भारतीय अर्थव्यवस्था में क्षेत्रवार बदलाव (GDP और कार्यबल)यहाँ दो अलग-अलग नाप हैं जो एक साथ नहीं चलतीं — किसी क्षेत्र का GDP में हिस्सा, और उसी क्षेत्र का रोज़गार में हिस्सा। प्रविष्टि दोनों का नाम लेती है, इसलिए देखने की चीज़ इन दोनों के बीच का फ़र्क़ है।
2Indian Planning — उद्देश्य, प्राथमिकताएँ और हाल की 5 year plan के विशिष्ट लक्ष्य, उसका अनुभव और समस्याएँ; आर्थिक सुधारों से पहले और बाद में public तथा private sector की भूमिका और कुल plan outlay में उनका हिस्साशब्दों पर ध्यान दीजिए — यहाँ किसी क्रमांक वाली नहीं, हाल की पंचवर्षीय योजना लिखा है। दस्तावेज़ 2008 में छपा था, इसलिए इसे उसी साल की चालू योजना की तरह पढ़िए जिस साल आप परीक्षा दे रहे हैं, और साथ में सुधारों से पहले-बाद वाली तुलना भी, जो प्रविष्टि ख़ुद माँगती है।
3ग़रीबी और बेरोज़गारी की समस्याएँ — उनका आकार और उन्हें कम करने के लिए उठाए गए क़दमआकार और उपाय, दोनों एक साथ पूछे गए हैं। इस पद के लिए उपाय वाला हिस्सा ही काम का हिस्सा है — कौन-सी योजनाएँ, वे किसे कवर करती हैं, और उन्हें ज़मीन पर पहुँचाया कैसे जाता है।
4Monetary policy; भारतीय banking तथा non-banking वित्तीय संस्थाओं का ढाँचा और 1990s के बाद उनमें हुए सुधार; RBI द्वारा credit का नियमनबैंकिंग के साथ non-banking पक्ष भी, जिसे उम्मीदवार अक्सर छोड़ देते हैं। सुधारों की अवधि साफ़ लिखी है — 1990 के दशक के बाद — यानी यही वह दौर है जिसे आपको क्रम से सुना पाना चाहिए।
5राजस्व, व्यय और public debt का स्वरूप, और अर्थव्यवस्था पर उनका असरयह राष्ट्रीय स्तर का लोक-वित्त है। यही तीनों शीर्षक Section-V में आंध्र प्रदेश के लिए दोबारा आते हैं, इसलिए शब्दावली एक बार सीखिए और वहाँ दोबारा इस्तेमाल कीजिए।

Section-V: स्वतंत्रता के बाद आंध्र प्रदेश में भूमि सुधार और सामाजिक बदलाव — पाँचों टॉपिक ↑

Section-V वही अर्थशास्त्र आंध्र प्रदेश पर लागू करता है और शुरुआत भूमि सुधार से करता है। भूमि, ग़रीबी, जनसांख्यिकी, राज्य का वित्त और राज्य की योजनाएँ — पाँच प्रविष्टियाँ, जो मिलकर बताती हैं कि राज्य पैसा कहाँ से जुटाता है और कहाँ ख़र्च करता है।

इस पद के लिए सबसे ज़्यादा काम की हैं पहली और तीसरी प्रविष्टि — भूमि सुधार के क़ानून, और साक्षरता, व्यवसाय तथा आय के ज़रिये पढ़ा गया सामाजिक पिछड़ापन। ये दोनों उसी विभाग का विषय हैं जिसमें यह पद आता है।

क्र.सिलेबस में दिया गया टॉपिकअसल में क्या पढ़ना है
1भूमि सुधार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और समय-समय पर बदले क़ानून; बिचौलियों (intermediaries) की समाप्ति; tenancy reforms; जोत पर ceiling; आंध्र प्रदेश के भूमि-विवादभूमि सुधार को यहाँ एक घटना नहीं, क़ानूनों की एक कड़ी की तरह रखा गया है। जो चार धाराएँ नाम लेकर दी गई हैं — बिचौलिये, काश्तकारी, हदबंदी और भूमि-विवाद — वही उनका ऐतिहासिक क्रम है और वही पढ़ने का क्रम भी।
2आंध्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था का ढाँचा, उसका क्षेत्रवार और भौगोलिक बँटवारा तथा ग़रीबी का विस्तार; कृषि के आदान (inputs) और तकनीकराज्य की अर्थव्यवस्था वैसे ही वर्णित है जैसे Section-IV में देश की थी, बस उसमें एक क्षेत्रीय परत और जुड़ी है। ग़रीबी उसके विस्तार के साथ पूछी गई है — यानी आँकड़े और उनका स्रोत चाहिए, विशेषण नहीं।
3जनसांख्यिकीय विशेषताएँ और सामाजिक पिछड़ापन; साक्षरता और व्यवसाय-संरचना; आय तथा रोज़गार के क्षेत्रवार बँटवारे में बदलाव; महिलाओं का सामाजिक-राजनीतिक और आर्थिक सशक्तीकरणसामाजिक पिछड़ापन और महिला सशक्तीकरण यहाँ अर्थशास्त्र वाले खंड के भीतर रखे गए हैं — इसी से पता चलता है कि यह पेपर इनका जवाब कैसे चाहता है: साक्षरता, व्यवसाय और आय के आँकड़ों के साथ, भावना के साथ नहीं।
4राज्य का वित्त और बजट नीति — कर-ढाँचा, केंद्रीय करों में हिस्सेदारी, revenue तथा capital account में और plan तथा non-plan खातों में व्यय का स्वरूप; public debt की संरचना, तथा World Bank ऋण सहित आंतरिक और बाह्य ऋणSection-V की सबसे तकनीकी प्रविष्टि यही है। चार जोड़ियाँ अलग-अलग याद रखनी होंगी: revenue बनाम capital, plan बनाम non-plan, आंतरिक बनाम बाह्य ऋण, और राज्य के अपने कर बनाम केंद्रीय करों में उसका हिस्सा।
5आंध्र प्रदेश की पंचवर्षीय योजनाएँ — outlays, सार्वजनिक क्षेत्र की योजना का वित्तपोषण, और हाल की 5 year plan में संसाधनों के आवंटन का स्वरूपयह Section-IV वाली नियोजन प्रविष्टि का राज्य-रूप है, और इसमें भी वही बिना तारीख़ वाला वाक्यांश है — हाल की पंचवर्षीय योजना। इसे उसी योजना की तरह पढ़िए जो आपकी परीक्षा वाले साल चालू है।

Section-VI: आंध्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था — वर्तमान स्थिति, ताक़त और कमज़ोरियाँ — पाँचों टॉपिक ↑

Section-VI आंध्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति पूछता है और, दस्तावेज़ के अपने शब्दों में, उसकी ताक़त और कमज़ोरियाँ। उद्योग, कृषि और क़ीमतें, क्षेत्रीय असमानता, ग्रामीण ऋण, और सेवाएँ — हर एक की एक प्रविष्टि।

यहाँ हर प्रविष्टि वृद्धि के आँकड़े के साथ कोई तुलना या कोई समस्या भी माँगती है — क्षेत्रों की आपस में तुलना, अंचलों की आपस में तुलना, ऋण की वृद्धि के सामने उसकी पर्याप्तता। जो उत्तर सिर्फ़ वृद्धि गिनाता है, वह अंक पाने वाला आधा हिस्सा छोड़ देता है।

क्र.सिलेबस में दिया गया टॉपिकअसल में क्या पढ़ना है
1आंध्र प्रदेश में उद्योगों की वृद्धि और ढाँचा; factories, small तथा tiny sectors की तुलना, उनकी वृद्धि, कमज़ोरियाँ और समस्याएँप्रविष्टि कारख़ाना, लघु और अति-लघु क्षेत्रों के बीच तुलना माँगती है, और वृद्धि के साथ-साथ कमज़ोरियाँ भी। सिर्फ़ वृद्धि बता देने वाला जवाब पूछी गई बात का आधा हिस्सा छोड़ देता है।
2कृषि उत्पादन का ढाँचा; support price और procurement price सहित administered prices; आंध्र प्रदेश में Public Distribution Systemसमर्थन मूल्य और ख़रीद मूल्य का नाम अलग-अलग इसलिए दिया गया है क्योंकि दोनों एक चीज़ नहीं हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली उसी शृंखला का आख़िरी सिरा है, और वह सीधे इसी नौकरी के काम से जुड़ी है।
3आंध्र प्रदेश में आय, औद्योगिक उत्पादन, वर्षा, सिंचाई, स्वास्थ्य और शिक्षा की क्षेत्रीय असमानताएँएक ही प्रविष्टि में क्षेत्रीय असमानता के छह नाप हैं — दो आर्थिक, दो भौतिक और दो सामाजिक। इसे छह अलग सूचियों की तरह नहीं, क्षेत्रों की आपसी तुलना की तरह तैयार कीजिए।
4आंध्र प्रदेश में ग्रामीण ऋण के संस्थागत और ग़ैर-संस्थागत स्रोत, उनका ढाँचा और वृद्धि; सहकारी संस्थाएँ और कुल ऋण में उनका हिस्सा; पर्याप्तता और समस्याएँग्रामीण ऋण को औपचारिक और अनौपचारिक स्रोतों में बाँटा गया है, और सहकारी संस्थाओं का हिस्सा नाम लेकर पूछा गया है। यही वह प्रविष्टि है जो Section-VI को दोबारा उसी कल्याण-कार्य से जोड़ती है जिसके लिए यह पद बना है।
5आंध्र प्रदेश का सेवा क्षेत्र — महत्व, संरचना और वृद्धि, विशेष रूप से परिवहन एवं संचार, पर्यटन तथा information technology के संदर्भ मेंतीन सेवाओं को अलग से चुना गया है — परिवहन एवं संचार, पर्यटन, और सूचना प्रौद्योगिकी — इसलिए प्रविष्टि भले पूरे क्षेत्र से शुरू होती हो, वज़न इन्हीं तीन पर है।

यह दस्तावेज़ जो नहीं बताता — और वह कहाँ मिलेगा ↑

scheme and syllabus शीट दायरा तय करती है। वह उम्मीदवार के हर सवाल का जवाब नहीं देती, और ईमानदारी इसी में है कि जो कमी है उसका नाम लिया जाए, न कि उसे किसी आत्मविश्वासी अंदाज़े से भर दिया जाए। नीचे दी गई हर चीज़ सचमुच उस दस्तावेज़ में नहीं है जिस पर यह पन्ना बना है।

इनमें से हर एक के लिए भरोसे लायक़ इकलौता स्रोत है उसी भर्ती की आयोग द्वारा जारी अधिसूचना जिसके लिए आप वाक़ई आवेदन कर रहे हैं, जो portal-psc.ap.gov.in › RecruitmentNotifications.aspx पर प्रकाशित होती है। सिलेबस शीट स्थायी होती है; अधिसूचना ही उसे जीवित करती है।

  • Negative marking। शीट किसी भी पेपर में ग़लत उत्तर पर कटौती के बारे में कुछ नहीं कहती। इस पद के लिए negative marking का जो भी आँकड़ा आपको कहीं दिखे, जब तक वह किसी जीवित अधिसूचना में न हो, वह किसी का अंदाज़ा है।
  • Qualifying marks, किसी पेपर में न्यूनतम अंक, और cut-off। तीनों में से एक भी दस्तावेज़ में कहीं छपा नहीं है।
  • Paper-2 के 300 अंक उसके छह सेक्शन में कैसे बँटते हैं, और हर टॉपिक प्रविष्टि से कितने प्रश्न आते हैं। सिर्फ़ पेपर के कुल आँकड़े दिए गए हैं।
  • प्रश्नपत्र किस भाषा में बनता है। शीट यह नहीं बताती कि वह अंग्रेज़ी में होगा, तेलुगु में, या दोनों में।
  • रिक्तियों की संख्या, वेतनमान, आयु-सीमा, शैक्षणिक योग्यता, आवेदन शुल्क और हर तारीख़। यह सिलेबस शीट है; इनमें से कुछ भी इसमें नहीं है, और यह सब भर्ती अधिसूचना का विषय है।
  • इंटरव्यू का कोई सिलेबस, प्रारूप या अवधि। Part-B को 50 अंक दिए गए हैं, इससे आगे कुछ नहीं।
  • कोई पुस्तक-सूची। आयोग टॉपिक की सूची छापता है, पढ़ने की सूची नहीं — सिलेबस ग्रंथ-सूची नहीं होता।

महत्वपूर्ण लिंक

FAQ — आपके सवाल, सीधे जवाब

यह परीक्षा कौन-सी संस्था कराती है?

Andhra Pradesh Public Service Commission (APPSC)

यह किस पद के लिए है?

Assistant Social Welfare Officer (ASWO)

यह भर्ती किस विभाग के लिए है?

Social Welfare Department, Government of Andhra Pradesh

कुल कितने पद हैं?

11

APPSC की और अपडेट

और सिलेबस

आधिकारिक स्रोत: आधिकारिक PDF ↗. कोई भी कदम उठाने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर पुष्टि ज़रूर करें।

अस्वीकरण: SarkariReady किसी सरकारी संस्था से संबद्ध नहीं है। यह लेख आधिकारिक नोटिफिकेशन के आधार पर लिखा गया है — कोई भी कदम उठाने से पहले तिथियां, फीस और पात्रता हमेशा आधिकारिक वेबसाइट पर जांच लें। कोई गलती दिखे तो हमें बताएं, हम तुरंत सुधारेंगे।

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